'जेन जी Vs भेंन जी"
1993 में दूर के दर्शन पर एक ठो सीरियल आईल रहिन " ज़बान संभाल के" जो कि अँग्रेजी सीरियल "Mind your language" का हिन्दी रूपांतरण ही था,नहीं था फिर भी हमारे कहने से समझ लो।जिसमें मोहन भारती बने बढ़िया वाले एक्टरवा पंकज कपूर हिन्दी सिखाते सिखाते किन किन परेशानियों से दो चार होते हैं ये उस ज़माने के नौजवानों से पूछिए! जनाब 1993 से 1998 तक दो सीजन आए वो भी पूरम.पट्ट 106 किन्तु परन्तु लेकिन किसने कितनी जुबान सम्भाली ये भी उसी दौर के जनरेशन एक्स से पूछ लो लेकिन एक बात तो तय है कि उस ज़माने के लोग ऐसे फैमिली सीरियल देखकर दिल खोलकर हँस लिया करते थे वो भी परिवार के साथ इसी बहाने दस पाँच ग्राम खून भी बढ़ जाता था। आज के सीरियलों की तो पूछो मती इतना कुछ उघाड़ दिया है कि ढांपने को कुछ बचा ही नहीं। आज जब जेन जी, जेन अल्फा फलाना ढिंमकाना पता नहीं किन किन विशेषणों से एक अदना से आदमी को पुकारा जाता है तो वो भयंकर वाला कन्फ्यूज हो जाता है।उसे समझ ही नहीं आता कि बाप या बुआ ने तो हमारा नाम अटरू, मटरू, बिट्टू सिट्टू चमेली, फरजाना या अब्दुल रक्खा था फिर ये ससुरे कौन हैं और हमें किस नाम से पुकार रहे हैं। कुछ ये सोचकर खुश कि चलो बैठे बिठाए हमें अंग्रेज़ी नाम मिल गए कुछ ये सोचकर तैश में तने बैठे हैं कि अबकी बार किसी ने उन्हें जेन जी फेन जी बोला तो वो उसको भरी सर्दी में बर्फ की सिल्ली पर लिटाकर लता मंगेशकर का गाना गुनगुनायेंगे "यारा सिल्ली सिल्ली गायेंगे, बिरहा की रात का जलना" और जो इन लपड़ झंडीस की फ़िराद लेगा उसको उल्टा लटकाकर नीचे से मिर्च की धौंकनी देकर दूसरा गाना गायेंगे "आ देखें जरा किसमें कितना है दम"
यथा राजा तथा प्रजा
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20 जुलाई को जंतर-मंतर के प्रदर्शन के बाद इस सो कॉल्ड जेन जी ने जो तबाही मचाई उससे पूरा देश हक्का बक्का रह गया। "दिल्ली पुलिस आपके लिए सदैव आपके साथ" का नारा देने वाली दिल्ली पुलिस के जवानों के धैर्य की जितनी परीक्षा ली गई कम से कम मैंने अपने जीवन में इतनी पहले कभी नहीं देखी। 1966 का साधु-संतो पर हुए अत्याचारों की कहानी हो या टिकैत सीनियर और अभी हाल ही में टिकैत जूनियर द्वारा किसान आंदोलन के नाम पर जो अराजकता फैलाई गई और कुछ सो कॉल्ड किसानों ने जो नरभषी रूप धारण किया उससे साफ पता चला कि ये किसान के भेष में विदेशी फंडिड भेड़िये हैं जो सो कॉल्ड किसान आंदोलन जीवि लाल किले की प्राचीर तक अपना भौंडा प्रदर्शन करते नज़र आए और दिल्ली पुलिस मौन रहते हुए पिटती रही। इसके अतिरिक्त भी न जाने ऐसी कितनी ही कहानियां हैं जहाँ दिल्ली पुलिस के हाथ बाँध दिए गए जैसे देश की राजधानी की पुलिस इसीलिए बनी है। यहाँ यह विशेष है कि दिल्ली पुलिस में नब्बे प्रतिशत लोग हरियाणा पंजाब उत्तर प्रदेश से आते हैं जब कि यहाँ के लोग मूँछ की ख़ातिर राजे रजवाड़ों से भी भिड जाने के लिए जाने जाते हैं। अब ऐसा भी नहीं है कि दिल्ली पुलिस पहले से ऐसी है इतिहास उठाकर देख लो इनके कारनामें। रामलीला मैदान में बाबा रामदेव का प्रदर्शन याद है न, इधर इशारा हुआ उधर रात में ही दिल्ली पुलिस ने बाबा रामदेव को तिगनी का नाच नचा दिया था हालत यह हो गई थी कि बाबा को लेडीज कुर्ता पायजामा पहनकर रात के अंधेरे में छुपकर भागना पड़ा था लेकिन दिल्ली पुलिस तो दिल्ली पुलिस ठहरी बाबा को पहचान लिया और फिर ठूँस दिया जेल में। फिर अब क्या बात हो गई दिल्ली पुलिस इतनी निरीह नज़र आ रही है। तो भैय्या यथा राजा तथा प्रजा।
आओ स्कूल ठीक करें
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सभी को लगा कि तिलचट्टों को जो करना था कर लिया चलो जान छूटी लेकिन वो तिलचट्टे ही क्या जो लाल हिट 🎯 का स्वाद चखकर भी किचन में आना छोड़ दें सो ये फिर जहां जहाँ भाजपा की सरकारें हैं उन्हीं प्रदेशों के स्कूल में जाकर हाय तौबा मचाने लगे। एक दो बार की तो ठीक है लेकिन कुछ स्कूल के कर्णधारों ने बाक़ी कुछ गाँव वाले भी इनकी ऊल जलूल हरकतों से उकता गए थे सो जयपुर के एक गाँव में इनका बढ़िया वाला ठोक पीट कर गाँव के बाहर ही स्वागत कर डाला बस फिर क्या था जैसे ही वीडियो वॉयरल हुई इन तिलचट्टों की शामत आ गई ये स्कूल के बाहर ही लपेट लिए गए । कुछ बच्चों ने भी इनको ढंग से आरती उतार डाली। उसपे तुर्रा ये कि ये बीजेपी वाले राज्यों में ही चेकिंग चेकिंग खेल रहे थे तो ये जल्दी ही एक्सपोज़्ड ही गए। इन्होंने भी अपनी रणनीति बदली और अब ये सीधे बदतमीज़ी पर उतर गए वैसे भी तमीज़ की उम्मीद करनी तो इनसे बेईमानी ही है। झारखण्ड में स्टूडेंट चिल्लाते रहे लेकिन ये वहां न फटके फटकते तो कांग्रेस इनका भी बाबा रामदेव वाला इलाज़ करके ही छोड़ती सो इन्हें लगा कि स्कूल चेकिंग में तो पक्के वाला पिटने का डर है इसलिए अपने आक़ा केजरीवाल से इन्होंने निर्देश लिए और तुरंत गोल 🏣 पोस्ट चेंज करते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की फरमाइशी प्रोग्राम में शामिल हो गए। वैसे याद दिलाता चलूँ कि मैं "जंतर मंतर छूमंतर" में पहले ही सीजेपी की पैदाइश बता चुका हूँ और अब तो केजरीवाल खुदई कह चुके हैं कि सीजेपी हमारा ही बालक है। अब हुआ ये कि तिलचट्टे स्कूल ठीक करने चले थे लोगों ने इनका दिमाग़ ही ठीक कर दिया।
नई उमर की बर्बाद फसल "जेन जी और भेंन जी"
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दो कचौरी एक समोसा, मर्द जात का क्या भरोसा जैसे टुच्चे नारे लगाकर ये ज्ञानेश कुमार का इस्तीफ़ा लेने चले हैं। इधर ये एक नारा वॉयरल हुआ फिर तो घटिया पन से लबरेज़ नारों की बौछार सी आ गई। इसमें प्रधानमंत्री को टारगेट करते हुए ऐसे भद्दे नारे गढ़े गए जिनको मुझे लिखने में ही शर्म आ रही है। अब जब एक पक्ष बिलकुल ही नंगा हुआ जा रहा है तो दूसरी तरफ़ से सोशल मीडिया पर इसका जवाब दिया जाने लगा जैसे दो समोसा दो किलाे आटा, तेरा बाप भी इसमें आता। अज़ीब बात ये रही कि इन नारों पर लड़कियाँ ही ज्यादा फैलती हुई और भोंडा डांस करती नज़र आई। वामपंथ का यह नारा सीमा पर देश की सुरक्षा करने वालो पर भरोसा नहीं करता। सबसे बडी बात नारा लगाने वाली नारी को अपने बाप पर भरोसा नही है, पति पर भरोसा नही है भाई पर भरोसा नहीं है अपने बॉय फ्रेंड पर भरोसा नहीं है। फिर भरोसा किस पर है इसी के साथ दूसरी तरफ़ से इसके प्रतिवाद स्वरूप एक ठो और नारा "एक समोसा दो ठो आलू ये लडकी है बिलकुल चालू। क्या जेनजी की यही भाषा है, इससे भी बड़ा सवाल यह भी कि ये भाषा इन्हें कौन सिखा रहा है। आश्चर्य ये है कि भोंडी के भोंडे पन में क्या पुरुष क्या महिलाएं सोशल मीडिया पर रील बनाकर फेंक रही हैं किसलिए ताकि कुछ आमदनी हो सके। ये देखकर एक सवाल परेशान करने लगा भैय्या ये किसकी औलाद हैं और हैं तो हैं पर क्यूं हैं। जिन्हें देश तो छोड़ो न अपने माँ की चिंता न बाप की फिर भविष्य की तो क्या ही होगी। फिर नीरज दद्दा का लिखा गाना याद आ गया "कारवां गुजर गया गुबार देखते रहे" ।
डेलुलू सेलुलू यानि delushion में ही सोल्यूशन
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जहाँ रजिस्ट्रेश रहित तिलचट्टा पार्टी विदेशी मीरजाफरो के कंधे पर रखकर अपनी नकली बंदूकें चला रही है उससे कॉन्ग्रेस, सपा सब परेशान हैं कि मीडिया की सारी मलाई इन्हें मिल रही है और हमें छाछ भी नसीब नहीं हो रही है। सो आनन फानन में राहुल गाँधी ने दो दिन दिल्ली में उधम मचाने की कोशिश की जिसमें आकाशवाणी के अन्दर घुसना तक शामिल है। देश के प्रधानमंत्री को चौकीदार चोर है बताने वाले को आकाशवाणी के गेट पर तैनात एक चौकीदार ने दिन में ही आईना दिखा दिया कि महाराज बिना आज्ञा अंदर प्रवेश वर्जित है वो भी बड़े वाला। राहुल का चेहरा देखकर सबको समझ आ गया कि चौकीदार की ताकत क्या है सिवाय एक सौ चालीस साल पुरानी के बड़े बड़े दिग्गज़ को। 9,10 को राहुल ने असफल घुड़दौड़ को आयोजन किया फिर 11 को तिलचट्टों को प्रदर्शन के लिए छोड़ चेन्नई निकल गए। तिलचट्टों ने मुंबई से निकलते हुए 10 को कुछ ज़्यादा ही ज़बान खोल दी, मोदी डर गया, ट्रेन बंद 🚇 मेट्रो बंद करने पर प्रधानमंत्री को बल्ड प्रेशर नापने की सलाह दे डाली। ये देखकर एक बात तो समझ में आ गई कि इन्हें लाल 🎯 हिट की जबरदस्त जरूरत है सो अगले दिन दिल्ली पुलिस ने दीपके फ़ीफके, रांका पांका और दास को ज़्यादा उदास करते हुए हवाई जहाज़ में ही लाल 🎯 हिट छिड़क कर दबोच लिया उधर राठी को गुरूग्राम की लाठी देकर दिखाकर दिल्ली की लाठी पकड़ा दी। दिन भर चली चिल्ल पों के बाद दिल्ली पुलिस ने सबको अपने अपने दड़बों में घुसेड़ने में सफ़लता प्राप्त की।
हम तो डूबेंगे सनम तुमको भी ले डूबेंगे
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राजनीति में सदा से गला काट प्रतियोगिता रही है लेकिन प्रत्यक्ष इस बार दिखाई दे रही है। कॉन्ग्रेस आगे कभी तिलचट्टा सपा तो कहीं हैय्ये नहीं जहां तक केजरीवाल का संबंध है तिलचट्टे तो उन्हीं की पैदाइश है सो वो आराम से घर से ही बाइट देकर इतिश्री समझ ले रिए हैं। तिलचट्टों ने ज़बरदस्त प्रदर्शन किया तो राहुल को रात में चेन्नई में कॉन्ग्रेस चवन्नी बनती नज़र आई तो 11 को राष्ट्रपति से रोना रोया फिर राहुल को अपनी दादी का लोकसभा में दिया बयान याद आया कि सुप्रीम कोर्ट तय नहीं करेगा कि सरकार कैसे चलेगी वरन् सुप्रीम कोर्ट को सरकार की नीतियों का समर्थन करना चाहिए बस फिर क्या था 12 की सुबह सुबह ही हुड़दंग शुरू और बाराखंबा रोड़ से सीधे सुप्रीम कोर्ट मार्च। बीच में चेले चपाटों ने सीजेआइ से मिलने का समय माँग लिया। बताओ जी जो बंदा 420 के केस में जमानत पर है वो सीजेआई से मिलेगा। सीजेआई ने मिलने से साफ़ मना कर दिया और लिख भेजा भैय्या याचिका लगाओ वहीं मिलेंगे और लो जी अपने आपको सुपर डूपर समझने वाला बंदा अपने ही बने जाल में फंस गया। जब तक बात समझ में आई तक तक याचिका लग गई। लेकिन बंदे ने फ़ैसला कर लिया सुप्रीम कोर्ट जाना है तो जाना है सो याचिका लगी साढ़े चार और बंदा सुप्रीम कोर्ट पहुंचा साढ़े छः बजे, दस मिनिट सुप्रीम कोर्ट रूपी हॉल्ट पर गाड़ी रोकी फिर लौट के बुद्धु घर को चल दिया। पूछो भई सुप्रीम कोर्ट जाकर क्या ही उखाड़ा तुमने हां आज ये खबर अवश्य आई कि जो पेटिशन कॉन्ग्रेस ने लगाई है उसमें 14 ठो गलतियां मिली, भाई कुछ तो ठीक कर लो। इधर सपा के मुखिया दुखियाओं के साथ राहुल के जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट, थोबड़ा दिखाया और वापिस अपने दड़बों में। अब कोई इनसे पूछे कि तुम सबको मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफ़ा चाहिए और ये पता नहीं कि ज्ञानेश का इस्तीफ़ा कैसे होगा। इधर ये सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट खेलने में व्यस्त उधर मोटा भाई ने ऑर्डर निकाल दिया कि प्रोटेस्ट के लिए जंतर मंतर तत्काल प्रभाव से छूमंतर किया जाता है। अब जिसे 🪧 प्रोटेस्ट करना है तो बेटा बुराड़ी जाओ, कड़कड़डूमा मैदान जाओ या रामलीला मैदान। सच कै रिया हूँ ऐन्नू कैदे मास्टर स्ट्रोक। लो कल लो बात। राहुल नमाज़ बख्शवाने गए थे रोज़े गले लगाकर लौटे। इधर दीपके फिफ्के, रांका फांका और दास उदास बड़ी मुश्किल से थूक गले से नीचे उतारने की असफल कोशिश कर रहे हैं।
सत्यमेव जयते
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नॉर्थ ईस्ट के कॉन्ग्रेस सांसद और जवाहर लाल नेहरू के प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल को 11 छात्राओं के यौन शोषण का दोषी पाया गया है। जवाहर लाल नेहरू की इंटरनल इन्क्वारी टीम ने अंगोमचा बिमोल को दोषी पाया है। इस पर एफ आर आई भी हो चुकी है बीजेपी की महिला सांसद राष्ट्रपति से भी इस मुद्दे पर मिल रही हैं लेकिन मजाल है कॉन्ग्रेस के सो कॉल्ड अध्यक्ष और सो कॉल्ड युवा नेता ने इस घटना पर कुछ भी कहने की ज़हमत उठाई है। कॉन्ग्रेस में महिलाओं के साथ समय समय पर बदतमीज़ी होती रहती है लेकिन एक्शन वही ढाक के तीन पात। अब प्रश्न है कि ये कांग्रेस के सांसद है तो सपा, तिलचट्टा गैंग, आप के पाप क्यूँ चुप हैं। सबको बिना सबूत के ज्ञानेश कुमार का इस्तीफ़ा चाहिए लेकिन दोष सिद्धी के बाद भी अंगोमचा बिमोल से इस्तीफ़ा तो छोड़िये बल्कि कांग्रेस उन्हें सभी प्रकार की सहायता प्रदान करने का निर्णय ले रही है। अब सवाल है कि सोशल मीडिया पर उपलब्ध वीडियो के अनुसार राहुल ghandy गाँधी पर भी रेप का चार्ज है। केरलम कॉन्ग्रेस का ट्वीट कि " डियर सूर्यकांत यदि कानून व्यवस्था संभालना तुम्हारे बस का रोग नहीं है तो तुम इस्तीफ़ा दो हम किसी और को बिठायेंगे। इसी को कहते है दिमाग़ी नक्सल होना।
असल जेन जी बिट्टू तबाही और स्मित मच्छार
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जहाँ एक तरफ़ तिलचट्टे फ़िलचट्टे गैंग के offernder और लफ्फंडर क्या क्या और क्यूँ क्यूँ कर चूँ चूँ का मुरब्बा बने जा रहे हैं। समझ नहीं आता इन्होंने पढ़ने लिखने में अपनी अपना समय क्यूँ बर्बाद किया। इनसे अच्छे तो अनपढ़ ही ठीक हैं ख़ैर जो वास्तव में पढ़ना लिखना चाहते हैं वे अपने घर में छात्रावासों में अपने इम्तेहान की तैय्यारी करते हुए दिखाई दे रहे हैं और जाहिल बड़े बुजुर्गों को सड़कों पर गाली देकर अपना ज्ञान बाँट रहे हैं । लेकिन कुछ हैं जो समय और देश की तरक्की में अपना योगदान दे रहे हैं। एक ऐसी महिला जो महिला होमगार्ड परीक्षा में साड़ी में दौड़ लगाती है वहीं दूसरी महिला साड़ी में ही मैराथन दौड़ में दौड़ पड़ती है ताकि उसके बच्चे पढ़ लिख कर कुछ बन सकें। मध्य प्रदेश का एक जेन जी सुरेंद्र सिंह चौधरी जो गंदे तालाब को साफ़ करने का बीड़ा उठाता है और आखिरकार उसे स्वच्छ करके ही दम लेता है उसके इस क़दम से उस अकेले गांव को नहीं वरन आसपास के गांवों को भी पीने के लिए स्वच्छ पानी मिलता है। उसका नाम सुनकर लगेगा कि ये तो किसी गैंगस्टर का नाम है सुरेंद्र सिंह चौधरी उर्फ़ बिट्टू तबाही ने अजनार नदी के गंदे पानी में सात महीने तक स्वच्छता की ऐसी तबाही मचाई कि लोगों ने कहा वाह क्या बात है। इसी प्रकार गुजरात के नागर ब्राह्मण परिवार में पैदा हुए कैप्टन स्मित मच्छार जिन्होंने फ्लाई दुबई की फ्लाइट में 174 यात्रियों और 6 क्रू मेंबर्स की अपनी जान पर खेलकर जान बचाई जब सह पायलट ने आतंकवादी गतिविधि को अंजाम देने की कुचेष्टा की किन्तु कैप्टन स्मित ने बुरी तरह घायल होने के बाद भी कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया जिससे यात्रियों ने समय रहते बड़ी दुर्घटना से बचा लिया। आज इजराइल कैप्टन स्मित को सबसे बड़ा नागरिक सम्मान देने की घोषणा कर चुका है। उधर तिलचट्टे, आपिए, पापिए देश में अराजकता लाने की असफल कोशिश कर रहे हैं। लेकिन बात बात पे दिल्ली पुलिस और भारत सरकार को प्रवचन देने वाला सुप्रीम कोर्ट राहुल एंड कम्पनी के लिए 4.30 के बाद भी कैसे और क्यूँ खुला रहा। सुप्रीम कोर्ट की मंशा पर सवाल उठना लाज़िमी है ख़ैर भैय्या प्रोटेस्ट करो लेकिन जुबान सम्भाल के।
प्रदीप भट्ट
लेखक, मेरठ
13102026