रिपोर्ताज
" अँग्रेजी साहित्य 400/- per KG "
उत्तर भारत में ठण्ड के प्रकोप के बीच कंबल का बुक्कल मार कर घूमते हुए अचानक फ़ेसबुक पर फ़्लैश होती खबर कि होटल सम्राट हैवंस,मेरठ में 19,20,21 दिसम्बर में तीन दिनी पुस्तक प्रदर्शनी है ।हमने भी सोचा दिल्ली में तो विश्व पुस्तक मेला 10 जनवरी से 18 जनवरी तक आयोजित होना है तो क्यूँ न एक दिन मेरठ की पुस्तक प्रदर्शनी को भी अपने दर्शनी दे ही आवें क्या पता कुछ हमारे मतबल का भी हो सो भैय्या कल बढ़िया से तैय्यार हुए और जा पहुँचे 🏨 सम्राट हैवंस।
अभी अपनी स्कूटी को ठीक से खड़ा भी नहीं किया था कि निगाह पड़ी शकरकंदी का ठेला लगाए हुए चचा पर जो बड़े जतन से ठेले को व्यवस्थित कर रहे थे।पेट भरा हुआ था पर ससुरी नीयत का क्या करें। ठेले पर अंगार में भुनती हुई शकरकंदी पर हमने भी सोचा प्रदीप बाबू प्रदर्शनी तो बाद में भी देखी जाएगी पहले एक ठो प्लेट शकरकंदी का मजा ले लिया जाए सो महराज भैय्या धनिये की चटनी में लिपटी हुई भुनी हुई शकरकंदी के टुकड़े और उस पर घर का बना मसाला बुरकते हुए हाथ बस चटखारे लेकर खाते हुए असली वाला आनन्द आ गया।
शकरकंदी के स्वाद का मजा लेते हुए जा पहुँचे पुस्तक प्रदर्शनी में शुरुआत में हिन्दी की पुस्तकों ने स्वागत किया दूसरी पँक्ति में अँग्रेजी की पुस्तकें 400/- per KG, भाई साहब देखते ही दिमाग़ चकरघिन्नी खा गया। आगे बढ़ा तो यही हाल गनीमत रही कि ये क़हर हिन्दी पुस्तकों पर लागू नहीं था। कुल 14 पन्क्तियों में सजी हुई पुस्तकों में से 8 में अँग्रेजी पुस्तकों पर यही टैग 400/-पर KG. शुक्र है शेष 4 में हिन्दी पुस्तकों पर 30 प्रतिशत छुट का टैग था। सच कै रिया हूँ संतोष तो था लेकिन भले ही अँग्रेजी पुस्तकों पर ही 400/- पर KG का टैग देख कर कुछ अच्छा नहीं लगा।
अच्छी बात ये रही कि पुस्तक प्रदर्शनी की शुरुआत में रखी पुस्तक "बेगम का तकिया" जिसके लेखक पंडित आनंद कुमार हैं। बेसाख्ता मुझे आकाशवाणी से हवामहल में प्रसारित इसका नाट्य रूपांतरण सुनने का मौका मिला है। इसमें दो भाइयों के मध्य एक संवाद है I
पहला:एक बात कहना चाहता हूँ
दूसरा: बोलो
पहला:तो दूसरी बात ये है
पहला: अरे पहले पहली तो कह
ख़ैर बेगम का तकिया के अतिरिक्त जॉन एलिया की "यानी" मोमिन, जॉक, मंटो की लोकप्रिय कहानियाँ के दो पार्ट ख़रीद लिए सच कह रहा हूँ मन को बड़ा संतोष मिला। ज्यादा कुछ था भी नही देखने और समझने को,पुस्तकें भी लिमिटेड और खरीदने वाले भी सो ये सोचकर बाहर आ गये कि 20 दिन बाद अगला पड़ाव विश्व पुस्तक मेला होगा अगले बरस 2026 में क्यूँ ठीक कै रिया हूँ न।
-प्रदीप डीएसभट्ट-21122025