रिपोर्ताज
"तीन का तेरह होना"
एक लम्बेबेबेबे वक्त के बाद (हंसो😜😜😜 मति महाराज) कथा रंग कार्यक्रम के होने की शुभ सूचना प्राप्त हुई कि कार्यक्रम फलाने दिन ढिकाने स्थान पर और मस्ताने समय यानि चिलचिलाती धूप का आनन्द लेते हुए अपराह्न 2.30 बजे होनी निश्चित हुई है साथ में गुज़ारिश🙏🏾🙏🏾🙏🏾 कि भैय्या समय से यानि मस्ताने समय तक 2.30 तक ज़रूर पहुंच जाइयो। लोगों ने समझा अंक्खे मियां साहब हमें समय से आने कू कै रिये हैं फिर मन ही मन कहा होगा भैय्यू जब हम अपनी ख़ुद की शादी में टैम पे ना पहुँचे ये तो फिर भी कहानियों पर आधारित कहन है हम ऊ टाइप के लोग हैं जो यमराज👹👹👹👹 को भी अपनी फ़ालतू की कविता या कहानी सुनाकर इत्ता भरमा देते हैं कि वो गफलत में अजय मिश्रा जी के पापा की जगह अजय शुक्ला जी के पापा को ढोकर ऊपर ले जाता है वो तो भला हो पढ़े लिखे चित्रगुप्त जी का जो AI का सटीक इस्तेमाल कर ग़लत बंदे की हाज़िरी लगाने से बच जाते हैं और अजय शुक्ला जी के पापा को वापिस धरती पर धड़ाम से टपका🫥🫥🫥 देते हैं। तो ऐसे लोगों से कमस्कम टैम पे आने की उम्मीद कतई न करें आलोक जी। वैसे भी प्रदीप भट्ट है ने टैम से पहले प्रकट होने के 🤥 लिए।
तो भैय्या 12 जुलाई को 10 बजे स्कूटी से निकले ही थे कि क्या देखते हैं जी कि गेट पर एक नेवला वही जिसे अंग्रेजी में मैंगोस कहते हैं,सर्प राज 🥨 को लपेटने की कोशिश कर रहा था क़रीब पचार मीटर दूर हमने हल्के वाला जोर से ब्रेक 💔 ठोक दिया। नेवले का ध्यान भंग हुआ और वो हमें प्रणाम करके राइट साइड की झाड़ियों में सरक लिया। हमें आश्चर्य हुआ फिर सोचा शायद पिछले जन्म में ये हमारा कुछ तो रहा होगा जो ..... अज्जी छोड़ो भी रिश्ते का कयास क्या लगाना खां म खां में घर में झगड़ा टंटा हो जाएगा। लेकिन वो नाग नाथ साहब हमारे कारण बची जान का धन्यवाद ज्ञापन दिये बिना लेफ्ट साईड को सरकते सरकते फिर राइट साइड में मुड़ लिए। हमें समझ आ गया भाई इनका तो टैम आज आ ही गया है। ख़ैर एक काम निबटाया और एक बजे की रैपिड पकड़ी ( भगवान भला करे बीजेपी का, बाक़ी का तो पता नई पर भाई साहब हम जैसे कवियों लेखकों के दिन इस रैपिड ने ज़रूर बदल दिए हैं, वरना तो.... अज्जी छडीओ भी) और 13.40 पर साहिबाबाद वहां से रैपिडो और लो जी ठीक दूई बजे kingsfok बैंक्वेट हॉल, रियल स्क्वायर मॉल में एंट्री। इधर उधर ढूँढते हुए रिसेप्शन पर जा पहुंचे। वहाँ एक और सज्जन हमसे पहले ही पहुंच गए थे। "हमसे भी पहले" हमें जोर का झटका कुछ ज़्यादा ही जोर से लगा लोग हमसे भी ज़्यादा कितने निपट और फालतू लोग हैं न मियाँ। ख़ैर वो बिचारी बारीक़ सी रिसेपनिस्ट उन्हें बता रही थी सर आज यहाँ कोई कार्यक्रम नहीं है कुछ दिनों पहले कहीं किसी का क्रिया कर्म हुआ था उनकी तेहरवीं🤠🤠🤠 कल थी पर आज तो कुछ नहीं है। सच कै रिया हूँ हंसी तो आई लेकिन उस पर काबू पाते हुए हमने अपनी जिह्वा का सही इस्तेमाल करते हुए उसे थोड़ा सा रिलेक्स करते हुए कहा बच्चा ज़रा ठहरो और अपने मैनेजर से पूछ लो। आश्चर्य उसने तुरत मोबाइल खटखटा दिया फिर अगले ही पल माफ़ी मांगते हुए पांचवीं मंज़िल पर जाने का इशारा कर दिया। अच्छा हुआ हमने उसे थोड़ा रिलेक्स कर दिया वगरना......😡।
सो हुआ यूँ कि इन सब झंझावतों में डूबते उतराते हम ऊपर जा पहुँचे और हर बार की तरह आलोक जी ने प्रेम से स्वागत किया। हॉल की क्षमता बा मुश्किल 30,40 होगी हमने अंदाज़ा लगाया शायद इत्ते लोग भी ना आएँगे। धीरे धीरे लोग आने लगे और अंततोगत्वा कार्यक्रम 3.20 पर शुरु हुआ। सुश्री ममता कालिया, श्री विभूति नारायण राय, डॉक्टर अशोक मैत्रेय, कमलेश भट्ट राहुल शिवाय ने अपना स्थान लिया और कार्यक्रम विधिवत शुरू हुआ। से. रा. यात्री जयंती को समर्पित 'कथा संवाद' के पहले सत्र में 'से. रा. यात्री: व्यक्तित्व और कृतित्व' को संबोधित करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार ममता कालिया ने कहा कि यात्री जी की संवेदनशीलता उनके लेखन के साथ उनके निजी जीवन और व्यवहार में भी साफ नजर आती है। उन्होंने कहा कि यात्री जी का जीवन जिन झंझावातों से भरा रहा, उनके पात्र भी उससे जूझते दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा कि यात्री जी में अपने नाम सेवा के अनुरूप सेवा भाव कूट कूट कर भरा था। प्राणियों से लेकर तमाम जीवों से उनका प्रेम जग जाहिर है। उन्होंने सेवा राम गुप्ता के से. रा. यात्री होने का प्रसंग भी रोचकता से सुनाया। इसी क्रम में वरिष्ठ साहित्यकार विभूति नारायण राय ने कहा कि यात्री जी का लेखक उनकी निर्भीक लेखन यात्रा का प्रमाण है। श्री राय ने चार दशक पुराने रिश्ते को याद करते हुए श्री यात्री से जुड़े कई मार्मिक संस्मरण साझा किए। वर्तमान साहित्य के संपादन से शुरू हुई मैत्री की इस यात्रा के कई पड़ाव रहे। श्री राय ने यात्री जी के अंतिम दौर को याद करते हुए कहा कि अंत समय तक यात्री जी चैतन्य रहे🌹🌹🌹। उनकी सबसे बड़ी यंत्रणा स्मरण शक्ति थी, जो अंत तक पहले ही जैसी सतर्क थी। किसी स्थान, व्यक्ति या घटना की विस्मृति उन्हें व्याकुल करती थी। उन्होंने अपने पास एक डायरी और कलम रख ली थी और जिद कर भूले नाम व चेहरे याद करने की कोशिश करते थे। कभी देर रात परिवार के किसी बच्चे का फोन आता कि वह किसी नाम को भूल गए हैं और अस्पष्ट से संदर्भ देकर मुझसे मालूम करने, मुझसे मालूम करने को कह रहे हैं।
वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अशोक मैत्रेय जी ने यात्री जी के साथ छह दशक से अधिक लंबे संग-साथ का अनुभव साझा करते हुए कहा कि अपने लेखन में यात्री जी ने सामान्य मनुष्य के जीवन संघर्ष, संवेदना और बदलते सामाजिक यथार्थ को अत्यंत प्रामाणिकता के साथ अभिव्यक्त किया है।साहित्यकार कमलेश भट्ट 'कमल', अशोक मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार नवोदित, रंगकर्मी अक्षयवर नाथ श्रीवास्तव व अनिल शर्मा व उनके सुपुत्र आलोक यात्री ने भी यात्री जी के साथ अपने अनुभव साझा किए। इस अवसर पर डॉ. बीना शर्मा ने से. रा. यात्री की चर्चित कहानी 'आकाशचारी' का स्मरण शक्ति के आधार पर वाचन कर सभी को विस्मृत कर दिया। इसके बाद कमलेश्वर भट्ट 'कमल' की पुस्तक 'किताबों की जगमग दुनिया' के लोकार्पण पर प्रकाशक राहुल शिवाय (मर्मज्ञ) 🤓🤓🤓ने पुस्तक का मर्म श्रोताओं से साझा किया। अपने पल्ले तो कुछ पड़ा नी किताब पढ़ेंगे तो हम भी जगमग हो जायेंगे।
'कथा रंग' द्वारा विविध वर्षों में आयोजित कथा रंग कहानी प्रतियोगिता के पुरस्कार राशि से वंचित विजेताओं वंदना बाजपेई, सिनीवाली व रिंकल शर्मा को पुरस्कार राशि सौंपी गई। प्रथम सत्र के अंत में 'कथा रंग' के संयोजक आलोक यात्री व निर्णायक मंडल के सदस्य कमलेश भट्ट 'कमल' ने वर्ष 2024-25 में आयोजित कथा रंग कहानी प्रतियोगिता के परिणाम भी घोषित किए। कुल 16 कहानियां चयनित एवम् पुरस्कृत हुई जिनमें से 13 महिलाओं की और मात्र 3 पुरुषों की कहानियां स्थान पा सकीं। इसी लिए इस रिपोर्ताज का शीर्षक "तीन का तेरह होना"तो बनता है बॉस😊😊😊। समझे के नाही। इस अवसर पर कथा रंग के सहयोगी 'अद्विक प्रकाशन' के स्वामी अशोक गुप्ता ने कथा रंग की पुरस्कृत रचनाकारों को पुस्ताकार देने का भी प्रस्ताव दिया। जिसे करतल ध्वनि से स्वीकृत किया गया। अब भैय्या जिनको 16 कहानियों की जानकारी चाहिए कृपया वे टैक्स्ट के साथ चिपकी हुई इमेज़ निहार लें फुल टू जानकारी मिल जावेगी।😁😁😁😁
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में रेनू अंशुल, डॉ. अजय गोयल, रश्मि वर्मा और शिवराज सिंह की कहानी पर गंभीर विमर्श हुआ। अति विशिष्ट अतिथि डॉ. निधि अग्रवाल कुछ ज़्यादा ही देर से उपस्थित हुई😎😎😎 आखिर अति विशिष्ट अतिथि जो ठहरी माहराज टशन है अपना अपना😻😻😻,ने कहा कि कथा संवाद जैसे कि कार्यक्रम रचनाकारों को संवारने, मांजने और गढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज देश के कई नगरों में स्टोरी राइटिंग के नाम पर पेड वर्कशॉप आयोजित की जा रही हैं। जिनका मकसद लेखन को समृद्ध करने के बजाए धन अर्जित करना है। ऐसी वर्कशॉप में आने वाले तथाकथित विशेषज्ञ भारी भरकम फीस वसूल कर अधकचरा झान परोसते हैं। जबकि कथा रंग का यह मंच एक दशक से यही काम उदारता से, निशुल्क रूप में कर रहा है। उन्होंने कहा कि कथा संवाद की इस एक दशक की यात्रा ने देश को कई नए कथाकार दिए। देर से आईं और बात लेकिन बात तो निधि जी आपने ठीक ही कही है। कथा संवाद में सुनी गई कहानियों पर सुभाष चंदर, सुरेंद्र सिंघल, बख्तावर हनीफ, सिनीवाली, सुभाष अखिल, विनय विक्रम सिंह, वागीश शर्मा और भैय्या हमने भी विचार प्रकट किए जिसमें डॉक्टर अजय गोयल जी कहानी भी थी। डॉक्टर साहब नाराज़ तो नहीं हो न।
अंत में भाई साहब शिमला प्रवास के रिपोर्ताज को पढ़कर एक सज्जन तड़के तड़के हमारा मुबलिया घनघना दिए, हम उठाए तो बोले आपने अपने रिपोर्ताज में हमारा नाम क्यूँ नहीं लिखा हमने आँखें और ज़्यादा चौड़ी करते हुए उन्हें बताया माहराज हमने तो शुरुआत ही आपसे ही की है तो बोले एक नाम के दो लोग नहीं हो सकते क्या😂😂😂 सच कहें डर के मारे हमारी चौड़ी हुई आँखें एक ही डपट में चाइनीज़ आकार की हो गईं 😝😝😝😝 अब वो रुकने वाले तो थे नहीं सो आगे बोले जिसका नाम आप टॉप पर टेप दिए हो वो शर्मा है और हम नेगी हैं💪🏼💪🏼💪🏼। सो भैय्या इस बार कोई ग़लती नी करनी🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾। कार्यक्रम का संचालन आलोक यात्री और रिंकल शर्मा ने संयुक्त रूप से किया। और जे जे लोग भी भरपेट राशन लपेटे हैं म्हारे अतिरिक्त आलोक यादव, वी. के. शेखर, पत्रकार रवि पाराशर, अतुल सिन्हा, राधा रमण, अविनाश शर्मा,
शकील अहमद, डॉ. रत्नापन्निकर, अनिल मीत, डॉ. वीना मित्तल, सरवर हसन, प्रताप सिंह, आलोक शुक्ला, डॉ. सुधीर त्यागी, डॉ. ईश्वर सिंह तेवतिया, अनिमेष शर्मा 'आतिश', राकेश सेठ, तुलिका सेठ, प्रवीण शंकर त्रिपाठी, डॉ. संजय शर्मा, सावित्री शर्मा, डॉ. माला शर्मा, तेजवीर सिंह, पं. सत्य नारायण शर्मा, संजय श्रीवास्तव, के. के. जायसवाल, पवन गहलौत, पूनम जोशी, अभिलाषा विनय, पराग कौशिक, टेकचंद, डॉ. शकीला बानो, रमेश खुराना, अभिषेक कौशिक, आबेद खान, राजीव शर्मा, प्रभात चौधरी, आशु गोस्वामी, तिलक राज अरोड़ा, कविता अरोड़ा, डॉ. आर. के. सिंह, सारिका शर्मा, छाया, जैनेन्द्र कुमार जैन, मनीषा गुप्ता, विनोद कुमार तोमर, ऊषा जैन, विजय लक्ष्मी, पुनीता सिंह, स्नेहलता पांडे, जोया खान व अनन्य शर्मा सहित बड़ी संख्या में लेखक, कवि, रंगकर्मी और पत्रकार उपस्थित थे।
विशेष: 30,40 का स्थान और इत्ते सारे लोग आ गए कि भाई साहब अटेंडेंट एक्स्ट्रा कुर्सी लगाता लगाता थक गया। लेकिन साहित्य की दृष्टि से ये शुभ संकेत है कि लोग सिर्फ मोबाइल में ही नहीं उलझे हुए हैं वरन समय व पैसा खर्च करके पांच घंटे तक साहित्य की सरिता में गोते लगाने का लोभ संवरण नहीं कर पाते। कथा रंग जिंदाबाद तो बनता है न बॉस🙌🙌🙌🙌। सबसे अच्छा पल जब 2024-25 के लिए मेरी कहानी "मिट्टी की महक" भी से. रा. यात्री सम्मान के लिए घोषित हुई।
अरे कोई बधाई तो दे दो रे। आगे क्या लिखूँ अरे लौट के "राइटर" घर को आए 🤠🤠🤠 आप क्या समझ रिये थे ' बुद्धु ' अरे जाने भी दो यारों 🧔♀️
प्रदीप डीएस भट्ट
15072026