गाँव का चौकीदार भुवन भागता हुआ चौपाल पर पहुंचा और हांफते हुए चौपाल का आंगन लीप रही धनवंती से बोला प्रधान जी कहां हैं। धनवंती ने ख़ुद को सीधा किया फिर बोली छत पे कसरत कर रे हैं वैसे चौपाल तो दस बजे सजेगी अभी तो आठ भी न बजे और तू हांफ क्यूँ रहा है क्या बात हुई बता। धनवंती की बात का जवाब दिए बिना दीनानाथ छत की ओर लपक लिया। प्रधान जी प्रधान जी कालीदीन के खेत पर एक लाश पड़ी है। प्रधान जी सीधे होते हुए बोले थानेदार को बताया। कालीदीन ने हां में मुंडी हिलाई तो प्रधान जी धोती लपेटते हुए बोले पता लगा लाश किसकी है। कालिदीन ने फिर ना में मुंडी हिलाई तो प्रधान जी बोले पूरे गांव को बुला ला और हां उन चारों को भी। ठीक है कहता हुआ कालिदीन सीढ़ी से नीचे उतर गया।
दरोगा जी दो सिपाहियों के साथ कालिदीन के खेत में पड़ी लाश को बांस की खपच्चियों से घेरे हुए खड़े थे साथ में गांव प्रधान शंकर विश्नोई भी। लोग आते दूर से लाश को देखते और पहचानने से इंकार कर देते। दरोगा जी प्रधान से बोले पूरा गांव ना में मुंडी हिला रहा है अरे कोई तो कुछ बताओ आख़िर ये लाश किसकी है। प्रधान जी ने पूरब दिशा से आ रहे चार लोगों की तरफ़ इशारा किया। चारों पास आए तो प्रधान जी बोले आप चारों भी लाश देख लो और दरोगा जी को कुछ सुराग दो। पण्डित रामलुभवन मिश्र जी गए लाश के चारों ओर चक्कर लगाया फिर दरोगा से बोले लाश के शरीर पर जनेऊ है, ललाट पर तिलक आधा मिट गया है शिखा में गांठ भी लगी है मरने वाला पक्का ब्राह्मण है। दरोगा बोला ये मुझे भी पता है तो इसमें नया क्या है? फिर श्रीधर गुप्ता को इशारा किया, श्रीधर गए चक्कर लगाया और लौटकर दरोगा से बोला लाश के पास एक थैला है उसमें से हिसाब की बही झांक रही है साथ में कलम नत्थी है मानो न मानो मरने वाला बनिया है। दरोगा ने घूर कर श्रीधर को देखा फिर तीसरे राम सिंह को इशारा किया, राम सिंह ने भी लाश का चक्कर लगाया और लौटकर बताया कि लाश के शरीर पर तलवार के कई घाव है उसके हाथ में भी तलवार का मूठ है जो दर्शाता है कि वो लड़ते लड़ते मरा। निश्चित ये क्षत्रिय होगा। अब दरोगा ने खीजते हुए चौथे को जाने का इशारा किया चौथा जो चर्मकार था ने भी लाश का चक्कर लगाया फिर लौटकर दरोगा से बोला साहब मैं इनके जीत्ता परफेक्ट विद्वान तो न हूं पर एक बात पक्की इस लाश के पैर में दस नम्बर की जूती ही आएगी, बाक़ी आप देख लो।
प्रदीप भट्ट -- 06122025
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