ऊर्जा मंत्रालय की बड्डी सी ऑफिस के घने बड़े से साहब ने आज समय से पन्द्रह मिनिट पहले ही ऑफिस में इंट्री मारी और सीधे शाकिर मियां को तुरन्त हाज़िर होने का हुकम छज्जू चपरासी को पकड़ा दिया। छज्जू चपरासी भी हैरान परेशान 11,12 और कभी लंच के बाद आने वाले चतुर्वेदी साहब आज इत्ती जल्दी, और आते ही शाकिर मियां को याद कर रे, कुछ तो गड़बड़ है। ख़ैर सिर खुजाते हुए छज्जू ने शाकिर मियां को सलाम ठोका फ़िर चतुर्वेदी साहेब का आदेश ज्यों का त्यों पढ़ सुनाया कि, तुरन्त हाज़िर होना है। अब शाकिर मियां की तो पहले ही चतुर्वेदी साहेब से छत्तीस छत्तीस के आंकड़े में गुत्थम गुत्थी लगी पड़ी थी सो शाकिर मियां चपरासी को टरकाते हुए बोले , जा बोल दे उस पण्डित को मैं अभी आया नई। छज्जू आँखे तरेरते हुए बोला ज़्यादा खलीफा मति बनो मियां आज खटपट है तो पण्डित जी को टरका रहे हो कल तक तो बड़ी गल बहियां करते फिरते थे। पण्डित जी का गुस्सा दुध में आए उबाल की तरह है मियां वैसे भी तुम हो उनके डिप्टी हमने ज्वाइन करते ही बता दिया था साहब जब गुस्सा करें तो चुप्पी साध लो या उबलते दुध में दो लकड़ी की डंडी रख दो जैसे उबाल को शान्त रखने के दुध के भगोने पर दो लकड़ी की स्टिक रख दो तो दुध कभी बाहर नहीं आता। लेकिन तुम कतई न माने और जा भिड़े उस दुर्वासा से। अब जब पण्डित जी खुदई बुलवा भेज रहे हैं तो मेढ़की की तरह टांग न उठाओ मियां वरना अगर पण्डित जी बिफर गए न तो हम दोनों की बली लेकर ही मानेंगे। शाकिर ने अपनी इंसलेट तो महसूस की पर बोला कुछ नहीं बस इत्ता बोल पाया अच्छा मेरे बाप मुझे लघु शंका तो कर लेने दे, जा जाकर ये सच बता दे कि शाकिर मियां लघुशंका में व्यस्त हैं। छज्जू खींसे निपोरते हुए वहां से खिसका और शाकिर मियां लघुशंका निवृत होने के लिए सीधे गुसलखाने के लिए उड़न छु हो लिए।
शाकिर मियां अभी लघुशंका में व्यस्तता का आनन्द ले ही रहे तभी चतुर्वेदी जी भी कान पर जनेऊ लपेटे हुए बगल में आकर लघुशंका में व्यस्त हो गए। शाकिर मियां को कुछ शंका का अहसास हुआ ही था तभी पण्डित जी ने लघुशंका के मध्य में शाकिर को अपनी मंशा प्रकट कर दी। देखो शाकिर बहुत बड़ी मुसीबत आन पड़ी है, तुम फारिग होने के बाद तुरन्त मेरे रुम में पहुंचो। इससे पहले कि शाकिर मियां कुछ समझते चतुर्वेदी जी हाथ धोकर कान से लिपटा जनेऊ वापिस बनियान में घुसेड़ते हुए वॉशरुम से बाहर, हतप्रभ से शाकिर मियां तुरन्त फारिग हुए और चतुर्वेदी जी के कमरे की ओर ये सोचते हुए लपक लिए कि जाने क्या मुसीबत आन पड़ी जो पण्डित जी को सबर न हुआ और मेरे पीछे पीछे गुसलखाने तक आ टपके। कमरे में घुसते ही पण्डित जी को साइड के सोफे पर बैठे देखा तो शाकिर मियां वहीं लपक लिए, फिर सामने वाले सोफे पर अपने को ढकेलते हुए बोले, क्या हुआ पण्डित जी ऐसी क्या मुसीबत आन पड़ी जो आप मेरे पिछु पिछु गुसलखाने तक दौड़ लगा बैठे। चतुर्वेदी जी ने एक गहरी स्वांस ली फिर घंटी बजाकर छज्जू को बुलाकर बोला, छज्जू आगरा मिठाई वाले से समोसे जलेबी मंगाकर पूरे ऑफिस में बांट दे और हां जाने से पहले दो कप चाय दे जा और देख मनोरमा मैडम को बोल दे शाम तक कोई भी मेरे कमरे में दाख़िल नई होगा। कोई पूछे तो बता दियो हेड ऑफिस का मसला है अर्जेंट मीटिंग चल रही है। छज्जू सर हिलाता हुआ बाहर की ओर लपक लिया।
शाकिर मियां कुछ सशंकित से होते हुए बोले क्या माजरा है पण्डित जी कुछ तो बताओ। चतुर्वेदी जी ने आधे गंजे सर पर आए पसीने को पोंछते हुए कहना शुरु किया। देखो शाकिर मसला ये है कि तुम्हें तो पता ही है फिर कुछ सोचते हुए बोले तुम्हें क्या पूरे शहर को पता है कि हम कविताएं लिखते हैं। पिछले दिनों ऑपरेशन सिन्दूर पर लिखी हमारी कविता " पाकिस्तान की "कुटाई " काफ़ी फेमस हो गई है। अब वो कविता प्रसिद्धि पाते पाते मंत्री जी तक पहुंच गई है। कल मंत्री जी ने घर बुलाकर आदेश दे दिया की स्वतंत्रता दिवस पर उनका ओज से भरा भाषण हम लिखें और उसमें कुटाई शब्द बार बार पूरे ताल मेल और ऊर्जा से भरपूर होकर आना चाहिए। अब तुम्हीं बताओ मियां कविता लिखना और बात है भाषण लिखना अलग। करें तो क्या करें। जान सांसत में आन पड़ी है। शाकिर मियां कुछ सोचते हुए बोले पण्डित जी भाषण लिखना इत्ता मुश्किल काम भी ना है जीत्ता सोचकर आपका हलक सूखा जा रिया है देखो आप बचपन की यादों से शुरु करो कि बचपन से आज तक आपकी कितनी और कब कब कहां कहां कुटाई हुई है। सच्ची कै रिया हूं अभी तो 15 अगस्त में दो दिन पड़े हैं कुछ क्या बहुत कुछ कर लेंगे। देखो बात अगर जेहादी भाषण की होती तो हमऊ लिख देते लेकिन मामला देश भक्ति का है इसलिए हमसे ज्यादा उम्मीद मति राखियो आइडिया दे दिया है इसलिए याद करते जाओ लिखते जाओ कल फिर बैठक कर लेंगे। चतुर्वेदी जी झुंझलाते हुए बोले अबे तुम भी तो तकरीरें लिखते हो वो क्या नाम है उस अख़बार का ख़ैर छोड़ो भी कोई और सुझाव दो। एक बात बताए दे रहा हूँ शाकिर सवाल सिर्फ़ मेरी इज़्ज़त का नई है इस ऑफिस का और ऊर्जा मंत्रालय का भी है अगर कुछ गड़बड़ हुई तो हम सबकी ऊर्जा ख़त्म होने में टाइम न लगेगा वैसे भी ऊर्जा विभाग के मंत्री हमेशा ऊर्जा से ओत प्रोत रहते हैं कल ही दो इंजीनियरो की बलि ली है कसूर सिर्फ़ इतना था कि मंत्री जी के भाषण के अध बीच में लाइट चली गई वो भी ट्रांसफार्मर के फूंकने से एक तो वैसे ही ऊर्जा की खपत बढ़ गई है वो ट्रांसफार्मर भी क्या करता फिर ऊर्जा मंत्री का भाषण बिचारा लोड न उठा सका।। शाकिर मियां हाथ जोड़ते हुए बोले पण्डित जी अभी तो बताया जेहादी तकरीरें लिखते हैं हम उस अख़बार में लेकिन वो छपती हैं हामिद अंसारी जो कि बड़े इमाम के दामाद हैं, के नाम से मतलब काम मेरा नाम उनका हमें तो हर तकरीर लिखने के दुई हज़ार मिल जाते हैं बस। ऊपर का खर्चा पानी निकल जाता है। ख़ैर आप कागज़ कलम उठाईये और लिखने बैठिए, चतुर्वेदी जी को असमंजस में देखकर शाकिर मियां बोले अरे महाराज आग़ाज़ तो करो अंजाम तक भी पहुंच जायेंगे। चाहो तो हम आपको कुटाई के काफिए दिए देते हैं जहां ठीक लगे भाषण में घुसेड़ देना जैसे कि ठुकाई, दुहाई, रजाई, रंगाई, पुताई, मलाई, नलाई वगैरह वगैरह कहते हुए शाकिर मियां ये सोचते हुए कि सैंया भए कोतवाल तो अब डर काहे का फिर मुस्कुराते हुए मियां जी वातानुकूलित कमरे में झपकियां लेने में व्यस्त हो गए।
चतुर्वेदी जी ने ठंडी चाय की चुस्की लेते हुए दूसरे सोफे पर पसरे और ऊंघयाते हुए शाकिर को देखा फिर मुस्कुराते हुए अपनी कुर्सी में धसते हुए कलम उठाई, डायरी का पन्ना खोला उसपे ऊपर ॐ लिखा फिर सोचते जाते हँसते जाते और कलम चलाते जाते। लगभग दो घंटे के लेखन के बाद उन्होंने एक अंगड़ाई ली फिर खर्राटों से शाकिर के उठते गिरते पेट को देखा फिर मुस्कुराते हुए फिर लिखने में जुट गए। आख़िर फाइनली ढाई बजे भाषण फ़ाइनल किया और घंटी बजा दी, घंटी की आवाज़ से शाकिर मियां की नींद में खलल तो पड़ा लेकिन उसे जल्दी समझ आ गया कि वो घर में नहीं है ऑफिस में है और वो भी बॉस के कमरे में। छज्जू ने दरवज्जजा नॉक किया और अन्दर आकर सीधे सावधान की मुद्रा में खड़ा हो गया। छज्जू मेरा और शाकिर का खाना यहीं लगा दे। साढ़े तीन पर फिर मीटिंग शुरु होगी, कोई अंदर न आवे समझा, जी कहता हुआ छज्जू खाना लगाकर बाहर निकल लिया। चतुर्वेदी जी शाकिर से बोले, शाकिर तूने आइडिया अच्छा दिया बचपन याद करो बस वहीं से शुरु किया है। खाना खाकर तुझे सुनाता हुं ठुकाई क्या होती है। शाकिर मियां अंदर ही अंदर बड़बड़ाए आज तो रजिया गुंडों में फंस गई रे। चतुर्वेदी महाराज शाकिर मियां की मनोस्थिति अच्छी तरी समझ रहे थे लेकिन मरता क्या न करता कि तर्ज़ पर उन्हें समझ में ही नहीं आया मंत्री जी के आदेश से कैसे निपटु सो कल ही डिसाइड किया कि कल सुबह सुबह शाकिर से सलाह लेता हूं वैसे भी ऑफिस में कोई इस लायक दिखा भी नई, सब एक दूसरे को झटके देने में व्यस्त दिखे। शाकिर भला आदमी तो है लेकिन एक दम अड़ियल किस्म का इसलिए एक दिन चतुर्वेदी जी ने शाकिर को जोर का झटका कुछ ज़्यादा ज़ोर से दे दिया लेकिन आज जब सलाह लेने की बात आई तो चतुर्वेदी जी ने गधे को बाप बनाने से परहेज़ भी नही किया। क्या करते भई बात इज़्ज़त पे जो बन आई थी। सो जैसे ही छज्जू ने खाना प्लेट में परोसा चतुर्वेदी जी ने उसे बिना किसी हिल हवाई के सीधा पेट तक पहुंचा दिया। इधर शाकिर मियां भी खाना खाते खाते सोच रहे थे खा ले बेटा खा ले पण्डित के घर का खाना है आज दक्षिणा में इसका भाषण सुनना पड़ेगा इच।
हां तो शाकिर मियां सुनो, जहां कुछ अतरंगी सा लगे तो टोक देना मैं उसे अंडर लाइन कर दूंगा और उस पर बाद में डिस्कस करके ठीक कर लेंगे तो मियां सुनो।अतिथियों को तो मंत्री जी खुदई नमस्कार चमत्कार करके सम्बोधित कर लेंगे मैं सिर्फ़ पढ़ता हूं और चतुर्वेदी जी शुरु हो गए:
मित्रों, जैसे कि आप सभी को पता ही है कि 22 अप्रैल को पहलगाँव में आतंकियों ने 25 भारतीय हिन्दुओं की और एक हमारे नेपाली हिन्दू भाई की सिर्फ़ धर्म पूछकर ही नहीं बल्कि कपड़े खुलवाकर, चैक करके फिर प्वाइंट ब्लैंक से सर पे निशाना लगाकर हत्या की तो भैय्या पूरे देश में हाहाकार तो मचना ही था, फिर एक नापाकी ने जाते जाते म्हारी एक बेटी से कह दिया कि "मोदी से कह देना" बस मित्रों यही एक गलती पाकिस्तान पे घणी भारी पड़ गई और पाकिस्तान ने भारत को" कूटाई" का न्यौता दे दिया फिर क्या होना था मित्रों मोदी साहब सऊदी अरब से वापिस आए और तीनों सेनाओं को कह दिया कि अपने अपने कुटाई यंत्र निकाल लो इस बार इस "झंडू बाम" को असली कुटाई के अंतर्राष्ट्रीय दर्शन करवाते हैं। अब आपको तो पता ही है गांव हो या शहर भाई साहब ऐसा कोई न जिसने कूटाई का आनन्द न लिया हो। दूसरे की क्या जी मैं तो अपनी पे जो बीत्ति वो बता रिया हूँ मित्रों। सबसे पहले कुटाई का अनुभव अपनी मां से लिया ग़लती मैं करूं तो कुटाई भाई करे तो साथ में फिर से मेरी कुटाई, मैं रात में अपनी गात को खुदई सहलाता हुआ सोचता था कि जे क्या बात हुई मेरी गलती पे भी मेरी कुटाई, भाई की गलती पे भी साथ में कुटाई। बस भैय्या एक दिन ग़लती से मिस्टेक कर बैठा मां अहोई माता का व्रत रखें हुए थी अजी वही जो बच्चों की लम्बी उम्र के लिए रखते हैं सो मन्ने ये सोचकर आज तो मां का व्रत है गुस्सा न करेगी लेकिन मित्रों अगर मां को कूटना है तो क्या व्रत क्या अनाव्रत। जैसे ही मैंने पूछा मां भईया की गलती पर भैय्या के साथ मुझे क्यूं कूटती हो, मां हँसी और बोली तेरा बड़ा भाई अकेले पिटेगा तो अच्छा थोड़ी लगेगा फिर साहब बेटे ध्यान से सुन कूटने कूटाने से इम्युनिटी बहुत ज़्यादा बढ़ती है धीरे धीरे ये इम्युनिटी इतनी बढ़ जाएगी कि तेरी गात स्टील से भी घणी मजबूत हो जावेगी और साहब अगले दिन नाश्ते में देशी घी नमक मिर्च लगाकर दो बासी रोटी और एक गिलास दुध देने से पहले फिर कुटाई कर दी मैंने प्रश्नवाचक दृष्टि मां पे गड़ाई तो बोली कल व्रत था न बेटे तो कल तेरी हिम्मत पे तुझे कूट न सकी इसलिए कल का उधार चुकता कर दिया वैसे भी उधार ज्यादा देर अपने पास रखना नी चाइए। और उसके बाद फिर जब स्कूल में गए तो मासाब ने कुटाई ठुकाई , रंगाई, नीलाई और पता नहीं क्या क्या और कैसी कैसी और जब मासाब नीम की गीली टहनी से सुताई करते थे तो बस पूछो मति दिन में ही आंखो के लाल नीले पीले तारे तैरने लगते थे। कुल मिलाकर घर पे कुटाई स्कूल में कुटाई, मां से कुटाई और कभी कभी पिताजी भी हाथ साफ़ करने से न चूकते वैसे भी पिताजी के द्वारा की गई डंडे से, बेल्ट से थप्पड़, लात घूंसे और कभी कभी पेड़ की टहनी बस भाई हमें ही पता है गात का क्या हाल होता था कभी कभी लगता था जैसे मां पिताजी का गुस्सा हमारी कुटाई करके निकाल रही है और पिताजी मां का गुस्सा हम पर निकाल रहे हैं लेकिन एक बात समझ न मासाब किसका गुस्सा हमारी कुटाई करके निकालते थे शायद प्रिंसिपल साहब का या मास्टरनी की का।
तो मित्रों अब खुदई सोचो जब पूरे भारत को ये कुटाई का सुनहरी मौका मिला तो कैसे छोड़ देते सो छः सात की मध्यनी रात को भारत ने कुछ कुटाई यंत्रों को पाकिस्तान भेज दिया और लो जी 22 अप्रैल का बदला हमारे कुटाई यंत्रों ने 22 मिनिट में ले भी लिया। तड़के उन्हें बता दिया कि देखो बेटा कुटाई यंत्रों को प्रणाम करो और शांत चित्त बैठ जाओ लेकिन मित्रों पाकिस्तान कब माना जो अबके मानता सो अपने फूफा चीन और जीजा तुर्की के नूकाई यंत्रों को म्हारे पे छोड़ दिया भाइयों चीन का माल बीच रास्ते में ही फुस्स हो गया और मोदी जी जो म्हारे पीएम हैं न ,उन्हें भी गुस्सा आ गया और फिर हमने अपने संयंत्रों से ब्रह्मोस कुटाई यंत्र निकाले और पाकिस्तान की ऐसी कुटाई और ठुकाई की कि उनका फूफा और जीजा देखते रह गए और खुद को दुनिया का चौधरी समझे बैठा चौधरी ट्रंप भी भौंचक हो गए। शायद उसे पाकिस्तान के अंदर अपने संयंत्रों में रखे कुटाई यंत्रों की चिंता हो गई। और मित्रों इसके बाद भारतीय कुटाई यंत्रों की मांग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इतनी बढ़ गई है कि अमेरिका का चौधरी भी सकते में है इसलिए वो आजकल आएं बाएं शाएं बोल रहा है। आपने एक कहावत सुनी होगी न कि "सब दिन होत न एक समाना" तो आजकल अपनी निकल पड़ी है, चीन पाकिस्तान क्या सारी दुनिया भारत की ताकत देखकर हैरान परेशान है। तो मित्रों इसी बात पर बोलो भारत माता की जय और हां ध्यान से सुन ले पाकिस्तान ऑपरेशन सिन्दूर थमा है बेटा रुका नहीं या यूं समझ ले प्यारे कि "कुटाई चालू आहे"
कैसा लगा भाषण शाकिर मियां उधर शाकिर मियां चतुर्वेदी जी को अपलक निहारे जा रिए थे। जब दोबारा चतुर्वेदी जी ने जोर से बोला तो शाकिर मियां की तंद्रा टूटी और एक दम से बोल पड़े तुमने तो कमाल कर दिया पण्डित जी। आख़िरी लाईन तो पंच लाइन है महाराज "कुटाई चालू आहे"। भाषण बिलकुल परफेक्ट लिखा है पण्डित जी। मैं भी बोलता हूँ "कुटाई चालू आहे पाकिस्तान" भारत माता की जय"।
प्रदीप डीएस भट्ट
व्यंग्यकार, मेरठ (UP)