Wednesday, 20 August 2025

"क्या कह दिया कवि ने"

"क्या कह दिया कवि ने" 

रिपोर्ताज 

         अभी हम उन्घियाते 😴 हुए उठे ही थे कि मुबलिया घनघना उठा दूसरी तरफ़ ऑल इंडिया रेडियो के नजीबाबाद केंद्र से सोहन शर्मा थे। नमस्कार चमत्कार के बाद सोहन जी ने सूचित किया सर 13 अगस्त को आपकी रिकॉर्डिंग होनी निश्चित हुई है😊 हमने धन्यवाद अदा किया फिर हमने यूं ही पूछ लिया कोई और भी है क्या मेरठ से तो बोले दो और थे लेकिन दोनों ही मेरठ से बाहर हैं🫣 एक सोलह को आयेंगे दूसरे पच्चीस को सो जनाब ए आली आप ही नजीबाबाद रेडियो स्टेशन को पवितर कर दें हमने तथास्तु कह दिया सोचा पूरे ग्यारह दिन पड़े हैं। इसी बीच इंद्र देवता ☔ 🌧️ ☔ पूरे भारत में घमासान मचाने लगे और लो जी सात अगस्त को मुबलिया फिर घनघना उठा। सोहन जी ने सोणी सी आवाज़ में गुज़ारिश की कि क्या आप तेरह की जगह ग्यारह को पधार सकते है साथ ही बिना विलम्ब किए सुदेश यादव और चित्रा त्यागी जी के मोबाईल नंबर भी इस आशय से शेयर कर दिए कि आप इनसे बात कर लें इनकी भी रिकॉर्डिंग ग्यारह को ही है। दूसरे दिन सुदेश जी से बात हुई और तय हुआ कि अनिल बाजपेई हापुड़ से अपनी गाड़ी🚘 लेकर आयेंगे उसी में हम चारों चलेंगे। 

         लो जी ग्यारह भी आ गई, सुबह सात बजे निश्चित स्थान पहुंचें, चित्रा जी हमसे पहले ही पहुंच गईं। तभी सुदेश जी ने बताया हमारे मित्र सुनील भारद्वाज भी चलेंगे। अब पांचों लद गए मारुति डिजायर🚖 में। चूंकि बारिश⛈️⛈️⛈️ ने कहर मचाया हुआ था सो हमने सभी को सूचित किया देखो भैय्या परसों अख़बार में नजीबाबाद रेडियो स्टेशन में पानी घुसा हुआ था और बिजनौर बैराज का हाल भी कुछ अच्छा न है, पुल के नीचे से बहने वाला पानी पुल के ऊपर से बह रहा है सो सुदेश जी ने किसी परिचित को तुरन्त फोन खड़का दिया। उधर से अपेक्षित उत्तर प्राप्त हुआ, जीवन से मोह भंग हो गया हो तो पधारो बच गए तो रिकॉर्डिंग करना वरना तुम्हारा नाम रिकॉर्ड में दर्ज करवा देंगे 🙆‍♂️। तभी चित्रा जी ने विश्वसनीय अंदाज़ में कहा वाया गढ़, गजरौला, धनौरा, चलते हैं मुझे रास्ता पता है।  सुनील जी ने तुरन्त गूगल में उगल किया और बाजपेई ने गड्डी दौड़ा दी जी। धनौरा तक सब ठीक लेकिन गूगल को क्या पता पानी कहां कहां घुस चुका है सो हमने गुहार लगाई क्या हम देसी गूगल में उगल करें। चारों ने पलटकर ऐसे देखा जैसे हमने पाकिस्तान पे हाथों से ही ब्रह्मोस 👁️ दाग दिया हो। हमने कहा तनिक गड़िया रोकिए तो सही फिर दो तीन लौंडे🧑🏻‍🎨 जो यूं ही खड़े बतिया रहे थे नजीबाबाद का रास्ता पूछा उन्होंने पहले तो घूर कर देखा जैसे हमने ट्रंप पर टैरिफ थोप दिया हो फिर जब देखा कि मारुति नामक गड़िया में बढ़िया से पंच परमेश्वर विराजे हुए तो मुस्कुराते हुए पहले तो नजीबाबाद जल्दी पहुंचने वाले रास्ते को दिमाग़ से निकालने की नसीहत दी और साफ़ बोल दिया नाक 👃 की सीध में चले चलो फिर फलाने से ढिकाने से 😳 लेना, वॉकल फॉर लोकल करते हुए बिजनौर को नमस्ते करते हुए हम पंच परमेश्वर साढ़े बारह नजीबाबाद जा पहुंचे, जहां हमारे इस्तकबाल के लिए 🌱 अस्सी वर्षीय नौजवान इंद्र देव भारती जी हाज़िर मिले। हमने फ्रेश होने के बाद साफ़ कह दिया पहले पेट पूजा करेंगे भला खाली पेट रिकॉर्डिंग क्या खाक करेंगे जी। हालत बाकी चारों की भी यही थी पर बोले कौन तो हुज़ूर हम हैं न। सो गर्मा गर्म पकौड़ी समोसे बरफी के साथ बढ़िया वाली चाय ओह हो हो भाई साहब पूछो मति बस डकार की कसर थी पर वो किसी को भी आई ना जी।

         तीन बजे रिकॉर्डिंग से फारिग हुए तो चित्रा जी और इन्द्र देव जी ने बताया कि फलाने के पिताजी नहीं रहे😓 बेहतर होगा पांच मिनिट की हाजिरी लगा दी जाए। अब भला ऐसे कामों को मना करने का प्रश्न ही कहां उठता है सो इंद्रदेव जी के निर्देशानुसार बाजपेई जी ने गड्डी दौड़ा दी। जब गड्डी रोड से बाएं मुड़ी तो कवि दुष्यन्त के नाम से बना बड़ा सा द्वार नज़र आया बस तय किया कि वापिसी में एक ठो फोटो ज़रूर ली जाएगी। कच्ची पक्की सड़क से होते हुए रपटे ( बरसात में अचानक पानी आ जाना, जो उसे पार करने का दुस्साहस करे वो कार सहित किधर बह गया पता ही नही चलता) को प्रणाम🙏🏾 करते हुए नियत स्थान जा पहुंचे। दस मिनिट की बैठक फिर वापिसी चूंकि बारिश का मौसम लगातार बना हुआ था सो दुष्यन्त जी के गांव जाने का विचार त्यागा वहीं से उनके गांव को प्रणाम किया और वापिसी में दुष्यन्त द्वार पर फोटो ली, रास्ते में नजीबाबाद की मशहूर चाट वाले का स्वाद लेते हुए इंद्रदेव जी को घर छोड़ा और भले आदमी द्वारा गाइड किए रस्ते (नहटौर, पैजनिया चांदपुर से धनौरा गजरौला) पर चल दिए मेरठ की ओर। लेकिन लेकिन लेकिन सुनील जीको गूगल ने फिर गच्चा दे दिया। अचानक पोलिस 🚨  बैरिकेडिंग देखते ही गड्डी रुकी बाजपेई ने बड़ी शालीनता से शायद SI था पूछा क्या बात हुई सर, सर सुनते ही पुलिस वाले ने पहले गाड़ी का मुआयना किया फिर पूछा किन्घे जाना है तमै, बाजपेई जी ने फिर बड़ी शालीनता से कहा मेरठ। हूं कहते हुए पोलिस वाला बोला पानी 🌊 पे तैर के जाओगे दिख नी रा पानी पुल के निश्चे से नी ऊपर से बह रा है। तभी सुनील जी बोल पड़े हमें तो गूगल ले आया यहां पर। पुलिस वाला बोला तो कुछ नही पर उसके हाव भाव से लग रिया था जैसे गूगल का नाम सुनते ही वो बाढ़ का पानी हमारी गड्डी की ओर उछाल देगा। गड्डी मोडी और सरपट दौड़ा दी और हमने फिर से देशी गूगल में उगल किया और खरामा खरामा गढ़, चित्रा जी को उनकी बहन के घर ड्रॉप किया, चाय पी और अनिल बाजपेई जी को धन्यवाद कहकर सीधे हापुड़ जाने के लिए कह दिया और हम तिलंगे 😜 रोड़वेज बस पकड़कर पौने ग्यारह बजे सीधे मेरठ। आज के प्रवास की उपलब्धि के तौर पर "एक पंथ दो काज" के साथ "क्या कह दिया कवि ने" तकिया कलाम रहा जिसे प्रवास के दौरान बार बार सुदेश यादव दोहराते रहे।😎😎😎😎😎

प्रदीप डीएस भट्ट - 21082025

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