आजकल देश की सबसे पुरानी ओं ओं पार्टी का हाल एक चुटकुले से समझा जा सकता है। धुंध में लिपटी दिल्ली की एक जरूरत से ज़्यादा सर्द रात में फैक्ट्री मैनेजर ने रात में सरदार जी को फोन किया और बताया कि सरदार जी फैक्ट्री में आग लग गई है जल्दी से जल्दी फैक्ट्री पहुंचो। सरदार जी ने ऊंघते हुए कहा "मैन्नू कि", मैनेजर ने हैरत से कहा महाराज आग आपकी अपनी फैक्ट्री में लगी है तब सरदार जी ने डपटते हुए कहा फिर "तेन्नू की"। बस कुछ ऐसा ही हाल एक बहुते पुरानी ओं ओं पार्टी ( नाम समझ तो रिये हो न) को छोड़कर जाते हुए उसके छोटे बड़े नेता गण और कुछ समझदार और मज़बूर पुराने चावल जैसे नेता जी। भई मजबूर इसलिए लिख रिया हूँ कि सत्तर अस्सी पार के नेताओं के पास उनसे दोगुनी पुरानी हो चुकी पार्टी में करने को कुछ होता नहीं और वो जो करना चाहें उन्हें कोई करने देता नहीं तो फिर एक ही चारा है कि वो अपनी बरबंटे जैसी अधमीची आँखो से उस ओं ओं पार्टी के उस सो कॉल्ड युवा नेता को समय समय पर बतातें रहें कि माहराज आपके प्रतापी पुरखों के प्रताप से और आपकी कारगुजारियों से कल ' श्याम ' गया था और आज ' छेनू 'चला गया है। इत्ता सुनने के बाद उस ओं ओं पार्टी के सो कॉल्ड युवा नेता ने महाराज अपने मुँह में बढ़िया वाले दो अंटे घुसेड़कर फिर अपनी पिनक में पिनपिनाते हुए कहा "मैन्नू की"। फिर अगर कोई ज़्यादा ही निष्ठा और समझदारी दिखाता हुआ लेकिन मन ही मन गलियाते हुए कोई नेता कहे माहराज ऐसे तो पार्टी बैठ जाएगी तो महाराज वो फिर से ज़बरदस्ती बरबंटे खोलें और फिर से एक अंटा मुँह में घुसेड़ते हुए कहें बहन के टके "तेन्नू की" चल चुपचाप बैठ जा। अब खुदई सोच लो राम झरोखे बैठ के भी देख लो इनका और इनकी ओं ओं पार्टी का क्या कुछ हो सकता है इस जनम में I वैसे बिगड़ने के नाम पे तो नित नए कीर्तिमान स्थापित हो ही रहे हैं। पर राम की लीला है सबसे न्यारी।
अब आप सोच रिये होंगे हर पुरानी चीज के साथ यही होता है तो इसमें नया क्या तो भईया बात तो तुम कतई सच सच सोच रिये हो पर महराज हम एक नई नवेली पार्टी का हाल बयां करने की सोच रिये हैं। बस नू समझ लो एक पुरानी पार्टी के नेताओं को छोटी छोटी सभाओं में बड्डी बड्डी गलियों से नवाज कर एक पार्टी एक पूर्व फ़ौजी के कंधों से चिपकी रही ताकि थोड़ी शोहरत वोहरत मिलती रहे इसके लिए टोटा सिंह कभी प्लास हाथ में लेकर खम्बे पर चढ़ते दिखाई दिए तो कभी हाथ में झाड़ू लेकर चमचमाती सड़क पर कचरा सेठ से कुछ कचरा उधार लेकर डालकर फिर कामवाली बाई को भी कॉम्प्लेक्स देते हुए कुछ ऐसे ऐसे पोज दिए कि देश की कामवाली तो छोड़ो भाई साहब बड़े बड़े मॉडल भी अपने अपने पेट पर लात लगती देखकर रोने लगे। उधर बेचारे पूर्व फ़ौजी टोटा सिंह के बेढंगे पन को देखकर राम राम करने लगे। इससे पहले कि पूर्व फ़ौजी कुछ प्रतिरोध करते टोटा सिंह ने तुरंत उनके कंधे से छलांग लगाई और अगला पाप करते हुए आप की बैसाखी पर जा चढ़े। सच कै रिया हूँ अपनी इज़्ज़त की छीछालेदर होते देख पूर्व फ़ौजी और भैय्या बढ़िया वाले सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना ने तुरत महाराष्ट्र स्थित गाँव पहुंचकर पुण्य की हाज़री लगाई। उधर अन्ना अपने गाँव में इधर टोटा सिंह सुबह सुबह चुनाव आयोग के दफ़्तर में। सफ़ाई वाले मुकद्दम मियां अपने टैम से आधा घंटा लेट यानि साढ़े आठ बजे चुनाव दफ़्तर पहुंचे वहां की साफ़ सफ़ाई देखकर उन्हें लगा कि लगता है रात की चढ़ी अभी उतरी नहीं है वरना इस बात के क्या मायने कि जिस दफ़्तर में वो पिछले बीस बरस से ऑफिस के अन्दर बाहर की सफ़ाई कर रहा है वो आज उसे एकदम चमचमाता हुआ नज़र आ रहा है। कहीं पिनक में वो बाजू वाले दफ़्तर में तो नहीं घुस गया। लेकिन तभी उसकी निगाह आफिस के बरामदे में बैठे दो तीन लोगों पर पड़ी जिनमें से एक बंदे ने करीने से मफ़लर लपेट रक्खा था और हाथ में बड्डी वाली फूलदार झाड़ू। मुकद्दम मियां को तुरत मामला समझ में आ गया कि उसके काम से नाखुश होकर स्टेट एंड सर्विसेज डिपार्टमेंट ने उसकी तनख्वाह में तीन बंदे रख लिए हैं। अभी मुकद्दम मियाँ कुछ सोचने समझने की कोशिश कर ही रहे थे तभी ऑफिस के बरामदे में कोने में बैठे खैनी रगड़ रहे एक बन्दे ने मुकद्दम को वहीं ठहरने का इशारा किया I
तभी अपने मफ़लर को सीधा करते हुए और खींसे निपोरते हुए टोटा सिंह मुकद्दम से बोले घबरा मत हम तो अपनी आप मुक्त पों पों पार्टी के रजिस्ट्रेशन के लिए आएं हैं वो भी चुनाव चिह्न के साथ। अब मुकद्दम मियां ने अपने कॉलर टाइट किए और 28 इंची सीने को मोदी के 56 इंची सीने की तरह फुलाने की असफल कोशिश करते हुए बोले, रजिस्ट्रेशन ? ये तो हम यूँ करा देंगे, तुमने इस फूलवाली झाड़ू से इत्ता अच्छा डेमो दिया है कि बड़े साहब खुश होकर तुम्हे यही चुनाव चिह्न अलॉट कर देंगे। टोटा सिंह ने 'अति विनियम धूर्तता नाम लक्षणम' की कहावत को चरितार्थ करते हुए वायदे का एक डेमो दे डाला, देखो मुकद्दम मियां अगर मेरी पों पों पार्टी सत्ता में आई तो मैं तुम्हें चुनाव आयोग का चीफ़ बना दूँगा। मुकद्दम एक दम से अर्श से फ़र्श के सपने देखने लगा फिर एक दम टोटा सिंह का हाथ पकड़ सीधे बड़े साहब साहब के कमरे में। साहब क्या जिसे देखो वो चमचमाते हुए फर्श को देखते हुए पूरा का पूरा ही गदगद हुआ जा रिया था।। अगले एक हफ़्ते तक पूरा ऑफिस एक दम चकाचक रहा, बड़े साहब ने खुश होकर आठवें दिन ही रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी कराई और फिर बैकग्राउंड में बजते गाजे बाजे के साथ बड़े साहब ने टोटा सिंह के गले में चुनाव चिह्न की माला पहना दी वो भी इस उम्मीद के साथ कि अगर पाप मिश्रित पों पों पार्टी सत्ता में आई तो दिल्ली की सड़के इसी तरह चमचमाएंगी। लेकिन होना तो वही ढाक के तीन पात था सो अगले दिन से मुकद्दम के मुक़द्दर में फिर वही आफिस फिर वही झाड़ू और वही चुनाव आयोग का दफ़्तर और बड़े साहब की डांट क्यूँ कि टोटा सिंह तो डेमोंस्ट्रेशन और फिर फोटो सेशन। इससे ज़्यादा की उम्मीद मति करो उनसे मियां।
आपने एक कहावत सुनी होगी बिल्ली के भाग से छींका टूटना तो बस पों पों पार्टी में जी जी करके आगे बढ़ने लगी पता ही नहीं चला और भाई साहब दिलपत की जनता त्राहिमाम त्राहिमाम करती हुई कराह रही थी सो और कोई विकल्प न होने पर टोटा सिंह की पों पों पार्टी की पो बारह हो गई और टोटा सिंह की पों पों पार्टी ने दिलपत पर कब्ज़ा कर लिया। राजनीति के सारे प्रकांड पण्डितो की भविष्वाणियां परत दर परत ऐसे उतरने लगी जैसे भरी बारिश में किसी सजी धजी महिला के चेहरे से मेकअप उतरता है। निश्चित सत्ता के नशे में चूर कुछ लोगों की सिट्टी पिट्टी गुम गई और ये सिलसिला अगले कुछ समय तक चला भी। दिलपत का डेमोंस्ट्रेशन दिखाकर टोटा सिंह ने और जगह भी हाथ पैर मारे लेकिन क़ामयाबी मिली सिर्फ़ उड़ता पंजाब में और वहां का चेला रमाणी बिना पवनहंस के इधर उधर उड़ता रहता है। एक दो नहीं सैकड़ों अत्याचारों की कहानियां भी बनी लेकिन साहब टोटा सिंह पर कुच्छो फ़र्क नहीं पड़ा। पड़ता भी क्यों अपना काम हो बनता तो भाड़ में जाए जनता और ये लो जी टोटा सिंह जो कभी बड्डी बड्डी बातें करके रंग जमाते थे वो खुदई अपने शीश महल में रंगबाज होने लगे। लेकिन साहब एक गाना है "शीशा हो दिल हो आख़िर टूट जाता है" और लो जी न जाने किस नासपीटे की नज़र लग गई टोटा सिंह शीशमहल से सीधे जेल महल। लगता है टोटा सिंह की कुण्डली में ढैय्या की जगह सीधे साढ़े साती उभर आई तभी तो टोटा सिंह बस यही गाना गाने लगे " आना जाना लगा रहेगा, सुख जाएगा दुःख आयेगा" और लीजिए महाराज दिलपत के चुनाव में टोटा सिंह की भयंकर वाली शिकस्त बाक़ी तो छोड़ो अपनी सीट की भी टांय टांय फिस्स। कुछ कर करा के जेल से बाहर आए तो उड़ते उड़ते, उड़ते पंजाब में डेरा जमा कर बैठे क्यों और किसके आदेश से ये तो राम जी जाने लेकिन भैय्या चेला रमाणी को तो परेशानी होनी थी सो चेला रमाणी परेशान परेशान होते हुए दो घूंट जिन्दगी के ज्यादा लेने लगेI। एक म्यान में दो तलवार कैसे समाएंगी वो भी एक उड़ते पंजाब में ऊपर और दूसरा सबसे बड़ा वाला सुपर।
ढैय्या हो साढ़े साती भाई साहब असर तो पक्के वाला ही आएगा सो उड़ते पंजाब के सहारे राज्य सभा में भेजे गए नौ में से सात ने सांसदों ने टोटा सिंह को टाटा बाय बाय बोल दिया। उधर उड़ते पंजाब का चेला रमाणी पिनक में कुछ ऐसा कर बैठा कि पूरी कैबिनेट ही उड़ते हुए माफ़ी मांगते हुए सीधे एस जी पी सी के चरणों में। सिर्फ़ सत्ता के गलियारों में ही नहीं बल्कि सोशल मीडिया में भी ये बात चल निकली कि चेला रमाणी के साथ किसने कॉमेडी कर दी। कुछ लोग इशारा टोटा सिंह की तरफ कर रहे हैं। उधर टोटा सिंह को लग रिया है कि जेल महल जाने से तो अच्छा है कि मैं वर्तमान चाणक्य की शरण में चला जाऊँ कम से कम बुढ़ापे में इज़्ज़त तो बची रहेगी। बस टोटा सिंह के भेजे में बत्ती जली और टोटा सिंह ने पहले तो वर्तमान चाणक्य के कमरे के बाहर से ही ढोक दी फिर लुटे पीटे आम आदमी की तरह चेहरा लटकाए और अपने आपको ज्यादा दीन हीन दिखाते हुए कमरे में जा घुसे और पहला वाक्य यही बोला कि जान की अमान पाऊं आली जहां तो मैं पों पों पार्टी के ऐसे ऐसे राज बताऊँगा जो किसी को नहीं पता यहां तक की मेरी अन्दर वाली भी नहीं और बाहर वाली को भी नहीं। चंचरीक मुस्कुराए फिर बोले टोटा सिंह पहले अपना नाम चेंज करो शक्ल और अक्ल एक जैसी दिखाओ। चलो ऐसा करो अपना नाम हमज़ा फली रख लो भले तुम्हारी शक्ल म्याऊं म्याऊं जैसी है पर कम से कम हम्ज़ा नाम का कुछ तो असर रहेगा नहीं तो आगे की बात चंचरिक ने हवा में तैरने के लिए छोड़ दी फिर बोले तुम मुझे इंटेल दो मैं तुम्हें शांति से जीने दूंगा। ठीक है आज से मेरा नाम हम्ज़ा हुआ मालिक। टोटा का ये त्वरित चेंज रूप देखकर चंचरीक ने जोर का ठहाका लगाया फिर बोले तुम तो गिरगिट के गुरु लगते हो हम्ज़ा।
हम्ज़ा सेठ ने तुरंत सर से थोड्डी से तक लपेटे हुए मफ़लर को ऐसे उतार फेंका जैसे उसने कभी सर्दी में उसको गर्म न रक्खा हो फिर चंचरिक की ओर दयनीय दृष्टि से देखते हुए बोला बच्चों की क़सम महाराज मैं अपनी इस पों पों पार्टी में खुदई इत्ते छेद करूंगा कि पार्टी भी विशेष से शेष और बाद में केवल अवशेष के रूप में ही नज़र आएगी। बस आप मुझे अपनी छत्र छाया में जगह दे दो वैसे महाराज। मैं फ़्री लांसर के रूप में आपको अपनी रिपोर्ट पहले भी देता रहा हूं वरना तो आप मुझे जेल महल से बाहर थोड़े ही आने देते। बुद्ध मुस्कुराए की तर्ज पर चंचरीक भी मुस्कुराए फिर बोले जेल में रहकर समझदार हो गए हो हम्ज़ा । चलो खिसको यहां से और पहली फुर्सत में उड़ता पंजाब पहुंचो। सुनो हम्ज़ा मेरी नज़र अब पंजाब पर है ओं ओं और पों पों को जो करना था कर लिया अब मुझे पंजाब जीतकर साहिब को गुरु दक्षिणा देनी है और उड़ते पंजाब को वास्तव में नशा मुक्त पंजाब बनाना है। थोड़े से फायदे के लिए तुमने नस्लों को बर्बाद कर दिया है। 'मान ' जाओ तो ठीक वरना मैं तुम्हारे और ओंगो पोगों की नस्लें बर्बाद कर दूंगा। हम्ज़ा को अपनी रीढ़ की हड्डी में खतरनाक वाली सिहरन महसूस सी हुई। हम्ज़ा उर्फ़ हम्ज़ा ही समझ लो यार तुरन्त बोरिया-बिस्तर लपेटकर हमज़ा अली मदारी के रोल में पंजाब पहुँच गया। और हफ़्ते भर के भीतर इंटेल शेयर की कि मैंने चेला रमाणी को सलाह दी है कि दारू वाले कांड पर जो छीछालेदर हो रही है उससे बचने के लिए गुरुग्राम की लैब से कॉन्टेक्ट करो और उस धतुरे के बीज ने दस लाख में सौदा पटा भी लिया है वो लैब वाला कुछ फ़र्जी फ़र्जी बनाएगा आप उसकी जर्सी जर्सी बना दो और लो जी हो गया दूसरा लंका काण्ड। आख़िर में एक कहावत तो बनती है न " घर का भेदी लंका ढाए"।
प्रदीप भट्ट
लेखक मेरठ
05072026