" जंतर मंतर तिलचट्टे छू- मंतर "
तू कौन कि मैं खां म खां, तो चल मेरे संग मिलकर करेंगे तिलचट्टा पार्टी। बात तो सीरियस है लेकिन इसमें हास्य और व्यंग्य का तड़का इसलिए लगना ज़रूरी है ताकि सनद रहे। मई में चीफ़ जस्टिस ऑफ इंडिया ने व्यंग्य के तौर पर बेरोजगारों को कॉकरोच कह दिया। बस भाई साहब कुछ देश में और कुछ विदेश में बैठे खां म खां के लोगों को इसमें अपना राजनीतिक अस्तित्व नज़र आने लगा। आनन फानन में कुछ घमौरी टाइप लोगों ने इसका खाका तैय्यार किया और सोशल मीडिया पर अपनी उपस्थिति दर्ज़ करा दी। वैसे भी विपच्छी पार्टी के कुछ नेताओं को सोशल मीडिया पर ही बाल्टी बाल्टी खेलने में ज़्यादा मज़ा आता है और शाम होते ही "सूरज अस्त नेता जी मस्त" की तर्ज पर नेता जी बाल्टी भरकर भरकर दारू पार्टी करते हैं। कई बरस पहले वित्त का एक आदमी अपनी वित्तई दिखाता और सबको ठेंगा दिखाता हुआ एक नई पार्टी बना लेता है और आश्चर्य लोगों के बीच छा भी जाता है और भाई साहब कभी रो के कभी पिट के या ख़ुद को पिटवा के आम आदमी को बिना नमक मिर्च लगाए साबुत निगल भी जाता है। अब उसी छद्म पार्टी से प्रेरणा लेकर एक तिलचट्टा जो कभी उस छद्म पार्टी का समर्थक था किंतु परंतु लेकिन उस छद्म पार्टी के लकड़बग्घे को अपना आदर्श मानता था, हित न सधने पर उसे खूब गरियाता है और फिर निराश होकर विदेश में जा बसता है। वक़्त का पहिया घूमता है और लकड़बग्घे नामक नेता की बग्गी निकल कर दूर जा गिरती है अगर कुछ बचा है तो लकड़ और उसके साथ कभी ख़त्म न होने वाली अकड़। तो भाई साहब उन साहब को आज की तारीख़ में सब अकडुद्दीन बोलते हैं। हंसो मति महाराज अगर सिर्फ अकड़ लिखेंगे तो न पकड़ लोगे इसलिए अकडुद्दीन ही ठीक है। अब इन्हीं अकडुद्दीन की बुआ का लड़का जो विदेश में जा बसा था अजी वही दीमक तिलचट्टा अमेरिका से आया मेरा दोस्त की तर्ज़ पर नीट की आड़ में FCRA को खुलवाने के प्रयास में। आप खुदई सोचो इस दीमक का नीट से क्या लेना देना फिर भारत में छात्रों के हक़ में बात करने वाली हर राजनैतिक दल में एक विंग है जो यूजीसी के विरोध में सड़को पर उतर चुकी है किंतु परन्तु तिलचट्टों के आकाओं का इससे क्या लेना देना सो भाई साहब हैय्या रे हैय्या के साथ अटरू मटरु को मिलाकर तिलचट्टा गैंग ने दो चार लाख डॉलर कुछ करम जले भी और कुछ नासपीटे गद्दारो से समेटे और तिलचट्टा कैंपेन चालू । फ़ॉलोअर बढ़े तो हसरतें बढ़ी और लो जी तिलचट्टा गैंग ने एक पार्टी बना डाली और अंग्रेजी मिश्रित नाम रख दिया कॉकरोच जनता पार्टी । अब विपच्छ में तो कछु बचा न है सो बीजेपी से मिलता जुलता नाम रखकर ही वैतरणी पार करने की सोची तिलचट्टों ने।
यूँ तो सदियों से अज्जी मतलब जब से मैकाले भैय्या की पद्धति से शिक्षा का चलन हुआ है तब से म्हारे देश में वो भी लेफ्टिस्टों के भरोसे रिक्शा रूपी शिक्षा एक दूसरे से क़दम ताल मिलाकर चले जा रही हैं। ये पेपर सैटिंग, अपनों के लिए कुछ अपना पन दिखाते हुए कुछ करमजले नेताओं की बदौलत कुछ तिलचट्टे पहले भी ऐसी खुराफातें करते रहे हैं और आज भी अपने पैतृक काम की विरासत को संजोय हुए हैं। पेपर की सेटिंग से लेकर लीक तक सब कुछ इत्ता करीने से होता था कि मजाल है इसकी ख़बर मीडिया में आ जाए। वैसे भी संबंधित को चढ़ावा टाइम पे मिल जाए तो लीक को बाकायदा क्रिकेट लीग की तरह चलाया जा सकता है। बस इक्का दुक्का केस छोड़ दो मियां। लेकिन बुरा हो इस तिलचट्टे सोशल मीडिया का जिसमें टेलीग्राम प्रमुख है ने सब गुड़ गोबर करके रख दिया। भाई साहब चढ़ावे का खेल इत्ता पॉवर फुल है कि हर राज्य के दस पांच बच्चों की बलि लेकर भी ये खेल बदस्तूर जारी है। लेकिन मजाल है किसी के कान पे जूं भी रेंग जाए। अब जूं है ज़रूरी है रेंगे ही दौड़ लगाकर कुछ खुजली वालों के सर में भी घुस सकती है। वैसे लीक की असली जड़ खरपतवारों की तरह हर शहर में उगे ट्यूशन केंद्र होते थे जिन्हें कुछ शातिर लोगों ने फलाना ढिकाना एकेडमी के बोर्डो से शहर शहर गली गली पाट दिया है जहां मोटे पैसे वसूल कर बच्चों को ख़्वाब दिखाए ही नहीं जाते वरन उन्हें पूरा करने में बच्चों से ज़्यादा उनके मां बाप कुछ भी करके बच्चों को डॉक्टर, इंजिनियर आई ए एस बनवाने का ठेका दे देते हैं और अब तो कुछ बरसों में ये रोग एनडीए और एस एस बी में भी दिखाई देने लगा है। ग़रीब का बच्चा कितना भी हाड तोड़ मेहनत करे लेकिन सलेक्शन एक्स सर्विस मैन द्वारा चलाए जा रही एकेडमी के बच्चों का ही हो रहा है। यकीं नहीं तो एन डी ए और एस एस बी के रिज़ल्ट आने के एक दो दिन बाद न्यूज़ पेपर देख लेना।
ख़ैर अब पार्टी बनी है तो कुछ तो करना था सो सोशल मीडिया से इतर कुछ करने की खुजली मची और एजेंडा ढूँढते तीन एजेंडों पर सहमति बनी। पहली मांग नीट की परीक्षा नीट एंड क्लीन क्यूँ नहीं हुई, बच्चों ने आत्महत्या की है उन्हें एक करोड़ रुपये दो तीसरा प्रधान साहब इस्तीफ़ा दो और लो जी पहुंच गए सगरे जंतर वाले मंतर पर। अब जंतर मंतर वो जगह है जहां साउथ इंडियन फ़ूड जबरदस्त वाला मिलता है। बाजू में केरल हाउस है न और वहां तो सामान्य दिनों के अलावा शनिवार रविवार को ज्यादा भीड़ रहती है मतबल 200-250 आदमी आम तौर पर दिखाई दे ही जायेंगे अगर कोई मदारी खेल दिखाए तो भीड़ बढ़कर 500-700 भी हो जाती है। अब ये तिलचट्टा पार्टी ने डेरा जमाया तो 200,400 और जुट गए। भारत में भीड़ की क्या कमी है। फ्री का शरबत बटे तो हज़ार दुई हज़ार मिनटो में हाज़िर। सो यहां भी 15-20 दिन तक नीट के समर्थन में ऐसे ऐसे कार्टून देखने को मिले कि हँसते हँसते लग गए रस्ते डायलॉग याद हो आया। सरकार को पता है कि इसके पीछे कौन और क्यूँ है सो सरकार अपने महत्वपूर्ण बिलो पर लोकसभा और राज्यसभा में समर्थन समर्थन खेलने में मस्त है। तिलचट्टा पार्टी हैरान परेशान कि कोई इधर को क्यूँ नहीं फटक रा। अबे फटकेगा कैसे पुलिस के डंडे से सबकी फटती है मियां।
भाई साहब फिर से एक जोर की कहावत याद आ रही है "कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा भानुमति ने कुनबा जोड़ा" सुसरा कुनबा जुड़ गया लेकिन न राजा न प्रजा कोई लोड ही नी ले रा । "तभी अनिश्चय के बादल में बिजली चमकी रस्ता पाया याद मुझे फिर ये दिन आया" ( मेरी कविता की पंक्तियां हैं) की तर्ज़ पर लेह के सो कॉल्ड लौह पुरुष कुछ कुछ वांगडू साहब को मैसेज भेजा वो भी वहां खाली बैठे मक्खियाँ ही मार रहे थे सो पहली फुर्सत में आ टपके और बिना किसी एजेंडा के सीधे आमरण अनशन। ऐसा कौन करता है भाई साहब पर ये साहब करते हैं सो किया। दीमक तिलचट्टे को ये समय मुफीद लगा सो तुरत विदेश से सीधे दिल्ली लैंड। लेकिन ये क्या दिल्ली पुलिस ने "दिल्ली पुलिस आपके लिए, सदैव आपके साथ" का उद्घोष करती हुई एयर पोर्ट पर ही दीमक को पेस्ट कंट्रोल में लिपटा प्रेम पत्र पकड़ा दिया कि भैय्या ज़्यादा चि पों की तो पौ बारह कर देंगे। अब चूंकि 20 जुलाई से मानसून सेशन चालू है सो तिलचट्टा गैंग में खलबली मच गई बिना सपोर्टर के संसद कुच कैसे होगा सो रातों रात पों पों पार्टी के मुखिया अकडुद्दीन को हाथ पैर जोड़कर मनाया कि महाराज अपने चेले की लाज बचाओ। अकड़ूद्दीन ने पल भर में सारे गणित फिट किए एक बेहयाई से भरपूर मुस्कान के साथ कह दिया तथास्तु। आनन फानन में ये ख़बर ओं ओं पार्टी जूँ जूं पार्टी खों खों पार्टी तक भी जा पहुँची। सबको लगा ये कल का लौंडा हमसे आगे कैसे निकल सकता है और लो जी कुल जमा हज़ार पंद्रह सौ छात्रों के बीच दस पन्द्रह हज़ार ऑफन्डर लफंडर टाइप के लोग पहुंच गए। वांगडू साहिब को दिल्ली पुलिस पहले ही उठा ले गई थी सो 20 की शाम होते होते ऑफ़ेंडर और लफंडरों ने काफ़ी उत्पात मचाचा। दीमक तिलचट्टा देखता ही रह गया और नीट आंदोलन को चिट करते हुए अकड़ूद्दीन, फ़र्दूदीन हाइजैक कर अपने पक्ष में ले गए।
फ़र्दूदीन ने तो अकड़ूद्दीन से भी ज़्यादा बाज़ी मार ली, बंदा संसद से निकला और प्रधानमंत्री के घर के सामने लमलेट, जीतेंद्र जी ने समझाया तो बोले नीट पे संसद में चर्चा चाहिए, बेचारे भागे भागे गए, वापिस लौटकर फ़र्दूदीन को बताया agrred ,फ़र्दूदीन को दूर दूर तक भी ये उम्मीद नहीं थी कि सरकार मान जाएगी सो तुरत बोले नहीं अब मुझे प्रधान जी का इस्तीफ़ा भी चाहिए। जितेंद्र जी फिर समझाया ऐसा नहीं होता फ़र्दूदीन जी तो गोविंदा की फिल्म गैंबलर का गाना गाते हुए बोले बोले 'मेरी मर्ज़ी ' अब कर लो जी क्या करो हो लोप महोदय का। अब इस घमौरी को कौन समझाए सो इस हरक़त को जो फालतू के नेता वहां जुटे थे वो भी कारवां गुज़र गया ग़ुबार देखते रहे गाना गाते और पुलिस द्वारा मालिश करवाते हुए बस में जा बैठे। अब चूंकि इस आन्दोलन का छात्रों से दूर दूर तक भी लेना देना नहीं तो ऑफेंडर लाफेंडर सबने अपनी अपनी मर्ज़ी चलाई और इधर उधर के वीडियो वॉयरल होने लगे जिसमें मोदी मर जा के नारे, सनातन विरोध के नारे, देश विरोधी, सेना विरोधी। एक 700 ग्राम की लड़की चिल्ला चिल्ला कर लोगों को मोदी के तेहरवीं के समोसे खाने का मौखिक आमंत्रण देती दिखाई दी, एक 900 ग्राम की लड़की मोदी को गोली मारने की वकालत करती दिखी, एक टेंगडा सा पहलवान संसद भवन को तोड़ने की बात करता दिखा और खाईं पी भैंस नुमा महिला ने तो सारी सीमाएं पार कर दीं जो बच्चे exam पास करते हैं उनकी माएं मोदी के साथ सोती हैं। ये कैसा प्रोटेस्ट है I सीलमपुर की पार्षद का पति हाजी अफ़ज़ल तो ख़ुद को पार्षद समझ आएं बाएं बकता दिखाई दिया। सरकार सख़्त है तो इसका मतलब कुछ भी करोगे और सरकार चलने देगी ना भैय्या ना। ऐसा तो बिलकुल न होने का है। ठुकाई, पिलाई रंगाई धुलाई सब होगी कुछ हो गई कुछ रह गई बस थोड़ा धैर्य धरों महाराज।
प्रेशर कूकर वॉल्व स्ट्रेटेजी
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लगातार तीन दिन तक ये झोल झाल देखने के बाद मोटा भाई ने अर्जेंट वाली मीटिंग बुलाई और बोले बस बहुत हो चुकी भली मानस वाली कहानी। लातो के भूत बातों से नहीं मानने वाले इसलिए सख़्त एक्शन लेने की तैयारी करो। दिल्ली पुलिस पीटने के लिए नहीं बैठी है। फ़र्दूदीन और अकड़ूद्दीन और अहिरावण ने अजमेरी गेट, नांगलोई सीलम पुर सुन्दर नगरी और भी कई जगह से ऑफ़ेंडर ऑफेंडर खेलने की कोशिश की है। सबके कच्चे चिट्ठे निकलो शाम तक। तभी एक सूचना आई अकड़ूद्दीन थाने थाने घूम रहे हैं। मोटा भाई ने निगाह तिरछी करके आदेश दिया रियल बच्चों को जानो दो अनरियल की ख़ातिरदारी करो। मोटा भाई तो मोटा भाई ठहरे कनिष्ठ वरिष्ठ और कुछ गरिष्ठ से भी इस समस्या को सुलझाने के लिए सुझाव मांगे। एक सुझाव आया कि चार घण्टे के लिए पुलिस को खुली छुट दे दी जाए रिज़ल्ट बिलकुल पक्का मिलेगा, दूसरा जंतर मंतर से सब कुछ छू मन्तर कर दिया जाए और भी सुझाव आए और मोटा भाई मुस्कराकर सुनते रहे। एक और ख़बर चिट पर लिखी आई कि अब तक face recognition system ने 215 ऑफन्डर, लफंडर की पहचान कर ली है। मोटा भाई ख़बर देखकर मुस्कुराए फिर कमर सीधी करते हुए बोले प्रशासन कमज़ोर नहीं दिखना चाहिए लेकिन हर समस्या का इलाज़ सोटा नहीं हो सकता फिर बोले आप लोगों को पता है कॉकरोच परमाणु हमले के बाद भी जीवित रह सकता है लेकिन अगर उसे उल्टा कर दो तो उसे कुछ दिनों में ही चींटियाँ सफ़ाचट कर देती हैं। यही हाल कछुए का भी है। इनको आपस में ही एक दूसरे को उल्टा करने दो। खुदई निपट जायेंगे।
हिट करेगी फिट
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इसी बीच आधी रात को 26 दिन से आमरण अनशन पर पहले जन्तर मंतर फिर सफ़दर जंग हॉस्पिटल फिर मेदांता हॉस्पिटल में वागंडु जी ने जितेंद्र सिंह और नड्डा जी से बातचीत कर अपना अनशन ख़त्म किया और अगले दिन दोपहर में तिलचट्टों ने थोड़ा यूँ थोड़ा हूँ यही तो प्रॉमिस की शान है गुनगुनाते हुए नड्डा जी, जितेंद्र सिंह से विठ्ठल भवन में समझौता कर डाला तो ओं ओं पार्टी, खों खों पार्टी और पों पों पार्टी के कुचक्री नेताओं को भरी बरसात में भी पसीना आने लगा कारण सरकार ने इन कुचक्री पार्टी के महा कुचक्री नेताओं को दर किनार कर तिलचट्टा गैंग और वागंडु जी को साध लिया। मोदी जी ने आधी रात को वीडियो संदेश दे दिया कि नीट को नीट बनाए रखने के लिए फ़ास्ट ट्रैक अदालत गठित होंगी साथ ही कैबिनेट ने इसे एप्रूव भी कर दिया। axam के लिए एक अलग पारदर्शी सिस्टम बनाये जाने की घोषणा, जोशी समेत 47 लोगों को एनटीए से टर्मिनेट कर दिया और ये सब प्रधानमंत्री के देर रात एक वीडियो के पोस्ट के बाद हुआ है। सरकार को जेन जी विरोधी बताने वाले इस बात से सदमें में आ गए मात्र 21 घंटे में इंस्टाग्राम, फेसबुक और ट्विटर पर प्रधानमंत्री के वीडियो को 40 करोड़+ देख चुके हैं। अब कल्लो बात क्या करनी है। लेकिन सीरियस नोट पर एक बात कहनी ही पड़ेगी कि किसी भी देश की सरकार को शिक्षा और स्वास्थ्य पर कम से कम दस दस प्रतिशत बजट रखना ही चाहिए और हां पहली फ़ुर्सत में क्रमबद्ध तरीके से कोचिंग पर लगाम लगानी चाहिए। शिक्षा और स्वास्थ्य की जड़ में यही शूल बिछाए हुए हैं अब बारी सरकार की है कि समय रहते इसमें मट्ठा डाल दें।
प्रदीप भट्ट
लेखक, मेरठ (उत्तर प्रदेश)