(यानि रजिया गुंडों में फंस गई)
रात के डेढ़ बजे के करीब मुबलिया घनघना उठा। हमने एक दूसरे से लिपटी अपनी टांगों को बेडवा से नीचे उतारा और साइड पर रक्खे स्टूल से मुबलिया पर मन ही मन बड़बड़ाते झपट पड़े कि ये कौन ससुर का नाती है जो इत्ती रात को हमारी नींद में खलल डालने की हिम्मत दिखा रहा है। जय राम जी करके पूछा आप कौन साहब हैं जो इत्ती रात को हमें घड़घड़ा दिए हो भाई उधर से सपाट स्वर उभरा "मी होर्मुज बोलतोय"। एक सेकेंड को तो हमारी डिबरी भी टाइट हो गई लगा कोई भूत है जो खाली टाइम में हमारी ख़ाली पीली फिरकी ले रहा है इसलिए हमने अपनी आवाज़ में चाटुकारिता की सभी प्रकार की मलाई लपेटते हुए हदों के अंदर रहते हुए मिमियाते हूं पूछा कौन होर्मुज जी। शायद होर्मुज को ऐसी उम्मीद नहीं थी इसलिए थोड़ा तल्खी लिए हुई आवाज़ आई बेटा हम ओमन और ईरान के मध्य मात्र 33 किलोमिटर लम्बे समुद्री गलियारे हैं फारस की खाड़ी से ओमन की खाड़ी को जोड़ते हैं। ये जो तुम अपनी स्कूटी चलाते हो न इसमें डलने वाला तेल हमारे गलियारे से होते हुए ही तुम तक पहुंचता है और हां सुनो बे ये गैस LNG वाली तुम्हारे पेट वाली नहीं बे,ये भी हमीं से होकर तुम तक आती है समझे या और समझाऊं। हम कुछ कहते कि फ़िर से आवाज़ आई जरथूष्ट्र धर्म जानते हो अहुरा मज़दा हमारे देवता हैं उन्हीं से हमने नाम झटक लिया है, बेटा दुनिया का 20 से 30 प्रतिशत और एक करोड़ बैरल प्रतिदिन तेल हमारी छाती को चीरकर तुम सब तक पहुंचता है। और हां आखिरी बात फ़ारसी में तंगेह ए होरमोज कहलाते हैं हम।
हमने अपने बरबंटो को अच्छी तरह खोलते हुए पूछा महाराज जे तो बताइए आप हमसे चाहते क्या हो। होर्मुज महाराज की हूं की आवाज़ आई फ़िर बोले देखो प्रदीप बाबू "भैंसों की लड़ाई में झुंडो का नुक़सान" हो रहा है पूरी दुनिया त्राहिमाम त्राहिमाम कर रही है। ये ट्रंप तो अमेरिका की पूरी इमेज़ के साथ बेइज्जती करवाकर ही मानेगा जहां तक इजरायल का सवाल है उसने अपना उल्लू सीधा कर लिया है। जहां तक प्रश्न ईरान का है तो इतने सारे नेताओं के मरने के बाद भी वो युद्ध युद्ध खेलने में मज़ा ले रहा है उसे अपने आवाम की चिंता बिलकुल भी नहीं है। अब ये सब कुछ गंवाकर होश में आयेगा तो क्या ही उखाड़ लेगा। लेकिन इन सब की गुंडई का खामियाजा मुझ अकेले को भुगतना पड़ रहा है। ट्रंप तो हुड़कचुल्लू है और नेतन्याहू शातिर लोमड़ी के दिमाग़ वाला और ईरान उसे आग की भयावता का अंदाजा है मगर वो अपनी बेवकूफाना हरकतों से आग को आग से बुझाने की कोशिश कर रहा है। मैंने मज़े लेने के लिए पूछ ही लिया और पाकिस्तान वो जो शान्ति शान्ति खेल रहा है उसके बारे में तो भाई साहब कुछ विशेष टिप्पणी तो कीजिए।होर्मुज झुंझलाहट से बोले "बुड्ढा मरे या जवान इसको हत्या से काम"। फ़िर एक गहरी स्वांस लेकर होर्मुज बोले हमने इसलिए फ़ोन किया कि तुम पहली फुर्सत में कल ही हमारे ऊपर एक व्यंग्य में हास्य का तड़का लगाते हुए एक आलेख लिख मारो नई तो बाक़ी का तो पता नहीं पर तुम्हारे पेट की गैस का इलाज़ हम परमानेंट कर देंगे। ये तो सीधे सीधे लॉरेंस विश्नोई की धमकी सी लगी सो सपना देख रही आँखें एक झटके में खुल गईं। हमने राम जी का नाम लिया और होर्मुज की चेतावनी को सीरियसली लेते हुए अगले दिन विस्तार से आलेख का खाका खींचना प्रारम्भ कर दिया। अब इत्ती प्यारी से धमकी के बाद नींद तो आने से रही न महाराज।
सो मसला यूं है कि इजरायल ने अमेरिका को पपीते के पेड़ पर चढ़ा दिया कि भैय्ये यो जो ईरानवा है न ससुरा 460 किलो यूरेनियम संवर्धन करके बैठा है क्या पता कब परमाणु परमाणु खेलने लगे इसीलिए अगर तुम्हें अपनी चौधराहट सलामत रखनी है तो पहली फुर्सत में इसको पेल दो नई तो भविष्य में ये तुम्हे रगड़ देगा। ट्रंप जो भयंकर वाले अन्प्रिडेक्टेबल हैं ने घूरकर नेतन्याहू को देखा फिर आधे गुस्से और आधी हंसी हंसते हुए कहा अबे अभी जुलाई में तो पेला था संसुरा ठंडा हुआ पड़ा है काहे मरे हुए को मरवाते हो बे। नेतन्याहू ने खींसे निपोरते हुए कहा तुम भी न बुढ़ापे में सठिया गए हो ट्रंप बाबू। देखो ऐसा है तुमने जो जुलाई में ईरान को पेला था वो तो टीजर मात्र था अच्छा एक बात बताओ तुमने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद कुल कितनी लड़ाई जीती है, वियतनाम, कोरिया ,इराक़, अफगानिस्तान अबे सारी की सारी लड़ाई तुमने हारी हैं लेकिन हार कर भी तुम जीतते हो सोचो भला क्यूँ , सोचो सोचो महाराज। देखो हर लड़ाई हारने के बाद अमेरिका का रक्षा उद्योग आगे पीछे की सारी कसर पूरी कर देता है। यानि तुम्हारा और दुश्मन देश का पुराना गोला बारूद मिसाइल सब ख़त्म फिर नया उत्पादन और भइया अमेरिका नया माल बनाकर बेचकर अगली पिछली सब कसर निकाल लेता है तो फिर से सोचो अर्जुन रूपी ट्रंप और ईरान का नाम ओ निशान मिटा दो। फिर मैं तो हूं न इधर से तुम इधर से मैं भाई साहब मिलकर ईरानवा का कचूमर बना डालेंगे। ट्रंप ने आखिरी प्रश्न दागा ठीक है है। हमला तो कर दूंगा लेकिन कोई कारण भी तो चाहिए। नेतन्याहू शातिराना मुस्कान बिखेरते बोले "ड्रिल बेबी ड्रिल" और बस ट्रंप ने कह दिया यलगार हो और लो जी 28 मार्च इतिहास में दर्ज हो गई।
बिना विचारे जो करे वो पाछे पछताए, सुना है न आपने अब उधर से अमेरिका और उधर इजरायल दे दना दन शुरू। सभी को लगा हफ़्ते भर की जंग में ईरान हांफते हुए अमेरिका और इजरायल के आगे लम लेट हो जाएगा लेकिन लेकिन लेकिन ईरान ने जब पेलना शुरू किया तो ईरान से 2300 किलोमीटर दूर इज़रायल को अपनी ग़लती का अहसास हुआ कि उसने ग़लत जगह पंगा ले लिया है लेकिन बाज़ी तो हाथ से निकल चुकी थी सो मरता क्या न करता उसने ईरान की नाजायज औलाद को उधेड़ना शुरू कर दिया यानि हिजबुल्लाह जिसने लेबनान पर कब्ज़ा किया हुआ है। अब हिजबुल्लाह की जान तो ईरानी तोते में है सो ज़ाहिर सी बात है ईरान सकपकाया भी सबकबाया भी और फिर से उसने दे दना दन शुरू और अमेरिका के इजरायल भी और ज्यादा गहरी चोट खाने लगा। जल्दी ही ईरान को समझ आ गया कि इज़रायल और अमेरिका से निपटना इतना आसान नहीं है सो उसने एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस के तहत बिना किसी चेतावनी के अमेरिका के सैनिक अड्डों पर जो कि बहरीन, ओमन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात इराक़ व सीरिया में दीपावली का धूम धड़ाका करना शुरू किया बस यही बात अमेरिका को खल गई कि मारना है तो इजरायल को मारो मेरे अड्डे पर बमबारी क्यूँ मैं तो छोटा सा नन्हा सा शैतानी बच्चा हूँ।
युद्ध में सब कुछ जायज़ है ये ईरान ने अमेरिका को अच्छी तरह से समझा दिया वैसे भी ईरानियन तो बीस बरसों से अमेरिका के ख़िलाफ़ जंग की तैयारी कर रहे थे उन्हें पता था कि अमेरिका लंपट बाज़ी जरूर करेगा सो उसने अमेरिका को वहां वहां ठोका जहां अमेरिका की नस दबी हुई थी । जिस गति से युद्ध लड़ा जा रहा था उससे ज्यादा तेज़ गति से ट्रंप भाई साहब की ज़बान। रोज़ रोज नए नए दावे ईरान ख़त्म और ही पल ईरान फिर अमेरिका पर तिरछी चोट कर देता। अब हालात ये कि इस युद्ध में इज़रायल एक तरह से गायब हो गया और ये युद्ध अमेरिका बनाम ईरान होकर रह गया। यानि "हींग लगी न फ़िटकरी और रंग आ गयो चोखा " जय हो नेतन्याहू बाबा की। ट्रंप बोलते रहे और ईरान ठोकता रहा। युद्ध की शुरुआत ईरान में रिज़ीम चेंज करने को लेकर थी बाद में सबको समझ आ गया ये तो तेल का खेल है। फ़िर तेल के चक्कर में अमेरिका का जब कुछ ज़्यादा ही तेल निकलने लगा तो ट्रंप महाराज आएं बाएं शाएं बोलते हुए कभी युद्ध जीत गए, कभी अमेरिका ने अपना टार्गेट अचीव कर लिया कभी होर्मुज से हमारा तेल नहीं आता है जिसका आता है वो देश खुलवा ले। मतलब कुछ भी यूरोप को भद्दी भद्दी गालियां और अंत में आख़िरी पासा पहले ईरान होर्मुज खोले तब समझौता होगा, फिर एक तरफ़ा युद्ध विराम लेकिन धमकी निरन्तर। आख़िर ये चल क्या रहा है होर्मुज बाबू।
सबसे अजीब स्थिति तो पाकिस्तान ने पैदा कर दी है होर्मुज होर्मुज खेलते ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध विराम की बिसात नम्बर एक आतंकवादी देश पाकिस्तान करवा रहा है। पाकिस्तान को भी पता है अमेरिका उसे बलि का बकरा बना रहा है लेकिन उसकी मज़बूरी है भाई उसका कशकोल खाली है देश कैसे चलाए या ख़ुद का खर्चा कैसे निकाले सो उसे लग रहा है इसी बहाने अमेरिका कुछ डॉलर उसके काशकोल में डाल दे तो कुछ बात बने। लेकिन लेकिन लेकिन होर्मुज बेचारा क्या करे। अच्छा खासे 100 जहाज़ रोज़ उसे सलाम करके निकल रहे थे लेकिन अब सलाम तो छोड़ो कलाम भी न हो रहा ऊपर से उसकी छाती पर कभी गोला गिर रहा है कभी नन्नक वाली मिसाइल। इस चक्कर में कभी इसका जहाज़ कभी उसका जहाज़ उसके पेट में अलग से समाए जा रहा है। इस युद्ध के चक्कर में अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप की रेटिंग शेयर मार्किट की तरह नीचे गोते लगा रही है। सुना है परसों ट्रंप पर किसी ने हमला कर दिया है। भई जे कैसा चाचा चौधरी है जो अपनी रक्षा न कर पा रहा और दूसरों को बता रहा है रिज़ीम चेंज करो और लोकतंत्र बचाओ। भाई साहब इस बिचारे लोकतन्त्र की हालात भी इस होर्मुज की ही तरह हो गई है। कहीं एक दिन लोकतन्त्र भी न कहे "मी लोकतन्त्र बोलतोय"।
प्रदीप भट्ट
व्यंग्यकार, मेरठ