Monday, 20 July 2026

" जंतर-मंतर छू- मन्तर "


" जंतर मंतर छू-मंतर " 

         तू कौन कि मैं खां म खां, तो चल मेरे संग मिलकर करेंगे तिलचट्टा पार्टी।  बात तो सीरियस है लेकिन इसमें हास्य और व्यंग्य का तड़का इसलिए लगना ज़रूरी है ताकि सनद रहे। मई में चीफ़ जस्टिस ऑफ इंडिया ने व्यंग्य के तौर पर बेरोजगारों को कॉकरोच कह दिया। बस भाई साहब कुछ देश में और कुछ विदेश में बैठे खां म खां के लोगों को इसमें अपना राजनीतिक अस्तित्व नज़र आने लगा। आनन फानन में कुछ घमौरी टाइप लोगों ने इसका खाका तैय्यार किया और सोशल मीडिया पर अपनी उपस्थिति दर्ज़ करा दी। वैसे भी विपच्छी पार्टी के कुछ नेताओं को सोशल मीडिया पर ही बाल्टी बाल्टी खेलने में ज़्यादा मज़ा आता है और शाम होते ही "सूरज अस्त नेता जी मस्त" की तर्ज पर नेता जी बाल्टी भरकर भरकर दारू पार्टी करते हैं। कई बरस पहले वित्त का एक आदमी अपनी वित्तई दिखाता और सबको ठेंगा दिखाता हुआ एक नई पार्टी बना लेता है और आश्चर्य लोगों के बीच छा भी जाता है और भाई साहब कभी रो के कभी पिट के या ख़ुद को पिटवा के आम आदमी को बिना नमक मिर्च लगाए साबुत निगल भी जाता है। अब उसी छद्म पार्टी से प्रेरणा लेकर एक तिलचट्टा जो कभी उस छद्म पार्टी का समर्थक था किंतु परंतु लेकिन उस छद्म पार्टी के लकड़बग्घे को अपना आदर्श मानता था, हित न सधने पर उसे खूब गरियाता है और फिर निराश होकर विदेश में जा बसता है। वक़्त का पहिया घूमता है और लकड़बग्घे नामक नेता की बग्गी निकल कर दूर जा गिरती है अगर कुछ बचा है तो लकड़ और उसके साथ कभी ख़त्म न होने वाली अकड़। तो भाई साहब उन साहब को आज की तारीख़ में सब अकडुद्दीन बोलते हैं। हंसो मति महाराज अगर सिर्फ अकड़ लिखेंगे तो न पकड़ लोगे इसलिए अकडुद्दीन ही ठीक है। अब इन्हीं अकडुद्दीन की बुआ का लड़का जो विदेश में जा बसा था अजी वही दीमक तिलचट्टा अमेरिका से आया मेरा दोस्त की तर्ज़ पर नीट की आड़ में FCRA को खुलवाने के प्रयास में। आप खुदई सोचो इस दीमक का नीट से क्या लेना देना फिर भारत में छात्रों के हक़ में बात करने वाली हर राजनैतिक दल में एक विंग है जो यूजीसी के विरोध में सड़को पर उतर चुकी है किंतु परन्तु तिलचट्टों के आकाओं का इससे क्या लेना देना सो भाई साहब हैय्या रे हैय्या के साथ अटरू मटरु  को मिलाकर तिलचट्टा गैंग ने दो चार लाख डॉलर कुछ करम जले भी और कुछ नासपीटे गद्दारो से समेटे और तिलचट्टा कैंपेन चालू । फ़ॉलोअर बढ़े तो हसरतें बढ़ी और लो जी तिलचट्टा गैंग ने एक पार्टी बना डाली और अंग्रेजी मिश्रित नाम रख दिया कॉकरोच जनता पार्टी । अब विपच्छ में तो कछु बचा न है सो बीजेपी से मिलता जुलता नाम रखकर ही वैतरणी पार करने की सोची तिलचट्टों ने।

          यूँ तो सदियों से अज्जी मतलब जब से मैकाले भैय्या की पद्धति से शिक्षा का चलन हुआ है तब से म्हारे देश में वो भी लेफ्टिस्टों के भरोसे रिक्शा रूपी शिक्षा एक दूसरे से क़दम ताल मिलाकर चले जा रही हैं।  ये पेपर सैटिंग, अपनों के लिए कुछ अपना पन दिखाते हुए कुछ करमजले नेताओं की बदौलत कुछ तिलचट्टे पहले भी ऐसी खुराफातें करते रहे हैं और आज भी अपने पैतृक काम की विरासत को संजोय हुए हैं। पेपर की सेटिंग से लेकर लीक तक सब कुछ इत्ता करीने से होता था कि मजाल है इसकी ख़बर मीडिया में आ जाए। वैसे भी संबंधित को चढ़ावा टाइम पे मिल जाए तो लीक को बाकायदा क्रिकेट लीग की तरह चलाया जा सकता है। बस इक्का दुक्का केस छोड़ दो मियां। लेकिन बुरा हो इस तिलचट्टे सोशल मीडिया का जिसमें टेलीग्राम प्रमुख है ने सब गुड़ गोबर करके रख दिया। भाई साहब चढ़ावे का खेल इत्ता पॉवर फुल है कि हर राज्य के दस पांच बच्चों की बलि लेकर भी ये खेल बदस्तूर जारी है। लेकिन मजाल है किसी के कान पे जूं भी रेंग जाए। अब जूं है ज़रूरी है रेंगे ही दौड़ लगाकर कुछ खुजली वालों के सर में भी घुस सकती है। वैसे लीक की असली जड़ खरपतवारों की तरह हर शहर में उगे ट्यूशन केंद्र होते थे जिन्हें कुछ शातिर लोगों ने फलाना ढिकाना एकेडमी के बोर्डो से शहर शहर गली गली पाट दिया है जहां मोटे पैसे वसूल कर बच्चों को ख़्वाब दिखाए ही नहीं जाते वरन उन्हें पूरा करने में बच्चों से ज़्यादा उनके मां बाप कुछ भी करके बच्चों को डॉक्टर, इंजिनियर आई ए एस बनवाने का ठेका दे देते हैं और अब तो कुछ बरसों में ये रोग एनडीए और एस एस बी में भी दिखाई देने लगा है। ग़रीब का बच्चा कितना भी हाड तोड़ मेहनत करे लेकिन सलेक्शन एक्स सर्विस मैन द्वारा चलाए जा रही एकेडमी के बच्चों का ही हो रहा है। यकीं नहीं तो एन डी ए और एस एस बी के रिज़ल्ट आने के एक दो दिन बाद न्यूज़ पेपर देख लेना। वैसे एक बात पूछनी कू मन कर रिया है क्या कभी आरक्षण हटाओ पर भी ऐसा वैसा कुछ होगा या सिर्फ़ नीट पर चीट ही चलेगा।

         ख़ैर अब पार्टी बनी है तो कुछ तो करना था सो सोशल मीडिया से इतर कुछ करने की खुजली मची और एजेंडा ढूँढते तीन एजेंडों पर सहमति बनी। पहली मांग नीट की परीक्षा नीट एंड क्लीन क्यूँ नहीं हुई, बच्चों ने आत्महत्या की है उन्हें एक करोड़ रुपये दो तीसरा प्रधान साहब इस्तीफ़ा दो और लो जी पहुंच गए सगरे जंतर वाले मंतर पर। अब जंतर मंतर वो जगह है जहां साउथ इंडियन फ़ूड जबरदस्त वाला मिलता है। बाजू में केरल हाउस है न और वहां तो सामान्य दिनों के अलावा शनिवार रविवार को ज्यादा भीड़ रहती है मतबल 200-250 आदमी आम तौर पर दिखाई दे ही जायेंगे अगर कोई मदारी खेल दिखाए तो भीड़ बढ़कर 500-700 भी हो जाती है। अब ये तिलचट्टा पार्टी ने डेरा जमाया तो 200,400 और जुट गए। भारत में भीड़ की क्या कमी है। फ्री का शरबत बटे तो हज़ार दुई हज़ार मिनटो में हाज़िर। सो यहां भी 15-20 दिन तक नीट के समर्थन में ऐसे ऐसे कार्टून देखने को मिले कि हँसते हँसते लग गए रस्ते डायलॉग याद हो आया। सरकार को पता है कि इसके पीछे कौन और क्यूँ है सो सरकार अपने महत्वपूर्ण बिलो पर लोकसभा और राज्यसभा में समर्थन समर्थन खेलने में मस्त है। तिलचट्टा पार्टी हैरान परेशान कि कोई इधर को क्यूँ नहीं फटक रा। अबे फटकेगा कैसे पुलिस के डंडे से सबकी फटती है मियां। 

         भाई साहब फिर से एक जोर की कहावत याद आ रही है "कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा भानुमति ने कुनबा जोड़ा"  सुसरा कुनबा जुड़ गया लेकिन न राजा न प्रजा कोई लोड ही नी ले रा । "तभी अनिश्चय के बादल में बिजली चमकी रस्ता पाया याद मुझे फिर ये दिन आया" ( मेरी कविता की पंक्तियां हैं) की तर्ज़ पर लेह के सो कॉल्ड लौह पुरुष कुछ कुछ वांगडू साहब को मैसेज भेजा वो भी वहां खाली बैठे मक्खियाँ ही मार रहे थे सो पहली फुर्सत में आ टपके और बिना किसी एजेंडा के सीधे आमरण अनशन। ऐसा कौन करता है भाई साहब पर ये साहब करते हैं सो किया।  दीमक तिलचट्टे को ये समय मुफीद लगा सो तुरत विदेश से सीधे दिल्ली लैंड। लेकिन ये क्या दिल्ली पुलिस ने "दिल्ली पुलिस आपके लिए, सदैव आपके साथ" का उद्घोष करती हुई एयर पोर्ट पर ही दीमक को पेस्ट कंट्रोल में लिपटा प्रेम पत्र पकड़ा दिया कि भैय्या ज़्यादा चि पों की तो पौ बारह कर देंगे। अब चूंकि 20 जुलाई से मानसून सेशन चालू है सो तिलचट्टा गैंग में खलबली मच गई बिना सपोर्टर के संसद कुच कैसे होगा सो रातों रात पों पों पार्टी के मुखिया अकडुद्दीन को हाथ पैर जोड़कर मनाया कि महाराज अपने चेले की लाज बचाओ। अकड़ूद्दीन ने पल भर में सारे गणित फिट किए एक बेहयाई से भरपूर मुस्कान के साथ कह दिया तथास्तु। आनन फानन में ये ख़बर ओं ओं पार्टी जूँ जूं पार्टी खों खों पार्टी तक भी जा पहुँची। सबको लगा ये कल का लौंडा हमसे आगे कैसे निकल सकता है और लो जी कुल जमा हज़ार पंद्रह सौ छात्रों के बीच दस पन्द्रह हज़ार ऑफन्डर लफंडर टाइप के लोग पहुंच गए। वांगडू साहिब को दिल्ली पुलिस पहले ही उठा ले गई थी सो 20 की शाम होते होते ऑफ़ेंडर और लफंडरों ने काफ़ी उत्पात मचाचा। दीमक तिलचट्टा देखता ही रह गया और नीट आंदोलन को चिट करते हुए अकड़ूद्दीन, फ़र्दूदीन हाइजैक कर अपने पक्ष में ले गए। 

         फ़र्दूदीन ने तो अकड़ूद्दीन से भी ज़्यादा बाज़ी मार ली, बंदा संसद से निकला और प्रधानमंत्री के घर के सामने लमलेट, जीतेंद्र जी ने समझाया तो बोले नीट पे संसद में चर्चा चाहिए, बेचारे भागे भागे गए, वापिस लौटकर फ़र्दूदीन को  बताया agrred ,फ़र्दूदीन को दूर दूर तक भी ये उम्मीद नहीं थी कि सरकार मान जाएगी सो तुरत बोले नहीं अब मुझे प्रधान जी का इस्तीफ़ा भी चाहिए। जितेंद्र जी फिर समझाया ऐसा नहीं होता फ़र्दूदीन जी तो गोविंदा की फिल्म गैंबलर का गाना गाते हुए बोले बोले 'मेरी मर्ज़ी ' अब कर लो जी क्या करो हो लोप महोदय का। अब इस घमौरी को कौन समझाए सो इस हरक़त को जो फालतू के नेता वहां जुटे थे वो भी कारवां गुज़र गया ग़ुबार देखते रहे गाना गाते और पुलिस द्वारा मालिश करवाते हुए बस में जा बैठे। अब चूंकि इस आन्दोलन का छात्रों से दूर दूर तक भी लेना देना नहीं तो ऑफेंडर लाफेंडर सबने अपनी अपनी मर्ज़ी चलाई और इधर उधर के वीडियो वॉयरल होने लगे जिसमें मोदी मर जा के नारे, सनातन विरोध के नारे, देश विरोधी, सेना विरोधी। एक 700 ग्राम की लड़की चिल्ला चिल्ला कर लोगों को मोदी के तेहरवीं के समोसे खाने का मौखिक आमंत्रण देती दिखाई दी, एक 900 ग्राम की लड़की मोदी को गोली मारने की वकालत करती दिखी, एक टेंगडा सा पहलवान संसद भवन को तोड़ने की बात करता दिखा और खाईं पी भैंस नुमा महिला ने तो सारी सीमाएं पार कर दीं जो बच्चे exam पास करते हैं उनकी माएं मोदी के साथ सोती हैं।  ये कैसा प्रोटेस्ट  है I  सीलमपुर की पार्षद का पति हाजी अफ़ज़ल तो ख़ुद को पार्षद समझ आएं बाएं बकता दिखाई दिया। सरकार सख़्त है तो इसका मतलब कुछ भी करोगे और सरकार चलने देगी ना भैय्या ना। ऐसा तो बिलकुल न होने का है। ठुकाई, पिलाई रंगाई धुलाई सब होगी कुछ हो गई कुछ रह गई बस थोड़ा धैर्य धरों महाराज।

प्रेशर कूकर वॉल्व स्ट्रेटेजी 
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         लगातार तीन दिन तक ये झोल झाल देखने के बाद मोटा भाई ने अर्जेंट वाली मीटिंग बुलाई और बोले बस बहुत हो चुकी भली मानस वाली कहानी। लातो के भूत बातों से नहीं मानने वाले इसलिए सख़्त एक्शन लेने की तैयारी करो। दिल्ली पुलिस पीटने के लिए नहीं बैठी है। फ़र्दूदीन और अकड़ूद्दीन और अहिरावण ने अजमेरी गेट, नांगलोई सीलम पुर सुन्दर नगरी और भी कई जगह से ऑफ़ेंडर ऑफेंडर खेलने की कोशिश की है। सबके कच्चे चिट्ठे निकलो शाम तक। तभी एक सूचना आई अकड़ूद्दीन थाने थाने घूम रहे हैं। मोटा भाई ने निगाह तिरछी करके आदेश दिया रियल बच्चों को जानो दो अनरियल की ख़ातिरदारी करो। मोटा भाई तो मोटा भाई ठहरे कनिष्ठ वरिष्ठ और कुछ गरिष्ठ से भी इस समस्या को सुलझाने के लिए सुझाव मांगे। एक सुझाव आया कि चार घण्टे के लिए पुलिस को खुली छुट दे दी जाए रिज़ल्ट बिलकुल पक्का मिलेगा, दूसरा जंतर मंतर से सब कुछ छू मन्तर कर दिया जाए और भी सुझाव आए और मोटा भाई मुस्कराकर सुनते रहे। एक और ख़बर चिट पर लिखी आई कि अब तक face recognition system ने 215 ऑफन्डर, लफंडर की पहचान कर ली है। मोटा भाई ख़बर देखकर मुस्कुराए फिर कमर सीधी करते हुए बोले प्रशासन कमज़ोर नहीं दिखना चाहिए लेकिन हर समस्या का इलाज़ सोटा नहीं हो सकता फिर बोले आप लोगों को पता है कॉकरोच परमाणु हमले के बाद भी जीवित रह सकता है लेकिन अगर उसे उल्टा कर दो तो उसे कुछ दिनों में ही चींटियाँ सफ़ाचट कर देती हैं। यही हाल कछुए का भी है। इनको आपस में ही एक दूसरे को उल्टा करने दो। खुदई निपट जायेंगे। 

हिट करेगी फिट 
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         इसी बीच आधी रात को 26 दिन से आमरण अनशन पर पहले जन्तर मंतर फिर सफ़दर जंग हॉस्पिटल फिर मेदांता हॉस्पिटल में वागंडु जी ने जितेंद्र सिंह और नड्डा जी से बातचीत कर अपना अनशन ख़त्म किया और अगले दिन दोपहर में तिलचट्टों ने थोड़ा यूँ थोड़ा हूँ यही तो प्रॉमिस की शान है गुनगुनाते हुए नड्डा जी, जितेंद्र सिंह से विठ्ठल भवन में समझौता कर डाला तो ओं ओं पार्टी, खों खों पार्टी और पों पों पार्टी के कुचक्री नेताओं को भरी बरसात में भी पसीना आने लगा कारण सरकार ने इन कुचक्री पार्टी के महा कुचक्री नेताओं को दर किनार कर तिलचट्टा गैंग और वागंडु जी को साध लिया। मोदी जी ने आधी रात को वीडियो संदेश दे दिया कि नीट को नीट बनाए रखने के लिए फ़ास्ट ट्रैक अदालत गठित होंगी साथ ही कैबिनेट ने इसे एप्रूव भी कर दिया। axam के लिए एक अलग पारदर्शी सिस्टम बनाये जाने की घोषणा, जोशी समेत 47 लोगों को एनटीए से टर्मिनेट कर दिया और ये सब प्रधानमंत्री के देर रात एक वीडियो के पोस्ट के बाद हुआ है। सरकार को जेन जी विरोधी बताने वाले इस बात से सदमें में आ गए मात्र 21 घंटे में इंस्टाग्राम, फेसबुक और ट्विटर पर प्रधानमंत्री के वीडियो को 40 करोड़+ देख चुके हैं। अब कल्लो बात क्या करनी है। लेकिन सीरियस नोट पर एक बात कहनी ही पड़ेगी कि किसी भी देश की सरकार को शिक्षा और स्वास्थ्य पर कम से कम दस दस प्रतिशत बजट रखना ही चाहिए और हां पहली फ़ुर्सत में क्रमबद्ध तरीके से कोचिंग पर सख्ती से लगाम लगानी चाहिए। शिक्षा और स्वास्थ्य की जड़ में यही असली शूल हैं। प्रधान जी का त्यागपत्र हो चुका है,अब बारी सरकार की है कि समय रहते इसमें मट्ठा डाल दें। चलते चलते एक अच्छी खबर यह भी कि आँचल नामक लड़की अपनी टीम के साथ जंतर-मंतर पर तिलचट्टे और लफंडर द्वारा फैलाई गईं गंदगी को साफ कर रही है I इस लड़की ने दिखाया कि सिर्फ़ नीट पर शोर नहीं जगह भी नीट एण्ड क्लीन रक्खो भाई लोगों पर कोई समझे तब ना।

प्रदीप भट्ट 
लेखक, मेरठ (उत्तर प्रदेश)


Monday, 13 July 2026

"तीन का तेरह होना"

रिपोर्ताज 

   "तीन का तेरह होना" 

         एक लम्बेबेबेबे वक्त के बाद (हंसो😜😜😜 मति महाराज) कथा रंग कार्यक्रम के होने की शुभ सूचना प्राप्त हुई कि कार्यक्रम फलाने दिन ढिकाने स्थान पर और मस्ताने समय यानि चिलचिलाती धूप का आनन्द लेते हुए अपराह्न 2.30 बजे होनी निश्चित हुई है साथ में गुज़ारिश🙏🏾🙏🏾🙏🏾 कि भैय्या समय से यानि मस्ताने समय तक 2.30 तक ज़रूर पहुंच जाइयो। लोगों ने समझा अंक्खे मियां साहब हमें समय से आने कू कै रिये हैं फिर मन ही मन कहा होगा भैय्यू जब हम अपनी ख़ुद की शादी में टैम पे ना पहुँचे ये तो फिर भी कहानियों पर आधारित कहन है हम ऊ टाइप के लोग हैं जो यमराज👹👹👹👹 को भी अपनी फ़ालतू की कविता या कहानी सुनाकर इत्ता भरमा देते हैं कि वो गफलत में अजय मिश्रा जी के पापा की जगह अजय शुक्ला जी के पापा को ढोकर ऊपर ले जाता है वो तो भला हो पढ़े लिखे चित्रगुप्त जी का जो AI का सटीक इस्तेमाल कर ग़लत बंदे की हाज़िरी लगाने से बच जाते हैं और अजय शुक्ला जी के पापा को वापिस धरती पर धड़ाम से टपका🫥🫥🫥 देते हैं। तो ऐसे लोगों से कमस्कम टैम पे आने की उम्मीद कतई न करें आलोक जी। वैसे भी प्रदीप भट्ट है ने टैम से पहले प्रकट होने के 🤥 लिए।

         तो भैय्या 12 जुलाई को 10 बजे स्कूटी से निकले ही थे कि क्या देखते हैं जी कि गेट पर एक नेवला वही जिसे अंग्रेजी में मैंगोस कहते हैं,सर्प राज 🥨 को लपेटने की कोशिश कर रहा था क़रीब पचार मीटर दूर हमने हल्के वाला जोर से ब्रेक 💔 ठोक दिया। नेवले का ध्यान भंग हुआ और वो हमें प्रणाम करके राइट साइड की झाड़ियों में सरक लिया। हमें आश्चर्य हुआ फिर सोचा शायद पिछले जन्म में ये हमारा कुछ तो रहा होगा जो ..... अज्जी छोड़ो भी रिश्ते का कयास क्या लगाना खां म खां में घर में झगड़ा टंटा हो जाएगा। लेकिन वो नाग नाथ साहब हमारे कारण बची जान का धन्यवाद ज्ञापन दिये बिना लेफ्ट साईड को सरकते सरकते फिर राइट साइड में मुड़ लिए। हमें समझ आ गया भाई इनका तो टैम आज आ ही गया है। ख़ैर एक काम निबटाया और एक बजे की रैपिड  पकड़ी ( भगवान भला करे बीजेपी का, बाक़ी का तो पता नई पर भाई साहब हम जैसे कवियों लेखकों के दिन इस रैपिड ने ज़रूर बदल दिए हैं, वरना तो.... अज्जी छडीओ भी) और 13.40 पर साहिबाबाद वहां से रैपिडो और लो जी ठीक दूई बजे kingsfok बैंक्वेट हॉल, रियल स्क्वायर मॉल में एंट्री। इधर उधर ढूँढते हुए रिसेप्शन पर जा पहुंचे। वहाँ एक और सज्जन हमसे पहले ही पहुंच गए थे। "हमसे भी पहले"🫪🫪🫪 हमें जोर का झटका कुछ ज़्यादा ही जोर से लगा लोग हमसे भी ज़्यादा कितने निपट और फालतू लोग हैं न मियाँ।  ख़ैर वो बिचारी बारीक़ सी रिसेपनिस्ट उन्हें बता रही थी सर आज यहाँ कोई कार्यक्रम नहीं है कुछ दिनों पहले कहीं किसी का क्रिया कर्म हुआ था उनकी तेहरवीं🤠🤠🤠 कल थी पर आज तो कुछ नहीं है। सच कै रिया हूँ हंसी तो आई लेकिन उस पर काबू पाते हुए हमने अपनी जिह्वा का सही इस्तेमाल करते हुए उसे थोड़ा सा रिलेक्स करते हुए कहा बच्चा ज़रा ठहरो और अपने मैनेजर से पूछ लो। आश्चर्य उसने तुरत मोबाइल खटखटा दिया फिर अगले ही पल माफ़ी मांगते हुए पांचवीं मंज़िल पर जाने का इशारा कर दिया। अच्छा हुआ हमने उसे थोड़ा रिलेक्स कर दिया वगरना......😡। 

         सो हुआ यूँ कि इन सब झंझावतों में डूबते उतराते हम ऊपर जा पहुँचे और हर बार की तरह आलोक जी ने प्रेम से स्वागत किया। हॉल की क्षमता बा मुश्किल 30,40 होगी हमने अंदाज़ा लगाया शायद इत्ते लोग भी ना आएँगे। धीरे धीरे लोग आने लगे और अंततोगत्वा कार्यक्रम 3.20 पर शुरु हुआ। सुश्री ममता कालिया, श्री विभूति नारायण राय, डॉक्टर अशोक मैत्रेय, कमलेश भट्ट राहुल शिवाय ने अपना स्थान लिया और कार्यक्रम विधिवत शुरू हुआ। से. रा. यात्री जयंती को समर्पित 'कथा संवाद' के पहले सत्र में 'से. रा. यात्री: व्यक्तित्व और कृतित्व' को संबोधित करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार ममता कालिया ने कहा कि यात्री जी की संवेदनशीलता उनके लेखन के साथ उनके निजी जीवन और व्यवहार में भी साफ नजर आती है। उन्होंने कहा कि यात्री जी का जीवन जिन झंझावातों से भरा रहा, उनके पात्र भी उससे जूझते दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा कि यात्री जी में अपने नाम सेवा के अनुरूप सेवा भाव कूट कूट कर भरा था। प्राणियों से लेकर तमाम जीवों से उनका प्रेम जग जाहिर है। उन्होंने सेवा राम गुप्ता के से. रा. यात्री होने का प्रसंग भी रोचकता से सुनाया। इसी क्रम में वरिष्ठ साहित्यकार विभूति नारायण राय ने कहा कि यात्री जी का लेखक उनकी निर्भीक लेखन यात्रा का प्रमाण है। श्री राय ने चार दशक पुराने रिश्ते को याद करते हुए श्री यात्री से जुड़े कई मार्मिक संस्मरण साझा किए। वर्तमान साहित्य के संपादन से शुरू हुई मैत्री की इस यात्रा के कई पड़ाव रहे। श्री राय ने यात्री जी के अंतिम दौर को याद करते हुए कहा कि अंत समय तक यात्री जी चैतन्य रहे🌹🌹🌹। उनकी सबसे बड़ी यंत्रणा स्मरण शक्ति थी, जो अंत तक पहले ही जैसी सतर्क थी। किसी स्थान, व्यक्ति या घटना की विस्मृति उन्हें व्याकुल करती थी। उन्होंने अपने पास एक डायरी और कलम रख ली थी और जिद कर भूले नाम व चेहरे याद करने की कोशिश करते थे। कभी देर रात परिवार के किसी बच्चे का फोन आता कि वह किसी नाम को भूल गए हैं और अस्पष्ट से संदर्भ देकर मुझसे मालूम करने, मुझसे मालूम करने को कह रहे हैं। 

         वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अशोक मैत्रेय जी ने यात्री जी के साथ छह दशक से अधिक लंबे संग-साथ का अनुभव साझा करते हुए कहा कि अपने लेखन में यात्री जी ने सामान्य मनुष्य के जीवन संघर्ष, संवेदना और बदलते सामाजिक यथार्थ को अत्यंत प्रामाणिकता के साथ अभिव्यक्त किया है।साहित्यकार कमलेश भट्ट 'कमल', अशोक मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार नवोदित, रंगकर्मी अक्षयवर नाथ श्रीवास्तव व अनिल शर्मा व उनके सुपुत्र आलोक यात्री ने भी यात्री जी के साथ अपने अनुभव साझा किए। इस अवसर पर डॉ. बीना शर्मा ने से. रा. यात्री की चर्चित कहानी 'आकाशचारी' का स्मरण शक्ति के आधार पर वाचन कर सभी को विस्मृत कर दिया। इसके बाद कमलेश्वर भट्ट 'कमल' की पुस्तक 'किताबों की जगमग दुनिया' के लोकार्पण पर प्रकाशक राहुल शिवाय (मर्मज्ञ) 🤓🤓🤓ने पुस्तक का मर्म श्रोताओं से साझा किया। अपने पल्ले तो कुछ पड़ा नी किताब पढ़ेंगे तो हम भी जगमग हो जायेंगे।

         'कथा रंग' द्वारा विविध वर्षों में आयोजित कथा रंग कहानी प्रतियोगिता के पुरस्कार राशि से वंचित विजेताओं वंदना बाजपेई, सिनीवाली व रिंकल शर्मा को पुरस्कार राशि सौंपी गई।  प्रथम सत्र के अंत में 'कथा रंग' के संयोजक आलोक यात्री व निर्णायक मंडल के सदस्य कमलेश भट्ट 'कमल' ने वर्ष 2024-25 में आयोजित कथा रंग कहानी प्रतियोगिता के परिणाम भी घोषित किए। कुल 16 कहानियां चयनित एवम् पुरस्कृत हुई जिनमें से 13 महिलाओं की और मात्र 3 पुरुषों की कहानियां स्थान पा सकीं। इसी लिए इस रिपोर्ताज का शीर्षक "तीन का तेरह होना"तो बनता है बॉस😊😊😊। समझे के नाही। इस अवसर पर कथा रंग के सहयोगी 'अद्विक प्रकाशन' के स्वामी अशोक गुप्ता ने कथा रंग की पुरस्कृत रचनाकारों को पुस्ताकार देने का भी प्रस्ताव दिया। जिसे करतल ध्वनि से स्वीकृत किया गया। अब भैय्या जिनको 16 कहानियों की जानकारी चाहिए कृपया वे टैक्स्ट के साथ चिपकी हुई इमेज़ निहार लें फुल टू जानकारी मिल जावेगी।😁😁😁😁

         कार्यक्रम के दूसरे सत्र में रेनू अंशुल, डॉ. अजय गोयल, रश्मि वर्मा और शिवराज सिंह की कहानी पर गंभीर विमर्श हुआ। अति विशिष्ट अतिथि डॉ. निधि अग्रवाल कुछ ज़्यादा ही देर से उपस्थित हुई😎😎😎 आखिर अति विशिष्ट अतिथि जो ठहरी माहराज टशन है अपना अपना😻😻😻,ने कहा कि कथा संवाद जैसे कि कार्यक्रम रचनाकारों को संवारने, मांजने और गढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज देश के कई नगरों में स्टोरी राइटिंग के नाम पर पेड वर्कशॉप आयोजित की जा रही हैं। जिनका मकसद लेखन को समृद्ध करने के बजाए धन अर्जित करना है। ऐसी वर्कशॉप में आने वाले तथाकथित विशेषज्ञ भारी भरकम फीस वसूल कर अधकचरा झान परोसते हैं। जबकि कथा रंग का यह मंच एक दशक से यही काम उदारता से, निशुल्क रूप में कर रहा है। उन्होंने कहा कि कथा संवाद की इस एक दशक की यात्रा ने देश को कई नए कथाकार दिए। देर से आईं और बात लेकिन बात तो निधि जी आपने ठीक ही कही है। कथा संवाद में सुनी गई कहानियों पर सुभाष चंदर, सुरेंद्र सिंघल, बख्तावर हनीफ, सिनीवाली, सुभाष अखिल, विनय विक्रम सिंह, वागीश शर्मा और भैय्या हमने भी विचार प्रकट किए जिसमें डॉक्टर अजय गोयल जी कहानी भी थी। डॉक्टर साहब नाराज़ तो नहीं हो न।

         अंत में भाई साहब शिमला प्रवास के रिपोर्ताज को पढ़कर एक सज्जन तड़के तड़के हमारा मुबलिया घनघना दिए, हम उठाए तो बोले आपने अपने रिपोर्ताज में हमारा नाम क्यूँ नहीं लिखा हमने आँखें और ज़्यादा चौड़ी करते हुए उन्हें बताया माहराज हमने तो शुरुआत ही आपसे ही की है तो बोले एक नाम के दो लोग नहीं हो सकते क्या😂😂😂 सच कहें डर के मारे हमारी चौड़ी हुई आँखें एक ही डपट में चाइनीज़ आकार की हो गईं 😝😝😝😝 अब वो रुकने वाले तो थे नहीं सो आगे बोले जिसका नाम आप टॉप पर टेप दिए हो वो शर्मा है और हम नेगी हैं💪🏼💪🏼💪🏼। सो भैय्या इस बार कोई ग़लती नी करनी🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾। कार्यक्रम का संचालन आलोक यात्री और रिंकल शर्मा ने संयुक्त रूप से किया। और जे जे लोग भी भरपेट राशन लपेटे हैं म्हारे अतिरिक्त  आलोक यादव, वी. के. शेखर, पत्रकार रवि पाराशर, अतुल सिन्हा, राधा रमण, अविनाश शर्मा, 
शकील अहमद, डॉ. रत्नापन्निकर, अनिल मीत, डॉ. वीना मित्तल, सरवर हसन, प्रताप सिंह, आलोक शुक्ला, डॉ. सुधीर त्यागी, डॉ. ईश्वर सिंह तेवतिया, अनिमेष शर्मा 'आतिश', राकेश सेठ, तुलिका सेठ, प्रवीण शंकर त्रिपाठी, डॉ. संजय शर्मा, सावित्री शर्मा, डॉ. माला शर्मा, तेजवीर सिंह, पं. सत्य नारायण शर्मा, संजय श्रीवास्तव, के. के. जायसवाल, पवन गहलौत, पूनम जोशी, अभिलाषा विनय, पराग कौशिक, टेकचंद, डॉ. शकीला बानो, रमेश खुराना, अभिषेक कौशिक, आबेद खान, राजीव शर्मा, प्रभात चौधरी, आशु गोस्वामी, तिलक राज अरोड़ा, कविता अरोड़ा, डॉ. आर. के. सिंह, सारिका शर्मा, छाया, जैनेन्द्र कुमार जैन, मनीषा गुप्ता, विनोद कुमार तोमर, ऊषा जैन, विजय लक्ष्मी, पुनीता सिंह, स्नेहलता पांडे, जोया खान व अनन्य शर्मा सहित बड़ी संख्या में लेखक, कवि, रंगकर्मी और पत्रकार उपस्थित थे।

विशेष: 30,40 का स्थान और इत्ते सारे लोग आ गए कि भाई साहब अटेंडेंट एक्स्ट्रा कुर्सी लगाता लगाता थक गया। लेकिन साहित्य की दृष्टि से ये शुभ संकेत है कि लोग सिर्फ मोबाइल में ही नहीं उलझे हुए हैं वरन समय व पैसा खर्च करके पांच घंटे तक साहित्य की सरिता में गोते लगाने का लोभ संवरण नहीं कर पाते। कथा रंग जिंदाबाद तो बनता है न बॉस🙌🙌🙌🙌। सबसे अच्छा पल जब 2024-25 के लिए मेरी कहानी "मिट्टी की महक" भी से. रा. यात्री सम्मान के लिए घोषित हुई। 

अरे कोई बधाई तो दे दो रे। आगे क्या लिखूँ अरे लौट के "राइटर" घर को आए 🤠🤠🤠 आप क्या समझ रिये थे ' बुद्धु ' अरे जाने भी दो यारों 🧔‍♀️


प्रदीप डीएस भट्ट 
15072026

Friday, 3 July 2026

"मैन्नू कि तेन्नू की"

"मैन्नू कि तेन्नू की"

         आजकल देश की सबसे पुरानी ओं ओं पार्टी का हाल एक चुटकुले से समझा जा सकता है। गहरी धुंध में लिपटी दिल्ली की एक जरूरत से ज़्यादा सर्द रात में फैक्ट्री मैनेजर ने रात में सरदार जी को फोन किया और बताया कि सरदार जी फैक्ट्री में आग लग गई है जल्दी से जल्दी फैक्ट्री पहुंचो। सरदार जी ने ऊंघते हुए कहा "मैन्नू कि", मैनेजर ने हैरत से कहा महाराज आग आपकी अपनी फैक्ट्री में लगी है तब सरदार जी ने डपटते हुए कहा फिर "तेन्नू की"। बस कुछ ऐसा ही हाल एक बहुते पुरानी ओं ओं पार्टी ( नाम समझ तो रिये हो न) को छोड़कर जाते हुए उसके छोटे बड़े नेता गण और कुछ समझदार और मज़बूर पुराने चावल जैसे नेता जी। भई मजबूर इसलिए लिख रिया हूँ कि सत्तर अस्सी पार के नेताओं के पास उनसे दोगुनी पुरानी हो चुकी पार्टी में करने को कुछ होता नहीं और वो जो करना चाहें उन्हें कोई करने देता नहीं तो फिर एक ही चारा है कि वो अपनी बरबंटे जैसी अधमीची आँखो से उस ओं ओं पार्टी के उस सो कॉल्ड युवा नेता को समय समय पर बतातें रहें कि माहराज आपके प्रतापी पुरखों के प्रताप से और आपकी कारगुजारियों से कल ' श्याम ' गया था और आज ' छेनू 'चला गया है। इत्ता सुनने के बाद उस ओं ओं पार्टी के सो कॉल्ड युवा नेता ने महाराज अपने मुँह में बढ़िया वाले दो अंटे घुसेड़ फिर अपनी पिनक में पिनपिनाते हुए कहा "मैन्नू की"।  फिर अगर कोई ज़्यादा ही निष्ठा और समझदारी दिखाता हुआ लेकिन मन ही मन गलियाते हुए कोई नेता कहे माहराज ऐसे तो पार्टी बैठ जाएगी तो महाराज वो फिर से ज़बरदस्ती अपने अधमीचे बरबंटे खोलें और फिर से एक अंटा अपने मुँह में घुसेड़ते हुए कहें बहन के टके "तेन्नू की" चल चुपचाप बैठ जा नई तो तुझे परमानेंट घर पे बिठा दूंगा। अब आप खुदई सोच लो और राम झरोखे बैठ के भी देख लो इनका और इनकी ओं ओं पार्टी का क्या कुछ हो सकता है इस जनम में I वैसे बिगड़ने के नाम पे तो नित नए कीर्तिमान स्थापित हो ही रहे हैं। पर राम की लीला है सबसे न्यारी।

         अब आप सोच रिये होंगे हर पुरानी चीज के साथ यही होता है तो इसमें नया क्या तो भईया बात तो तुम कतई सच सच सोच रिये हो पर महराज हम एक नई नवेली पार्टी का हाल बयां करने की सोच रिये हैं। बस नू समझ लो एक पुरानी पार्टी के नेताओं को छोटी छोटी सभाओं में बड्डी बड्डी गलियों से नवाज कर एक पार्टी एक पूर्व फ़ौजी के कंधों से चिपकी रही ताकि थोड़ी शोहरत वोहरत मिलती रहे इसके लिए टोटा सिंह कभी प्लास हाथ में लेकर खम्बे पर चढ़ते दिखाई दिए तो कभी हाथ में झाड़ू लेकर चमचमाती सड़क पर कचरा सेठ से कुछ कचरा उधार लेकर डालकर फिर कामवाली बाई को भी कॉम्प्लेक्स देते हुए कुछ ऐसे ऐसे पोज देते रहे कि देश की कामवाली तो छोड़ो भाई साहब बड़े बड़े मॉडल भी अपने अपने पेट पर लात लगती देखकर रोने लगे। उधर बेचारे पूर्व फ़ौजी टोटा सिंह के बेढंगे पन को देखकर राम राम करने लगा। इससे पहले कि पूर्व फ़ौजी कुछ प्रतिरोध करते टोटा सिंह ने तुरंत उनके कंधे से एक लम्बी छलांग लगाई और अगला पाप करते हुए आप की बैसाखी पर जा चढ़े। सच कै रिया हूँ अपनी इज़्ज़त की छीछालेदर होते देख पूर्व फ़ौजी और भैय्या बढ़िया वाले सामाजिक कार्यकर्ता तन्ना साहिब ने तुरत महाराष्ट्र स्थित अपने गाँव पहुंचकर पुण्य की हाज़री लगाई। उधर तन्ना अपने गाँव में इधर टोटा सिंह सुबह सुबह चुनाव आयोग के दफ़्तर में।  सफ़ाई वाले मुकद्दम मियां अपने टैम से आधा घंटा लेट यानि साढ़े आठ बजे चुनाव आयोग के दफ़्तर पहुंचे वहां की साफ़ सफ़ाई देखकर उन्हें लगा कि लगता है रात की चढ़ी अभी उतरी नहीं है वरना इस बात के क्या मायने कि जिस दफ़्तर में वो पिछले बीस बरस से ऑफिस के अन्दर बाहर की सफ़ाई कर रहा है वो उसे आज क्यूँ एकदम चमचमाती हुई नज़र आ रही है। कहीं पिनक में वो बाजू वाले दफ़्तर में तो नहीं घुस गया। लेकिन तभी उसकी निगाह आफिस के बरामदे में बैठे दो तीन दीन हीन से लोगों पर पड़ी जिनमें से एक बंदे ने करीने से मफ़लर लपेट रक्खा था और हाथ में बड्डी वाली फूलदार झाड़ू। मुकद्दम मियां को तुरत मामला समझ में आ गया कि उसके काम से नाखुश होकर स्टेट एंड सर्विसेज डिपार्टमेंट ने उसकी तनख्वाह में तीन ऑउट सोर्स बंदे रख लिए हैं। अभी मुकद्दम मियाँ कुछ सोचने समझने की कोशिश कर ही रहे थे तभी ऑफिस के बरामदे में कोने में बैठे खैनी रगड़ रहे एक बन्दे ने मुकद्दम को वहीं ठहरने का इशारा किया I 

         उन तीनों में से एक खों खों करते हुए साथ में अपने मफ़लर को सीधा करते हुए और  खींसे निपोरते निपोरने की असफल कोशिश करते हुए टोटा सिंह मुकद्दम से बोले घबरा मत हम तो अपनी पाप युक्त पों पों पार्टी के रजिस्ट्रेशन के लिए आएं हैं वो भी चुनाव चिह्न के साथ। अब मुकद्दम मियां ने अपने कॉलर टाइट किए और 28 इंची छाती को मोदी की 56 इंची छाती  की तरह फुलाने की असफल कोशिश करते हुए बोले, रजिस्ट्रेशन ? ये तो हम यूँ करा देंगे, तुमने इस फूलवाली झाड़ू से इत्ता अच्छा डेमो जो दिया है कि बड़े साहब खुश होकर तुम्हे यही चुनाव चिह्न अलॉट कर देंगे। टोटा सिंह ने 'अति विनियम धूर्तता नाम लक्षणम' की कहावत को चरितार्थ करते हुए वायदे का एक और डेमो मुकद्दम मियां को दे डाला, देखो मुकद्दम मियां अगर मेरी पों पों पार्टी सत्ता में आई तो मैं तुम्हें चुनाव आयोग का चीफ़ बना दूँगा। मुकद्दम एक दम से अर्श से फ़र्श के सपने देखने लगा फिर एक दम टोटा सिंह का हाथ पकड़ सीधे बड़े साहब साहब के कमरे में। साहब को पूरे ऑफिस का चक्कर लगवाते हुए मुकद्दम टोटा सिंह की ओर इशारा करते हुए बोला साहिब ई बड़े काम की चीज़ है। साहिब क्या पूरा ऑफिस चमचमाते हुए फर्श को देखते हुए पूरा का पूरा ही गदगद हुआ जा रिया था। टोटा एण्ड पार्टी का डेमो अगले एक हफ़्ते तकयूँ ही चलता रहा सुबह जल्दी आना झाड़ू पोंछा वो भी तरतीब से और घुटी हुई अदा के साथ। पूरा ऑफिस एक दम चकाचक, बड़े साहब ने खुश होकर आठवें दिन ही रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी कराई और फिर बैकग्राउंड में बजते गाजे बाजे के साथ बड़े साहब ने टोटा सिंह के गले में चुनाव चिह्न की माला यानि फूल वाली झाड़ू पहना दी वो भी इस उम्मीद के साथ कि अगर पाप मिश्रित पों पों पार्टी सत्ता में आई तो दिल्ली की सड़के इसी तरह चमचमाएंगी। लेकिन होना तो वही ढाक के तीन पात था सो रजिस्ट्रेशन होते ही अगले दिन से मुकद्दम के मुक़द्दर में फिर वही आफिस फिर वही झाड़ू और वही चुनाव आयोग का दफ़्तर और बड़े साहब की डांट क्यूँ कि टोटा सिंह तो डेमोंस्ट्रेशन और फिर फोटो सेशन देकर रफूचक्कर। इससे ज़्यादा की उम्मीद मति करो उनसे मियां।

         आपने एक कहावत सुनी होगी बिल्ली के भाग से छींका टूटना तो बस पों पों पार्टी में जी जी करके आगे बढ़ने लगी पता ही नहीं चला और भाई साहब दिलपत की जनता त्राहिमाम त्राहिमाम करती हुई कराह ही रही थी सो और कोई विकल्प न होने पर टोटा सिंह की पों पों पार्टी की पो बारह हो गई और टोटा सिंह की पों पों पार्टी ने दिलपत पर कब्ज़ा कर लिया। राजनीति के सारे प्रकांड पण्डितो की भविष्वाणियां परत दर परत ऐसे उतरने लगी जैसे भरी बारिश में किसी सजी धजी महिला के चेहरे से मेकअप उतरता है। निश्चित सत्ता के नशे में चूर कुछ लोगों की सिट्टी पिट्टी गुम हो गई और ये सिलसिला अगले कुछ समय तक चला भी। दिलपत का डेमोंस्ट्रेशन दिखाकर टोटा सिंह ने और जगह भी हाथ पैर मारे लेकिन क़ामयाबी मिली सिर्फ़ उड़ता पंजाब में और वहां का चेला रमाणी बिना पवनहंस के इधर उधर उड़ता रहता है या कहें फुदकता रहता है। एक दो नहीं सैकड़ों अत्याचारों की कहानियां भी बनी लेकिन साहब टोटा सिंह पर कुच्छो फ़र्क नहीं पड़ा। पड़ता भी क्यों अपना काम हो बनता तो भाड़ में जाए जनता और ये लो जी टोटा सिंह जो कभी बड्डी बड्डी बातें करके रंग जमाते थे वो खुदई अपने शीश महल में रंगबाज होने लगे। लेकिन साहब एक गाना है न "शीशा हो दिल हो आख़िर टूट जाता है" और लो जी न जाने किस नासपीटे की नज़र लग गई टोटा सिंह के शीशमहल पर जो शीशमहल से सीधे जेल महल। लगता है टोटा सिंह की कुण्डली में ढैय्या की जगह सीधे साढ़े साती उभर आई तभी तो टोटा सिंह बस यही गाना गाने लगे " आना जाना लगा रहेगा, सुख जाएगा दुःख आयेगा" और लीजिए महाराज दिलपत के चुनाव में टोटा सिंह की भयंकर वाली शिकस्त बाक़ी तो छोड़ो अपनी सीट की भी टांय टांय फिस्स। कुछ कर करा के जेल से बाहर आए तो पता नहीं किसके इशारे पर उड़ते उड़ते, "उड़ते पंजाब" में डेरा जमा कर बैठ गए क्यों और किसके आदेश से ये तो राम जी जाने लेकिन भैय्या चेला रमाणी को तो परेशानी होनी थी सो चेला रमाणी परेशान परेशान होते हुए दो घूंट जिन्दगी के कुछ ज्यादा लेने लगे। किसी ने टोका तो बोले मैनू दो तो ज़्यादा गिनती नी आंदी इसलिए जब मन होता है जिन्दगी के दो घूंट गटक लेता हूं लेकिन जब से ये करम जला आया है ज़्यादा भी कम लग रहा है। मेरी हैसियत उस चवन्नी की तरह हो गई है एक कहावत है न अठन्नी रूपिया बनने चली थी चवन्नी बनकर रह गई। हाय मैं कि करां। अब एक म्यान में दो तलवार कैसे समाएंगी वो भी एक उड़ते पंजाब में ऊपर और दूसरा सबसे बड़ा वाला सुपर।

        ढैय्या हो साढ़े साती भाई साहब असर तो पक्के वाला ही आएगा सो उड़ते पंजाब के सहारे राज्य सभा में भेजे गए नौ में से सात ने सांसदों ने टोटा सिंह को टाटा बाय बाय बोल दिया लेकिन टोटा सिंह बुद्ध की तरह मुस्कुरा कर रह गया। कुछ तो गड़बड़ है दया।। उधर उड़ते पंजाब का चेला रमाणी पिनक में कुछ ऐसा कर बैठा कि पूरी कैबिनेट ही उड़ते हुए और माफ़ी मांगते हुए सीधे एस जी पी सी के चरणों में। सिर्फ़ सत्ता के गलियारों में ही नहीं बल्कि सोशल मीडिया में भी ये बात चल निकली कि चेला रमाणी के साथ ये किसने कॉमेडी कर दी। कुछ लोग इशारा टोटा सिंह की तरफ कर रहे हैं। उधर टोटा सिंह को लग रिया है कि जेल महल जाने से तो अच्छा है कि मैं वर्तमान चाणक्य की शरण में पूरी तरह से चला जाऊँ कम से कम बुढ़ापे में इज़्ज़त तो बची रहेगी। बस टोटा सिंह के भेजे में बत्ती जली और टोटा सिंह ने पहले तो वर्तमान चाणक्य के कमरे के बाहर से ही ढोक दी फिर लुटे पीटे आम आदमी की तरह चेहरा लटकाए और अपने आपको ज्यादा दीन हीन दिखाते हुए कमरे में जा घुसे और पहला वाक्य यही बोला कि जान की अमान पाऊं आली जहां तो मैं पों पों पार्टी के ऐसे ऐसे राज बताऊँगा जो किसी को नहीं पता यहां तक की मेरी अन्दर वाली को भी नहीं और बाहर वाली का तो सवाल ही पैदा नही होता।  चंचरीक भी बुद्ध की तरह मुस्कुराए फिर बोले टोटा सिंह पहले अपना नाम चेंज करो शक्ल और अक्ल एक जैसी दिखाओ। चलो ऐसा करो अपना नाम हमज़ा फली रख लो भले तुम्हारी शक्ल म्याऊं म्याऊं जैसी है पर कम से कम हम्ज़ा नाम का कुछ तो असर रहेगा, नहीं तो आगे की बात चंचरिक ने हवा में तैरने के लिए छोड़ दी फिर बोले तुम मुझे इंटेल दो मैं तुम्हें शांति से जीने दूंगा। ठीक है आज से मेरा नाम हम्ज़ा हुआ मालिक। टोटा का ये त्वरित चेंज रूप देखकर चंचरीक ने जोर का ठहाका लगाया फिर बोले तुम तो गिरगिट के गुरु लगते हो हम्ज़ा।

         हम्ज़ा सेठ ने तुरंत सर से थोड्डी तक लपेटे हुए मफ़लर को ऐसे उतार फेंका जैसे उसने कभी सर्दी में उसको गर्म न रक्खा हो फिर चंचरिक की ओर दयनीय दृष्टि से देखते हुए बोला बच्चों की क़सम महाराज मैं अपनी इस पों पों पार्टी में खुदई इत्ते छेद करूंगा कि पार्टी भी विशेष से शेष और बाद में केवल अवशेष के रूप में ही नज़र आएगी। बस आप मुझे अपनी छत्र छाया में जगह दे दो। वैसे महाराज मैं फ़्री लांसर के रूप में आपको अपनी रिपोर्ट पहले भी देता रहा हूं वरना तो आप मुझे जेल महल से बाहर थोड़े ही आने देते। बुद्ध मुस्कुराए की तर्ज पर चंचरीक फिर से मुस्कुराए फिर बोले जेल में रहकर समझदार हो गए हो हम्ज़ा । चलो खिसको यहां से और पहली फुर्सत में दुबारा उड़ता पंजाब पहुंचो। सुनो हम्ज़ा मेरी नज़र अब पंजाब पर है ओं ओं और पों पों को जो करना था कर लिया अब मुझे पंजाब जीतकर साहिब को गुरु दक्षिणा देनी है और उड़ते पंजाब को वास्तव में नशा मुक्त पंजाब बनाना है। थोड़े से फायदे के लिए तुमने नस्लों को बर्बाद कर दिया है। 'मान ' जाओ तो ठीक वरना मैं तुम्हारे और ओंगो पोगों की नस्लें बर्बाद कर दूंगा। हम्ज़ा को अपनी रीढ़ की हड्डी में खतरनाक वाली सिहरन महसूस सी हुई। हम्ज़ा उर्फ़ हम्ज़ा ही समझ लो यार तुरन्त बोरिया-बिस्तर लपेटकर हमज़ा अली मदारी के रोल में दुबारा पंजाब पहुँच गया। और हफ़्ते भर के भीतर इंटेल शेयर की कि मैंने चेला रमाणी को सलाह दी है कि दारू वाले कांड पर जो छीछालेदर हो रही है उससे बचने के लिए गुरुग्राम की लैब से कॉन्टेक्ट करो और उस धतुरे के बीज ने दस लाख में सौदा पटा भी लिया है वो लैब वाला कुछ फ़र्जी फ़र्जी बनाएगा आप उसकी बुर्जी बुर्जी  बना दो और लो जी हो गया दूसरा लंका काण्ड। आख़िर में एक कहावत तो बनती है न " घर का भेदी लंका ढाए"।

         अब थोड़ा विशेष भी सुना है पिनक में अरविन्द नामक केजरीवाल ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के विषय में कहा है कि ये कौन है। भाई साहब मुझे 2014 याद आ गया जब ममता ने बड़ी ढिठाई से कहा था कौन अमित शाह? भाई साहब सिर्फ बारह साल में अमित शाह ने टीएमसी का सिर्फ़ सुपड़ा ही नहीं साफ़ किया वरन् ममता दूरबीन से अपनी पार्टी खोजती फिर रही हैं और हां यही ग़लती से मिस्टेक प्रियंका अरे वही मुरादाबाद वाले रॉबर्ट की पत्नी ने स्मृति ईरानी के विषय में की थी कौन स्मृति ईरानी? भाई साहब अमेठी और रायबरेली से बोरिया बिस्तरा गोल। इसलिए बड़े बुजुर्ग कह गए हैं भैय्या बड़े कौर खा लो पर बड़े बोल न बोलो।

प्रदीप भट्ट 
लेखक मेरठ 
05072026