Sunday, 21 December 2025

अंग्रेज़ी साहित्य 400/ per KG

रिपोर्ताज 

        " अँग्रेजी साहित्य 400/- per KG "

         उत्तर भारत में ठण्ड के प्रकोप के बीच कंबल का बुक्कल मार कर घूमते हुए अचानक फ़ेसबुक पर फ़्लैश होती खबर कि होटल सम्राट हैवंस,मेरठ में 19,20,21 दिसम्बर में तीन दिनी पुस्तक प्रदर्शनी है ।हमने भी सोचा दिल्ली में तो विश्व पुस्तक मेला 10 जनवरी से 18 जनवरी तक आयोजित होना है तो क्यूँ न एक दिन मेरठ की पुस्तक प्रदर्शनी को भी अपने दर्शनी दे ही आवें क्या पता कुछ हमारे मतबल का भी हो सो भैय्या कल बढ़िया से तैय्यार हुए और जा पहुँचे 🏨 सम्राट हैवंस।


         अभी अपनी स्कूटी को ठीक से खड़ा भी नहीं किया था कि निगाह पड़ी शकरकंदी का ठेला लगाए हुए चचा पर जो बड़े जतन से ठेले को व्यवस्थित कर रहे थे।पेट भरा हुआ था पर ससुरी नीयत का क्या करें। ठेले पर अंगार में भुनती हुई शकरकंदी पर हमने भी सोचा प्रदीप बाबू प्रदर्शनी तो बाद में भी देखी जाएगी पहले एक ठो प्लेट शकरकंदी का मजा ले लिया जाए सो महराज भैय्या धनिये की चटनी में लिपटी हुई भुनी हुई शकरकंदी के टुकड़े और उस पर घर का बना मसाला बुरकते हुए हाथ बस चटखारे लेकर खाते हुए असली वाला आनन्द आ गया।

        शकरकंदी के स्वाद का मजा लेते हुए जा पहुँचे पुस्तक प्रदर्शनी में शुरुआत में हिन्दी की पुस्तकों ने स्वागत किया दूसरी पँक्ति में अँग्रेजी की पुस्तकें 400/- per KG, भाई साहब देखते ही दिमाग़ चकरघिन्नी खा गया। आगे बढ़ा तो यही हाल गनीमत रही कि ये क़हर हिन्दी पुस्तकों पर लागू नहीं था। कुल 14 पन्क्तियों में सजी हुई पुस्तकों में से 8 में अँग्रेजी पुस्तकों पर यही टैग 400/-पर KG. शुक्र है शेष 4 में हिन्दी पुस्तकों पर 30 प्रतिशत छुट का टैग था। सच कै रिया हूँ संतोष तो था लेकिन भले ही अँग्रेजी पुस्तकों पर ही 400/- पर KG का टैग देख कर कुछ अच्छा नहीं लगा।

        अच्छी बात ये रही कि पुस्तक प्रदर्शनी की शुरुआत में रखी पुस्तक "बेगम का तकिया" जिसके लेखक पंडित आनंद कुमार हैं। बेसाख्ता मुझे आकाशवाणी से हवामहल में प्रसारित इसका नाट्य रूपांतरण सुनने का मौका मिला है। इसमें दो भाइयों के मध्य एक संवाद है I 
पहला:एक बात कहना चाहता हूँ 
दूसरा: बोलो 
पहला:तो दूसरी बात ये है 
पहला: अरे पहले पहली तो कह 

        ख़ैर बेगम का तकिया के अतिरिक्त जॉन एलिया की "यानी"  मोमिन, जॉक, मंटो की लोकप्रिय कहानियाँ के दो पार्ट ख़रीद लिए सच कह रहा हूँ मन को बड़ा संतोष मिला। ज्यादा कुछ था भी नही देखने और समझने को,पुस्तकें भी लिमिटेड और खरीदने वाले भी सो ये सोचकर बाहर आ गये कि 20 दिन बाद अगला पड़ाव विश्व पुस्तक मेला होगा अगले बरस 2026 में क्यूँ ठीक कै रिया हूँ न।

-प्रदीप डीएसभट्ट-21122025

Friday, 12 December 2025

भौं-- भौं भौं-- भौं

भौं --भौं भौं-- भौं 

         अभी हमने अंगड़ाई लेते हुए सुबह की चाय को होठों से छुआ ही था कि हमारे प्यारे मित्र लमन्डेस जी आ धमके। राम राम के बाद बोले गुरु वो है न रेणुका चौधरी? हमने अधमिची आंखों से उंघते हुए पूछा कौन रेणुका चौधरी बे तो वो एक दम से तैश में आ गए फिर बिफरते हुए बोले अरे वही रेणुका चौधरी जिसकी हंसी सुनकर मोदी जी ने स्पीकर को कहा था जनाब इनकी हंसी सुनकर रामायण की एक पात्र की याद ताज़ा हो गई। अब भैय्या रामायण में बड़े बड़े करेक्टर हुए हैं लेकिन लेकिन लेकिन हंसी तो ताड़का ताई की ही फेमस थी शायद प्रधान सेवक का इशारा उसी ओर था खैर जैसे ही लमन्डेस जी ने रामायण का ज़िक्र किया हमारे चक्षु बिना चाय पिए ही बड़मंटे से खुल गए। हम सीधे होते हुए बोले क्या हुआ लमन्डेस तनिक जल्दी बताओ और हां पहले ये बतावा अपनी प्यारी भौजाई लम्न्डिरी कैसी हैं।  लमन्डेस जी सुनते ही बिदक गए अरे यार हम यहाँ सस्पेंसफुल ख़बर देने आए हैं तुमको और तुम हो कि हुड़कचूल्लू की तरह लमनडीरी के पीछे पड़े हो। अबे हम अगर यहां है तो वो भी अच्छे से होगी ही वो भी अपने घर में टांग पे टांग चढ़ाए। हमने तुरत हाथ जोड़कर माफ़ी मांगी तब जाकर  लमन्डेस जी शांत हुए। फिर एकदम दार्शनिक अंदाज़ में बोले अबे कल रेणुका चौधरी उर्फ़..... अपनी गाड़ी में पति को न लाकर एक ठो आवारा कुत्ते को लेकर आई। पत्रकारों ने पूछा तो जवाब में भौं -- भौं भौं --भौं बोलकर लोकसभा में घुस गई। एक बात पल्ले न पड़ी वो आवारा कुत्ता गाड़ी की ठंडी हवा में इतना मस्त क्यूँ था कि भौंकना ही भूल गया वो आवारा था या पालतू खैर लौटते हुए पत्रकारों ने फिर टोका तो बोली संसद में भी तो हैं अब भैय्या पता नही वो अपनी पार्टी के माननीयों के लिए बोल रही थीं या.. आगे की बात लमन्डेस जी ने भी अधूरी प्रेम कहानी की तरह हवा में ही अधूरी छोड़ दी।

         बाक़ी सब बातें तो हमने बिना डकार लिए हज़म कर लीं लेकिन कुत्ता भौंका नही बस अपने सोचने की सुईं यहीं पे आकर अटक गई। हमने ध्यान से लमन्डेस जी को देखा फिर पूछा कुत्ता देखने में कैसा था। लमन्डेस जी ने अपनी आधी मुंडी हवा में आसमान की ओर की मतबल वो जताना चाह रहे थे कि उनके सोचने में भगवान जी के सैटेलाइट का हाथ हो फ़िर खोपड़िया पर अपनी उंगलियों से तबला बजाते हुए बोले बस छोटे से कद का होगा भूरे रंग का, माथे पे सफ़ेद सी लकीर थी और भी कुछ था पर याद नही बस इतना याद है कुत्ता भौंका पता नहीं क्यूँ पर ससुरा भौंका नही गुरु। कुत्ता दो काम ज़रूर करता है टांग उठाकर मूतेगा भी और भौंकेगा भी काटे न काटे ये उसकी मर्ज़ी या यूं कह लो गुरु कंडीशन अप्लाई। हमने अपनी बरबंटे जैसी आंखों को थोड़ा और चौड़ा किया फिर लमन्डेस से बोले सुनो बे हम आज तुम्हें कुत्ते की एक ऐसी प्रजाति के बारे में ज्ञान देंगे जिसे आज तक किसी ने किसी को न तो दिया और आगे भी न देगा। लमन्डेस थोड़ा और नज़दीक को खिसक कर बैठ गया फिर बोला जैसा भगवान कृष्ण ने अर्जुन को दिया था कुरुक्षेत्र में कुछ वैसा वाला गुरु। हमने न में मुंडी हिलाई तो लमन्डेस हल्के से गुर्राते हुए बोला अबे सीधे सीधे बोलो हमें बेकार में ज्ञान मत पेलो बे हम बनारस से हैं दूसरों को ज्ञान पेलते हैं। हमने लमन्डेस को घुरकर देखा फिर बोले अफ्रीका में बेसेंजी प्रजाति बार्कलेस डॉग यानि बिना भौंकने वाला कुत्ता पाया जाता है। उसके न भौंकने का कारण जानते हो उसके गले की संरचना यानी लेरिंक्स सामान्य कुत्तों से अलग होती है यानि थोड़ी पतली और चपटी बस यही कारण है वो जोर से भौं भौं नहीं कर पाता। बेसेंजी अलग तरह की आवाज़ निकालता है जिसे योडल या बरु कहते हैं। ये कुछ ज्यादा तेज़ और फुर्तीला होता है। शिकारियों के लिए बेमिसाल कुत्ता, शिकार देखकर यूडली यूडली करता है जिससे शिकार को पंछी होने का भ्रम हो जाता है। बेसेंजी अपने मालिक से प्यार तो करता है लेकिन हर वक्त उसके नाम की माला नहीं जपता जहां कोई यूडली दिखाई दी तुरन्त दुड़की लगा लेता है आख़िर आज़ादी भी कोई चीज़ होती है भाई साहब। लमन्डेस ने व्यंग्यात्मक लहज़े में पूछा और कोई खासियत हो तो भी बतावें हुज़ूर। हमने दोनों हाथ सर के पीछे करते हुए ज्ञान की आखिरी पंक्ति भी मुखारबिंद से उड़ेल दी। देखो मियां ये बहुत बड़े वाला सफ़ाई पसंद कुत्ता है यानि स्वच्छ भारत अभियान का छोटे वाला ब्रांड एंबेसेडर। 

          लमन्डेस जी बिफरते हुए बोले अरे यार हम रेणुका चौधरी द्वारा लाए कुत्ते की बात कर रहें हैं और तुम हो कि कुत्ता ज्ञान बघारे जा रहे हो। हमने वक्त की नब्ज़ पकड़ी और कमर को सीधा करते हुए बोले देखो लमन्डेस मियां तुम्हें वो अतिकवा याद है न इलाहाबाद का गुंडा हां वही जिसके घर नेता जी यानि मुल्ला मुलायम गए तो सार्वजनिक तौर पर अतिकवा के कुत्ते से हाथ मिलाया ताकि अतिकवा से दोस्ती बनी रहे, दोस्ती बनी रहेगी तो मुस्लिम वोट बने रहेंगे और ये दोनों बने रहेंगे तो नोट तो खुदई बने रहेंगे न और उन नोटों पर नमाजवादी का कब्ज़ा। इसलिए कुत्तों से प्यार करो फिर जो चाहोगे मिलेगा। इससे पहले कि लमन्डेस हमारे ज्ञान के बीच में फिर अपना ज्ञान बघारते हमने ज़रा रुको का इशारा करते हुए एक खट्टी डकार ली जिससे लमन्डेस और हम ख़ुद भी थोड़ा अटपटा गए लेकिन चारपाई से उतरकर गुजरे जमाने की आराम कुर्सी पर पसरते हुए शुरू हो गए।

         देखो मियां लमन्डेस कुत्तों से प्यार करना तो पाप न है लेकिन हर जीव जंतु की अपनी जगह होती है। पहली रोटी गाय की और आखिरी रोटी कुत्ते की ही क्यूँ बनती है सोचा है कभी? लमन्डेस बोले सुने हैं बे वो भी बचपन से पचपन तक। हमने लमन्डेस की ओर आँखें घूमाते हुए पूछा जाने कितनी तस्वीरें इंद्रजाल पर मौजूद हैं जहां राहुल गाँधी विभिन्न मुद्राओं में कुत्ते के साथ फुटवा में मौजूद हैं। करनाल में भारत जोड़ो यात्रा में सफ़ेद रंग का श्वान उनके साथ साथ चल रहा था मजे कि बात पट्टा कुत्ते के गले में और चेन राहुल के हाथ में।
अगर कोई पत्रकार उस धौले रंग वाले कुत्ते का इंटरव्यू ले लेता तो निश्चित वो कुत्ता बड़ी शान से कहता अगर मैं न साथ चलूं तो भारत जोड़ो यात्रा भारत तोड़ो यात्रा में तब्दील हो जाती। अब भैय्या अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर राहुल गाँधी ने सेना के कुत्तों के साथ योग करते हुए तस्वीर पोस्ट की थी तब सच बता रिया हूं सेना के कुत्तों ने राहुल को कॉम्प्लेक्स दे दिया था। और तो और राहुल का पर्सनल कुत्ता जिसका नाम pidi पीडी है से घने से अच्छा वाला प्रेम करते हैं।  शायद ये गुण उनको उनकी चाची से मिला है वो भी 🐕 प्रेमी हैं। लमन्डेस जी रोकते हुए बोले ये तो ठीक है लेकिन वो किस्सा याद है न जहां कांग्रेसी राहुल के घर मीटिंग में व्यस्त हैं और राहुल का प्रिय pidi भी एक कुर्सी पर विराजमान है। भाई साहब कुछ भी कहो राहुल की निगाह में सब एक समान है फिर वो pidi कुत्ता हो या कॉन्ग्रेसी। जिस प्लेट से राहुल pidi को बिस्कुट खिला रहे हैं उसी प्लेट से कांग्रेसी भी बड़े चाव से बिस्किट गटक रहे हैं, मज़बूरी है लेकिन क्या करें राहुल बाबा नाराज़ हो गए तो न प्लेट नसीब होगी न बिस्किट। बस एक नासमझ कांग्रेसी उस मीटिंग में था वो क्या नाम है उसका हेमंत बिस्वा शर्मा। कित्ता नासमझ है शर्मा बताओ जी ज़मीर न बेचकर भाजपा की तरफ़ दुड़की लगा दी। भाई खा लेते pidi की प्लेट से एक बिस्कुट कम से कम आज मजे से ठाली रहता घर में और यहाँ वहां घूमकर राहुल को कोसता कि भैय्या हम भी जवान और राहुल भी जवान लेकिन दोनों को कुछ न मिला काम। अब कोई पूछे उस हेमंतवा से भाजपा में जाकर क्या मिला उसे कुछ भी तो नहीं, बस असम का मुख्यमंत्री और पूरे पूरा नॉर्थ ईस्ट का इंचार्ज और हां मां के साथ भारत मां भी सेवा कर रहा है। भले ही हेमन्ता ने कांग्रेस छोड़ दिया लेकिन इससे कांग्रेस के कुत्ता-नेता साम्य भाव पर कुछ फ़र्क पड़ा क्या कुछो भी तो फ़र्क नहीं पड़ा। 

         जहां तक राहुल गाँधी की इस टिप्पणी का प्रश्न है कि संसद के अंदर भी पालतू बैठे हैं तो भाजपा को इसमें कतई बुरा नहीं मानना चाहिए। शायद वो भी तो अपने सांसदों के बारे मे बता रहे थे या उन्हें शब्दों के बूस्ट से नहला रहे थे। और भाई साहब जहां तक रेणुका चौधरी की बात है कि वे संसद के प्रांगण में कुत्ता लेकर क्यूँ आईं तो सोचो भाई उन्होंने एक संदेश दिया है कांग्रेस साफ़ दिल की पार्टी है वो सांसदों और कुत्तों में तनिक भी भेदभाव नहीं करती हो सकता है बंगाल चुनाव में कॉन्ग्रेस किसी देसी विदेशी नस्ल के कुत्ते को खड़ा कर दे और कोई बड़ी बात नही कि वो कुत्ता एम एल ए भी बन जाए और क़िस्मत ठीक रही तो मंत्री भी। अब इससे एक पंथ दो काज हो गए न जीवों पर दया भी, चुनाव में जीत भी और भैय्या परिवारवाद का आरोप भी गायब। हो तो ये भी सकता है कि वे उस कुत्ते को कांग्रेस की सदस्यता दिलवाने लाई हों, क्योंकि वोट चोरी के मुद्दे तो फ्लॉप हो गए फिर भी कॉन्ग्रेस है कि वोट चोर गद्दी छोड़ का नारा लगातार हफ़्ते भर कढ़ाई में पड़े हुए सडेले रिफाइंड में इस नारे से दस बीस भटूरे और तल लेना चाहती हो लेकिन उन भट्टूरों को जनता क्या ख़ुद उनकी पार्टी के नेता भी सूंघने को भी तैयार नहीं। और मैं तो नू कै रिया हूं कि लोकसभा राज्य सभा में जितने भी कांग्रेसी हैं सब 19 दिसंबर से पहले एक एक देसी या विदेशी कुत्ता संसद प्रांगड़ में लाकर कुत्ता जिंदाबाद का नारा लगवा दें इसी बहाने राहुल गाँधी को ख़ुश करने का मौक़ा भी मिल जाएगा और हो सकता है इसी बहाने राहुल गाँधी कुत्तों के लोकतंत्रिक अधिकार की लड़ाई लड़ने वाले वड़े वाले नेता बन जाएं। वे कुत्तों को वोटिंग का अधिकार, चुनाव लड़ने का अधिकार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं क्योंकि उन्हें पता है कि कांग्रेस के नेताओं से अधिक वफादार कुत्ते ही होते हैं। 

         लमन्डेस जी ने शायद इससे पहले इत्ता कुत्तों पर इत्ता सारा ज्ञान आज तक लपेटा न था सो वो औकते हुए उठे और मेरे द्वारा दिए गए दिव्य ज्ञान को वॉश बेसन में उल्टियाए। अलप सलप करके लमन्डेस जी फिर बाजू में आ बैठे और लगे हमारे कुत्तई ज्ञान की प्रशंसा करने। हमने आशीर्वाद की मुद्रा में हाथ उठाया तो बोले गुरु ये रेणुका चौधरी का गली का आवारा सा कुत्ता बढ़िया वाली बड़ी सी गाड़ी में! साले ने क्या क़िस्मत पाई है सच कै रिया हूं हम तो बस सोचने के लिए बने हैं एसी गाड़ी में तो कुत्ते पहले से घूम रहे हैं लेकिन लोकसभा का प्रांगण न न न। हम साले चालीस साल से दिल्ली में झक मरा रिए है बस टी वी पर लोकसभा देखकर खुश हो रहे हैं और एक ये है आवारा गली का कुत्ता जिसकी किस्मत का ताला रेणुका ताई ने खोल दिया। चलो आज संध्या वंदन में भगवान जी से अगले जनम मुझे कुत्ता बनाईयो की गुहार लगाते हैं वैसे गुरु तुम्हारी ज्ञान गंगा भी गज़ब की है तभी तो हम तुम्हें अपना बड़े वाला गुरु मानते हैं लेकिन एक बात तो बताओ तुम कुत्तों पे इत्ता ज्ञान कहां से पाए हो बे कहीं तुम पिछले जन्म में......... आगे के शब्द लमन्डेस जी ने हवा में फिर तैरने के लिए छोड़ दिए। 

प्रदीप भट्ट 
व्यंग्यकार, मेरठ 

Saturday, 6 December 2025

परफेक्शन

                "परफेक्शन"

         गाँव का चौकीदार भुवन भागता हुआ चौपाल पर पहुंचा और हांफते हुए चौपाल का आंगन लीप रही धनवंती से बोला प्रधान जी कहां हैं। धनवंती ने ख़ुद को सीधा किया फिर बोली छत पे कसरत कर रे हैं वैसे चौपाल तो दस बजे सजेगी अभी तो आठ भी न बजे और तू हांफ क्यूँ रहा है क्या बात हुई बता। धनवंती की बात का जवाब दिए बिना दीनानाथ छत की ओर लपक लिया। प्रधान जी प्रधान जी कालीदीन के खेत पर एक लाश पड़ी है। प्रधान जी सीधे होते हुए बोले थानेदार को बताया। कालीदीन ने हां में मुंडी हिलाई तो प्रधान जी धोती लपेटते हुए बोले पता लगा लाश किसकी है। कालिदीन ने फिर ना में मुंडी हिलाई तो प्रधान जी बोले पूरे गांव को बुला ला और हां उन चारों को भी। ठीक है कहता हुआ कालिदीन सीढ़ी से नीचे उतर गया।

        दरोगा जी दो सिपाहियों के साथ कालिदीन के खेत में पड़ी लाश को बांस की खपच्चियों से घेरे हुए खड़े थे साथ में गांव प्रधान शंकर विश्नोई भी। लोग आते दूर से लाश को देखते और पहचानने से इंकार कर देते। दरोगा जी प्रधान से बोले पूरा गांव ना में मुंडी हिला रहा है अरे कोई तो कुछ बताओ आख़िर ये लाश किसकी है। प्रधान जी ने पूरब दिशा से आ रहे चार लोगों की तरफ़ इशारा किया। चारों पास आए तो प्रधान जी बोले आप चारों भी लाश देख लो और दरोगा जी को कुछ सुराग दो। पण्डित रामलुभवन मिश्र जी गए लाश के चारों ओर चक्कर लगाया फिर दरोगा से बोले लाश के शरीर पर जनेऊ है, ललाट पर तिलक आधा मिट गया है शिखा में गांठ भी लगी है मरने वाला पक्का ब्राह्मण है। दरोगा बोला ये मुझे भी पता है तो इसमें नया क्या है? फिर श्रीधर गुप्ता को इशारा किया, श्रीधर गए चक्कर लगाया और लौटकर दरोगा से बोला लाश के पास एक थैला है उसमें से हिसाब की बही झांक रही है साथ में कलम नत्थी है मानो न मानो मरने वाला बनिया है। दरोगा ने घूर कर श्रीधर को देखा फिर तीसरे राम सिंह को इशारा किया, राम सिंह ने भी लाश का चक्कर लगाया और लौटकर बताया कि लाश के शरीर पर तलवार के कई घाव है उसके हाथ में भी तलवार का मूठ है जो दर्शाता है कि वो लड़ते लड़ते मरा। निश्चित ये क्षत्रिय होगा। अब दरोगा ने खीजते हुए चौथे को जाने का इशारा किया चौथा जो चर्मकार था ने भी लाश का चक्कर लगाया फिर लौटकर दरोगा से बोला साहब मैं इनके जीत्ता परफेक्ट विद्वान तो न हूं पर एक बात पक्की इस लाश के पैर में दस नम्बर की जूती ही आएगी, बाक़ी आप देख लो।


प्रदीप भट्ट -- 06122025

Monday, 24 November 2025

" चिख़ुरी कुछ नया लिखा क्या "

रिपोर्ताज 

"चिख़ुरी कुछ नया लिखा क्या "

        अचानक फ़ोन की टुन्न टूनिया बज उठी। दूसरी तरफ़ गुरुग्राम से डॉक्टर प्रवीण शर्मा थी, उन्होंने राधे राधे कहा और हमने जय श्रीराम यानि उन्होंने द्वापर का प्रतिनिधित्व किया और हमने त्रेता का 😄 प्रवीण जी ने आग्रह किया कि उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर ABS4 "प्रज्ञान विश्वम" का विशेषांक निकाल रही है अतएव आपसे प्रार्थना है कि आप इसमें अपना सहयोग अवश्य दें। सहयोग से कुछ और मतबल मत निकाल लेना पाठकों🤔😎😎 यहाँ सहयोग का तात्पर्य आलेख से था, पईसे से बिलकुल भी नी, हाँ नई तो। ख़ैर हाँ भर दी।

तो भैय्या 19th नवम्बर को रेपिडो फिर रैपिड मेट्रो नमो भारत का आनन्द लेते हुए जा पहुँचे प्रेस क्लब ऑफ इंडिया वो भी 10:10 पर। यूँ प्रश्न वाचक दृष्टि से मती देखो 👀👀👀👀 टेम से पहुँचने की अच्छी वाली आदत है म्हारी समझे के नाही।👑👑👑 तो बस म्हारे से पहले कौन होगा वहाँ सोचो सोचो,सही पकड़े हैं 😺😺😺😺 शर्मा फैमिली। भाई साहब कित्ता भी समझा लो पर सबको यही ग़लत वाली फैमिली है कि वो मुन्शी प्रेमचंद और दिनकर से भी बड़े साहित्यकार हैं 😡😡😡😡

         ख़ैर सवा ग्यारह बजे गायत्री मंत्र से प्रोग्राम की शुरूआत हुई। मुख्य,विशिष्ट और अतिविशिष्ट कौन था राम जाने पर हम थे न मात्र अतिथि सो नीरव जी के आग्रह पर लगे हाथ कइयों को सम्मानित कर डाला।😍😝😍😝😍😛 अब चूँकि प्रोग्राम तो डॉक्टर प्रवीण शर्मा, गुरुग्राम की अभी तक की शैक्षणिक, सामाजिक एवं साहित्यिक यात्रा को स्मरण करने का था सो इस कार्य हेतु साहित्य एवं राजभाषा हिन्दी की अलख जगाती संस्था अखिल भारतीय सर्वभाषा, संस्कृति समन्वय समिति ने डॉक्टर प्रवीण शर्मा के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर "प्रज्ञान विश्वम" का विशेषांक निकालने का निर्णय लिया। निश्चित ही ये कार्य साहित्य के क्षेत्र में कार्य कर रहे साहित्यकारों के लिए विशेष जड़ी बुटी देने का कार्य कर रहा है जिसके लिए सुरेश नीरव जी बधाई के पात्र हैं।

" साहित्यिक यज्ञ की गिलहरी "

         मेरा मानना है कि आप किसी भी क्षेत्र से संबंध रखते हो यदि आपको अपने जीवन के शुरु में मध्य में या रिटायरमेंट के बाद साहित्य का कीड़ा काट ले तो आपके सोचने समझने के तरीके में बदलाव आ जाता है। जहां तक संपूर्ण जीवन का प्रश्न है वो भी माया काया के फेर से द्वंद करते हुए अंततोगत्वा साहित्य में अपने आपको ज्यादा सुरक्षित महसूस करता है ऐसा इसलिए भी कि युवावस्था में जहां लेखक प्यार व्यार में अपनी लेखनी को ज़्यादा सक्रिय रखता है वहीं शादी का लड्डू खाने के कुछ महीनों या वर्षों के बाद उसे जीवन के धरातल के अनुभव होते हैं तब उसकी लेखनी कम किंतु अनुभव आधारित लिखने लगती है। यूं तो मनुष्य जिम्मेदारियों से कभी भी पीछा नही छुड़ा पाता किंतु जिम्मेदारियों के पूर्ण होने पर उसकी कलम सत्य लिखने का साहस कर पाती है वैसे ऐसा सबके साथ नही भी हो पाता किंतु जो लेखक इन अनुभवों को जीते हैं वे जानते हैं कि सत्य कहने और लिखने में यक़ीन रखते हैं उन्हें ज्ञात होता है कि वे किन परिस्थितियों से होकर इस लक्ष्य तक पहुँच पाए हैं।

         9 फ़रवरी 2025 को प्रेस क्लब में हुई पहली मुलाक़ात से लेकर 19 नवंबर तक के सफर में मैं जितना उन्हें जान पाया,समझ पाया उन्हें शब्दों में बांधकर उनके लिए कुछ लिखकर मैंने भी प्रवीण जी की साहित्यिक यात्रा के हवन में अपने हिस्से की आहूति डाल दी। प्रवीण जी में नया और वो भी कुछ अलग करने की इच्छा ज़बरदस्त है। अच्छी बात ये रही कि ये शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ी रही हैं जहां सदैव कुछ अलग करने की संभावनाएं सदा मौजूद रहती हैं। उन्हीं संभावनाओं को टटोलती उनकी दृष्टि सदैव कुछ नया पा ही जाती है। हरियाणा जो कि उनकी जन्मभूमि भी है और कर्मभूमि भी में संतुलन साधते साधते प्रवीण जी धीरे धीरे साहित्य की ओर आकर्षित हो गईं और साहित्य तो प्रेम की वह अविरल धार है जिसमें से जिसे जो चाहिए वह निश्चित ही पा जाता है। अच्छी बात ये रही कि अपनी शैक्षणिक यात्रा के दौरान इन्हें दिल्ली हरियाणा की जर्नी में इन्हें कई ऐसे किस्से मिले जिसे इन्होंने अपनी लेखकीय यात्रा में इस्तेमाल किया है।

        जहां तक प्रवीण जी की कविताओं का प्रश्न है उनमें मन में त्वरित उपजे भावों की अभिव्यक्ति नज़र आती है। उनकी कविताई प्रकृति, मानव पीड़ा, श्रृंगार के इर्द गिर्द बुनी लगती है, एक बानगी देखिए:

  
राम जो तुम आ जाते एक बार 
तो बेड़ा सबका हो जाता पार 
हम नव दीप जलाते,
उपवन में फूल खिल जाते।
संसार सुखी हो जाता 
राज विद्या बुद्धि का होता 
दुःखी न रहता कोई,
धन्य धान से वंचित रहता न कोई 
राम जो तुम आ जाते एक बार 
आ कर कुछ तो करते जतन 
आकर धर्म का रोकते पतन।

होती पितृ भक्ति की जय जय कार 
होता भरत लक्ष्मण भाई सा प्यार 
राम जो तुम आ जाते एक बार 

         सवा बजे कार्यक्रम सम्पन्न हुआ और फिर लंच। सो भैय्या आदत अनुसार दो पीस गुलाम जामुन पेट में डालकर ब्राह्मण कुल में जन्म होने का कर्तव्य पूरा किया 😍😍😍😍 फिर थोड़ा सा ये थोड़ा सा वो और निकल पड़े वाया मेरठ वाया दिल्ली विश्वविद्यालय होते हुए 🍩🍩🍩🍩एक बालक को जन्मदिन की शुभकामनायें देते हुए। क्यूँ अच्छा किया न महाराज 

प्रदीप डीएस भट्ट - 25112025

Friday, 21 November 2025

हरबे हरबे -- जितबे कब

हरबे हरबे जीतबे कब 

सन् राइज के चक्कर में सन सेट करा बैठे 
"गिरे तो भी टांग ऊपर"

Wednesday, 12 November 2025

"काँपे टांग जाएंगी"

रिपोर्ताज 

        "कांपे टांग जाएंगी"

         इश्क़ भी अजब चीज़ है मियां कब किससे कहां और कितना हो जाए भाई साहब मैनू कि पता😻😻😻 किसी और नू पता होए तो मैन्नू भी दसना। अब आप भी सोच रिए होंगे ए कि गल्ल कित्ती तो भाई साहब पिछले तीन चार दशक में जोर जबरदस्ती से ही सही हम मंच शेयर कर ही रहे हैं 🤓🤓🤓🤓 लेकिन एक बात तो सच्ची सच्ची बता रिया हूं उर्दू फ़ारसी अरबी के बड़े बड़े लच्छेदार शब्दों के घाल मेल से महफ़िल सजती भी देखी है और भैय्या उजड़ती भी। दिल्ली मुम्बई हैदराबाद लखनऊ और छोटे मोटे का तो ज़िक्र ही क्या करना हुज़ूर😊😊 हमने ऐसी ऐसी नशिस्त देखी हैं जहाँ सुनने वाले और सुनाने वाले सब के सब अंतर्राष्ट्रीय😛😛😛😛😛😛 कोई भी ससुरा वॉकल फॉर लोकल ना हो रिया 👺👺बस बजट के चक्कर में भारत में आयोजन करके अंतरराष्ट्रीय होने का सुख प्राप्त कर रहे हैं। करो करो मैंनूं की लोड।

         सो महाराज जब भारत सरकार की सेवा से निवृत हुए तो मेरठ को अपना ठिकाना बना लिया। वो स्लोगन आपने सुना है न "जिन्दगी के साथ भी जिन्दगी के बाद भी" तो बस मेरठ में रहकर दिल्ली गुड़गांव गाजियाबाद में सुबह निकलकर साहित्यिक समारोहों में अपनी हाजिरी दर्ज कर आते हैं।👁️👁️👁️👁️ इसी क्रम में कथा रंग और "महफ़िल ए बारादरी" से जुड़ाव हुआ और वो भी सच्चा वाला। इसे ही शास्त्रों में सच्चे वाला इश्क़ कहते हैं हुज़ूर। महफ़िल ए बारादरी की सबसे बड़ी खासियत ये है यहाँ सिर्फ़ पढ़ने वाले ही नही अपितु श्रवण सुख प्राप्त करने वाले भी अपनी हाज़िरी लगाते हैं। बढ़िया वाले वैन्यू के साथ बढ़िया वाला मैन्यू भी ब्राह्मण का इसके बिना गुजारा न है जी 😛😛😛😛और शायरी UPSC क्रैक करके क्लॉस वन अधिकारी वाली। नवागंतुको के लिए  एकदम परफैक्ट पाठशाला। अब इत्ती सारी खूबियां हों तो इश्क़ तो होवे ही होवे, तो महाराज हमें भी हो गया। निश्चित इसके लिए डॉक्टर माला कपूर गौहर और रियल संयोजक के साथ एंकर भी  की तरह महफ़िल ए बारादरी नामक जहाज को संभाल कर रखने वाले आलोक यात्री जी। मैंने कुछ ज़्यादा तारीफ़ तो नी कर दी। अब कर दी तो कर दी भाया 🤠🤠🤠🤠🤠🤠🤠🤣 बुरा लगे तो हैप्पी 🫟।

         9 नवंबर को रैपिड 🚇 का आनन्द लेते हुए मेरठ से गाजियाबाद और फिर  रैपिडो का साथ,लो जी जा पहुंचे सिल्वर लाइन प्रेस्टिज स्कूल वो भी टैम से पहले। ठीक सवा तीन बजे आलोक जी ने माइक संभाला, दीप प्रज्ज्ववलन के बाद मित्र इंद्रजीत सुकुमार द्वारा सरस्वती वन्दना प्रस्तुत की गई फिर माइक संभाला तरुणा मिश्र जी ने और लो जी कार्यक्रम विधिवत शुरू हो गया। इस बार की महफ़िल गज़लों के उस्ताद शायर कृष्ण बिहारी ''नूर'' की जन्मशताब्दी के अवसर पर विशेष आयोजन के तहत रखी गई।  मुख्य अतिथि नीना सहर,  गोविन्द गुलशन, डॉक्टर सुधीर  त्यागी जिन्हें इस बार "बारादरी जीवन पर्यन्त साहित्य सृजन सम्मान" से नवाजा गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता इरफ़ान आज़मी जी ने की। सुरेन्द्र सिंहल जी, इंद्रजीत, दीपक श्रीवास्तव, बी के शर्मा जैदी, जगदीश पंकज, सुधा गोयल, वेद प्रकाश, रवि पाराशर, विपिन जैन, तारा गुप्ता, अनिमेष शर्मा, ईश्वर सिंह तेवतिया, ताबिश खैराबादी, असलम राशिद, डॉक्टर रणवीर सिंह परमार, संजीव शर्मा, संजीव निगम, नरेंद्र शर्मा, शोभना श्याम, राजेश श्रीवास्तव, सोनम यादव, मनीषा जोशी, उषा श्रीवास्तव, विनोद तोमर, पवन तोमर, सुभाष चंदर,विवेक वशिष्ठ, कपिल खंडेलवाल, तूलिका सेठ और भैय्या मित्र विनय के साथ विक्रम और विक्रम के साथ सिंह साहब दी ग्रेट,। देख लो जी कितने पॉवर फूल मित्र मण्डली है हमारी💪🏼💪🏼💪🏼👊🏼। अब इतने सारे महानुभावों के बीच हम भी जींस के ऊपर बाटीक प्रिंट वाला खादी का कुर्ता पहने ख़ुद को तुर्रम खां समझ रिए थे। भाई साहब अपनी भी बारी आई और भैय्या कोई सत्रह अठारह बरस पहले की ताज़ी ताज़ी ग़ज़ल लपेट दी। ग़लती से अच्छी बात ये रही दोस्तों ने वाह वाह भी कर दी मतबल पप्पू पास हो गया 🤩😝😝😝🤪🤪🤪🤪🤪 हेल्लो हेल्लो ऐ जी क्या कै रिए हो आपको भी पढ़नी है तो लो जी पढ़ लो बधाई अगली बार दे देना 😅😅😅😂

माया काया फेर में पड़कर, उलझे जाने कितने लोग 
दूर तमाशा देख रहे थे, हम जैसे अंजाने लोग 

ठगनी माया कब ठहरी है, एक जगह तू सोच ज़रा 
बौराए से फिरते रहते ,कुछ जाने पहचाने लोग 

बाहर से काला कोई, अन्दर से काला होता है 
भेद समझ न पाए अब तक, कैसे हैं बचकाने लोग 

हंसना रोना खोना पाना,जीवन के हैं रंग कई 
दुःख से भागे मयखाने में, पैमाने पी जाते लोग 

जिसकी गाड़ी ने कल बदला, इंसानों को लाशों में 
उसके दर पे कब से बैठे, मांग रहे हर्जाने लोग 

इसकी उसकी तेरी मेरी, फ़िक्र करी है कब ख़ुद की 
बस छोटी मुस्कान की खातिर, लूट जाते दीवाने लोग 

कितना समझाया लोगों ने, नहीं समझ पर कुछ आया 
हंसते हंसते जान गवा दें, कैसे हैं 
मरजाने लोग 

मैंने तो दस्तूर निभाया, हंस कर उनसे बातें की 
बिला वज़ह गढ़ने लगते हैं, कितने ही अफसाने लोग 

ऊंची ऊंची बातें करना जिनकी फ़ितरत होती है 
उतने ज़्यादा घर में गहरे रखते हैं तैयखाने लोग 

आंधी और तूफ़ानों से ये, दीप नहीं' बुझने वाला 
धरती पर दो चार बचे हैं, हम जैसे परवाने लोग 

--प्रदीप -- 08082008 (मीठी बाई कॉलेज, मुम्बई)

मुक्तक 
 भले दूरी नहीं कुछ भी, मगर दूरी सी लगती है।
अधूरी हैं कई ईप्साएँ, पर पूरी सी लगती हैं।
तुम्हीं बतलाओ इन सबसे, मैं बाहर आऊँ अब कैसे,
करूं न कुछ अगरचे मैं, तो मजबूरी सी लगती है।।
प्रदीप डीएस भट्ट-1572025

         और अंत में भाई साहब जब पढ़ने वाले चालीस पचास हों और एंकर एक तो तकलीफ़ तो होती है वो भी बड़ी वाली। सब कवियों/ शायरों की शान में एक डेढ़ शेर तो पढ़ना ही पड़ेगा न तो अगर 50 कवि हुए तो कम से कम 100 मिनिट फिर बार बार उठना बैठना वो भी चेहरे पर डेढ़ इंच मुस्कान लिए और फिर अपना नम्बर आने पर कविता भी पढ़नी। महाराज चार साल 2003-7 में करके देख चुके हैं। जल्दी समझ में आ गया मियां ये रोग हमारे बस का न है। सो भैय्या प्रवचन कर्ता थोड़ी ठंड रक्खा करें एंकरिंग कोई मूंग की दाल का हलवा नही है बल्कि उड़द की दाल का हलवा है खाना आसान है पचाना मुश्किल। यकीं नई तो एक बार ट्राई करके देख लो मियां और मियन। वरना बकौल पाकिस्तानी एंकर" काँपे टांग जाएंगी" 😻😻😻😻😻🙆‍♂️🙆‍♂️🙆‍♂️
जय श्रीराम 

प्रदीप डीएस भट्ट - 1211025

Wednesday, 15 October 2025

जबरा मारे रोने न दे ( बुलडोजर बाबा से पंगा)


"जबरा मारे रोने न दे "
(बुलडोजर बाबा से पंगा) 

रहिमन जिह्वा बावरी, कह गई सरग पाताल,
आप कह भीतर भई, जूती खाए कपाल। 

         आज से करीब 969 बरस पहले जब रहीम दास जी ने इस दोहे की रचना की होगी तो उन्हें थोड़े ही पता था कि 2014 में भाजपा जब केंद्र की सत्ता में आयेगी और तीन बरस बाद उत्तर प्रदेश में 2017 में योगी आदित्यनाथ उर्फ़ बुलडोजर बाबा सत्ता संभालेंगे तब इस दोहे को दो चार लमढींग पूरा पूरा मान सम्मान देंगे और बदले में पता नही अपना क्या क्या लाल करवाएंगे और सिर्फ़ अपना नही अपने रिश्ते नाते दारों का भी। वो क्या है न जब योगी बाबा जी किसी का इलाज़ करते हैं तो वो गर्म तवे पर आस पड़ोस, रिश्तेदारों और ऐसे लमढींगो के हम दर्दों का भी इलाज़ कर देते हैं ताकि न रहे बांस न बजे बासुंरी। तुम्हें मेरी सच्ची वाली मुहब्बत की कसम यकीन कर लो सच कै रिया हूं इसी में भलाई है महाराज। जिसे भी लगता हो योगी जी उसके साथ ज्यादती कर रहे हैं वो एक बार इनके फेरे में पड़कर देख लो भाई इलाज़ के पहले चरण में ही पांच वक्त का नमाजी भी सु प्रभात और शुभ संध्या कहने लगता है। अगर कोई ज़्यादा ही ढीठ हुआ तो उसका इलाज़ जैसे जैसे अंतिम चरण में पहुंचता है उसे अपनी आठवीं पीढ़ी सनातनी नज़र आने लगती है और फिर वो योगी जी के चरणों में लोट पोट होकर जय श्री राम राधे राधे कहता हुआ इलाज़ को रोकने की मिन्नतें करने लगता है। 

         आपको याद होगा सम्भल वाले बर्क मियां, अरे महाराज नाराज़ काहे होते हो 2011 में भीमनगर बनाया था मायावती ने नमाजवादी ने 2012 में फ़िर से सम्भल कर दिया। वैसे भाई साहब शास्त्रों के हिसाब से सतयुग में सम्भल का नाम सत्यव्रत , त्रेता में  महदगिरि और द्वापर में पिंगल  वैसे कलयुग में नागभट्ट द्वितीय के लिखे ताम्र शिला लेखों में इसका नाम शम्भुपल्लिक है । पता नी किसने इसका नाम सम्भल कर दिया। हां तो महाराज सीनियर वाले बर्क मियां अजी वही नमाजवादी पार्टी के बड़डे वाले नेता जी भाई साहब जब भी मुंह खोलते थे ऊटपटांग ही बोलते थे। शफ़्फाक दाढ़ी और कपड़ों में लिपटे डेढ़ सौ ग्राम के मियां बर्क योगी बाबा के प्रकोप से जैसे तैसे बच गए इसलिए पहली फुर्सत में निकल लिए लेकिन जूनियर बर्क की एक ग़लती देखो क्या करा गई अभी तक कसमसा रहा है। योगी जी टैम टैम पर मुग़ली घुट्टी 555 की डॉज देते रहते हैं।  कुछ ऐसा ही दुस्साहस इलाहाबादी माफिया का हुआ अजी क्या नाम था उसका हां हां हां याद आया अतीक अहमद उर्फ़ अतीकवा याद आया न कोर्ट में किसी ने अतिकवा कहा तो भड़क गया था। योगी जी पूरे प्राण जाए पर वचन न जाए की तर्ज पर शोले के गब्बर की तरह विधानसभा में दहाड़े मिट्टी में मिला देंगे और भाई साहब कोर्ट से निकलते ही अतिकवा के साथ उसका सगे वाला भाई अशरफ़ का भी हैप्पी वाला बर्थडे। उसके बाद वो मूंछों पर ताव देते एक और माफिया मुख़्तार अंसारी भाई साहब क्या तूती बोलती थी, योगी जी की वक्र दृष्टि पड़ी और उसका भी जेल में ही जय श्रीराम।

         रामपुर के चौधरी आज़म ख़ान जो अपने आप को आबे जम जम खान समझने की भूल में थे, पहले कोंग्रेस ने सहारा दिया और फिर नमाजवादी पार्टी ने सीधे सर पर बिठा लिया। जरा सोचिए 2012-2017 में जनाब के क्या जलवा ए जलाल थे। एक मुख्यमंत्री अखिलेश एक आज़म ख़ान और आधे बाक़ी यादव यानि कुल जमा ढाई मुख्यमंत्रियों की बारात लेकिन आज़म ख़ान का जलवा बस पूछो मति। जब आदमी पॉवर में होता है तो आएं बाएं शाएं कुछ भी बोल देता है बस ग़लती से मिस्टेक इन्होंने भी कर दी और लोकसभा में अपने टर्म में बोलते बोलते कुछ ज्यादा ही जौहर दिखा गई और भैय्या बोल गए राष्ट्रपति भवन से ज़्यादा बेहतर तो जौहर यूनिवर्सिटी है। बस उस दिन से उनका सितारा ऐसा गर्दिश में आया है कि अभी अभी जेल से बाहर आ पाए हैं। इल्ज़ाम भी कैसे कैसे, भैंस चोर, जमीन चोरी मतबल कुल मिलाकर मुकदमों की सैंचुरी हो गई है। बुरे वक्त में नमाजवादी पार्टी ने भी मियां साहब की खूब फिरकी ली। अब जेल से बाहर आएं हैं तो अपने आपको सनातनी घोषित करने में लगे हैं और बात बात में भगवान राम और कृष्ण का गुणगान अलग से। लेकिन एक और कहावत है क़िस्मत में हों ककंर, तो क्या करेंगे शंकर सो भैय्या अभी आज़म ठीक से स्वांस भी नहीं ले पाए थे कोर्ट ने फर्जी पैनकार्ड मामले में बाप बेटे को सात सात साल की सजा मुकर्रर हुई है। पचास हज़ार का जुर्माना अलग से।

         अब आप खुदई सोचो बाबा जी की वक्र दृष्टि से ऐसे ऐसे तीस मार खां न बचे तो फिर तौक़ीर रजा किस खेत की मूली है। ऐं जी कौन तौकीर रजा अरे भाई बरेली वाले अहमद रज़ा खान बरेली आंदोलन के जनक ये कलमुंहा उन्हीं का परपोता है। कहने को तो इस्लामी धर्म गुरु हैं  बरेली मसलक के धार्मिक नेता और राजनैतिक दल इत्तेहाद ए मिल्लत परिषद् के संस्थापक भी। अब धर्म नीति में पिछवाड़े से राजनीति भी करनी है सो पड़ोसी रामपुर जिले के आज़म खान और सम्भल के बड़े वाले बर्क मियां की तरह इन्हें भी अनाप शनाप बोलने की सुरसुरी उठी। अब सुरसुरी उठी तो उठी। मौक़ा कोई भी हो दस्तूर कोई भी हो तौक़ीर मियां को तो बोलना ही बोलना है सो समजवदिया पार्टी की शय पाकर देश के ख़िलाफ़ बोलने के इस बंदे ने सारे रिकॉर्ड ही तोड़ डाले। जितना ज़्यादा कड़वा बोले उससे ज़्यादा सरकारी ग़ैर सरकारी सम्पत्ति पर कब्जा करते रहे। न कोई रोकने वाला न कोई टोकने वाला। किसी ने ज़्यादा चू चपड़ की तो एक आवाज़ पे हज़ारों लोग सड़को पर। जिले की क्या औकात जब तौकीर के तार लखनऊ और दिल्ली से जुड़े हों। लखनऊ में समजवदिया पार्टी और केंद्र में पापिन कॉन्ग्रेस। कोई करे भी तो क्या करे। 2010 का दंगा इस बात का जीता जागता उदाहरण है जी। लेकिन तब मुख्यमंत्री थीं मायावती तौक़ीर की मुश्कें बंधवाकर लखनऊ मंगवा लिया पर कर कुछ न सकी। ऊपर से दबाव और तौक़ीर शान से बिना मूंछों के होते हुए भी ताव देता हुआ वापिस बरेली वो भी पूरी शान ओ शौकत से वो भी ये कहते हुए की बरेली का झुमका हूं बरेली में ही सजूंगा।

         लेकिन कहते हैं न "समय समय की बात है समय बड़ा बलवान, खड़ी गोपियां लुट गईं वही अर्जुन वही बाण " तो भैय्या 2017 में उत्तर प्रदेश में आ गए बाबा जी वो भी लठ्ठ लेकर और मुनादी करा दी "गुंडन गुंडई छोड़ दें या उत्तर प्रदेश" वरना हम छुड़वा देंगे और महाराज उसके बाद जो गुंडन और माफिया की डेटिंग पेंटिंग,धुलाई रंगाई पुताई होनी शुरू हुई वो बदस्तूर जारी है।  जो प्रेम से माना उसे लड्डू जो नहीं माना उसे लठ्ठ और जो ख़ुद को ख़ुदा समझने के फेर में था उसकी बत्ती जड़ से गुल। इधर इस चौराहे पर लड़की पर फब्ती कसी उधर अगले चौराहे पर यमदूत तैयार। कुछ जड़ बुद्धि फिर भी नहीं माने तो बाबा जी ने पहली फुर्सत में ऑपरेशन लंगड़ा लॉन्च कर दिया। हर दूसरे दिन पैर में गोली लगे लंगड़ाते हुए तीन चार छुटभैय्ए नेता और कुछ टुच्चे से टट पुंजीए। तो हुआ यूं कि बरेली वाले तौक़ीर मियां की जीभ को फिर खुजली हो गई कि कुछ अनाप शनाप भौं भौं शुरू कर दी। लोगों ने बहुत समझाया मियां बाबा जी की दृष्टि आपके कुकर्मों पर पहले से ही और पंगा मति लो पर तौक़ीर कहां मानने वाला था सो आई लव मुहम्मद पर 25 सितम्बर को आएं बाएं शाय बोल गया। प्रशासन सख़्त हुआ तो इसने अगले दिन 26 को शुक्रवार को हजारों की भीड़ इक्ट्ठी करके प्रशासन को चुनौती दे डाली। बात बाबा जी तक पहुंची, तौक़ीर का रसूख दादागिरी और बहन मायावती जैसी सख़्त प्रशासक के बावजूद उसकी दबंगई की चर्चा हुई। बाबा जी ने सख़्त आदेश दे डाला बाबा जी की ओर से खर्चा पानी दे दो साथ में बहन मायावती की जो किरकिरी हुई थी उसका भी हिसाब किताब करो। अब ये बंदा मुगालते में था बाबा जी मेरा क्या ही उखाड़ लेंगे हम तौक़ीर हैं हमने तो समजवदिया और बसपा प्रमुख को भी घुटनों पर ला दिया तो योगी जी किस खेत की मूली हैं। ये सुनकर इधर बाबा जी धीरे से मुस्कुराए और उधर बरेली में लठ्ठ चालू और अगले तीन चार दिन में बाबा जी ने तौक़ीर समेत कइयों को समझा दिया बाबा जी ख़ेत की मूली नहीं बड़े वाले मठ के मूला हैं। लठ कहां से घुसेगा और कहां से निकलेगा ख़ुद बाबा जी को भी न पता हां नई तो। 

         अब तोकीर रजा अब गिड़गिड़ा रहा है जुगाड लगा रहा है कह रहा है कि योगी जी कसम से पूरी जिंगदी किसी मंदिर में भजन कीर्तन सत्संग करके काट लूंगा बस बख़्श दो।दंगा फसाद आगजनी तोड़फोड़ तो दूर मुंह भी नहीं खोलूंगा बस बख़्श दो लेकिन महाराज योगी आदित्यनाथ नाथ तो ठहरे पक्के वाले बाबा जी पहली फुर्सत में तौक़ीर को फतेहगढ़ जेल भेजा दस बीस मुक़दमे दर्ज, अगली पिछली कई पीढ़ियों की जन्मकुंडली खंगाली गई फिर शुरू हुआ बरेली में स्वच्छ भारत अभियान का श्रीगणेश। तौक़ीरवा के दूर के पास के सभी रिश्तेदारों पर योगी जी का नजला गिर रहा है। ऐंठन बैठन, हेकड़ी वेकड़ी रंगबाजी छिनैति गिरी सब हवा। इतना बड़ा एक्शन लिया है बाबा जी ने कि तौक़ीर के रिश्तेदार ही उसके जानी दुश्मन बन गए हैं। जब तौक़ीर के कारण कब्ज़ा कर रहे थे तो सब अच्छा था लेकिन अब छिन गया तो आप समझ रिए हो न मैं क्या कै रिया हूं। नाते रिश्तेदारों की तौक़ीर से इस कदर नाराज़गी बढ़ गई है कि दूर के सूत्रों से ये ख़बर मिली है कि कुछ लौंडे लपाडो को तौक़ीर के साथ वही करने के लिए कहा गया है जो पाकिस्तान में इमरान खान के साथ जेल में हुआ है। सच्ची कै रिया हूं ये सजा कुछ ज़्यादा न हुई मियां पर भाई जान से बढ़कर कुछ थोड़े है सो जान बची तो.......।


प्रदीप डीएस भट्ट - 20112025
व्यंग्यकार मेरठ 



Friday, 12 September 2025

"आँख बन्द डिब्बा गायब"

"आँख बन्द डिब्बा गायब" 

         तो हुआ यूं कि टीवी पर वोट चोर गद्दी छोड़ का नारा सुनते सुनते ससुरे कानों ने अपनी जगह से लगभग उखड़ते हुए बिल्कुल दोनों दीदो के बीच आकर कहा अबे सुनो राहुल गाँधी की नौटंकी से हमारे यानि कानों के सिर में दर्द हो रहा है। आख़िर हम भी एक हद तक ही डेसिबल डेसिबल झेल सकते हैं। बड़े व्यंग्यकार बने फिरते हो सुनो हमें अभी अभी गुप्त सूचना प्राप्त हुई है कल राहुलवा हाइड्रोजन बम फोड़ने वाला है हम पे रहम करो और वहां ले चलो ज़रा प्रत्यक्ष देख सुन लें।कानों के रौद्र रूप को देखते हुए हम अगले दिन कोटला जा पहुंचे वो भी 9 बजे 10 बजे हाइड्रोजन बम फटने का समय जो निश्चित था पहुंचें तो पता चला बम फूटने का समय 10 की जगह 11 हो गया है। बस फिर क्या था हमने कांग्रेस मुख्यालय के हॉल में टहलना शुरु कर दिया  तभी हॉल में टंगी एक फोटो ने हमें खोपचे में आने का इशारा किया। हमने इधर उधर देखा तो फुटवा बोली वोट चोरी का हाइड्रोजन बम फूटता देखने आए हो बे हमने हां में मुंडी हिलाई और परिचय जानना चाहा तो तस्वीर ने नाम पट्टिका से धूल हटाने को कहा, हमने धूल हटाई तो मटमैले कलर में "एलन ऑक्टेवियन ह्यूम" लिखा दिखा। हमने मस्ती में पूछा तुम यहां काहे टंगे हो बे। तस्वीर फिर बोली मैं एक ब्रिटिश सिविल सेवी, एक पक्षी विज्ञानी और वनस्पति विज्ञानी था। मति मारी गई थी मेरी जो मैंने भारतीयों और ब्रिटिशस के मध्य एक सेफ़्टी वाल्व के रूप में कार्य करने के लिए 28 दिसम्बर 1885 में 72 लोगों (भाई साहब आप 72 हूरें न पढ़ लेना, हां नई तो) के साथ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना कर डाली । 

         तस्वीर ने एक लम्बा पॉज लिया फिर बोली कांग्रेस पार्टी के उद्भव से लेकर आज तक न जाने कितने अध्यक्ष बने या बनाए गए कभी चोरी से कभी सीना जोरी से लेकिन मजाल है किसी दूसरे कॉन्ग्रेसी नेता ने चूं चपड़ की हो और करते भी कैसे कुछ दिनों या महीनों में ही चूं चपड़ करने वाले का नाम," राम नाम सत्य" में जो विलीन हो जाने का ख़तरा जो रहता था। कभी ट्रक के नीचे कभी होटल के कमरे में खूबसूरत लाश के रूप में तो कभी हवाई जहाज़ में उल्टे लटके हुए। वैसे कुछ भी कहो हवाई जहाज़ में मरने का अलग ही मज़ा है लेकिन इसके लिए आपके पास कुछ ख़ुफ़िया राज होने चाहिए ऐसे ही कोई इत्ते महंगे हवाई जहाज़ की बली थोड़े दी जाएगी भाई साहब किसी ऐरे गेरे के लिए। इसके लिए ऐसे वैसे और न जाने कैसे कर्म कुकर्मों की आह लेनी पड़ती है जी। वैसे ख़तरा मतलब वो जो सफ़ेद बोर्ड पर एक नरमुंड पर लाल रंग से क्रॉस निशान, अबे बात समझ में आई या नहीं। अब भला किसको शौक होगा जो उस नरमुंड की जगह अपना मुंड लटकता देखना चाहेगा।  ख़ैर असली वोट चोरी या तुम उसे डकैती कहना चाहो या लूट कह लो। मैं तुम्हें आंकड़े देता हूं लेकिन शर्त इत्ती सी है तुम जाते जाते मुझे यहां से चुरा कर ले जाना। मैंने हां में फिर से मुंडी हिलाई तो तस्वीर बड़बड़ाते हुए बोली चलो  कागज़ पेंसिल उठाओ और लिखना शुरू करो। 

       👉  एक *  देखो भैय्या आज़ाद भारत में वोट चोरी नहीं बल्कि वोट डकैती डाली गई थी। 1946 में 15 कॉंग्रेस प्रान्तीय समितियों को कॉंग्रेस अध्यक्ष का चुनाव करना था 15 में से 12 ने सरदार पटेल को वोट दिया 3 ने बहिष्कार किया और नेहरू को वोट की जगह मिला बाबा जी का ठुल्लू लेकिन अध्यक्ष कौन बना नेहरू। इससे सिद्ध होता है खुदा मेहरबान तो गधा पहलवान।  👉  दो ** 1951 में जम्मू कश्मीर में चुनाव डिक्लेयर हुए । नेहरू शेख अब्दुल्ला को मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे। सीट बंटवारे में कश्मीर घाटी को 43 जम्मू रीजन को 30 और लद्दाख को केवल 2 सीट दी गईं। कॉन्ग्रेस ने चुनाव न लड़ने का फैसला किया ताकि नेशनल कॉन्ग्रेस आसानी से चुनाव जीत जाए। तीसरी पार्टी थी प्रजा परिषद् चूंकि उसका घाटी में कोई आधार नहीं था इसलिए प्रजा परिषद् ने  जम्मू रीज़न में चुनाव लड़ने का फैसला किया लेकिन कॉन्ग्रेस की दख़ल पर तत्कालीन चुनाव आयुक्त ने  नॉमिनेश में 13 उम्मीदवारों के पर्चे ख़ारिज कर दिए इस पर प्रजा परिषद् ने पहले जम्मू कश्मीर में फिर दिल्ली में प्रोटेस्ट किया और नेहरू को इस गड़बड़ी की चिट्ठी लिखी लेकिन जब कोई एक्शन नहीं हुआ तो प्रजा परिषद् ने चुनाव बहिष्कार की घोषणा कर दी। 👉  चार ** बाबा साहब अम्बेडकर नॉर्थ बम्बई से 1952 में 14  हज़ार वोटों से हारे और वोट कैंसिल हुए 78000। जय प्रकाश नारायण जी ने भी कहा कुछ नही बहुत बड़ी गड़बड़ है।अब तनिक आप ही सोचो "दया कुछ गड़बड़ है " से पहले भी कांग्रेस कुछ गड़बड़ है वामपंथियों कुछ गड़बड़ है चल रहा था। इसलिए डंके की चोट पर अम्बेडकर जी ने कोर्ट में केस फाइल किया और कांग्रेस और वामपंथियों को कटघरे में खड़ा किया।

         👉 पांच ** 1952 में रामपुर में मौलाना आज़ाद चुनाव लड़े मगर बीस हज़ार वोटों से हार गए, रिटर्निंग ऑफिसर ने रिज़ल्ट भी डिक्लेयर कर दिया तभी नेहरू जी ने गोविन्द वल्लभ पंत को फोन कर कहा कि मौलाना आज़ाद चुनाव नही हारने चाहिए। पंत जी बोले महाराज डीएम रिजल्ट डिक्लेयर कर चुका है तो नेहरू जी ने तुरन्त धमकी दी अगर मौलाना की शिकस्त हुई तो तुम्हारी कुर्सी गई। पंत जी ने आनन फानन में डीएम को फोन लगाया और बोला अगर मौलाना हारा तो हम दोनों की कुर्सी जाना तय है कुछ करो, फिर डीएम जीते हुए उम्मीदवार के बक्से से वोट निकालकर मौलाना के बक्से में डाले और लो जी मौलाना जीत गए जी। गांधी जी की किताब सत्य के प्रयोग का सबसे उम्दा उदाहरण। प्वाइंट नम्बर छः ** कैलाश नाथ वाँचू जिनके पास नॉर्मल लॉ की डिग्री भी नही थी कॉन्ग्रेस ने 24 अप्रैल 1967 में उन्हें चीफ़ जस्टिस ऑफ इंडिया बना दिया। भाई साहब खुदई सोचो ऐसे ऐसे काम कांग्रेस के अलावा और कोई कर सके है। अब इसे वोट चोरी तो नहीं संवैधानिक लूट कह सकते हैं। प्वाइंट नम्बर सात** रायबरेली चुनाव में सो कॉल्ड आयरन लेडी ने वोट की चोरी नही की वरन डकैती डाली, उत्तर प्रदेश के हाई कोर्ट ने 1975 में राज नारायण की याचिका पर 1971 के चुनाव का संज्ञान लिया और परिणाम रद्द कर दिया। बस आयरन लेडी को गुस्सा आ गया 25 जून को आपातकाल लगा दिया। 👉 ** गोपाल स्वामी मुख्य चुनाव आयुक्त ने नवीन चावला की लिखित शिकायत दर्ज कराई कि चुनाव आयोग की महत्वपूर्ण सूचनाएं चावला द्वारा कांग्रेस को लीक की जा रही हैं। कांग्रेस ने कहा चावला हमारा बच्चा है ये तो यूं ही दुग्ध पीएगा। मतलब वोट चोरी चुनाव आयोग के एक लपाड़े के द्वारा नही बल्कि आधा चुनाव आयोग ही चोरी हो गया।

         👉 ** जस्टिस बहरुल इस्लाम आसाम हाई कोर्ट के जज पहले इस्तीफा देते हैं फिर कांग्रेस के टिकिट पर चुनाव लड़ते हैं, लोकसभा चुनाव कैंसिल हो जाता है तो फिर उन्हें राज्य सभा भेजा जाता है बाद में इस्लाम मियां इस्तीफा देते हैं फिर उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज बना दिया जाता है। अब लगाते रहो हिसाब ये चोरी है,लूट है या डकैती। 👉 ** जब 21 मई 1991 में राजीव गाँधी की हत्या हो गई तो चुनाव आयोग ने राजीव गाँधी की सीट कैंसिल नहीं की वरन पूरे देश के चुनाव को 21,22 दिन आगे बढ़ा दिया ताकि कॉन्ग्रेस राजीव गाँधी की अस्थियों को देश में लेकर घूम सके। अब खुदई सोचो जो पार्टी चुनाव आयोग को जेब में रखकर चलती थी आज वो चुनाव आयोग के पीछे हाथ धोकर पड़ी है। 👉 ** अधीर रंजन चौधरी जो कॉन्ग्रेस के पिछले लोप ( लीडर ऑफ ऑप्जिशन) रह चुके हैं खुदई कॉन्ग्रेस से अलग होकर बनी TMC यानि तुड़ी मुड़ी कांग्रेस पर आरोप लगा रहे हैं कि ममता नामक दीदी खुदई 35,40 लाख फर्जी वोट लिए घूम रही है।
👉 ** के एन राजन्ना कांग्रेस लीडर ने राहुल गांधी के वोट चोरी के आरोप पर उल्टा सवाल दागते हुए कहा कि कर्नाटक में यदि वोट चोरी हुई है तो कांग्रेस कर्नाटक में कैसे जीती। बस तुरन्त दिल्ली से फोन खड़क गया और परिणाम बेचारे राजन्ना की बलि से खत्म हुआ।

आँख बंद डिब्बा गायब
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👉** चारा चोर का टाइटल गले में लटकाए घूम रहे ललुआ जी से जब बीबीसी एक पत्रकार पूछे कि बालू जी जहां आप जीतने की स्थिति में होते हैं वहां आप जीतते हैं कोई बात नही लेकिन जहां सबको पता है आप हारेंगे वहां कैसे जीतते हो ललुआ जी, तो भैय्या जी ललुवा जी बोले "आँख बन्द डिब्बा गायब " 👉 ** राहुल गाँधी ने वोट चोरी नामक वाहियात इल्ज़ाम चुनाव आयोग एवम् वर्तमान सरकार पर लगाया और उस पर बाकायदा PPt प्रेजेंटेशन तैयार कर कुछ सो कॉल्ड पत्रकारों एवम् स्टूडेंट्स के सामने प्रेजेंट किया। अब भईया जब उस प्रेजेंटेशन को अपलोड करने का रियल टाइम चैक किया गया तो पता चला ये तो म्यांमार से अपलोड किया गया है। मतलब आंकड़ा खुद का चोरी हुआ अब कै रिए हैं हाइड्रोजन बम फोड़ूगा। अब उनकी ही बाल्टी के लोग हाथ जोड़कर कह रहे हैं रहने दे भाई तेरे से न होगा। क्यूँ बेइज्जती में दाग लगवाने पर तुला है,चल हवा आने दे । 👉** राहुल गाँधी के वोट चोरी के आरोपों के बहकावे में आकर पता नही कॉन्ग्रेस के किस भक्त ने मद्रास हाई कोर्ट में याचिका लगा दी साथ ही कोर्ट को चुनाव आयोग को दिशा निर्देश देने के लिए कहा। अब भाई साहब पहले चौकीदार चोर पे सुप्रीम हंटर खाकर भी ये लकड़बग्घे सुधरे नही तो कोर्ट है वो भी हाई वाली आ गया गुस्सा वो भी हाई वाला, पहले तो याचिका कर्ता को ढंग से रगड़ा फिर एक लाख का अर्थ दण्ड लगा दिया । अब वो बंदा सोच रहा है नमाज़ बख्शवाने गया था ई ससुरा तो रोज़ा ही गले पड़ गया जी। 👉 
** एक सो कॉल्ड सोफिलोजीस्ट संजय कुमार जिनके ट्वीट से ही कॉन्ग्रेस ने वोट चोरी का फंडा विकसित किया। अब जब संजय कुमार कह चुके हैं माफी मांग चुके हैं कि ये एक टाइपिंग एरर था तो सवाल ये है कि इतना लम्बा एरर हुआ कैसे और हुआ तो पढ़ा कैसे और पढ़ा तो किसने इसे समझा कैसे मतलब संजय कुमार महाभारत के संजय बनने की कोशिश में संजय एरर बन गए। सच्चाई ये है कि ये सारी कारगुज़ारी कॉन्ग्रेस को पुनर्जीवित करने के लिए थी लेकिन कॉन्ग्रेस के राजकुमार कभी हाइड्रोजन कभी नाइट्रोजन बम को फुस्सी बम बनाकर फोड़ रहे हैं जिससे कांग्रेस परमानेंट कोमा में चली जाए। 👉** निशित कटारिया को हरियाणा युवा कांग्रेस अध्यक्ष बना दिया। भाई साहब कमाल तो ये है नीतीश पुत्र राजकुमार निषेध पुत्र सुखबीर बन गया और सुखबीर की पत्नी और पता नी कौन कौन रिश्तेदार के फर्जी डॉक्यूमेंट के आधार पर घने सारे फर्जी वोट ठोक दिए। मजे की बात जे है कि अकेले गुरुग्राम में इस बंदे पे सौ से ज्यादा केस विचाराधीन।

        और भैय्या अंत में वोट चोरी के अलावा कॉन्ग्रेस पार्टी जाति चोरी में भी बड़ी माहिर है। अब देखो ने जवाहर लाल कौल ( इससे पहले के इतिहास में जाऊंगा तो कोई अब्दुल निकलेगा ये विषय अलग है कि उस अब्दुल के दादा किशन लाल ही होंगे) जवाहर लाल नेहरू हो गए, किसी ने पूछा क्या कैसे?, फिरोज ghandy फिरोज गाँधी हो गए। एंटोनियो माइनो सोनिया गाँधी, प्रियंका गाँधी वाड्रा हो गईं लेकिन भाई साहब गाँधी सरनेम को पकड़ के रक्खा हुआ है आखिर भविष्य वाड्रा में थोड़े ही है ghandy में भी नहीं अगर भविष्य है तो वो है गाँधी में। गाँधी जी भी सोच रहे होंगे, अमा क्या सोच रहे होंगे अपना सिर धुन रिए होंगे, हां नई तो।

प्रदीप भट्ट - व्यंग्यकार 22.09.2025

Tuesday, 9 September 2025

"बेचारा गांधी "

        "बेचारा गांधी"
 
          अँधेरी रेलवे स्टेशन से निकलकर बाहर आया तो देखा दूर-दूर तक न कोई ऑटो न टैक्सी अलबत्ता पानी ज़रूर भरा हुआ मिला जिसमें छप छपाक की इक्का दुक्का आवाज़ें गूंजती मिली। नीचे भी तीन फुट पानी और ऊपर से राम जी का पानी और वो भी रात के सवा दो  बजे। थोड़ी देर संशय के सागर में गोते लगाते हुए  तय किया कि पैदल ही चले चलते हैं। पिट्ठू को पीठ पर लादा और सीधे एस वी रोड़ क्रॉस करके जुहू गली की तरफ़ मुड़ गया। पानी में छप छपाक की आवाज़ लगातर हुए जा रही थी तभी लाठी की ठक् ठक सुनाई पड़ी। पीछे मुड़कर देखा तो बिलकुल गांधी जी वाले गैटअप में लम्बी लम्बी डग भरते हुए एक कृष काय काया फासला कम करती हुई मुझसे आ लगी। मैंने ने यूं ही पूछ लिया चच्चा इत्ती रात में किधर टहल रिए हो, एक क्षण के पॉज के बाद आवाज़ आई चच्चा नही बप्पा मैंने हँसते हुए कहा उन्हें तो 6 सितम्बर को विसर्जित कर दिया।चश्मे पे पानी की बूँदों को झटकटते हुए वो कृष काया में फिर कंपन हुई और इस ज़रा सख्त आवाज़ आई तो फिर बापू कहो मैं मोहन दास करम चन्द गांधी उर्फ़ महात्मा गाँधी उर्फ़ राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी। मैंने फिर मज़ाक किया ये क्या चचा भारत वर्ष, हिंदुस्तान और इंडिया की तर्ज़ पर अपना गुणगान कर रिये हो। इस बार कोई प्रतिक्रिया न आई तो मुझे लगा इस बहरूपिये ने गांधी जी की किताब "मौन सर्वार्थ साधकम" का पालन किया है।थोड़ी देर बस छप छाप की आवाज़ ही गूंजती रही।

          जुहू सर्कल से मुड़ते हुए मैंने उस कृष काय काया को फिर से देखा और उल्टा सवाल दाग दिया लगता है चच्चा लगे रहो मुन्ना भाई के किरदार में अभी तक धंसे हुए हो मैं संजय दत्त नहीं प्रखर दत्त हूं और हां ये तीन फुट भरे पानी में तुम्हारी लाठी की आवाज़ कैसे क़ायम है। वो कृष काया बोली देख भाई प्रखर दत्त पहले मेरी बात ध्यान से सुन मुझमें पहले दम था पर अब न है। अगर ये लाठी न हो तो तो मुझे कोई पहचाने भी न।  पता नहीं मेरे कैसे कैसे और किस किस रंग रूप के स्क्रपचलर बना दिए जा रहे हैं जिसमें मैं न मोहन दास लगता हूं, न करम चन्द और महात्मा तो बिल्कुल नहीं लेकिन लोग उस स्क्रपचलर के हाथ में लाठी देखकर समझ लेते हैं कि यही होगा वो जिसने सो कॉल्ड चरखे से आज़ादी दिलाई पर सच्ची बात तो ये है उस चरखे से इत्ता सुत भी न कता जिससे मैं अपनी दो चार धोती बना लेता। खैर देख भाई तू मेरा एक काम कर मुझे परसों सुबह तक अपने घर में छिपा के रख ले। तेरा घर तो यहीं जुहू में ही है न और हां मेरी लाठी मेरी धोती में फंसी हुई है जिससे तीन फुट पानी में भी लाठी आवाज़ पैदा कर रही है। मैंने पहली बार महसूस किया कि ये कृष काया वास्तव में वास्तव वाले गांधी जी हैं बिलकुल 30 जनवरी 1948 वाले दिन की तरह बस फ़र्क इत्ता था कि उनके दोनों कंधे पकड़कर चलने वाली सहायिका गायब थीं। असलियत से सामना होते ही मेरी टांगे कांप गई लेकिन "सूं सां मानस गंध" हम दोनों के अलावा तीसरा कोई था भी नही इसलिए मुंह से इत्ता ही फूटा जैसी आपकी इच्छा बापू।

         बात करते करते हम दोनों मेरे फ्लैट तक आ पहुंचे थे। मैंने बापू को अन्दर आने का इशारा किया और खादी का तौलिया उनकी ओर बढ़ा दिया । खादी का तौलिया देखते ही बापू बोले बस अब दो अक्टूबर को ही मेरी ज़रूरत रह गई है, वो भी पहले रिबेट के लिए और अब..... फिर कुछ सोचते हुए बोले नाथू राम गोड़से ने तो तीन गोली मारकर मुझे ठंडा कर दिया लेकिन यहाँ के नेताओं ने मुझे अभी भी गर्म रक्खा हुआ है, देखो न भगवान जी से सेटिंग कर रक्खी है। हर साल एक अक्तुबर को भगवान जी मुझे ऊपर से यहां टपका देते हैं कभी दिल्ली कभी वर्धा कभी बिहार कभी झारखण्ड। इस साल मुम्बई टपका दिया है। मैं तो उकता गया हूं इस ढोंग से। इसलिए 1.40 की लास्ट लोकल से अंधेरी उतरा था कि चलो विरार जाकर कहीं लेट जाऊंगा लेकिन इस राम जी की बरसात ने उधम उतार रक्खा है ऐसा लगता है बादलों में छेद हो गया है। मैंने पहली बार बापू की दयनीय स्थिति को देखते हुए पूछा बापू सच्ची सच्ची बताओ तुम वास्तव में भारत की आज़ादी के लिए लड़ रहे थे या । मेरे इस प्रश्न से बापू कुछ अचकचाए फिर बोले "सत्य के प्रयोग" पर किताब लिखना अलग बात है स्वीकारना अलग। फिर बुदबुदाए ऐसे वैसे कैसे कैसे हो गए और कैसे कैसे ऐसे वैसे हो गए। बापू को गर्म चाय पिलाई फिर थपकी देकर बापू को सुला दिया। मुझे अब समझ आया बापू 2 अक्तूबर के पाखण्ड से बस ख़ुद को बचाने की चेष्टा क्यूँ कर रहे थे। सच बोल रिया हूँ गांधी जी को मैं कुछ ख़ास पसन्द नहीं करता लेकिन पहली बार लगा मोहन दास करम चंद गांधी उर्फ़ महात्मा गांधी उर्फ़ सो कॉल्ड राष्ट्रपिता बेचारा गांधी भी हो सकता है।

प्रदीप डीएस भट्ट 
मेरठ 
तीन काव्य संग्रह व एक कहानी संग्रह प्रकाशित 
उत्तरांचल दीप पत्रिका में नियमित आलेख 

Tuesday, 2 September 2025

"नदी चली मायके "

रिपोर्ताज 

     "नदी चली मायके"

         यूं तो दो बरस हो गए हैदराबाद को छोड़े लेकिन आँख🥸 बंद करो तो साढ़े चार साल के हैदराबाद प्रवास की यादें आंखो के आगे चित्र की भांति अब भी यूं गुजर जाती है जैसे बरसात के दिनों में नदी नाले उफान मार जाएं। अब आप सोच रिए होंगे जे क्या उदाहरण हुआ जी तो भैय्यू इस बार गर्मी तो जितनी पढ़नी थी पड़ ली लेकिन बरसतिया 🌧 बुआ छप्पर फाड़ के सूखी जमीन का गला तर करने पर तुली हुई हैं। अब करें भी क्यूँ न गंगा मैय्या हों या जमुना, राप्ती हों या झेलम या फिर इनकी चचेरी ममेरी तहेरी बहनें, बहुत दिनों से वो अपने ससुराल की जमीन पर बहे जा रहीं थीं बहे जा रही थीं अब वो का है न ससुराल में कुछ ज़्यादा ही प्यार जो मिल रिया था हुज़ूर सो अब भैय्या ससुराल का मामला है कौन किसको क्या कहे बरसों बरस हो गए बहते हुए किसकी हिम्मत जो मइया जी को टोक दे कि बुआ तनिक भाई भतीजों का भी हाल चाल 👍 मालूम कर लो, तो हुआ यूं के म्हारे बार बार गिड़गिड़ाने पर जून में सभी बुआओं ने एक मीटिंग कर डाली और तय किया कि चलो इस बार मायके चलते हैं देखें भैय्या भाभी भतीजा भतीजी कैसे हैं ,  राम राम भी हो जाएगी और मायके घूम भी आयेंगे, पर भैय्या आयेंगे कहां से जहां ये सारी नदिया बहती थीं वहां तो क्या माननीय सांसद क्या विधायक, क्या कॉर्पोरेटर क्या मुखिया सब ससुरों ने बड्डी बड्डी बिल्डिंग 👷‍♀️ 🏢 🏗 डाली रही सही कसर भाई भतीजों ने पूरी कर दी और लो जी भैया जो थोड़ी भोत धार चल री थी या बची हुई थी वहां किनारे पर अपने अपने घर बना डाले। अब जब सभी बुआओं ने मायके जाने के लिए बड्डी वाली बरसतिया 🌧 🌦 बुआ के साथ मायके जाने का रस्ता पकड़ा तो उन्हें रस्ता न मिल के दिया जब घणी परेशान हो गई तो अपने बादल ☁️ 😶‍🌫️ मित्र को बुलावा भेज दिया कि तनिक ऊपर से देखकर बताओ हमारा मायका कहां है। 

         अब बादल मित्र भी क्या करते बिन पानी उड़ान भरते भरते उन्होंने HD फ़ोटो  खींची और सारी नदियों को व्हाट्सअप कर दिया। फ़ोटो देखते देखते वॉयरल भी हो गई। अब तो फ़ोटो देखते ही सारी बुआओं को घणा गुस्सा आ गया अबे ये हमारा मायका था इसे क्या तुम सबने सरकारी ज़मीन समझकर ग़ैर क़ानूनी कब्ज़ा कर लिया बे, हमारी पूजा भी करोगे और हमीं पे कब्ज़ा। सजा मिलेगी बरोबर मिलेगी और उन्होंने सावन के पावन महीने में भोले नाथ को फुनवा लगा दिया उधर भोले नाथ भी तनिक गुस्से में बैठे थे वो इसलिए कि धरती पे जितने भी सो कॉल्ड भक्त हैं सब ससुरे सुबह देखें न शाम दिन देखें न रात उनकी पिंडी पे लोटा से ड्रम से (नीला 🛢️ नी महाराज) भर भर के दे जल दे जल। अरे भैय्या माना वो भोले नाथ हैं पर नेचर कॉल तो उन्हें भी निपटानी पड़ती है न। बस फिर क्या था नदी बुआ ने जैसे ही अपना दुखड़ा सुनाया भोले नाथ ने नन्नक सी अपनी तीसरी आँख खोलकर बादलों ☁️ को इशारा कर दिया। अब बादल तो बादल ठहरे नदियों के दोस्त और भोले का इशारा बस भक्तों ने जितना जल पिंडी पे उड़ेला था उसका लाख गुना पानी छलनी की जगह अपनी पेंदी में छेद करके बरसा दिया अब आप उसे बादल फटना कहो या चखना बादल नू कि फ़र्क पैंदा है जी। अब आप खुदई देख लो शेर सिंह के ढाबे का अगड़ा हिस्सा चमक रिया है पिछले का तो हैप्पी बड्डे हो भी गया। जिधर देखो त्राहिमाम त्राहिमाम। कहां तो पाकिस्तान एक एक बूंद पानी के लिए तरस रिया था और धमकी अलग से दे रिया था पानी 💧 नी मिला ते अपन भारत की सांसे बंद कर दांगे, खून बहा दांगे। एक तो मुझे समझ नी आंदा ऐ पाकिस्तान उर्दू विच क्यूँ नी बोलदा खैर मैनू की लोड़। अब पानी चड्ड दीत्ता ती कै रिया है इत्ता पानी काय नू चड्ड दित्ता । ओ लो जी मैंनु भी पंजाबी बोलन दी आदत पड़ गी सी। मैनू ऐसा लग रिया है कि नदियों ने कब्ज़ा करने वालों पर ट्रंप डैडी की तरह 5000 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया है। जय भोले नाथ की।

         हां तो हम कहां थे जी ओह याद आया नदियों की लीला से त्रसित मानव त्राहिमाम त्राहिमाम कर ही रहा था तभी हमें हैदराबाद से एक ठो सूचना मिली काव्य धारा प्रकाशन इन्दौर में एक दिनी कार्यक्रम आयोजित कर रहा है उसमें हमें भी आमंत्रण दिया गया। भाई इन्दौर को मिनी मुम्बई😎 भी कहा जाता है सो सबसे पहले मित्र दिनेश दवे जी को सूचित किया कि हम 23 अगस्त को इन्दौर पधार रहे हैं सो स्वच्छ  इन्दौर को हमारे स्वागत के लिए और स्वच्छ करवा दिया जाए। दवे जी भी उस्ताद निकले तुरन्त बोले तथास्तु🥳 साथ ही सूचना दी कि इन्दौर से इंद्र देवता रूठे हुए हैं उतनी नहीं हुई जितनी होनी चाहिए। हमने ठहाका मारते हुए पूछा अभी तक उतनी क्या नहीं हुई माहराज इससे पहले वो बोलते हम खुदई बोल पड़े आमदनी क्या अब ठहाका उधर से आया फिर बोले गुरु तबियत से बारिश 🌧 🌦 न हुई अब तक। हमने अपने बनियान के कॉलर ऊंचे करते हुए कहा इन्द्र देव से बात हो गई है दवे जी हम 23 अगस्त को प्रातः 6.05 पर ट्रेन से उतरेंगे और उतरते ही स्वच्छ इन्दौर को पानी पानी कर देंगे। 

         अब कह दी तो कह दी। खैर 22 अगस्त को 11.40 पर हल्की बूंदा बांदी के बीच हमने जैसे ही ऋषिकेश इन्दौर एक्सप्रेस के B1 के कंपार्टमेंट में एंट्री मारी तो घुसते ही 12 नम्बर सीट पर आराम फरमाते हुए एक ठो लड़की 👦 मिली, सामान रक्खा और सामने वाले से बोले दो मिनिट में फ्रेश होकर आते हैं, रेस्ट रुम गए,जुल्फें करीने से सेट की और वापिस सीट पर लैदर बैग को सीट के नीचे सरकाया खाने का झोला सामने टांगा तो सामने से आवाज़ आई कहां तक जाएंगे हमने अपनी जुल्फें पीछे की तरफ़ धकेली और बोले बस थोड़ी दूर तक हुज़ूर। उन सज्जन ने एक गहरी सांस ली और हमारी सीट पर भगवान विष्णु की तरह शेष शैय्या की मुद्रा में लेटी हुई लड़की 👧 को रिलेक्स का इशारा किया। हम भी थोड़ा रिलेक्स हुए फिर उन साहब से पूछा आप कहां तक तो बोले आखिरी स्टेशन तक यानि इन्दौर ये कल सुबह पहुंचेगी। हमने हां में मुंडी हिलाई तो फिर पूछ बैठे वैसे आप क्या दिल्ली तक या मथुरा, हमने फिर जुल्फों को झटका देते हुए कहा बस इन्दौर तक। एक बारगी तो वहां बैठे सब गड़बड़ा गए जब हमने दोबारा दोहराया तो बोले मान गए पक्के ह्यूमरिस्ट हो हमने उनकी आंखों में झांकते हुए पूछा शक्ल से या... उन्होंने दोनों हाथ पकड़ते हुए बोला मजा आ गया इन्दौर तक अच्छा रास्ता कटेगा तब तक वो लड़की उठ कर बैठने की चेष्टा कर रही थी। हमने सर पे हाथ रखते हुए कहा तत्काल प्रभाव से ये सीट आपकी हुई बच्चा वैसे एक बात बताओ एक्सीडेंट में चोट ही खानी थी तो लेफ्ट में खाते राइट में क्यूँ प्लास्टर चढ़ा रखा है उसने थोड़ा मुस्कुराते हुए कहा अंकल स्कूटी स्किड हो गई सड़क पर और.... हमने अफ़सोस ज़ाहिर करते हुए कहा क्या सड़क को भी प्लास्टर चढ़ा है। अब ये सुनते ही उस बच्चे के चेहरे पर जो हंसी आई है बस पूछो मति मज़ा आ गया। दिन 🌞 कैसे निकला पता ही नही चला रात 🌙 आई और बीच वाली सीट में किसी तरह खुद को फंसा कर सो गए। सुबह 🌄 चार बजे उज्जैन आँख खुली तो हमने सीट से बाहर निकलकर ट्रेन से महाकाल को प्रणाम किया लेकिन ये क्या बूंदा बांदी शुरु हम कुछ समझ पाते तभी कानों में सुरसुराहट हुई बेटा प्रदीप भट्ट तू भी तो घर में रखी पिंडी पर मुझे तीन बूंद जल रोज़ाना उड़ेलता है तो ले बेटे थोड़ी मौज तू भी ले ले।

         म्हारी क़िस्मत भी न गज़ब की है जी ठीक ठाक बारिश में 🚂 ने भी हमें 6.05 की जगह 5.35 पर इन्दौर स्टेशन का पटका। सह यात्रियों से राम राम की और एक छज्जे के नीचे दुड़की लगा दी बस सर ही गिला हुआ तभी मुबलिया🤗 घनघना उठा उधर डॉक्टर खामोश भागिया जी अजीब इत्तेफ़ाक है जनाब उनकी ट्रेन 🚆 भी आधे घंटे पहले ही अहमदाबाद से इंदौर जंक्शन पर आ धमकी खैर तय हुआ 🏨 में मिलते हैं और लीजिए हुज़ूर बारिश में ही पंद्रह मिनिट में वो उधर से हम इधर से सीधे 🏨 और बरखा रुक गई। गले मिले फिर रिसेप्शन वाले ने बताया गया कि रुम जल्दी से जल्दी भी करेंगे तो रूम दस बजे मिलेगा फ़िलहाल आपको फ्रेश होने के लिए दूसरा रुम दिए देते हैं। Thx बोलकर हम दोनों बाहर आए और बूंदा बांदी शुरू ख़ैर स्वच्छ इन्दौर में सुबह सुबह कूड़ा करकट देखा फिर दोनों ने चाय 🍵 भी और भागिया जी ने एक सिगरेट सुलगा ली फिर गम को हंसी में उड़ाते हुए दो दीवाने शहर में कूड़ा करकट देखते हुए वापिस 🏨। 9.00 रुम लिया फ्रेश हुए फिर पूरी, करेला, आंवला और हां कृष्णाष्टमी की बची हुई पंजीरी से नाश्ता किया फिर अन्य आए हुए अन्य मित्रों से मुलाक़ात की। शाम को मित्र दिनेश दवे आ पहुंचे हमने भी जी भर कर उनका आथित्य स्वीकारा, यकीं नहीं तो कटोरियां 🥣 गिन लो जी। अगले दिन नाश्ता किया और साढ़े दस बजे सबों के साथ हम भी श्री मध्य भारत हिन्दी सेवा समिति के प्रांगण में जो 🏨 से बा मुश्किल पांच मिनिट की दूरी पर था में प्रवेश कर गए। खूबसूरत हॉल जहां चारों ओर एक से बढ़कर दिवंगत साहित्यकारों के चित्र। सबसे अच्छी बात सब A 4 साइज़ के फ्रेम में जड़े हुए। मतलब समझ गए न आप जिंदा रहते सब के सब अपनी मैं में तने हुए मैं ये मैं वो करने वाले यहाँ सब एक साइज़ में चलो यहाँ आकर तो इंसाफ़ हुआ।

         11.30 पर दीप प्रज्ज्वलन से कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत हुई राजस्थान से आईं पायल शर्मा और रश्मि शर्मा ने सरस्वती वन्दना से कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मंच पर प्रोफ़ेसर राजीव शर्मा जिन्होंने दुष्यन्त पर पी एच डी की है, हरे राम बाजपेई, सत्य प्रसन्न जी, डॉक्टर ख़ामोश भागिया, काव्य धारा प्रकाशन की सुनीता लुल्ला, ब्रजेश शर्मा, बागड़ी जी और नोएडा से पधारे बढ़िया वाले विज्ञान व्रत जी उपस्थित रहे। समारोह में कुल दस पुस्तकों 📖 📕 📘 का लोकार्पण हुआ जिसमें 8 एकल व 2 साझा संकलन  किसलय और मनीषा। पहले सत्र में यही सब कुछ होता है पुस्तक लोकार्पण, सम्मान समारोह यहां भी यही हुआ फिर लंच और भैय्या फिर दूसरे सत्र में कवि सम्मेलन जिसमें कोई पांच मिनिट पढ़ेगा फिर भी टोका टाकी होगी और किसी को जब तक वो चाहे। हर कार्यक्रम का यही ढर्रा है इसलिए किसी एक को दोष देना ठीक नहीं। मंच पर पहले और दूसरे सत्र में लगभग एक जैसी मूर्तियां जे बात ठीक न है जी 2021 में इससे बेहतर व्यवस्था थी।दूसरी बात आधे पौने घण्टे में 10 पुस्तकों 📖 📕 📘 का लोकार्पण, किसी एक पुस्तक पर भी चर्चा न होना दिखाता है कि सब के सब भेड़ चाल में व्यस्त हैं। बस पुस्तक छपवा लो फिर पुस्तक का फ़ोटो सेशन करवा लो फिर जय हिंद जय भारत। ये सोचने का विषय है कि क्वांटिटी नहीं क्वालिटी की बात तो सब करते हैं लेकिन मानता कोई नहीं। और भी बहुत कुछ लेकिन छड़ो भी। बुरा मान जाएंगे मैं तो कहता हूं बुरा मान के भी देख ले शायद साहित्य का कुछ भला हो जाए। अब हमें भी पढ़ना था सो पढ़ दिया आप भी पढ़कर धन्य हो जाओ जी।

“दरगाहों पर जाना क्यूँ है”

दरगाहों पर जाना क्यूँ है,  मन अपना बहलाना क्यूँ है
धर्म सनातन सर्वश्रेष्ठ फिर, दर दूजा खटकाना क्यूँ है

जो भी जीव धरा पर आये,ब्रह्मा जी ने उन्हें बनाया   
बच्चे की फिर चाह में मत्था, हर दर पर टिकवाना क्यूँ है

चींटी को कण हाथी को मन,तोल सभी को विष्णु देते
आँखे नीची करके अपनी, हाथ सदा फैलाना क्यूँ है

बिन इच्छा के महादेव की, बाल भी बाँका हो न पाए 
झाड फूँक करने वालों को, डर अपना दिखलाना क्यूँ है

धन की देवी मात वैष्णवी, हर इच्छा पूरण करती हैं
साँझ सवेरे करो अर्चना,पीरों के दर जाना क्यूँ है

संकट हरणी मात शांभवी, दुर्जन निकट नहीं आ पाता 
दुर्गा काली अरि अवरोधी, कृष्ण तिलक लगवाना क्यूँ है

नाम से जिनके भूत भी काँपे, वो बजरंग बली हैं भैय्या
खली फली के डर से बोलो, फिर तुमको घबराना क्यूँ है

राम नाम में इतनी ताकत, पत्थर भी तैरे जाते हैं
क्रोध दिला श्रीराम से तुमको, सागर को सूखवाना क्युँ है

कृष्ण की लीला कृष्ण ही जाने, और दूजा न जाने कोई 
बार बार कनकी उँगली फिर, गोवर्धन उठवाना क्यूँ है
   
                                                                                                                                                                                                                                                दिया ईश ने जन्म जहाँ तुम, बस उसका सम्मान करो जी 
धर्म बदल कर कोख को अपनी, नालायक कहलाना क्यूँ है

जाने कितने धर्म हैं उपजे, इसी सनातन पारावर से
बार बार चमडे का सिक्का, फिर तुमको चलवाना क्यूँ है

रहो चैन से खुद भी और तुम, दूजे को भी रहने दो न
बात बात पे रार बढाकर, आपस में टकराना क्यूँ है

छोडो भी जाने दो बातें , कहाँ कोई है सुनने वाला
वक्त से पहले चित्र पे अपनी, माला को चढ़वाना क्यूँ है

समय शेष है 'दीप' चेताओ, अब सब अपने मुख को खोलें 
मौन की अग्नि से फिर वर्ना, देश  नया जन्मवाना क्यूँ है 

© प्रदीप देवीशरण भट्ट -24:02:2021

         दवे जी से फिर से बात हुई और तय हुआ वो शाम चार बजे 🏨 आएंगे, अपुन सामान सहित उनकी गाड़ी में जा ठूंसेगे घूमेंगे और बाद में नौ साढ़े नौ बजे वे हमें टेशन छोड़ देंगे। हमने सोची जे भी ठीक है, बस गणेश भगवान का छजराना मंदिर 🛕 🕍 🛕 🕍 🛕 देख लें तो काफी है सो जैसे ही जाम से जूझते हुए दवे जी छः बजे पहुंचे हम उनकी गड्डी में सामान सहित जा गिरे एक बात जो मैने नोट की वह ये कि मैं और भागिया जी जितनी बार होटल 🏨 से निकले इंद्र देवता कुनन मिनन करते मिले भाई साहब इस चक्कर में इन्दौर घूमने का प्रोग्राम चौपट अब 25 की रात्रि ट्रेन 🚆 🚉 🚄 और इंद्र महाराज हैं कि ऐंठे हुए हैं हमने पूछा काहे दुर्वासा हुए जा रहे हो तो बोले बेटे भोले नाथ से पंगे लोगे तो तुमही तो भुगतोगे। भोले बाबा 22 को ही बोल दिए थे ई ससुरा प्रदीपवा बहुत बड़ा फेंकोलिजवा है जहां तहां फेंक देता है, ट्रेन में फेंक दिया कि इन्दौर पहुंचते ही बादल बरसेंगे और इसका फेंका हुआ लपेटना हमें पड़ता है। क्या करें सच्चे वाला भगत है इसकी बात तो माननी ही पड़ेगी।तो बस भैय्या हम तो उनका आदेश मान रिए हैं जब तक तुम इन्दौर की स्वच्छ धरती पर हो हम तुम्हें कतई सूखने न देंगे ज़ालिमलोशन। बारिश और जाम को देखते हुए दवे जी सीधे अपने घर ले गए रास्ते में भगवान गणेश जी का छजाराना मन्दिर की चोटी के दर्शन किए, गाड़ी में बैठे बैठे ही गणेश जी को नमस्ते की तभी फिर कान में सुरसुराहट हुई गणेश जी कह रहे थे क्यूँ बेटा बाप को नाराज़ करके बेटे के दर्शन करेगा फिर हँसते हुए बोले चल कोई गल्ल नी नेक्स्ट टाइम श्योर। दवे जी के यहाँ उपमा खाया, चाय पी फिर सीधे इन्दौर जंक्शन, प्लेटफॉर्म नंबर 2 से भागिया जी शान्ति एक्सप्रेस पकड़ी और आधे घंटे बाद प्लेटफॉर्म नम्बर 4 से हमने फिर अगले दिन वाया दिल्ली होते हुए सीधे मेरठ लेकिन लेकिन लेकिन बारिश अभी भी चालू आहे, अब बस भी करो भोले नाथ। 🙏 रिपोर्ताज लिखने दोगे की नाही, हां नई तो।

प्रदीप डीएस भट्ट -01092025

Wednesday, 20 August 2025

"क्या कह दिया कवि ने"

"क्या कह दिया कवि ने" 

रिपोर्ताज 

         अभी हम उन्घियाते 😴 हुए उठे ही थे कि मुबलिया घनघना उठा दूसरी तरफ़ ऑल इंडिया रेडियो के नजीबाबाद केंद्र से सोहन शर्मा थे। नमस्कार चमत्कार के बाद सोहन जी ने सूचित किया सर 13 अगस्त को आपकी रिकॉर्डिंग होनी निश्चित हुई है😊 हमने धन्यवाद अदा किया फिर हमने यूं ही पूछ लिया कोई और भी है क्या मेरठ से तो बोले दो और थे लेकिन दोनों ही मेरठ से बाहर हैं🫣 एक सोलह को आयेंगे दूसरे पच्चीस को सो जनाब ए आली आप ही नजीबाबाद रेडियो स्टेशन को पवितर कर दें हमने तथास्तु कह दिया सोचा पूरे ग्यारह दिन पड़े हैं। इसी बीच इंद्र देवता ☔ 🌧️ ☔ पूरे भारत में घमासान मचाने लगे और लो जी सात अगस्त को मुबलिया फिर घनघना उठा। सोहन जी ने सोणी सी आवाज़ में गुज़ारिश की कि क्या आप तेरह की जगह ग्यारह को पधार सकते है साथ ही बिना विलम्ब किए सुदेश यादव और चित्रा त्यागी जी के मोबाईल नंबर भी इस आशय से शेयर कर दिए कि आप इनसे बात कर लें इनकी भी रिकॉर्डिंग ग्यारह को ही है। दूसरे दिन सुदेश जी से बात हुई और तय हुआ कि अनिल बाजपेई हापुड़ से अपनी गाड़ी🚘 लेकर आयेंगे उसी में हम चारों चलेंगे। 

         लो जी ग्यारह भी आ गई, सुबह सात बजे निश्चित स्थान पहुंचें, चित्रा जी हमसे पहले ही पहुंच गईं। तभी सुदेश जी ने बताया हमारे मित्र सुनील भारद्वाज भी चलेंगे। अब पांचों लद गए मारुति डिजायर🚖 में। चूंकि बारिश⛈️⛈️⛈️ ने कहर मचाया हुआ था सो हमने सभी को सूचित किया देखो भैय्या परसों अख़बार में नजीबाबाद रेडियो स्टेशन में पानी घुसा हुआ था और बिजनौर बैराज का हाल भी कुछ अच्छा न है, पुल के नीचे से बहने वाला पानी पुल के ऊपर से बह रहा है सो सुदेश जी ने किसी परिचित को तुरन्त फोन खड़का दिया। उधर से अपेक्षित उत्तर प्राप्त हुआ, जीवन से मोह भंग हो गया हो तो पधारो बच गए तो रिकॉर्डिंग करना वरना तुम्हारा नाम रिकॉर्ड में दर्ज करवा देंगे 🙆‍♂️। तभी चित्रा जी ने विश्वसनीय अंदाज़ में कहा वाया गढ़, गजरौला, धनौरा, चलते हैं मुझे रास्ता पता है।  सुनील जी ने तुरन्त गूगल में उगल किया और बाजपेई ने गड्डी दौड़ा दी जी। धनौरा तक सब ठीक लेकिन गूगल को क्या पता पानी कहां कहां घुस चुका है सो हमने गुहार लगाई क्या हम देसी गूगल में उगल करें। चारों ने पलटकर ऐसे देखा जैसे हमने पाकिस्तान पे हाथों से ही ब्रह्मोस 👁️ दाग दिया हो। हमने कहा तनिक गड़िया रोकिए तो सही फिर दो तीन लौंडे🧑🏻‍🎨 जो यूं ही खड़े बतिया रहे थे नजीबाबाद का रास्ता पूछा उन्होंने पहले तो घूर कर देखा जैसे हमने ट्रंप पर टैरिफ थोप दिया हो फिर जब देखा कि मारुति नामक गड़िया में बढ़िया से पंच परमेश्वर विराजे हुए तो मुस्कुराते हुए पहले तो नजीबाबाद जल्दी पहुंचने वाले रास्ते को दिमाग़ से निकालने की नसीहत दी और साफ़ बोल दिया नाक 👃 की सीध में चले चलो फिर फलाने से ढिकाने से 😳 लेना, वॉकल फॉर लोकल करते हुए बिजनौर को नमस्ते करते हुए हम पंच परमेश्वर साढ़े बारह नजीबाबाद जा पहुंचे, जहां हमारे इस्तकबाल के लिए 🌱 अस्सी वर्षीय नौजवान इंद्र देव भारती जी हाज़िर मिले। हमने फ्रेश होने के बाद साफ़ कह दिया पहले पेट पूजा करेंगे भला खाली पेट रिकॉर्डिंग क्या खाक करेंगे जी। हालत बाकी चारों की भी यही थी पर बोले कौन तो हुज़ूर हम हैं न। सो गर्मा गर्म पकौड़ी समोसे बरफी के साथ बढ़िया वाली चाय ओह हो हो भाई साहब पूछो मति बस डकार की कसर थी पर वो किसी को भी आई ना जी।

         तीन बजे रिकॉर्डिंग से फारिग हुए तो चित्रा जी और इन्द्र देव जी ने बताया कि फलाने के पिताजी नहीं रहे😓 बेहतर होगा पांच मिनिट की हाजिरी लगा दी जाए। अब भला ऐसे कामों को मना करने का प्रश्न ही कहां उठता है सो इंद्रदेव जी के निर्देशानुसार बाजपेई जी ने गड्डी दौड़ा दी। जब गड्डी रोड से बाएं मुड़ी तो कवि दुष्यन्त के नाम से बना बड़ा सा द्वार नज़र आया बस तय किया कि वापिसी में एक ठो फोटो ज़रूर ली जाएगी। कच्ची पक्की सड़क से होते हुए रपटे ( बरसात में अचानक पानी आ जाना, जो उसे पार करने का दुस्साहस करे वो कार सहित किधर बह गया पता ही नही चलता) को प्रणाम🙏🏾 करते हुए नियत स्थान जा पहुंचे। दस मिनिट की बैठक फिर वापिसी चूंकि बारिश का मौसम लगातार बना हुआ था सो दुष्यन्त जी के गांव जाने का विचार त्यागा वहीं से उनके गांव को प्रणाम किया और वापिसी में दुष्यन्त द्वार पर फोटो ली, रास्ते में नजीबाबाद की मशहूर चाट वाले का स्वाद लेते हुए इंद्रदेव जी को घर छोड़ा और भले आदमी द्वारा गाइड किए रस्ते (नहटौर, पैजनिया चांदपुर से धनौरा गजरौला) पर चल दिए मेरठ की ओर। लेकिन लेकिन लेकिन सुनील जीको गूगल ने फिर गच्चा दे दिया। अचानक पोलिस 🚨  बैरिकेडिंग देखते ही गड्डी रुकी बाजपेई ने बड़ी शालीनता से शायद SI था पूछा क्या बात हुई सर, सर सुनते ही पुलिस वाले ने पहले गाड़ी का मुआयना किया फिर पूछा किन्घे जाना है तमै, बाजपेई जी ने फिर बड़ी शालीनता से कहा मेरठ। हूं कहते हुए पोलिस वाला बोला पानी 🌊 पे तैर के जाओगे दिख नी रा पानी पुल के निश्चे से नी ऊपर से बह रा है। तभी सुनील जी बोल पड़े हमें तो गूगल ले आया यहां पर। पुलिस वाला बोला तो कुछ नही पर उसके हाव भाव से लग रिया था जैसे गूगल का नाम सुनते ही वो बाढ़ का पानी हमारी गड्डी की ओर उछाल देगा। गड्डी मोडी और सरपट दौड़ा दी और हमने फिर से देशी गूगल में उगल किया और खरामा खरामा गढ़, चित्रा जी को उनकी बहन के घर ड्रॉप किया, चाय पी और अनिल बाजपेई जी को धन्यवाद कहकर सीधे हापुड़ जाने के लिए कह दिया और हम तिलंगे 😜 रोड़वेज बस पकड़कर पौने ग्यारह बजे सीधे मेरठ। आज के प्रवास की उपलब्धि के तौर पर "एक पंथ दो काज" के साथ "क्या कह दिया कवि ने" तकिया कलाम रहा जिसे प्रवास के दौरान बार बार सुदेश यादव दोहराते रहे।😎😎😎😎😎

प्रदीप डीएस भट्ट - 21082025

Friday, 8 August 2025

"आ बैल मुझे मार"

             
"आ बैल मुझे मार" टैरिफ फॉर नॉबेल 

         हैलो हैलो हैलो मिस्टर मोदी मिस्टर मोदी हैलो हेलो SSSSS SSSSSSSSSS आख़िर थक हार कर ट्रंप ने अपने सहायक से मुखातिब होते हुए कहा, माईकल ज़रा साइकिल लेकर भारत जाओ और मालूम करके बताओ कि मिस्टर मोदी हमारा फ़ोन काय कू नही उठाना मांगता। माइकल के दिल में तो आया कि ट्रंप के कान के नीचे एक बजाए लेकिन कुछ सोचकर दांत पिसते हुए बड़ी शालीनता से कहा जनाब वो मोदी है न उसकी राशि वृश्चिक है समझदार आदमी ऐसे लोगों से पंगे लेने से पहले पचास बार सोचता है लेकिन आप हैं कि मोदी को मुनीर समझ रहे हैं। महाराज कोई बीच का रास्ता निकालो और मामला सुलटा लो वरना ये नया भारत है उल्टा करके टांग देगा और नीचे से मिर्च की धोकनी अलग से देगा। शटअप माइकल हम सारी दुनिया के चौधरी हैं जाओ मिस्टर मोदी को बताओ। माईकल कुछ देर चुप रहा फिर एक दम फूटते हुआ बोला मैं पांच साल भारत में रहा हूं बेवड़े वहां कैसे कैसे चौधरी हैं तुम्हें अंदाज़ा भी नही है। सच बता रिया हूं तुम्हारे इन्हीं कुकर्मों की सजा सारा अमेरिका भुगत रहा है और इसलिए तुम्हारी इज़्ज़त इतनी तेजी से घट रही है कि बस पूछो मति, बस इत्ता समझ लो मोदी के पंजे के नीचे से जैसे बिच्छू आर पार हो जाता है वैसे ही आपकी इज़्ज़त बेजत्ती भी बिच्छू के पेट के नीचे से इधर से उधर सरक जा री है। अच्छा चलता हूं रात हो री है मुझे दुआ या बददुआ में भी याद न रखना महाराज।

         भारत के किसी भी प्रांत में जाइए, भाषा भले ही तमिल हो तेलगु हो मलयालन, कन्नड़ हो, पंजाबी हो या बंगाली या फिर अपनी प्यारी सी दुलारी सी हिन्दी। हर भाषा में दादी हो या नानी या फिर अच्छी या खडूस सी देसी मां भाई साहब हर बात में कहावतों का पिटारा खोलना उन्हें भली भांति आता है। मैगी को बनने में दो मिनिट लगते हैं किंतु मां के मुँह से कहावत दो सेकेंड में बाहर। अब पिछले जमाने की दादी नानी बस नाम मात्र को ही स्कूल जा पाईं किंतु कहावतों में रचे बसे संसार को अपने जीवन में उतारकर उन्होंने कई मर्तबा अच्छे अच्छों की सिट्टी पिट्टी गुम की है। उन बहुत सारी कहावतों में से एक कहावत घर में भी और स्कूल में गुरु जी ने भी बात बात में उदाहरण के साथ बालकों को घोट घोट कर ये समझाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। सो भैय्या ट्रंप चच्चा ने जब से भारत से पंगा लेने की सोची तो हमें "मुगली घुट्टी 555" की तरह वो कहावत याद हो आई "आ बैल मुझे मार"  अब आप सोच रिए होंगे कि ऐसा कैसे जी तो भैय्या डोनाल्ड ट्रंप की मां ने भी अपने लाल को जनने के बाद और जब वो थोड़ा बड़ा हुआ तो उसके लच्छन देखकर जान लिया था कि ये ससुरा सबका है पर किसी का नही तभी तो उन्होंने सार्वजनिक रूप से (जे ख़बर तो अमेरिका के अख़बार में भी छपी थी) कहा था कि "इसमें 0 जीरो कॉमन सेंस है अगर ये कभी पॉलिटिक्स में आया तो ये अमेरिका के डिजास्टर साबित होगा" वैसे मुझे लगता है मैरी मैम अजी मैं डॉनल्ड ट्रंप की मां के बारे में बता रिया हूं जी। वो मैडम मैरी ने ने थोड़ी सी ममता दिखाई वरना आज तो दुनिया जान गई कि इस बंदे की कॉमन सेंस _ जीरो है और हद तो तब हो गई जब इसने अपनी ही जवान बेटी के लिए कहा कि "मैं अपनी बेटी को डेट करना पसन्द करूंगा" जे बात भी अख़बार में छपी थी। भाई साहब जब टी वी पे इस खुडूस को बोलते देखा तो मुझे अपने देसी बॉलीवुड डोनाल्ड ट्रंप याद आ गए। गेस करो गेस ? गेस करने के चक्कर में ज्यादा जोर मति लगाना नई ते पीछे से गैस पास हो जावेगी।

         तो मसला तब शुरु हुआ जब ट्रंप बाबू ने ये कहना शुरु किया कि भारत पाकिस्तान का युद्ध उन्होंने रुकवाया। चलो जी कह दिया तो कह दिया हमने और मोदी जी ने सोचा चलो ट्रंपवा दोस्त है कोई गल्ल नी जी। युद्ध हमने रोका या पाकिस्तान युद्ध रुकवाने के लिए म्हारे पैरों में सर रखकर गिड़गिड़ाया वो तो हम ही जानते हैं और हमारे महादेव। लेकिन ये क्या जी मई से लेकर अब अगस्त तक ट्रंप बिगड़ैल बच्चे की तरह युद्ध मैंने रुकवाया, युद्ध मैंने रुकवाया की रट लगाकर जमीन पे लोट पोट कर कपड़े गंदे करने लगा तो भैय्या म्हारे मोदी जी ने संसद में साफ़ साफ कह दिया मित्रों युद्ध रुकवाने में किसी देश का कोई हाथ नहीं तो ट्रंपवा के हाथ के तोते उड़ गए। बस भाई साहब उसने आनन फानन में भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ ठोक दिया। तीन दिन बाद एकस्ट्रा 25 प्रतिशत यानि कि कुल 50 प्रतिशत लेकिन मोदी जी तो मोदी ठहरे लोड लेते ही नही वो तो लोड देने में विश्वास करते हैं सो टैरिफ उनके ठेंगे से फिर तीन दिन बीत गए। सन्नाटा सन्नाटा सन्नाटा अचानक भारत के रक्षा मंत्री ने अपनी अमेरिकी यात्रा स्थगित कर दी और हथियार खरीदने की डील को पॉज कर दिया, समझे नहीं क्या बबुआ वही जैसे ऑपरेशन सिन्दूर को पॉज किया था। 

          अब भैय्या ट्रंप व्हाइट हाऊस में अलबलाए अलबलाए से कभी बैडरूम में कभी छत पर घूम रहे कि जे क्या हुआ ससुरा मोदी तो बिलकुल भी लोड न ले रा क्या करें, क्या न करें की उधेड़बुन में जैसे तैसे नींद आई ही थी कि ट्रंपवा की माता जी Mary Anne MacLeod Trump सपने में प्रकट हो गई, उन्हें देखते ही ट्रंपवा के मुँह से स्वत: ही निकल गया माते इत्ते दिनों बाद अपने सुपुत्र की कैसे याद आ गई। मैरी माता बोली तू सुपुत्र नहीं कुपुत्र है तेरे जीवन का उद्धार करने के लिए ही मैंने नरेन्द्र दामोदर दास मोदी को तेरे मित्र माई फ्रेंड के रूप में चुना लेकिन तू तो निरा HK निकला रे तू तो उसे ही चूना लगा रहा है। तूने अपने पहले कार्यकाल में भले ही 30573 झूठ बोले हों किंतु तू मोदी के गुण गाता नहीं थकता था लेकिन दूसरे कार्यकाल के शुरु में "उसके लिए कुर्सी आगे पीछे करने वाले" नामाकुल अब तू उसके साथ टैरिफ टैरिफ खेल रहा है। याद रख वो गुज्जू है वो अपनी पे आया तो तेरी गज्जक बना के खा जाएगा और पानी भी नही पीएगा। शायद तूने उसे मोहन दास करमचंद गाँधी का रिश्तेदार समझ लिया है जो दूसरा गाल आगे कर देगा। नामाकुल ये तेरा गाल तुझसे ही पकड़वाकर तेरे दूसरे हाथ से खुद पे इत्ते चांटे  लगवाएगा कि तू बस इत्ता ही बोल पाएगा गलती से मिस्टेक हो गई दद्दू। सुनते सुनते ट्रंप को अपनी मां मैरी में भारत माता दिखने लगीं। बड़े ही कातर दृष्टि से अपनी मां को देखकर ट्रंपवा बोले तुसी दस्सो मैं किरां मैरी मां। तो सुन नमाकुल कल मोदी को फोन कर माफ़ी मांग ले और बताना मत भूलना कि ये सब करने के लिए मैंने कहा है वरना तू तो उसे चार बार हैलो कह चुका है और मोदी है कि चारों बार रिसीवर उल्टा करके रख देता है ताकि तुझे तेरी औकात पता रहे। एक काम कर पहले अजीत को फोन करना समझे, ट्रंप सर खुजाते हुए बोला कौन अजीत माते, मैरी ने एक तिरछी नज़र ट्रंप पर डाली फिर बोली अजीत जिसको कोई जीत न सके काहिल मैं अजीत डोभाल की बात कर रही हूँ वो बहुत खतरनाक है लेकिन जब हंसता है तो समझ में आ जाता है वो किसकी बत्ती गुल करके आया है तो सुन तू मोदी को डायरेक्ट फोन मति करियो अजीत को हाथ वात जोड़ वो कुछ जुगाड भिड़ाएगा वरना कहीं तूने पांचवी बार फोन किया और ग़लती से मोदी ने रिसीवर उल्टे की जगह सीधा रक्खा तो वो सबसे पहले तुझे लठियाएगा फिर सोचेगा आगे बात करनी है या नही समझा कि नही HK। ट्रंप ने मां के पैर छुए तो मां खुश हो गई बोली चल तूने कुछ तो अच्छा सीखा मोदी से अच्छा सुन मोदी गुज्जू भाई है इस बार माफ़ी मिल जाए तो खुद को धन्य समझियो गुजराजी को गाली दो तो हँस कर लेता है लेकिन समय आने पर ब्याज सहित वापिस भी कर देता है। चल अब चलती हूं। ट्रंप ने मैरी मां के पुनः चरण छुए, जैसे ही मैरी मां अपनी जगह से हिली तो देखा उनके पीछे से ट्रंप के पिताजी फ्रेड ट्रंप प्रकट हो गए हैं इससे पहले कि डोनाल्ड कुछ कहते फ्रेड ट्रंप बोले झापड़ी के क्यूं मेरा नाम ख़राब करने पर तुला है ट्रंप ने पिता से ऐसी भाषा की उम्मीद नही की थी सो अचानक ट्रंप को फ्रेड ट्रंप के चेहरे में नाना पाटेकर की झलक दिखाई देने लगी। फ्रेड ट्रंप आगे बोले अपनी मां का कहना मान BKT और मोदी से सुलह कर ले वरना वो मोदी है डोनाल्ड डोनाल्ड अलग और ट्रंप ट्रंप अलग करके ही मानेगा और मिलेनिया से तेरा मिलन तो होगा लेकिन मिलेनियम वर्ष के बाद। मोदी को अंडर एस्टीमेट मत कर पगले कभी इस खाली खोपड़ी के जाले साफ करके सोच कि जो मोदी तेरे डिनर को ठुकरा सकता है वो ठुकाई भी तो कर सकता है। ट्रंप झापड़ी का अर्थ समझने के लिए गूगल में ऊंगली कर ही रहे थे तो पिता ने BKT भी कह दिया। कुछ सोचकर ट्रंप ने गूगल में डाली हुई ऊंगली निकाली और ये सोचकर निश्चिंतता की श्वांस ली कि पिताजी हैं गाली तो देने से रहे झापड़ी और BKT सनातन धर्म में आशीर्वाद के पर्यायवाची शब्द होंगे।

         अगले दिन ट्रंप ने मोदी जी को सुबह सुबह ही फोन खटका दिया राम राम श्याम श्याम के बाद 
ट्रंप: हेलो हेलो मिस्टर मोदी मिस्टर मोदी मैं ट्रंप बोल रहा हूँ। एक लम्बा पॉज लेने के बाद मोदी जी फिरकी लेते हुए बोले बोलो चौधरी साहेब कैसन बा, कैसे याद किया अपुन कू। ट्रंप : ये तुम जवाब देने से पहले इतना लम्बा पॉज काय कू लेते जी मिस्टर मोदी, बताओ बताओ। मोदी: ऑपरेशन सिन्दूर में पॉज लेने के बाद मेरे कू पॉज लेने का आदत पड़ गया है बिड़ू। अभी 
जैसे सिन्दूर का पॉज चल रिया है वैसे ईच्च समझ लो।
ट्रंप: ये तुम कईसे कईसे वर्ड बोलता, मेरे पल्ले कुछ भी नई पड़ता मिस्टर मोदी। ख़ैर मुझे कुछ पूछना मांगता है, पुछूं क्या ? मोदी: बिंदास होके पूछो चौधरी साहेब, हम दोस्तों के दोस्त हैं, ये बात अलग तुम सिर्फ़ माया और काया के दोस्त हो बीड़ू। ट्रंप: यार सात महीने हो गए राष्ट्रपति बने हुए, पहले सब सुन रिए थे अब कोई मेरी काय कू नी सुनता। जिसे देखो बड्डी बड्डी आँखें दिखाता। बाकी का छोड़ो तुम भी तो मुझे इग्नोर मार रिए हो। मैं सच्चे वाला दोस्त हूं तुम्हारा भी और भारत का भी " I 💕 मोदी N India too"। मोदी: इसके लिए थैंक यू सो कॉल्ड चौधरी साहब लेकिन ये मैं भी जानता हूँ और दुनिया वाले भी कि अमेरिका और ट्रंप किसी का दोस्त नहीं और आपके बारे में तो आपकी माता जी भी फरमा गई हैं डोनाल्ड अमेरिका का भी नही है वो सिर्फ़ अपने बारे में ही सोचता है। वैसे आपकी दोस्ती भी काबिल ए तारीफ़ है चौधरी साहब दोस्त भी कहते हो पीठ पर खँजर भी मारते हो। ट्रंप: मैं कुछ समझा नही मिस्टर मोदी। मोदी :एक शेर सुनो:  
      
        "दोस्तों की अब यही पहचान है 
         खंजरों के पीठ पर निशान हैं "
         हम पुजारी शान्ति के हैं मगर 
         हमको जां से प्यारा हिंदुस्तान है 

     ट्रंप का टॉमी 
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    हमने तुम्हारी पीठ पर खँजर कब मारा दोस्त देखो तुमने कहा और हमने TRS को आतंकवादी संगठन घोषित किया न। मोदी: अच्छा फिर फर्जी फ़ील्ड मार्शल मुनीर को लंच क्यूँ दिया, बलूचिस्तान लिब्रेशन आर्मी को आतंकवादी बताकर बैन क्यूँ किया। ट्रंप: देखो दोस्त एक हफ़्ते से हमारा dogi 🐕 खाना नही खा रहा था और मुनीर बिन बुलाए मेहमान की तरह आया लेकिन पाकिस्तान वापिस नहीं जाने का नाम ही नही ले रिया था तो हमने उस बचे हुए खाने में तड़का लगाकर मुनीर को परोस दिया वो खुश और बदले में हमने उसको पाकिस्तान में तेल निकालने का वादा कर दिया। मोदी: पाकिस्तान में तेल कहां है माई डियर फ्रेंडवा वहां की आवाम का तेल पहले ही शाहबाज और मुनीर निकाल चुके हैं। मुझे मालूम है तुम्हारा तीर कहां जाकर गिरेगा। इराक के बाद ईरान का भट्टा बिठाना चाहते हो न। ट्रंप: छोड़ो दोस्त तुम इन पचड़ों में काय कू पड़ता तुम एक बार कह देते जंग मैंने रुकवाई है तो मैं भारत पर टैरिफ जीरो पर्सेंट कर देता बस इत्ती सी चाहत है कि अमेरिकी इतिहास में शान्ति का नोबेल पाने वाला मैं पांचवा राष्ट्रपति बन जाऊं। लेकिन दोस्त तुम माने नही और मुझे खुजली हो गई। सब मान रहे हैं तो मोदी क्यूँ नहीं बस मेरा खुजली वाला इगो हर्ट हो गया। देखो यार मैं अभी तक सात जंग रुकवा चुका हुं, रूस यूक्रेन भी रुकवा दूंगा और इजरायल और हमास की भी। तुम ऐसा करो दोस्त रूस से तेल न खरीदो, हथियार भी न खरीदो जहां तक पाकिस्तान को चने के झाड़ पर चढ़ाने की बात है वो इसके अलावा और किसी पे चढ़ने के लायक बचा भी कहां है। तुम एक बार हां तो कहो दोस्त मैं सच्ची कै रिया हूँ पाकिस्तान को ऐसी लात मारूंगा कि उसका नाम पाकिस्तान से लतीयास्तान हो जाएगा। यकीं नहीं तो पाकिस्तान में चल रहा नारा देख लें हुज़ूर " अमेरिका ने कुत्ते पाले, वर्दी वाले वाले" मेरे दोस्त मेरी एक ही इच्छा है कि मुझे शान्ति का नोबेल पुरस्कार मिल जाए बस। मोदी ने एक लम्बा पॉज लिया फिर बोला तुम भिखारी की तरह नोबेल मांग रहे हो ट्रंप मान लो 10 अक्तुबर को तुम्हारा नाम नोबेल के लिए नहीं आया तब क्या तुम नार्वे पर ही युद्ध थोप दोगे। अरे झिंगड तैनू कब अक्ल आएगी।

          मोदी: ने फिर से एक लम्बा पॉज लिया और बोले देखो डियर ट्रंप न तो मैं रूस से दोस्ती तोडूंगा न ही रूस से तेल और हथियार खरीदना बंद करूंगा। अमेरिका का इतिहास रहा है उसने हर उस देश को नष्ट कर दिया है जिसने उन्हें चुनौती दी।जब जापान ने चुनौती दी, तो तुमने उसे नष्ट कर दिया। जब यूएसएस आर ने तुम्हें चुनौती दी, तो तुमने उन्हें 17 टुकड़ों में तोड़ दिया। जब इराक ने अपना सिर उठाया, तो तुमने उन्हें नष्ट कर दिया। अब तुम इजरायल के साथ मिलकर ईरान के साथ भी ऐसा ही करना चाहते हो लेकिन ईरान ने तुम्हारी पेंट ढीली कर दी है। अब तुम चीन रूस के साथ मिलकर भारत को भी लपेट रहे हो बस यहीं तुम ग़लती कर बैठे ट्रंप बाबू। तुमने मोदी ,अम्बानी, अदाणी को चीन का जैक मा समझ लिया है क्या? जो विलुप्त हो जायेंगे ये तो मैंने रोका हुआ है वरना ये दोनों गुज्जू अपनी पे आ गए तो "एक था टाइगर" की तरह "एक था ट्रंप" होने में देर नही लगेगी। तुम सुबह उठते ही आएं बाएं शाएं चालू हो जाते हो जरा फोर्ड की हालत तो देख लो कित्ते घाटे में आ गई है और ये तो अभी शुरुआत है मियां। तुम चाहते हो सारे देश तुम्हारी चौधरहट कबूल करें पर ऐसा होने का न है महाराज। तुम्हें रूस से दिक्कत नहीं है तुम चाहते हो भारत तुमसे तेल खरीदे ठीक है लाओ जिस रेट में रूस दे रहा है तुम आधे रेट में देने की बात करो तुम्हारे सारे तेल के कुएं हमारे। जहां तक हथियारों की बात है F 35 केरल में महीनों खड़ा रहा सोचो हमने क्या कार गुजारी की होगी। तुम्हारे F 35 कबाड़ हैं उन्हें हमारे पड़ोसी कबाड़ीस्तान को बेच दो। जैसे ही मोदी ने स्वांस ली ट्रंप बोल पड़े:  आप मेरे दोस्त हो मोदी भाई दोस्ती का कुछ तो खयाल रखो कब से पेले जा रहे हो तुम्हारी संगत में ब्राजील का लूला भी मुझे ढंग से पेल रहा है कहता है शी से बात करेगा, पुतिन से करेगा मोदी से करेगा पर मुझसे नहीं, भाई घन्नी बेजत्ती हो री है कुछ तो कर मेरे बाप। अच्छा एक काम करो तुम्हारे यहां एक कहावत है "सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे" हां तो मोदी जी बस कुछ ऐसा उपाय करो कि दोनों की बात रह जाए। लेकिन हमारी एक शिकायत पर तुरन्त ध्यान देना होगा वो क्या है हम हफ़्ते भर तक अनाप शनाप बकते हैं ट्वीट भी कर रहे है पर न मोदी जवाब देता है न उसका कोई मंत्री बताओ जी जॉइंट सेक्रेट्री रैंक का एक अधिकारी स्टेटमेंट जारी कर देता है कि "राष्ट्रपति ट्रंप जी को कोई गलतफहमी हो गई लगती है" हम अपनी नीति पर कायम रहेंगे और फाइल झाड़कर हंसता हुआ वापिस लौट जाता है। ये तो प्रोटोकाल नहीं है भाई। मोदी जी माउथ पीस पर हाथ रखकर मुस्कुराए जा रहे हैं फिर हल्के से बोले मिस्टर ट्रंप ये नया भारत है। ख़राब सौदा करने से अच्छा है मैं सौदा ही न करूं। गुज्जू भाई हूं गुज्जू भाई।

         अब ध्यान से सुनो ये दुनिया पर चौधराहट जमाना बन्द करो। भारत रूस चीन के साथ टैरिफ टैरिफ खेलोगे तो कहीं ऐसा न हो make amerika great again के चक्कर में make amerika fail amerika न बन जाओ। दुनिया तेजी से बदल रही है। ये टैरिफ टैरिफ खेलकर ये जो तुम टैरिड डैडी हुए जा रहे हो इससे तुम निश्चित अमेरिकियों का ही तेल निकालोगे। भारत तो 140 करोड़ लोगों का देश है जिसमें अमेरिका जैसे चार देश बनते है और बात अगर RIC की करोगे तो 10 अमेरिका बनेंगे। और अगर S यानि साउथ अफ्रीका भी जोड़ दिया तो चलो खुदई हिसाब लगा लो मियां।तुम्हारी जनता तुम्हें पीटने के बहाने ढूंढ रही है कि साले किस उल्लू के पट्ठे को वोट दे दिया समझे। और हां ये जो तुम व्हाइट हाउस की छत पर खड़े होकर हाथ हिला रहे थे न उसी छत पर लेडी crow ने दो बच्चे दिए थे कल ही फोन पर मुझसे शिकायत कर रहे थे कि मोदी जी संभाल लो इस फुटकर को वरना हम इस पर ऐसा टैरिफ लगायेंगे ससुरा टैरिफ की स्पेलिंग ही भूल जाएगा। अब तुम खुदई सोचो तुम्हारी चौधराहट कित्ती रह गई है। अच्छा सुनो अगस्त में तुम्हारी टैरिफ टीम टीम आ रही है सम्भावना तलाशने ठीक है थोड़ी ढील देता हूँ लेकिन कृषि और डेयरी सेक्टर को छोड़कर। कल रात को तुम्हारी मैरी मां मेरे सपने में भी आई थीं तुम्हारी गुंडागिरी के कारनामे सुना रही थीं अब तो ग्रोक पर वाशिंगटन का सबसे बड़ा गुंडा कौन डालते ही तुम्हारा नाम फ्लैश होता है। चलते चलते दो बातें जो ट्रंप एलन मस्क का न हुआ वो और किसी का क्या होगा। ट्रंप ने कुछ कहने के लिए जैसे ही मुंह खोला मोदी बोले आखिरी बात सुनो डियर ट्रंप भारत के लोग अच्छे हैं लेकिन थोड़ा सनकी भी, उदाहरण देता हूँ जब पूरा विश्व कोरोना से त्राहि माम त्राहि माम कर रहा था तब भारत के लोग 10 रुपये का बीड़ी का बण्डल 100 में खरीद कर सुट्टा मार रहे थे,  10 की सिगरेट 50 में, 100 का अध्धा 1000 में और 500 की बोतल 5000 में खरीदकर कोरोना को चैलेंज कर रहे थे I  अब ऐसे लोगों के देश को टैरिफ की धमकी मती देना I और हाँ हमारे देश में एक और कहावत है " चौबे जी छोबे जी बनने गए और दुबे जी बनकर लौटे" समझ जा पगले वरना मैं असली चौधरी एक्सपोर्ट कर दूंगा वो तेरी सारी चौधराहट कहां से निकालेगा तुम खुदई समझ लो लपड़ झंडीस। ट्रंप: थैंक यू दोस्त मेरे पिताजी ने झापड़ी का बोला और तुमने लपड़ झंडीस मतलब good whishis होता है न मज़ा आ गया मैं इनको नोट करके रखूंगा। जय मोदी जय भारत।

         मोदी ने ट्रंप का ट्रंपवा बजाने के बाद अजीत डोभाल की ओर देखते हुए कहा सुनो अजीत ये पक्के वाला HK है कुछ लोग दो क़दम आगे चलते हैं चार कदम पीछे पर ई कनखजूरा टेढ़ा मेढ़ा चलता है, इसकी फिल्डिंग लगाता हूं। नज़र रक्खो इस ससुरे पर मैं जरा चीन जाकर चाइनीज खा कर लौटता हूं वो भी वाया जापान। चौंको मत अजीत धोखे का दूसरा नाम चीन है, तुमने सुना नही "अति विनियम धूर्तता नाम लक्ष्मणम" राष्ट्रपति महोदय को जिनपिंग ने मार्च में गोपनीय चिट्ठी भेजी थी न, चीन ने उसमें जो नही लिखा है मैंने वो भी पढ़ लिया है। तुम जयशंकर को कहकर रूस से 20 प्रतिशत तेल की खरीद बढ़ा दो। चीन जापान से आने के बाद इस ट्रंप का अच्छे से ट्रंपवा बजाकर इसकी डिबरी टाइट करता हूं।


प्रदीप डीएस भट्ट - 31082025
व्यंग्यकार मेरठ 

Thursday, 7 August 2025

"अतिथि देवो भव"


रिपोर्ताज 

        "अतिथि देवो भव"

         एक लम्बे अरसे बाद शायद तीन दशकों बाद ऐसा देखने को मिला कि श्रावण मास ने भोले नाथ से जग के कल्याण के लिए उत्तरी भारत में ( महाराष्ट्र और साउथ इंडिया में पन्द्रह दिनों बाद) एंट्री की ही थी कि इन्द्र देव बिना वीज़ा लिए दे दना दन बरसने 🌧 🌦 🌂 लगे I शुरू में तो सब ठीक ही था फिर जाने क्या हुआ यहाँ बरसे तो वहाँ नहीं और वहाँ बरसे तो यहाँ नहीं तो महराज फिर कहाँ बरसे I  महाराज आने से पहले अपनी टंकी और टोटी चैक करनी चाहिए थी न, ये क्या हुआ जी मेरठ जैसे छोटे से शहर में बाईपास पे बरसोगे कंकरखेड़ा छुट्टी, कैंट बरसोगे गढ़ रोड नहीं और गढ़ रोड़ बरसोगे तो नदी पार नहीं, महाराज शास्त्रों में इसे पक्षपात कहा गया है। 😜😜😜😜अब बताओ जी हम मुम्बई, हैदराबाद छोड़कर किसलिए मेरठ में आन बसे । ये तो ज्यादती है महाराज। सरासर दुहाई है दुहाई I चलो महाराज आगे से ध्यान राखियो।😇

         अभी हम इन्द्र देव से गुफ़्तिया ही रहे थे तभी हमारे खूबसूरत दीदे 👀 👁 मुबलिया पर एक चित्र देखकर ठिठक गए। चित्र को इत्र लगाया फिर चौड़ा करके देखा तो कुल अट्ठारह जनों की फुटवा जिसमें मात्र तीन पुरुष और पन्द्रह महिलाएँ I  सच बता रिया हूँ तुरन्त हर साल अख़बार में छपने वाले 10th 12th के रिज़ल्ट पर वही खबर "लड़कियों ने  लड़को से बाज़ी मारी "  महिला सशक्तिकरण की जय बोलने को मन तो किया लेकिन फिर नीला ड्रम और सर्प दंश याद आ गए और हमने चुपचाप फ़ोटो पर नज़र गड़ाई। कई जाने पहचाने चेहरे दिखे जो फ़ेसबुक की भीड़ में कहीं खोए हुए लगे लेकिन लेकिन लेकिन मुम्बई से बबीता जैन, अन्नपूर्णा गुप्ता और देहरादून से मीरा नवेली इन सभी से पूर्व में ग़ज़ल कुम्भ में मुलाक़ात हो चुकी थी। 😊😊😊😊बबीता जैन और अन्नपूर्णा से तो एक अन्य संस्था के कार्यक्रम में चेन्नई और हरिद्वार में भी मिल चुका था सो बबीता जी को तुरन्त फोन खड़का दिया। राम राम श्याम श्याम हुई उनकी कुछ शंकाओं का समाधान किया और फिर उनके 1 अगस्त मुंबई से चलने से लेकर 2 अगस्त IIMT मेरठ में पहुँचने तक दिशा निर्देश दिए जाते रहे। चूँकि उनका केवल 24 घण्टे का ही प्रवास था सो जो सम्भव हो सकता है कि तर्ज़ पर पहले भोजन 🍑🍑🍉🍓🫐🥥🥝 ग्रहण किया फिर अपनी मुम्बईया स्कूटी उठाई और स्वेद से सराबोर होते हुए IIMT अतिथि गृह जा पहुँचे। हमारी शिकायत से इन्द्र देव कुछ रूष्ट हो गए लगते थे तभी तो हमने दोनों मोहतरमाओ को बताया था कि मौसम विभाग ने दिल्ली NCR में  बारिश का 🌧️🌧️🌦️🌦️🌦️येलो अलर्ट जारी किया है किन्तु यहाँ तो धूप 🔥🔥🔥ऐसे निकली कि बस पूछो मती।

         IIMT के ठीक ठाक से अतिथि गृह में हम अन्नपूर्णा और बबीता जी थोड़ी देर में हैदराबाद से पधारी निधि जैन भी आ गई। काफ़ी देर तक चारों बतियाते रहे फिर निधि जैन नीचे और बाजू वाले कमरे से मीरा नवेली जी बिटिया संग प्रकट हुईं I बबीता जी व अन्नपूर्णा तैय्यार होकर आईं तो फिर मैंने आतिथ्य धर्म का निर्वहन करते हुए बारी बारी से तीनों मोहतरमाओ और बिटिया मृणालिनी का सत्कार किया। चूँकि बार बार लंच का बुलावा आ रहा था सो सीधे लंच🍿🍩🥃🍪🫘🥣🥣🥣🥣 रूम में I चारों के लंच से निवृत्त होने के बाद हमने तीनों को शुभकामनायें प्रेषित की और मृणालिनी को शुभाशीष देते हुए खरामा खरामा घर की ओर। 

         अगले दिन दिल्ली प्रोग्राम अटेंड करके मेरठ वापसी के रास्ते में बारिश ने अपना भयंकर रूप दिखाया भाई साहब पूछो मती, तभी मुबलिया बज उठा उधर बबीता जी थीं, पूछने लगी ये शोर कैसा है प्रदीप जी, बड़ी मुश्किल से इत्ता ही बोल पाए देवी इन्द्र देवता ने तूफ़ान  ⛈️ 🌩 ⚡️ ⛈️ 🌩 मचा रक्खा है I इधर बादल गरज़ रहे थे उधर बबीता बारिश के येलो अलर्ट पर सवाल उठा रही थीं, अब उन्हें कौन बताए प्लेटफार्म नंबर 5 पर आने वाली गाड़ी अगर अचानक 10 पर आए तो कोई क्या करे जी।


प्रदीप डीएस भट्ट-07082025

Thursday, 31 July 2025

"कुटाई चालू आहे"



"कुटाई चालू आहे"

         ऊर्जा मंत्रालय की बड्डी सी ऑफिस के घने बड़े से साहब ने आज समय से पन्द्रह मिनिट पहले ही ऑफिस में इंट्री मारी और सीधे शाकिर मियां को तुरन्त हाज़िर होने का हुकम छज्जू चपरासी को पकड़ा दिया।  छज्जू चपरासी भी हैरान परेशान 11,12 और कभी लंच के बाद आने वाले चतुर्वेदी साहब आज इत्ती जल्दी, और आते ही शाकिर मियां को याद कर रे, कुछ तो गड़बड़ है। ख़ैर सिर खुजाते हुए छज्जू ने शाकिर मियां को सलाम ठोका फ़िर चतुर्वेदी साहेब का आदेश ज्यों का त्यों पढ़ सुनाया कि, तुरन्त हाज़िर होना है। अब शाकिर मियां की तो पहले ही चतुर्वेदी साहेब से छत्तीस छत्तीस के आंकड़े में गुत्थम गुत्थी लगी पड़ी थी सो शाकिर मियां चपरासी को टरकाते हुए बोले , जा बोल दे उस पण्डित को मैं अभी आया नई। छज्जू आँखे तरेरते हुए बोला ज़्यादा खलीफा मति बनो मियां आज खटपट है तो पण्डित जी को टरका रहे हो कल तक तो बड़ी गल बहियां करते फिरते थे। पण्डित जी का गुस्सा दुध में आए उबाल की तरह है मियां वैसे भी तुम हो उनके डिप्टी हमने ज्वाइन करते ही बता दिया था साहब जब गुस्सा करें तो चुप्पी साध लो या उबलते दुध में दो लकड़ी की डंडी रख दो जैसे उबाल को शान्त रखने के दुध के भगोने पर दो लकड़ी की स्टिक रख दो तो दुध कभी बाहर नहीं आता। लेकिन तुम कतई न माने और जा भिड़े उस दुर्वासा से। अब जब पण्डित जी खुदई बुलवा भेज रहे हैं तो मेढ़की की तरह टांग न उठाओ मियां वरना अगर पण्डित जी बिफर गए न तो हम दोनों की बली लेकर ही मानेंगे। शाकिर ने अपनी इंसलेट तो महसूस की पर बोला कुछ नहीं बस इत्ता बोल पाया अच्छा मेरे बाप मुझे लघु शंका तो कर लेने दे, जा जाकर ये सच बता दे कि शाकिर मियां लघुशंका में व्यस्त हैं। छज्जू खींसे निपोरते हुए वहां से खिसका और शाकिर मियां लघुशंका निवृत होने के लिए सीधे गुसलखाने के लिए उड़न छु हो लिए।

         शाकिर मियां अभी लघुशंका में व्यस्तता का आनन्द ले ही रहे तभी चतुर्वेदी जी भी कान पर जनेऊ लपेटे हुए बगल में आकर लघुशंका में व्यस्त हो गए। शाकिर मियां को कुछ शंका का अहसास हुआ ही था तभी पण्डित जी ने लघुशंका के मध्य में शाकिर को अपनी मंशा प्रकट कर दी। देखो शाकिर बहुत बड़ी मुसीबत आन पड़ी है, तुम फारिग होने के बाद तुरन्त मेरे रुम में पहुंचो। इससे पहले कि शाकिर मियां कुछ समझते चतुर्वेदी जी हाथ धोकर कान से लिपटा जनेऊ वापिस बनियान में घुसेड़ते हुए वॉशरुम से बाहर, हतप्रभ से शाकिर मियां तुरन्त फारिग हुए और चतुर्वेदी जी के कमरे की ओर ये सोचते हुए लपक लिए कि जाने क्या मुसीबत आन पड़ी जो पण्डित जी को सबर न हुआ और मेरे पीछे पीछे गुसलखाने तक आ टपके। कमरे में घुसते ही पण्डित जी को साइड के सोफे पर बैठे देखा तो शाकिर मियां वहीं लपक लिए, फिर सामने वाले सोफे पर अपने को ढकेलते हुए बोले, क्या हुआ पण्डित जी ऐसी क्या मुसीबत आन पड़ी जो आप मेरे पिछु पिछु गुसलखाने तक दौड़ लगा बैठे। चतुर्वेदी जी ने एक गहरी स्वांस ली फिर घंटी बजाकर छज्जू को बुलाकर बोला, छज्जू आगरा मिठाई वाले से समोसे जलेबी मंगाकर पूरे ऑफिस में बांट दे और हां जाने से पहले दो कप चाय दे जा और देख मनोरमा मैडम को बोल दे शाम तक कोई भी मेरे कमरे में दाख़िल नई होगा। कोई पूछे तो बता दियो हेड ऑफिस का मसला है अर्जेंट मीटिंग चल रही है। छज्जू सर हिलाता हुआ बाहर की ओर लपक लिया।         
         शाकिर मियां कुछ सशंकित से होते हुए बोले क्या माजरा है पण्डित जी कुछ तो बताओ। चतुर्वेदी जी ने आधे गंजे सर पर आए पसीने को पोंछते हुए कहना शुरु किया। देखो शाकिर मसला ये है कि तुम्हें तो पता ही है फिर कुछ सोचते हुए बोले तुम्हें क्या पूरे शहर को पता है कि हम कविताएं लिखते हैं। पिछले दिनों ऑपरेशन सिन्दूर पर लिखी हमारी कविता " पाकिस्तान की "कुटाई " काफ़ी फेमस हो गई है। अब वो कविता प्रसिद्धि पाते पाते मंत्री जी तक पहुंच गई है। कल मंत्री जी ने घर बुलाकर आदेश दे दिया की स्वतंत्रता दिवस पर उनका ओज से भरा भाषण हम लिखें और उसमें  कुटाई शब्द बार बार पूरे ताल मेल और ऊर्जा से भरपूर होकर आना चाहिए। अब तुम्हीं बताओ मियां कविता लिखना और बात है भाषण लिखना अलग। करें तो क्या करें। जान सांसत में आन पड़ी है। शाकिर मियां कुछ सोचते हुए बोले पण्डित जी भाषण लिखना इत्ता मुश्किल काम भी ना है जीत्ता सोचकर आपका हलक सूखा जा रिया है देखो आप बचपन की यादों से शुरु करो कि बचपन से आज तक आपकी कितनी और कब कब कहां कहां कुटाई हुई है। सच्ची कै रिया हूं अभी तो 15 अगस्त में दो दिन पड़े हैं कुछ क्या बहुत कुछ कर लेंगे। देखो बात अगर जेहादी भाषण की होती तो हमऊ लिख देते लेकिन मामला देश भक्ति का है इसलिए हमसे ज्यादा उम्मीद मति राखियो आइडिया दे दिया है इसलिए याद करते जाओ लिखते जाओ कल फिर बैठक कर लेंगे। चतुर्वेदी जी झुंझलाते हुए बोले अबे तुम भी तो तकरीरें लिखते हो वो क्या नाम है उस अख़बार का ख़ैर छोड़ो भी कोई और सुझाव दो। एक बात बताए दे रहा हूँ शाकिर सवाल सिर्फ़ मेरी इज़्ज़त का नई है इस ऑफिस का और ऊर्जा मंत्रालय का भी है अगर कुछ गड़बड़ हुई तो हम सबकी ऊर्जा ख़त्म होने में टाइम न लगेगा वैसे भी ऊर्जा विभाग के मंत्री हमेशा ऊर्जा से ओत प्रोत रहते हैं कल ही दो इंजीनियरो की बलि ली है कसूर सिर्फ़ इतना था कि मंत्री जी के भाषण के अध बीच में लाइट चली गई वो भी ट्रांसफार्मर के फूंकने से एक तो वैसे ही ऊर्जा की खपत बढ़ गई है वो ट्रांसफार्मर भी क्या करता फिर ऊर्जा मंत्री का भाषण बिचारा लोड न उठा सका।। शाकिर मियां हाथ जोड़ते हुए बोले पण्डित जी अभी तो बताया जेहादी तकरीरें लिखते हैं हम उस अख़बार में लेकिन वो छपती हैं हामिद अंसारी जो कि बड़े इमाम के दामाद हैं, के नाम से मतलब काम मेरा नाम उनका हमें तो हर तकरीर लिखने के दुई हज़ार मिल जाते हैं बस। ऊपर का खर्चा पानी निकल जाता है। ख़ैर आप कागज़ कलम उठाईये और लिखने बैठिए, चतुर्वेदी जी को असमंजस में देखकर शाकिर मियां बोले अरे महाराज आग़ाज़ तो करो अंजाम तक भी पहुंच जायेंगे। चाहो तो हम आपको कुटाई के काफिए दिए देते हैं जहां ठीक लगे भाषण में घुसेड़ देना जैसे कि ठुकाई, दुहाई, रजाई, रंगाई, पुताई, मलाई, नलाई वगैरह वगैरह कहते हुए शाकिर मियां ये सोचते हुए कि सैंया भए कोतवाल तो अब डर काहे का फिर मुस्कुराते हुए मियां जी वातानुकूलित कमरे में झपकियां लेने में व्यस्त हो गए। 

         चतुर्वेदी जी ने ठंडी चाय की चुस्की लेते हुए दूसरे सोफे पर पसरे और ऊंघयाते हुए शाकिर को देखा फिर मुस्कुराते हुए अपनी कुर्सी में धसते हुए कलम उठाई, डायरी का पन्ना खोला उसपे ऊपर ॐ लिखा फिर सोचते जाते हँसते जाते और कलम चलाते जाते। लगभग दो घंटे के लेखन के बाद उन्होंने एक अंगड़ाई ली फिर खर्राटों से शाकिर के उठते गिरते पेट को देखा फिर मुस्कुराते हुए फिर लिखने में जुट गए। आख़िर फाइनली ढाई बजे भाषण फ़ाइनल किया और घंटी बजा दी, घंटी की आवाज़ से शाकिर मियां की नींद में खलल तो पड़ा लेकिन उसे जल्दी समझ आ गया कि वो घर में नहीं है ऑफिस में है और वो भी बॉस के कमरे में। छज्जू ने दरवज्जजा नॉक किया और अन्दर आकर सीधे सावधान की मुद्रा में खड़ा हो गया। छज्जू मेरा और शाकिर का खाना यहीं लगा दे। साढ़े तीन पर फिर मीटिंग शुरु होगी, कोई अंदर न आवे समझा, जी कहता हुआ छज्जू खाना लगाकर बाहर निकल लिया। चतुर्वेदी जी शाकिर से बोले, शाकिर तूने आइडिया अच्छा दिया बचपन याद करो बस वहीं से शुरु किया है। खाना खाकर तुझे सुनाता हुं ठुकाई क्या होती है। शाकिर मियां अंदर ही अंदर बड़बड़ाए आज तो रजिया गुंडों में फंस गई रे। चतुर्वेदी महाराज शाकिर मियां की मनोस्थिति अच्छी तरी समझ रहे थे लेकिन मरता क्या न करता कि तर्ज़ पर उन्हें समझ में ही नहीं आया मंत्री जी के आदेश से कैसे निपटु सो कल ही डिसाइड किया कि कल सुबह सुबह शाकिर से सलाह लेता हूं वैसे भी ऑफिस में कोई इस लायक दिखा भी नई, सब एक दूसरे को झटके देने में व्यस्त दिखे। शाकिर भला आदमी तो है लेकिन एक दम अड़ियल किस्म का इसलिए एक दिन चतुर्वेदी जी ने शाकिर को जोर का झटका कुछ ज़्यादा ज़ोर से दे दिया लेकिन आज जब सलाह लेने की बात आई तो चतुर्वेदी जी ने गधे को बाप बनाने से परहेज़ भी नही किया। क्या करते भई बात इज़्ज़त पे जो बन आई थी। सो जैसे ही छज्जू ने खाना प्लेट में परोसा चतुर्वेदी जी ने उसे बिना किसी हिल हवाई के सीधा पेट तक पहुंचा दिया। इधर शाकिर मियां भी खाना खाते खाते सोच रहे थे खा ले बेटा खा ले पण्डित के घर का खाना है आज दक्षिणा में इसका भाषण सुनना पड़ेगा इच।

         हां तो शाकिर मियां सुनो, जहां कुछ अतरंगी सा लगे तो टोक देना मैं उसे अंडर लाइन कर दूंगा और उस पर बाद में डिस्कस करके ठीक कर लेंगे तो मियां सुनो।अतिथियों को तो मंत्री जी खुदई नमस्कार चमत्कार करके सम्बोधित कर लेंगे मैं सिर्फ़ पढ़ता हूं और चतुर्वेदी जी शुरु हो गए:

         मित्रों, जैसे कि आप सभी को पता ही है कि 22 अप्रैल को पहलगाँव में आतंकियों ने 25 भारतीय हिन्दुओं की और एक हमारे नेपाली हिन्दू भाई की सिर्फ़ धर्म पूछकर ही नहीं बल्कि कपड़े खुलवाकर, चैक करके फिर प्वाइंट ब्लैंक से सर पे निशाना लगाकर हत्या की तो भैय्या पूरे देश में हाहाकार तो मचना ही था, फिर एक नापाकी ने जाते जाते म्हारी एक बेटी से कह दिया कि "मोदी से कह देना" बस मित्रों यही एक गलती पाकिस्तान पे घणी भारी पड़ गई और पाकिस्तान ने भारत को" कूटाई" का न्यौता दे दिया फिर क्या होना था मित्रों मोदी साहब सऊदी अरब से वापिस आए और तीनों सेनाओं को कह दिया कि अपने अपने कुटाई यंत्र निकाल लो इस बार इस "झंडू बाम" को असली कुटाई के अंतर्राष्ट्रीय दर्शन करवाते हैं। अब आपको तो पता ही है गांव हो या शहर भाई साहब ऐसा कोई न जिसने कूटाई का आनन्द न लिया हो। दूसरे की क्या जी मैं तो अपनी पे जो बीत्ति वो बता रिया हूँ मित्रों। सबसे पहले कुटाई का अनुभव अपनी मां से लिया ग़लती मैं करूं तो कुटाई भाई करे तो साथ में फिर से मेरी कुटाई, मैं रात में अपनी गात को खुदई सहलाता हुआ सोचता था कि जे क्या बात हुई मेरी गलती पे भी मेरी कुटाई, भाई की गलती पे भी साथ में कुटाई। बस भैय्या एक दिन ग़लती से मिस्टेक कर बैठा मां अहोई माता का व्रत रखें हुए थी अजी वही जो बच्चों की लम्बी उम्र के लिए रखते हैं सो मन्ने ये सोचकर आज तो मां का व्रत है गुस्सा न करेगी लेकिन मित्रों अगर मां को कूटना है तो क्या व्रत क्या अनाव्रत। जैसे ही मैंने पूछा मां भईया की गलती पर भैय्या के साथ मुझे क्यूं कूटती हो, मां हँसी और बोली तेरा बड़ा भाई अकेले पिटेगा तो अच्छा थोड़ी लगेगा फिर साहब बेटे ध्यान से सुन कूटने कूटाने से इम्युनिटी बहुत ज़्यादा बढ़ती है धीरे धीरे ये इम्युनिटी इतनी बढ़ जाएगी कि तेरी गात स्टील से भी घणी मजबूत हो जावेगी और साहब अगले दिन नाश्ते में देशी घी नमक मिर्च लगाकर दो बासी रोटी और एक गिलास दुध देने से पहले फिर कुटाई कर दी मैंने प्रश्नवाचक दृष्टि मां पे गड़ाई तो बोली कल व्रत था न बेटे तो कल तेरी हिम्मत पे तुझे कूट न सकी इसलिए कल का उधार चुकता कर दिया वैसे भी उधार ज्यादा देर अपने पास रखना नी चाइए। और उसके बाद फिर जब स्कूल में गए तो मासाब ने कुटाई ठुकाई , रंगाई, नीलाई और पता नहीं क्या क्या और कैसी कैसी और जब मासाब नीम की गीली टहनी से सुताई करते थे तो बस पूछो मति दिन में ही आंखो के लाल नीले पीले तारे तैरने लगते थे। कुल मिलाकर घर पे कुटाई स्कूल में कुटाई, मां से कुटाई और कभी कभी पिताजी भी हाथ साफ़ करने से न चूकते वैसे भी पिताजी के द्वारा की गई डंडे से, बेल्ट से थप्पड़, लात घूंसे और कभी कभी पेड़ की टहनी बस भाई हमें ही पता है गात का क्या हाल होता था कभी कभी लगता था जैसे मां पिताजी का गुस्सा हमारी कुटाई करके निकाल रही है और पिताजी मां का गुस्सा हम पर निकाल रहे हैं लेकिन एक बात समझ न मासाब किसका गुस्सा हमारी कुटाई करके निकालते थे शायद प्रिंसिपल साहब का या मास्टरनी की का।

         तो मित्रों अब खुदई सोचो जब पूरे भारत को ये कुटाई का सुनहरी मौका मिला तो कैसे छोड़ देते सो छः सात की मध्यनी रात को भारत ने कुछ कुटाई यंत्रों को पाकिस्तान भेज दिया और लो जी 22 अप्रैल का बदला हमारे कुटाई यंत्रों ने 22 मिनिट में ले भी लिया। तड़के उन्हें बता दिया कि देखो बेटा कुटाई यंत्रों को प्रणाम करो और शांत चित्त बैठ जाओ लेकिन मित्रों पाकिस्तान कब माना जो अबके मानता सो अपने फूफा चीन और जीजा तुर्की के नूकाई यंत्रों को म्हारे पे छोड़ दिया भाइयों चीन का माल बीच रास्ते में ही फुस्स हो गया और मोदी जी जो म्हारे पीएम हैं न ,उन्हें भी गुस्सा आ गया और फिर हमने अपने संयंत्रों से ब्रह्मोस कुटाई यंत्र निकाले और पाकिस्तान की ऐसी कुटाई और ठुकाई की कि उनका फूफा और जीजा देखते रह गए और खुद को दुनिया का चौधरी समझे बैठा चौधरी ट्रंप भी भौंचक हो गए। शायद उसे पाकिस्तान के अंदर अपने संयंत्रों में रखे कुटाई यंत्रों की चिंता हो गई। और मित्रों इसके बाद भारतीय कुटाई यंत्रों की मांग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इतनी बढ़ गई है कि अमेरिका का चौधरी भी सकते में है इसलिए वो आजकल आएं बाएं शाएं बोल रहा है। आपने एक कहावत सुनी होगी न कि "सब दिन होत न एक समाना" तो आजकल अपनी निकल पड़ी है, चीन पाकिस्तान क्या सारी दुनिया भारत की ताकत देखकर हैरान परेशान है।  तो मित्रों इसी बात पर बोलो भारत माता की जय और हां ध्यान से सुन ले पाकिस्तान ऑपरेशन सिन्दूर थमा है बेटा रुका नहीं या यूं समझ ले प्यारे कि "कुटाई चालू आहे"

         कैसा लगा भाषण शाकिर मियां उधर शाकिर मियां चतुर्वेदी जी को अपलक निहारे जा रिए थे। जब दोबारा चतुर्वेदी जी ने जोर से बोला तो शाकिर मियां की तंद्रा टूटी और एक दम से बोल पड़े तुमने तो कमाल कर दिया पण्डित जी। आख़िरी लाईन तो पंच लाइन है महाराज "कुटाई चालू आहे"। भाषण बिलकुल परफेक्ट लिखा है पण्डित जी। मैं भी बोलता हूँ "कुटाई चालू आहे पाकिस्तान" भारत माता की जय"।

प्रदीप डीएस भट्ट 
व्यंग्यकार, मेरठ (UP)