"ये सरकार गिरती क्यूँ नहीं है "
आपने टीवी पर बांगर सीमेंट का एक एड देखा होगा जिसमें बोमन ईरानी कहते हैं "ये दीवार टूटती क्यूँ नहीं" तभी पार्श्व में एक आवाज़ गूंजती है "ये दीवार बांगर सीमेंट से बनी है टूटेगी कैसे" आजकल अपने देश के हालत भी कुछ कुछ ऐसे ही हैं। सभी विपच्छी (विपक्षी) पार्टियों के नेताओं के पता नहीं कहां कहां सूजन आई पड़ी है। हर दिन हर दो घंटे में कोई न कोई लपड़ियाया सा नेता घंटा बजाकर घोषणा करता है बस कल सरकार चली जाएगी या अमुक दिन तक मोदी खुदई इस्तीफ दे देंगे अब इन घुडचंदों को कौन बताए कि मोदी और इस्तीफ़ा अजी किस जमाने के आदमी तुम हो। बेटा मोदी का बस चले तो वो तुम्हारा इस्तीफ़ा तुम्हारी घरवाली से लिखवा ले और भाई साहब वो घरवाली भी चांदी जैसे दांत चमकाती हुई जय मोदी जय मोदी करते हुए इस्तीफ़ा सोने की तश्तरी में सजाकर प्रधान सेवक के चरणों में समर्पित कर देगी यानि "तुम्हारी बिल्ली तुम्हें ही म्याऊं" और ये चले हैं जी इस्तीफ़ा इस्तीफ़ा खेलने। मियां कभी चाय पे भी चर्चा किया करो सच्ची सच्ची कै रिया हूं कुछ न कुछ तो हो ही जाएगा।
जब 2014 में बीजेपी सत्ता में आई तो विपच्छी पार्टियों को लगा कि बिल्ली के भाग से छींका टूट गया है कोई बात नही 2019 में हम इन्हें ऐसी पटकनी देंगे कि इनके सारे अंजर पंजर ढीले पड़ जाएंगे। लेकिन लेकिन लेकिन जनाब बीजेपी चाणक्य की फॉलोवर वाली पार्टी है और वो भी बड़े वाली आठ कदम पीछे रखती है फिर एकदम से एक सौ आठ कदम आगे, अब कर लो क्या करोगे। 2019 में पूरे जोर से झांसी वाली रानी की तरह लड़ी और लो जी 302 सीटें लेकर विपक्ष की कमरिया ही तोड़ ली। सरसों के झांज वाले तेल में जबरन पकाए गए नारे "चौकीदार चोर है" के नारे की सर्वोच्च न्यायालय ने ऐसी अम्मा बुआ की कि बाबा को माफ़ी मांग कर ही पिंड छुटा। धारा 302 तो पहले से ही फेमस है अब बीजेपी की 302 सीटों ने ऐसा कहर ढाया कि जिधर देखो उधर खलबली खलबली की वोटिंग की जगह वेटिंग मशीन लग गई। अब इसी बौड़मगिरि में विपच्छी पार्टियों के नेताओं ने अपनी बौड़मगिरि का मुज़ाहरा हर जगह पेश करना शुरू कर दिया और तो और जिसने कभी वोटिंग मशीन का बटन तक भी नहीं देखा था वो भी बहुत बड़े ज्ञानी बाबा की तरह हर चैनल पर फुदक फुदक कर ज्ञान बघारने लग गया I लेकिन नतीजा तो वही ढाक के तीन पात होना था और हुआ भी। अब कीट पतंगों की तरह विपच्छी दल भी तिलमिलाए तिलमिलाए से इधर से उधर और उधर से इधर अपना दुखड़ा सुनाते फिर रहे हैं लेकिन वे जिसे भी सुनाने जाएं उसके पास उसका ख़ुद का पर्सनल सा कुछ ज्यादा ही बड़ा दुखड़ा तैयार है अब सब अपनी सुनाना चाहते पर दूसरे की सुनने को कोई राज़ी ही नहीं। अब बेचारा करे तो क्या करे सिवाए अगले पांच बरस तक ठलुआ बैठकर इंतजार करने के।
जो पत्रकार नेता का चोला पहनकर फोन पर ही कैबिनेट तक बना देते थे अब उनके फोन में इत्ता भी बैलेंस नही कि वो मिस कॉल भी मार सकें। यानि "ग़रीबी में आटा गीला" वाली नौबत आ गई है भाई साहब! एक बहुत पुरानी कहावत है "पहली जीत मंगाए भीख" अब ऐसे महारथियों की आत्मा दिन में तीन बार भविष्य वाणी करने को उछाले मारती है वो भविष्यवाणी कर भी देते हैं लेकिन ससुरी पूरी एक भी नी हो री। ऐसी आत्माओं में एक नाम है पुण्य प्रसून बाजपेई! भाई साहब एक ठो घटना याद आ गई जब श्रद्धेय अटल जी प्रधानमंत्री बने तो प्रेस कॉन्फ्रेंस में हर चैनल का पत्रकार उनसे सवाल कर रहा था और अटल जी अपने अंदाज़ ए बयां से सबको सन्तुष्ट भी कर रहे थे कि पुण्य प्रसून खड़े हुए और जैसे ही उन्होंने अपना नाम बोला मैं पुण्य प्रसून बाजपेई फलाना से तुरन्त अटल जी ने कहा यहां एक ही बाजपेई काफ़ी है। अब तनिक सोच के देखो कित्ता बड़ा दाग़ लगा था उस दिन बेजत्ती में। तो हुज़ूर आजकल ये सरकार गिरवाने वाले नजूमियों की लिस्ट में प्रथम पायदान पर कब्ज़ा जमाए बैठे हैं।
ये अकेले ना हैं जिन्हें सरकार गिरवाने का शौक़ हो सुधीर, आकाश, रविश कुमार, अभिसार, अजित अंजुम और हां बरखा रानी भी तो हैं ये वहीं है जिसे जनता ने कोरोना काल में लाशों पर रखने वाली लड़कियों को गिनकर पत्रकारिता का धर्म निभाते देखा था वो भी टीवी पर किसी को उस चैनल का नाम याद हो तो उसकी स्मृति को नमन वो भी दूर से। जब से बीजेपी सत्ता में आई है और मोदी प्रधानमंत्री बने हैं इनके सपनों को पंख तो क्या लगते उल्टे ये पँख विहीन हुए घूम रहे हैं । ये सारे के सारे भविष्यवक्ता बने बैठे हैं ये और बात की इनकी एक्को भविष्यवाणी सीधी न पड़ रही है उल्टे मोदी के प्रकोप से इन सगरों की आत्मा अंधेरी काल कोठरी में चमगादड़ की मानिंद उल्टी लटकी हुई है। अरे हां एक ठो नाम तो छुट ही गया वो लखनऊ वाले 4 पीएम वाले संजय शर्मा, अगर किसी को मोदी सरकार गिरवानी हो तो बेहद सस्ते दामों पर ये और पुण्य दोनों विशेषज्ञ सरकार गिरवा देते है। सुबह, दोपहर और शाम कभी भी सरकार गिरवा सकते है। रात में गिराने के स्पेशलिस्ट है। सरकार गिराने के लिए बहुत उम्दा थीम देते है, क़यामत की रात, क़ातिल रात। कभी कभी तो लगता है पहले रामसे ब्रदर्स की हॉरर फ़िल्में लिखते थे। रामसे ब्रदर्स से ध्यान आया जब भी उनकी हॉरर फिल्म में कोई बेहद डरावन सीन आने को होता था तो तुरंत उस डर को कम करने के लिए एक मसखरा हाज़िर हो जाता था। बस कुछ ऐसा ही हाल है इन लपड़ियाओ का।
वैसे ये इत्ते काबिल वाले पत्रकार हैं कि अगर किसी पार्टी के पास मुख्यमंत्री का चेहरा न हो तो ये बढ़िया वाली पत्तल चाटकर आपको दूसरे दल से मुख्यमंत्री एक्सपोर्ट भी करा देते हैं लेकिन बात अगर प्रधानमंत्री बनवाने की हो तो इनके पास एक अदद प्रधानमंत्री भी है।आप चाहें या न चाहें लेकिन ये महाशय हर पार्टी को कन्विंस करते हैं कि पार्टी आपकी हुई तो क्या हुआ प्रधानमंत्री तो ये बंदा ही बनेगा अब इस चक्कर में इंडी गठबंधन मिन्डी ठगबंधन हुआ जा रहा है। अब इन घपड़चौथ को कौन समझाए कि भारत में गांव के प्रधान का भी एक ही सपना होता है कि कुछ जुगाड़ लगे तो वो भी प्रधानमंत्री बन जाए भले ही दो दिन के लिए और केजरू महाराज तो प्रधानमंत्री पद की हवस में पंजाब तोड़कर उसका प्रधानमंत्री बनने तक का ख़्वाब पाले बैठा था।
भाजपाई कहते हैं कि पीएम मोदी अठारह अठारह घंटे काम करते है। विपक्षी इसे तंज में देखते है लेकिन इसके पीछे का असली सच है कि पीएम मोदी पिछले ग्यारह सालों से रात को सो नहीं पाते है क्योंकि उन्हें भय है कि पुण्य प्रसून और संजय शर्मा और इन जैसे जाने कितने लपड़ झंडीस जाने कब उनकी सरकार गिरवा दें। इसी डरावनी संभावना को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने अपने आप को चौकीदार कहकर संबोधित किया था। डर सबको लगता है जनाब पर ये डर ससुरा मोदी का कुच्छो न बिगाड़ पा रिया है। अब जिससे भय भी भयभीत हो उसी को तो मोदी कहा गया है। यकीं न आए तो कोशिश करके देख लो मियां। अगर शरीर के अंग प्रत्यंग से ढाई ढाई सौ ग्राम धुंआ न निकले तो हमसे कहना।
अब तो हालत ये हो गई है कि चंद्र बाबू नायडू और नीतीश बाबू खुदई मोदी जी को फोन करके पूछते हैं जनाब पुण्य के पुण्य कम तो नही हो गए जो एक हफ्ते बीत जाने पर भी सरकार गिरने का दावा नही कर रहा या उस 4PM वाले संजवा का क्या हुआ लगता है उसकी आँखों का तेज़ आपने घटा दिया है। अब मोदी तो मोदी ठहरे एक कातिल मुस्कान बिखेरते हुए कहते हैं पुण्य का तो पुण्य अभी बाक़ी है पर लगता है इस सांजवा को शर्म आ गई है वैसे सांजवा को शर्म आए ऐसा नही भी हो सकता क्यूँ कि..... तभी चंद्र बाबू नायडू बीच में टोकते हुए मोदी जी को कहते होंगे जनाब आपकी जलेबी जैसी बात म्हारे पल्ले न पड़ री है। मोदी फिर ठहाका लगाते हुए कहते होंगे मैं दिमाग़ में आने वाली चीज़ हूं समझ में आने वाली नहीं।
प्रदीप डीएस भट्ट-
व्यंग्यकार; मेरठ
17012026
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