(यानि रजिया गुंडों में फंस गई)
इजरायल ने अमेरिका को पपीते के पेड़ पर चढ़ा दिया कि भैय्ये यो जो ईरानवा है न ससुरा 460 किलो यूरेनियम संवर्धन करके बैठा है क्या पता कब परमाणु परमाणु खेलने लगे इसीलिए अगर तुम्हें अपनी चौधराहट सलामत रखनी है तो पहली फुर्सत में इसको पेल दो नई तो भविष्य में ये तुम्हे रगड़ देगा। ट्रंप जो भयंकर वाले अन्प्रिडेक्टेबल हैं ने घूरकर नेतन्याहू को देखा फिर आधे गुस्से और आधी हंसी हंसते हुए कहा अबे अभी जुलाई में तो पेला था संसुरा ठंडा हुआ पड़ा है काहे मरे हुए को मरवाते हो बे। नेतन्याहू ने खींसे निपोरते हुए कहा तुम भी न बुढ़ापे में सठिया गए हो ट्रंप बाबू। देखो ऐसा है तुमने जो जुलाई में ईरान को पेला था वो तो टीजर मात्र था अच्छा एक बात बताओ तुमने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद कुल कितनी लड़ाई जीती है, वियतनाम, कोरिया ,इराक़, अफगानिस्तान अबे सारी की सारी लड़ाई तुमने हारी हैं लेकिन हार कर भी तुम जीतते हो सोचो भला क्यूँ , सोचो सोचो महाराज। देखो हर लड़ाई हारने के बाद अमेरिका का रक्षा उद्योग आगे पीछे की सारी कसर पूरी कर देता है। यानि तुम्हारा और दुश्मन देश का पुराना गोला बारूद मिसाइल सब ख़त्म फिर नया उत्पादन और भइया अमेरिका नया माल बनाकर बेचकर अगली पिछली सब कसर निकाल लेता है तो फिर से सोचो अर्जुन रूपी ट्रंप और ईरान का नाम ओ निशान मिटा दो। फिर मैं तो हूं न इधर से तुम इधर से मैं भाई साहब मिलकर ईरानवा का कचूमर बना डालेंगे। ट्रंप ने आखिरी प्रश्न दागा ठीक है है। हमला तो कर दूंगा लेकिन कोई कारण भी तो चाहिए। नेतन्याहू शातिराना मुस्कान बिखेरते बोले "ड्रिल बेबी ड्रिल" और बस ट्रंप ने कह दिया यलगार हो और लो जी 28 मार्च इतिहास में दर्ज हो गई।
बिना विचारे जो करे वो पाछे पछताए, सुना है न आपने अब उधर से अमेरिका और उधर इजरायल दे दना दन शुरू। सभी को लगा हफ़्ते भर की जंग में ईरान हांफते हुए अमेरिका और इजरायल के आगे लम लेट हो जाएगा लेकिन लेकिन लेकिन ईरान ने जब पेलना शुरू किया तो ईरान से 2300 किलोमीटर दूर इज़रायल को अपनी ग़लती का अहसास हुआ कि उसने ग़लत जगह पंगा ले लिया है लेकिन बाज़ी तो हाथ से निकल चुकी थी सो मरता क्या न करता उसने ईरान की नाजायज औलाद को उधेड़ना शुरू कर दिया यानि हिजबुल्लाह जिसने लेबनान पर कब्ज़ा किया हुआ है। अब हिजबुल्लाह की जान तो ईरानी तोते में है सो ज़ाहिर सी बात है ईरान सकपकाया भी सबकबाया भी और फिर से उसने दे दना दन शुरू और इजरायल भी गहरी चोट खाने लगा। जल्दी ही ईरान को समझ आ गया कि इज़रायल और अमेरिका से निपटना इतना आसान नहीं है सो उसने एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस के तहत बिना किसी चेतावनी के अमेरिका के सैनिक अड्डों पर जो कि बहरीन, ओमन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात इराक़ व सीरिया में दीपावली का धूम धड़ाका करना शुरू किया बस यही बात अमेरिका को खल गई कि मारना है तो इजरायल को मारो मेरे अड्डे पर बमबारी क्यूँ।
युद्ध में सब कुछ जायज़ है ये ईरान ने अमेरिका को समझा दिया वैसे भी ईरानियन तो बीस बरसों से अमेरिका के ख़िलाफ़ जंग की तैयारी कर रहे थे उन्हें पता था कि अमेरिका लंपट बाज़ी जरूर करेगा सो उसने अमेरिका को वहीं ठोका जहां अमेरिका की नस दबी हुई थी । जिस गति से युद्ध लड़ा जा रहा था उससे ज्यादा तेज़ गति से ट्रंप भाई साहब की ज़बान। रोज़ रोज नए नए दावे ईरान ख़त्म और ही पल ईरान फिर अमेरिका पर तिरछी चोट कर देता। अब हालात ये कि इस युद्ध में इज़रायल एक तरह से गायब हो गया और ये युद्ध अमेरिका बनाम ईरान होकर रह गया। यानि "हींग लगी न फ़िटकरी और रंग आ गयो चोखा " ट्रंप बोलते रहे और ईरान ठोकता रहा। युद्ध की शुरुआत ईरान में रिज़ीम चेंज करने को लेकर थी बाद में सबको समझ आ गया ये तो तेल का खेल है।
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