Tuesday, 29 September 2026

"झुमका ढूँढती वंदे भारत"

रिपोर्ताज 

             "झुमका ढूँढती वंदे भारत"

    "दरगाहों पर जाना क्यूँ है, बेमतलब इतराना क्यूँ है 
   धर्म सनातन सर्वश्रेष्ठ फ़िर, दर दूजा खटकाना क्यूँ है" 

         तो हुआ यूँ के जुलाई -२०२३ में हम हैदराबाद को टाटा टाटा बाय बाय करके अपनी खूबसूरत तशरीफ़ को मेरठ में स्थापित कर चुके थे। दिल्ली, गुरूग्राम, गाजियाबाद में तो महीने में दो चार बार साहित्यिक यज्ञ में अपनी आहूति देने जाने लगे थे साथ ही मदुरई, रामेश्वरम, धनुषकोडी, कन्याकुमारी, तिरुवनंतपुरम, दमन, वड़ोदरा मुम्बई नागालैंड मथुरा , लखनऊ, हरिद्वार बस भैय्या इत्ते ही शहर याद आ रहे हैं बाक़ी के लिए सर्दियों में बादाम खाने पड़ेंगे। इसी बीच २०२४ में मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी, भोपाल और युगधारा फाउंडेशन लखनऊ को अपने वाले कहानी संग्रह "काला हंस" की प्रविष्टि भेज दी। अचानक एक दिन ख़बर मिली कि काला हंस 3100/- का सम्मान पाकर गोरा हो गया है। सच कै रिया हूँ मियां घणी ज़ोर की ख़ुशी हुई। पुरस्कार समारोह मई -२०२५ में ऋषिकेश फिर हरिद्वार फिर किन्ही कारणों से पोस्टपोन। दिसम्बर २०२५ में हम लेखक गाँव देहरादून के कार्यक्रम में उपस्थित होना चाहते थे लेकिन एक पारिवारिक कार्यक्रम आन पड़ा सो भैय्या मथुरा कार्यक्रम को हरी झंडी दे दी तभी युगधारा से खबर आई कि उन्हीं तारीखों में युगधारा फाउंडेशन भी हरिद्वार में "काला हंस" को गोरा बनाने का कार्यक्रम तै कर चुका है। स्नेही सौम्या से क्षमा मांगते हुए अगले कार्यक्रम में उपस्थित होने की गुहार लगाई और लो जी सौम्या तो सौम्या ठहरी तुरंत हां भरते हुए "तथास्तु दादा" कहकर हमारा संकट हर लिया।

         दिसम्बर २०२५ से सितम्बर २०२६ तक हम जैसे तुम्नक् से कवि और लेखक बहुत सारे आत्म मुग्धता के शिकार स्व घोषित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कवियों और लेखकों के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज़ कराने में पसीना बहाते रहे। कोई जर्मनी से, कोई फ्रांस से कोई दुबई से कोई सऊदी से तो कोई रूस से भाई साहब और अंतर्राष्ट्रीय नाम याद रखने के लिए इस बार बादाम के साथ किशमिश भी खानी पड़ेगी। क्या करें माहराज ऐसे महानुभावों की गिनती ख़त्म होने का नाम ही नी ले री। मज़े की बात ये कि ये सारे अंतर्राष्ट्रीय कवि लेखक गली मुहल्ले के कवि गोष्ठी तक छोड़ना पसन्द नहीं करते तो फिर ये विदेशों में रहते कितना हैं। सोचो सोचो सोचने में पैसे थोड़े ही लगते हैं। समझ में आ जाए दिल खोलकर ६० ग्राम हँस लेना भाई।

         तो भैय्या जैसे ही ख़बर मिली कि युगधारा १९,२० सितम्बर को अयोध्या में कार्यक्रम करेगा हमने पहली फुर्सत में रेलवे मिनिस्टर से टांका भिड़ाकर आने जाने की कन्फ़र्म टिकिट झटक ली। १८ को अयोध्या एक्सप्रेस पकड़ी और लो जी सुबह टाइम से पॉंच मिनिट पहले यानि ६:१५ को अयोध्या कैंट स्टेशन, रेपिडो से फटफटिया बुक की और ८:०१ KM दूर होटल राम लला, तपस्वी की छावनी के इर्द गिर्द चक्कर लगाते रहे लेकिन कऊनो बता के न दीन्ह, भैय्या हमें बार बार चक्कर काटता देख पुलिस ने पूछा, हमने बताया लेकिन रिज़ल्ट ज़ीरो बटे लड्डू वो भी सरसों के तेल वाले। घूमफिर के जब पांचवीं बार वहीं पहुंचे तो पुलिस वाले फिर पूछे का हुआ मिल्ला नहीं हमने भी फटफटिया पर बैठे बैठे ना में मुंडी हिलाई और जे क्या १०० मीटर दूर पर नज़र पड़ी होटल राम लला हमने घूरकर पुलिस वालों की तरफ़ देखना चाहा फिर बाबा जी का ख़्याल मय बुल्डोजर याद आ गया तुरंत अपनी औकात में आए फिर ज़बरदस्ती चेहरे पर मुस्कान लाते हुए धन्यवाद कहा और लपक लिए होटल की तरफ़। फटफटिया वाले को कुछ एक्स्ट्रा देकर विदा किया। सौम्या संग गर्मा गर्म चाय फिर सीधे बीकानेर के राजा रवि त्रिपाठी जी के तुम में। फ्रेश हुए आलू के पराठे संग चाय और सीधे कथा मण्डप में। 

          कार्यक्रम का प्रारम्भ वाग्देवी के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन से हुआ l इसके बाद सरस्वती वन्दना नीरू गुप्ता मोहिनी ने प्रस्तुत की l उद्घाटन कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण भरत नाट्यम में गणेश वन्दना की नृत्य प्रस्तुति रही l कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता सीधी, मध्यप्रदेश से पधारे डॉ श्रीनिवास शुक्ल सरस ने की, मुख्य अतिथि के  रामलला पैलेस के आचार्य परम आदरणीय 
ब्रह्मदास महाराज जी रहे l विशिष्ट अतिथि के रूप में कानपुर के डी ए वी कॉलेज के विभागाध्यक्ष डॉ राजेश तिवारी विरल, लखनऊ के प्रो विश्वंभर शुक्ल, देहरादून के शिव मोहन सिंह , मुंबई के डॉ कृपा शंकर मिश्र उपस्थित रहे l आचार्य ब्रह्मदास महाराज ने आशीर्वचन में संस्था के कार्य की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से भारतीय संस्कृति और साहित्य का संरक्षण होगा और समाज को सही दिशा मिलेगी सत्र का कुशल संचालन नागपुर वाले म्हारे मित्र रामकृष्ण वि सहस्रबुदधे ने किया।संस्था की पत्रिका युगधारा के नवीन अंक का लोकार्पण हुआ, साथ ही विभिन्न 6 राज्यों से उपस्थित रचनाकारों की 14 साहित्यिक कृतियां भी लोकार्पित हुईं। संस्था 
 के सर्वोच्च साहित्य शिरोमणि सम्मान से नागपुर के वरिष्ठ साहित्यकार रामकृष्ण वि सहस्रबुदधे और लखनऊ की डॉ करुणा पांडेय को सम्मानित किया गया । गोस्वामी तुलसी दास सम्मान डॉ इंदु अग्रवाल 
और पं प्रताप नारायण मिश्र सम्मान डॉ राजेश तिवारी विरल को प्रदान किया गया। इसी अवसर पर हमारे कहानी संग्रह "काला हंस" को भी "सरस्वती साधक" सम्मान और साथ में रुपये ३१००/- से देकर सम्मानित किया गया। इस सत्र का संचालन महासचिव सौम्या मिश्रा अनुश्री ने किया।

         अगले दिन सुबह ही चूँकि प्रिय सौम्या को किसी इम्तेहान के लिए वापिस लखनऊ लौटना पड़ा तो हमने प्रिय प्रणव के साथ सुबह सुबह राम लला फिर हनुमान गढ़ी के दर्शन कर अयोध्या जी आने का ध्येय पूर्ण कर लिया होटल वापिस गर्मागर्म आलू पूरी से पेट पूजा की फिर मिली जुली सरकार के देख रेख में विविध राज्यों से आए 60 साहित्यकारों ने अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में प्रतिभाग करते हुए अपना अपना अप्रतिम काव्य पाठ प्रस्तुत किया। अब भाई साहब वो कवि कैसा जो माइक जल्दी छोड़ दे। लोग भरे बैठे रहते हैं महीनों और कभी सालों तक बस एक मौके के इंतज़ार में तो जिन्हें मौक़ा मिला उन्होंने कई कई दफ़ा अध्यक्षीय भाषण देकर ख़ुद को हल्का किया तो बाक़ी बचे शेष और अवशेषों ने टोके जाने के खौफ़ से न मंच की ओर देखा न ही संचालक की ओर मुंडी घुमाई बस जितना लपेट सकते थे लपेट दिया। हॉल बड़ा बचे खुचे दर्शक और हॉल में गूँजती हुई आवाज़ हमने दूर बैठकर संचालक महोदय को इन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कवियों के डर से खुदई कविता पढ़ने से स्पष्ट मना कर दिया अनुज जनार्दन को लगा ह्म्म नाराज़ हैं अब उसे कैसे बताएं कभी कभी कविता न पढ़ना भी पढ़ने के बराबर मान लिया जाना चाहिए आख़िर जिन्होंने पढ़ा है उन्हें सुना कितनों ने जाना कितनों ने और पहचाना कितनों ने हाँ भड़ास ज़रूर निकल गई कि अयोध्या जी में पढ़ आए हाँ नई तो।   

         शाम को डिनर के लिए सभी रेस्टोरेंट में जुटे पहली थाली हमें मिली हमने अभी हाथ जोड़कर पहला टुकड़ा तोड़ा ही था कि झट से बजरंगी आए फट से रोटी उठाई खट से बाहर । भाई साहब सब हक्के बक्के से देख रहे थे तभी गेट पार जाकर बजरंगी बोले अबे हमने एक ही रोटी उठाई है बाक़ी तुम ठूस लो और हां हमारी रोटी के पैसे सौम्या के खाते में डलवा देना (बजरंगी की भाव भंगिमाएं देखकर हमें ऐसा ही फील हुआ) । अगले दिन सुबह तैय्यार हुए ई रिक्शा ली मौर्या की कचौरी खाई, सरयू जाकर जल छिड़का आचमन किया फिर खूबसूरत पथ निरीक्षण करते हुए शिला स्थल देखा फिर मंदिर निर्माण स्थल देखा और सर नवाते हुए वापिस होटल सामान उठाया और अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन,११:४५ वंदे भारत ली और झटक से सामान ऊपर रक्खा और फटक से सीट पर। ३,४ घण्टे बाद अहसास हुआ इस वंदे भारत से तो हमारी नमो भारत ज़्यादा बढ़िया है। ये १०२ की स्पीड से आगे नहीं बढ़ रही और नमो भारत है कि १६१ तक की स्पीड टच करती हैं। अभी हम कैलकुलेशन में व्यस्त थे कि वंदे भारत रुक गई,१०,२०,३० अजी नहीं पूरे एक घण्टे 
 हमें तनिक गुस्सा आ गया अगल बगल से ट्रेन गुज़र रही और हम.... ख़ैर टी टी तो क्या बताता हमने वंदे को वंदे किया और रुकने की वज़ह पूछी। हमारा पूछना था कि वंदे भड़क गई बोलो बरसों पहले बरेली में झुमका गिरा था उसे ही ढूंढ रही हूँ तुम्हें मदद करनी है तो करो वरना निकलो। हमने कहां देवी जहाँ तुम खड़ी हो वो जगह टिसुआ हॉल्ट से भी १० KM पहले है यहाँ से बरेली ४०,५० KM तो होगा। अब वंदे और भड़क गई और बोली सुनो बे शराफ़त से बता रहे हैं सुन लो ये नेता फेता तो वंदे संदे चला देते हैं बड़े बड़े दावे अलग से पर ट्रैक वही पुराने और घिसे पिटे तो हम चले कहां पे उड़ सकते नहीं चल सकते नहीं तो बेटा हमारी हम जानी तुम्हारी तुम समझे और ज़्यादा बोले तो याद दिला देंगे नानी। हमने मौके की नज़ाकत को समझा और वंदे को वंदे करते हुए मेरठ आने तक घुड़पचंद की तरह शांत बच्चे की तरह बैठे रहे ये सोचकर कि बात तो वंदे ने भी ठीक ही कही है। उधर वंदे एक घंटा लेट होने के बाद भी कवर करती हुई ९:०५ की जगह ९:२० पर मेरठ आ ही पहुंची। बाहर आए टैक्सी ली और सीधे 🧁 🏠 🏡 फिर स्वीट बेड और 🧁 वाली 😴 😴 😴।

विशेष: तीन दिनी अयोध्या जी प्रवास में जितनों से भी बात हुई एक बात क्रिस्टल क्लियर समझ आ गई कि मंदिर में चोरी हुई या करवाई गई उसका इफेक्ट दर्शनार्थियों पर बहुत ज़्यादा पड़ा है। भले ही एफ आर आई में चंपक राय और एक हैं का नाम नहीं है लेकिन अयोध्या जी वासियों में रोष बहुत है और वो चंपक राय की कार्यप्रणाली से कतई खुश नहीं हैं। बातचीत बाहर भी की और मन्दिर के अंदर भी । ये दाग किसी सर्फ़ से नहीं धुलने वाले।

"अब दाग़ दार दामन, कोई नहीं मिलेगा 
इस दौर में सभी हैं, उजले लिबास वाले"

-प्रदीप भट्ट - मेरठ 
24092026





         

          

टिसुआ 

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