रिपोर्ताज
"आज का सृजन कल का परिवर्तन"
मुबलिया की घंटी लगातार बजे जा रही थी हमने बंद आँखो से ही टटोलकर कवर हटाया और अंदाजे से dismiss पर ये सोचकर रगड़ लगाई कि ये 6.03 या 7.02 का ⏰ है लेकिन जब कुच्छो न हुआ तो अपने दीदे 👀 खोलकर देखा उधर से मुकद्दम मियां के मिमीयाने की आवाज़ आई हमने जोर की डपट लगाई जे क्या मियां सुबह 4.45 पर कौन डिस्टर्ब करता है। उधर से हैरत भरी आवाज अरे पण्डित जी घड़ी उल्टा देख रहे हो का अबे घड़ी पौने पांच नहीं 9.25 बजा रही है। हमने घटपट आँखे रगड़ी ये तो वास्तव में 9.25 ही हुए थे और AC भी रात दस बजे से चल चल कर हॉफ रहा था सो पहली फुर्सत में उसे बंद किया फिर मुकद्दम से मुखातिब हुए। बोलो फोन क्यूं किया। मुकद्दम आराम से बोला शिमला से कब लौटे बे हमने कहा कल दोपहर साढ़े तीन बजे। नहाए धोए खाया और एक घंटा सोए फिर दस बजे तक न्यूज़ देखी AC ऑन किया फिर सो गए मुकद्दम बिफरते हुए बोला शिमला कविता पढ़ने गए थे या फिर पहाड़ सरकाने, कित्ता सोओगे बे लगता है तुम्हारी जवानी वापिस आ रही है वरना बुढ़ापे की तरफ़ सरकता ये शरीर कब इतनी नींद मांगता है।😴😴😴। कुछ देर की खामोशी के बाद फिर आवाज़ आई अबे रिपोर्ताज नहीं लिखना है क्या हमने झल्लाते हुए कहा अबे सुनो बे परसों तक लिखेंगे पढ़ लेना उधर से घड़घड़ाते बादलों ☁️ ☁️ ☁️ के फटने जैसी आवाज़ आई। चुपचाप उठो फ्रेश🤠 हो जाओ खाओ और लिखने बैठ जाओ बे ज़्यादा नवाबी नखरे मति दिखाओ वरना आगे के शब्द मुकद्दम मियां ने अपने हलक में ही अटका लिए। बड़ी मुश्किल से कल तक की मोहलत दी है पहलवान ने सो भैय्या लिखना तो पड़ेगा एक ही तो बंदा है 😎😎😎😎 जिसे हमारे रिपोर्ताज अच्छे लगते हैं। ऐन्नू नाराज़ करना चंगी बात नई है जी।
आपने एक कहावत तो सुनी होगी न "काणी के ब्याह को सौ जोक्खो" यानि गाँव में एक लड़की है जो समदर्शी😊 है यानि सबको समान रूप से देखती है🫥 क्यूं कि उसकी केवल एक आँख में 👀 रोशनी है। माँ बाप गाँव वाले सारे परेशान कि भैय्या छोरी का ब्याह कैसे होगा। जब जब भी ब्याह का प्रयास हुआ कोई न कोई कमी सामने आ जाती और ऐसे हुआ इस कहावत का जन्म🤠। हमारे समाज में बुजुर्गों के अनुभवों पर आधारित न जाने कितनी ही कहावतें हवा में तैर रही हैं। हम सभी इन कहावतों से समय समय पर दो चार होते रहते हैं।जब भी कुछ अनोखा या दिलचस्प हुआ कोई न कोई अनुभवी बुजुर्ग के मुखारबिंद से एक कहावत टपक पड़ती है 😛 नाराज़ मत हो भाई टपक की जगह हाज़िर अब तो ठीक है😜।
अब ज़रा बात हो जाए साहित्य सृजन कुटुम्ब की। यूँ तो ये संस्था 2021 से ही लगातार समाज और साहित्य के क्षेत्र में शानदार कार्य कर रही है तो जब संस्था अच्छा कार्य कर रही है तो चार साल पूरा होने के उपलक्ष्य में दिल्ली सरकार के अन्तर्गत रजिस्टर्ड करा दिया गया। फिर 28 मई-2025 को संगम के तट (प्रयागराज) पर बड़े धूम धाम से पहला उत्सव शब्दांजलि सम्पन्न हुआ। इस बार भी 28 मई को ही देवभूमि शिमला में कार्यक्रम होना तय हुआ लेकिन लेकिन लेकिन भाई साहब 7 मई को सूचना प्राप्त हुई कि हिमाचल में उन्हीं दिनों में पंचायत चुनाव है । सो फाइनली शिमला कार्यक्रम के संयोजक पवन शर्मा जी से डिस्कस के बाद कार्यक्रम की तिथि 14 जून होना तय हुई और मॉल रोड स्थित रोटरी क्लब फ़ाइनल। मैंने हैदराबाद के एक कार्यक्रम में अपने उद्बोधन में कहा था कि कभी भी कहानी से बड़ा किरदार नहीं हो सकता अन्यथा कहानी मर जाती है (विशेष परिस्थितियों को छोड़कर) उसी हिसाब से संस्था से बड़ा भी कुछ नहीं हो सकता सो आनन फानन में अध्यक्षा महोदय ने अगले कुछ दिनों में ही 28 के कार्यक्रम की न केवल रूपरेखा बनाई अपितु वैन्यू मैन्यू सब फाइनल और लो जी धूमधड़ाके के साथ कार्यक्रम सम्पन्न कराकर ही अध्यक्षा महोदय को ' संतोष' प्राप्त हुआ। 🤠🤠🤠😊😊🌹🌹
विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत्त विभूतियों की चयन प्रक्रिया , कार्यक्रम अध्यक्ष, विशिष्ट अतिथियों को सम्मानित करने के लिए ट्रॉफियां इत्यादि का कार्य साथ साथ चलता रहा। कार्यक्रम अध्यक्ष के लिए एस आर हरनोट (नाम ही काफ़ी है) जी से बात की गई जिन्होंने बड़ी सहृदयता से न केवल इसे स्वीकार किया अपितु शिमला में हर सम्भव मदद का भी आश्वासन दिया। अपरिहार्य कारणों से होटल बुकिंग का कैंसिल होना फिर दूसरी बुकिंग🙆♂️🙆♂️🙆♂️🙆♂️ भाई साहब जून तो पीक टाइम होता है पर यहाँ दूसरी कहावत "जहाँ चाह वहां राह" हमारे जिम्मे 🚂 बुकिंग थी जिसे हमने अप्रैल में ही निपटा दिया था वरना भाई साहब ट्रेन टिकिट वो शिमला अजी छड्यो भी मियां 🤕🤕💪🏼
तो जनाब 12 जून को संस्था की अध्यक्षा, कोषाध्यक्ष दुई ठो कवियित्री अमरोहा की शान सतेंद्र धारीवाल👊🏼 और हम तो हईयें ही हैं ना महाराज। मेरठ रैपिड से पसीने से तरबतर होते हुए निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन वो भी एक घंटा पहले। 🚂 ट्रेन ने इंदौर छोड़ने से पहले ही हमें फ़ोन करके बता दिया था बेटा रास्ते में हम कित्ते भी लेट हो जाएं लेकिन तुम टाइम से पहुंच जइयो नई तो👹👹👹👹👹.... ख़ैर ट्रेन आई हमने सीट पकड़ी और गाजे बाजे के साथ बरखा रानी ⛈️⛈️⛈️ जम के बरसने लगीं । इधर हम चीं पाउं चिं पॉ करते रहे उधर बारिश ने तनिक भी न सोने दिया जिधर मुंह करके लेटें उधर की हवा के साथ बारिश की दादागिरी। खिड़कियाँ बंद लेकिन बारिश के छींटे फिर भी आतंकवादियों की तरह सीमा के इधर घुसते ही रहे 😡😡😡। सुबह चंडीगढ़ वहां से टैक्सी और लो जी बाँका स्थल पर बिना ब्रश के भुट्टा खाते हुए होटल। पता चला बाजू में संकट मोचक मंदिर है। नहाए धोये,चेंज किया कुछ खाया और बाहर निकले तो फिर बारिश हमने आकाश की तरफ़ मुंडी घुमाकर 😡 से देखा और उमड़ते घुमड़ते बादलों से कहा अबे ये क्या दादागिरी है बे रुकते क्युँ नहीं। भाई साहब इतना सुनना था कि बारिश का एक झेंपटा हमारे थोबड़े से आ टकराया वो भी झपटदार हवा के साथ। सच्ची कै रिये हैं मियां पहली फुर्सत में हमारी हवा एक दम टाइट हो गई। हमने मिमियाते हुए कहा हम तो संकटमोचक जाना चा रिए थे महाराज इसलिए गुस्से में आपसे फ़रियाद की थी आपने तो हमारा चौखटा ही बिगाड़ दिया। तभी आकाशवाणी हुई ठीक है ठीक है टैरिस पर जाकर गर्मा गर्म चाय पियो और मौसम का मज़ा लो दो घंटे बाद हम हमीरपुर निकल जाएंगे बरसने तब तुम भी निकल जाना हनुमान जी के दर्शन करने। बस हम हां में मुंडी हिलाकर रह गए जनाब। सो शाम को बजरंग बली के दर्शन किए फिर पुचके का आनन्द लिया तब जाकर जान में जान आई ।
अगले दिन सुबह सवेरे ठक ठक की आवाज़ से चौंक कर उठ बैठे सोचा कहीं भूत महाराज तो कविता सुनने नहीं आ पहुंचे👺👺👺, सामने अध्यक्षा महोदय कड़कती आवाज़ में बोली आज प्रोग्राम है और आप दोनों अभी तक लमलेट हुए पड़े हो, चाय आने वाली है चलो तैयार हो जाइए सच कै रिया हूं मियां दोस्त अगर टीचर हो तो बस पूछो मति। 🤧🤧🤧 सो भाया उठे तैयार हुए नाश्ता ठोका और देहरादून से पधारे नरेश जी की गाड़ी में लिफ़्ट लेकर लपक लिए मॉल रोड की लिफ़्ट की ओर। वहां से सामान ढोते हुए ठीक 12 बजे रोटरी क्लब, सामान रक्खा फिर सभी ने फ़ोटो सेशन किया और फिर भूखे भजन न होए गोपाल पकड़ ये अपनी कंठी माला को मन ही मन बुदबुदाते हुए गुप्ता भोजनालय। जम के खाया थम के खाया वो भी कुल जमा 37 अतिथियों ने। फिर सभी खरामा खरामा रोटरी क्लब।
ठीक 2.20 पर कार्यक्रम शुरू, प्रथम सत्र का सञ्चालन लेखिका व कवियित्री कल्पना गांगटा जी ने सम्भाला, सरस्वती वन्दना के बाद हिमाचल की शान वरिष्ठ साहित्यकार श्री एस आर हरनोट जी कार्यक्रम अध्यक्ष, मुख्य अतिथि अशोक मिलु जी एवम् विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉक्टर सत्य नारायण ' स्नेही ' जी, संस्था की अध्यक्ष सन्तोष सम्प्रीति व सचिव के तौर पर मैं स्वंय एवम् कार्यक्रम के संयोजक पवन शर्मा जी मंच पर उपस्थित रहे। संस्था कुछ अलग करने के लिए जानी जाती है सो अतिथियों के परिचय एवम् सम्मान के पश्चात मैंने संस्था के अब तक के कामों का लेखा जोखा प्रस्तुत किया साथ ही साहित्य सृजन कुटुम्ब कार्यकारणी के निर्णयानुसार श्री पवन शर्मा जी को हिमाचल प्रदेश ईकाई का प्रभारी नियुक्त करने बाबत नियुक्ति पत्र सौंपा। संस्था की अध्यक्षा ने संस्था की कार्यशैली एवम् हिमाचल प्रदेश राज्य से चयनित पांच विभूतियों को सम्मानित करने बाबत ब्यौरा प्रस्तुत किया।
1. श्री प्रेम पाल आर्य, साहित्य
2. श्री विनोद वर्मा, शिक्षा क्षेत्र
3. निशा भंडारी, समाज सेवा
4. श्री नरेश उनियाल, बहुमुखी प्रतिभा
5. श्री राजन कुमार (दिव्यांग)
खेल क्षेत्र
द्वितीय सत्र में राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसका सञ्चालन लेखिका एवम् कवियित्री सुधा ठाकुर जी ने किया। हिमाचल के भिन्न भिन्न भागों से पधारे कवियों ने अपनी प्रस्तुति दी जिसमें एस आर हरनोट जी, डॉक्टर सत्य नारायण स्नेही, सुनील शर्मा, केशव शर्मा, प्रीति मधु शर्मा, कैप्टन जय महलवाल, रविन्द्र शर्मा, सुमन चड्ढा, रविन्द्र चन्देल, सभी बिलासपुर से,सतेंद्र धारीवाल अमरोहा ( उत्तर प्रदेश), जाह्नवी (किन्नौर), अनु ठाकुर, प्रमोद हर्ष मण्डी, उमा राणा, (नालागढ़), ओम प्रकाश शर्मा, कंपिला शर्मा, पवन शर्मा, कल्पना गांगटा, सुधा ठाकुर (शिमला), राम लाल वर्मा, दीक्षा शर्मा (सोलन), प्रेम पाल शर्मा (सिरमौर) सन्तोष संप्रीती, रजनी बाला, पुष्पा सोलंकी, सुनीता पुनिया,( दिल्ली) उत्तराखंड से नरेश उनियाल श्रीमती मिश्रा, अमरोहा उत्तर प्रदेश से सतेंद्र धारीवाल और भैय्या मेरठ से हम। बहुत ज़्यादा लम्बा नहीं हो गया नामों का सिलसिला पर क्या करें भाई जिसका भी छोड़ा वो हमें पहली फुर्सत में लपेट नहीं लेगा क्या। डर सबको लगता है भाया 😊😊😊😊😊। लगे हाथ अपने अमरोहा के नवाब सतेंद्र धारीवाल जी की क़िताब का विमोचन भी हो गया।😊😊😊🌹🌹🌹
विजय शर्मा जो रोटरी क्लब हॉल के इंचार्ज थे बार बार घड़ी दिखाकर लाइट बंद करने की..... हमने प्यार से पुचकारा तो ब मुश्किल साढ़े छः तक कार्यक्रम निपटाने की मनुहार पर माने फिर भी कार्यक्रम सात बजे तक चलता रहा। विजय शर्मा की वक्र दृष्टि से बचने के लिए हमने हरनोट जी से सलाह की और झट से उन्हें बुलाकर उनको भी सम्मानित कर दिया🤠🤠🤠🤠 अंत में राष्ट्रीय गान और सभा बर्ख़ास्त। फिर साहित्य सृजन कुटुम्ब टीम निकल गई मॉल रोड घूमने, घूमे फिर गुप्ता जी भोजनालय का स्वाद लिया और 11 बजे 🏨। अगले दिन नाश्ता किया और तारादेवी मन्दिर के दर्शन किए। इससे पहले की मौसम बेईमान होकर हमें भिगोता हमने सामान उठाया टैक्सी की एक घंटा जाम में फंसे लेकिन छः बजे शिमला स्टेशन। फोटो सेशन, राजमा चावल की दावत और 8.20 की टॉय ट्रेन ली और 15 जून की मध्य रात्रि 1.30 पर कालका पहुंच गए । प्लेटफार्म पर ही थोड़ा आराम किया फिर मुँह धोया और पहुंच गए सुबह 4.15 पर कालका माई के दर्शन करके! बढ़िया वाले दर्शन हुए साथ में सुबह की आरती फिर वापिस कालका स्टेशन जहाँ शताब्दी इन्तेज़ार करती मिली। लगभग तीस वर्षों के बाद माता रानी के पुनः दर्शन किये।मन्दिर पुनर्निमाण के दौर से गुजर रहा है I 10.30 नई दिल्ली फिर सबने अपने अपने घर का रास्ता पकड़ लिया।
विशेष:
"ज्ञानी से ज्ञानी लड़े ज्ञान सवाया होय
मूरख से मूरख लड़े तुरत लड़ाई होय"
कभी कभी समझदार व्यक्ति भी पेशेंस खो देता है। इस प्रवास में मुझसे भी ये ग़लती हो गई। शायद ग्रहों का चक्कर है वरना भैय्या हम जैसा समझदार बंदा जो दूसरों को ज्ञान बांटता है ख़ुदई अज्ञानी क्यों बनता।
प्रदीप डीएस भट्ट -1802026
जय माता दी!
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