Tuesday, 1 September 2026

इज़्ज़त घर

इज़्ज़त घर 

         राहुल गाँधी स्टेज़ के हर कोने का इस्तेमाल करते हुए महिलाओं पर बोल रहे हैं, फिर कट टू कट मनु स्मृति अपना ज्ञान बखार रहे हैं और बड़े मनोयोग से एक रहस्य से पर्दा उठा रहे हैं कि समाज में दो तरह के कप हैं एक प्लास्टिक जो दलितों के लिए है और दूसरा काँच का जो सवर्णो के लिए है। प्लास्टिक वाले कप में दलित को चाय मिलती है और काँच वाले में स्वर्ण को। एक बार फिर कट टू कट जेन जी और फ़िर जेन अल्फ़ा न जाने क्या क्या बीच में हल्द्वानी की घटना भी घुसेड़ दी। मज़ा तो तब आता है जब कार्यक्रम के बाद राहुल चाय बाँटते दिखते हैं और जे क्या हुआ भाई साहब प्लास्टिक वाले कप में सबको चाय पकड़ाते राहुल महाराज फिर एक बार कट टू कट राहुल गाँधी चाय पी रहे हैं वो भी काँच वाले कप में मतबल किसी बढ़िया कार्यक्रम का क्रियाक्रम कैसे किया जाता ये खासियत सिर्फ़ और सिर्फ़ से सीखा जा सकता है। ये सब देखकर मेरी आँख खुल गई न न न भाई साहब मैं कोई सपना नी देख रहा मियां, समझो अगर समझ में आवे तो। राहुल गाँधी का चलायमान ज्ञान देखकर मेरी आँखे या फिर बरबंटे या कुछ भी कह लो पर सच तो ये है कि इतने घुमावदार ज्ञान को देखकर सुनकर मुझे 3 इडियट की क्लास का वो टीचर याद हो आया जो आमिर ख़ान की हरकतों से परेशान होकर पूछता है "आख़िर कहना क्या चाहते हो" । अब आमिर क्या जवाब दिया वो तो हम सबको पता ही है लेकिन राहुल गाँधी का जवाब तैय्यार है। "मेरी मर्ज़ी"। अब कल्लो क्या बात करोगे इस बन्दे की।

         यूँ तो हर व्यक्ति स्वतंत्र है कहीं भी कुछ भी बक बकियाने के लिए लेकिन भाई साहब जो बंदा जन्मजात ईसाई हो और वोटो की अगुवाहट में कुर्ते पे जनेऊ टांगने से बाज न आता हो तो ऐसे भले माणुस को अगर सार्वजनिक स्थान पर मनु स्मृति पर अपना ज्ञान उड़ेलना पड़े और वो भी संस्कृत के श्लोक को उद्धृत करते हुए "यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमयंते तत्र देवता" फिर उस ज्ञान की जबरदस्त खिल्ली उड़े तो... सोचो सोचो इसके आस पास रहने वाले चुकन्दर टाइप लोग भी शायद यही चाहते होंगे की जित्ती जल्दी हो सके इस बन्दे को जसपाल भट्टी का उल्टा पुल्टा करके छोड़ देते हैं। तभी तो ये चुकन्दर टाइप लोग जनता की अदालत में ऐसे वैसे कठिन मुद्दे पर इस बन्दे की ज्ञान वान पौध को लहलहाने देते हैं। हिट हुए तो हम साथ साथ हैं वरना तुम कौन हम खां म खां। अब महाराज इस बन्दे और इसकी टीम को कोई बताए कि मनुस्मृति यह ग्रन्थ स्वयंभू मनु और भृगु के संवाद व प्रवचन के रूप में है। इसमें बारह अध्याय और 2685 से 2694 श्लोक हैं। इसमें ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति, संस्कार, आचरण कर्तव्यों एवम् सामाजिक नियमों का उल्लेख है। अब जैसा की होता है समय के साथ और सत्ता के लोलुप लोगों की आकांक्षाओ को पूर्ण करने के लिए धर्म पुस्तकों को अपनी बलि देनी पड़ी और ये किसी एक धर्म के विषय में नहीं हुआ वरन् हर धार्मिक पुस्तक के साथ हुआ है बलवान के सामने कमजोर को बढ़ावा देना हो या फिर धर्म पुस्तक में घालमेल करना हो। लक्ष्य एक ही रहता है किसी भी तरह सत्ता पे काबिज़ हुआ जाए। राहुल इसी कोशिश को करते नज़र आते हैं वो भी मैं चाहे ये करूं मैं चाहे वो करूं मेरी मर्ज़ी की तर्ज़ पर।

         एक बात जो मेरे पल्ले आज तक नहीं पड़ी कि सबको ज्ञान देना है फिर चाहे वो सनातनी हो या ईसाई, मुस्लिम हो या सिख, बुद्ध हो या जैनिज्म और भी न जाने कितने दीन , मज़हब भरे पड़े हैं भारत में। सबको ज्ञान भी देना है गाली भी लेकिन सबको सिर्फ़ सनातन को कोसना है। अब कोई इन बांदरों को समझाओ कि समय समय पर सनातन रूपी पारावार से दो मुट्ठी जल लेकर ख़ुद को आर्टिफियल समन्दर समझने वाले लोग ये कब समझेंगे कि धर्म तो सिर्फ एक ही है और वो है सत्य सनातन बाक़ी तो... दिल को ख़ुश रखने को ग़ालिब ख़्याल अच्छा है। और चलो जी अगर इन लोगों को ज्ञान ही देना है तो दे ले भाई, ईसाई लोग ग़रीब गुरबा लोगों को ईसाई बनकर क्या ही कर लेंगे, या मुसलमान इन्हीं बचे खुचे गरीब गुरबा को मुसलमान बनाकर क्या हासिल कर लेंगे। अगर किसी को गलत वाली फहमी हो कि उच्च पदस्थ ईसाई या मुस्लिम इन कन्वर्टिड लोगों को अपने चर्चों में या महजिदो में जाने देंगे तो मियां ये अभी भी बहुते दूर की कौड़ी है। नागालैण्ड जाकर मैं इस सच्चाई से रु ब रु हो चुका हूँ, कुछ ऐसा ही हाल महजिदो का भी है। "जाति है कि जाति नहीं" भले ये कनवर्ट हो गए हों लेकिन फ़ायदा तो दलित या महादलित या पिछड़ा बने रहने में ही है इसलिए कनवर्ट हुए हैं पैसे के लिए न कि अल्ला या यीशु से इन्हें कोई प्रेम है। बरसों से ऐसे लोग दो नावों की सवारी धड़ल्ले से कर रहे हैं। कोई भी ज्ञानी उन्हें ये नहीं बताता कि तुम ये गलत कर रहे हो क्यूँ कि भारतीय जन मानस में एक कहावत रच बस गई है। "माया तेरे तीन नाम परसी परसा परशुराम" इसलिए "बाप बड़ा न भईया सबसे बड़ा रुपैया" सो ये सोचना ही बेईमानी है कि कोई राजनेता सच बोलेगा हां दोगली टाइप पब्लिक को खुश करने वो सनातन को सरे आम गरियायेगा और सत्ता की दलदल में अंदर तक धंसा छद्म सनातनी ताली बजाएगा।
 

         

         

         

No comments:

Post a Comment