Sunday, 21 December 2025

अंग्रेज़ी साहित्य 400/ per KG

रिपोर्ताज 

        " अँग्रेजी साहित्य 400/- per KG "

         उत्तर भारत में ठण्ड के प्रकोप के बीच कंबल का बुक्कल मार कर घूमते हुए अचानक फ़ेसबुक पर फ़्लैश होती खबर कि होटल सम्राट हैवंस,मेरठ में 19,20,21 दिसम्बर में तीन दिनी पुस्तक प्रदर्शनी है ।हमने भी सोचा दिल्ली में तो विश्व पुस्तक मेला 10 जनवरी से 18 जनवरी तक आयोजित होना है तो क्यूँ न एक दिन मेरठ की पुस्तक प्रदर्शनी को भी अपने दर्शनी दे ही आवें क्या पता कुछ हमारे मतबल का भी हो सो भैय्या कल बढ़िया से तैय्यार हुए और जा पहुँचे 🏨 सम्राट हैवंस।


         अभी अपनी स्कूटी को ठीक से खड़ा भी नहीं किया था कि निगाह पड़ी शकरकंदी का ठेला लगाए हुए चचा पर जो बड़े जतन से ठेले को व्यवस्थित कर रहे थे।पेट भरा हुआ था पर ससुरी नीयत का क्या करें। ठेले पर अंगार में भुनती हुई शकरकंदी पर हमने भी सोचा प्रदीप बाबू प्रदर्शनी तो बाद में भी देखी जाएगी पहले एक ठो प्लेट शकरकंदी का मजा ले लिया जाए सो महराज भैय्या धनिये की चटनी में लिपटी हुई भुनी हुई शकरकंदी के टुकड़े और उस पर घर का बना मसाला बुरकते हुए हाथ बस चटखारे लेकर खाते हुए असली वाला आनन्द आ गया।

        शकरकंदी के स्वाद का मजा लेते हुए जा पहुँचे पुस्तक प्रदर्शनी में शुरुआत में हिन्दी की पुस्तकों ने स्वागत किया दूसरी पँक्ति में अँग्रेजी की पुस्तकें 400/- per KG, भाई साहब देखते ही दिमाग़ चकरघिन्नी खा गया। आगे बढ़ा तो यही हाल गनीमत रही कि ये क़हर हिन्दी पुस्तकों पर लागू नहीं था। कुल 14 पन्क्तियों में सजी हुई पुस्तकों में से 8 में अँग्रेजी पुस्तकों पर यही टैग 400/-पर KG. शुक्र है शेष 4 में हिन्दी पुस्तकों पर 30 प्रतिशत छुट का टैग था। सच कै रिया हूँ संतोष तो था लेकिन भले ही अँग्रेजी पुस्तकों पर ही 400/- पर KG का टैग देख कर कुछ अच्छा नहीं लगा।

        अच्छी बात ये रही कि पुस्तक प्रदर्शनी की शुरुआत में रखी पुस्तक "बेगम का तकिया" जिसके लेखक पंडित आनंद कुमार हैं। बेसाख्ता मुझे आकाशवाणी से हवामहल में प्रसारित इसका नाट्य रूपांतरण सुनने का मौका मिला है। इसमें दो भाइयों के मध्य एक संवाद है I 
पहला:एक बात कहना चाहता हूँ 
दूसरा: बोलो 
पहला:तो दूसरी बात ये है 
पहला: अरे पहले पहली तो कह 

        ख़ैर बेगम का तकिया के अतिरिक्त जॉन एलिया की "यानी"  मोमिन, जॉक, मंटो की लोकप्रिय कहानियाँ के दो पार्ट ख़रीद लिए सच कह रहा हूँ मन को बड़ा संतोष मिला। ज्यादा कुछ था भी नही देखने और समझने को,पुस्तकें भी लिमिटेड और खरीदने वाले भी सो ये सोचकर बाहर आ गये कि 20 दिन बाद अगला पड़ाव विश्व पुस्तक मेला होगा अगले बरस 2026 में क्यूँ ठीक कै रिया हूँ न।

-प्रदीप डीएसभट्ट-21122025

Friday, 12 December 2025

भौं-- भौं भौं-- भौं

भौं --भौं भौं-- भौं 

         अभी हमने अंगड़ाई लेते हुए सुबह की चाय को होठों से छुआ ही था कि हमारे प्यारे मित्र लमन्डेस जी आ धमके। राम राम के बाद बोले गुरु वो है न रेणुका चौधरी? हमने अधमिची आंखों से उंघते हुए पूछा कौन रेणुका चौधरी बे तो वो एक दम से तैश में आ गए फिर बिफरते हुए बोले अरे वही रेणुका चौधरी जिसकी हंसी सुनकर मोदी जी ने स्पीकर को कहा था जनाब इनकी हंसी सुनकर रामायण की एक पात्र की याद ताज़ा हो गई। अब भैय्या रामायण में बड़े बड़े करेक्टर हुए हैं लेकिन लेकिन लेकिन हंसी तो ताड़का ताई की ही फेमस थी शायद प्रधान सेवक का इशारा उसी ओर था खैर जैसे ही लमन्डेस जी ने रामायण का ज़िक्र किया हमारे चक्षु बिना चाय पिए ही बड़मंटे से खुल गए। हम सीधे होते हुए बोले क्या हुआ लमन्डेस तनिक जल्दी बताओ और हां पहले ये बतावा अपनी प्यारी भौजाई लम्न्डिरी कैसी हैं।  लमन्डेस जी सुनते ही बिदक गए अरे यार हम यहाँ सस्पेंसफुल ख़बर देने आए हैं तुमको और तुम हो कि हुड़कचूल्लू की तरह लमनडीरी के पीछे पड़े हो। अबे हम अगर यहां है तो वो भी अच्छे से होगी ही वो भी अपने घर में टांग पे टांग चढ़ाए। हमने तुरत हाथ जोड़कर माफ़ी मांगी तब जाकर  लमन्डेस जी शांत हुए। फिर एकदम दार्शनिक अंदाज़ में बोले अबे कल रेणुका चौधरी उर्फ़..... अपनी गाड़ी में पति को न लाकर एक ठो आवारा कुत्ते को लेकर आई। पत्रकारों ने पूछा तो जवाब में भौं -- भौं भौं --भौं बोलकर लोकसभा में घुस गई। एक बात पल्ले न पड़ी वो आवारा कुत्ता गाड़ी की ठंडी हवा में इतना मस्त क्यूँ था कि भौंकना ही भूल गया वो आवारा था या पालतू खैर लौटते हुए पत्रकारों ने फिर टोका तो बोली संसद में भी तो हैं अब भैय्या पता नही वो अपनी पार्टी के माननीयों के लिए बोल रही थीं या.. आगे की बात लमन्डेस जी ने भी अधूरी प्रेम कहानी की तरह हवा में ही अधूरी छोड़ दी।

         बाक़ी सब बातें तो हमने बिना डकार लिए हज़म कर लीं लेकिन कुत्ता भौंका नही बस अपने सोचने की सुईं यहीं पे आकर अटक गई। हमने ध्यान से लमन्डेस जी को देखा फिर पूछा कुत्ता देखने में कैसा था। लमन्डेस जी ने अपनी आधी मुंडी हवा में आसमान की ओर की मतबल वो जताना चाह रहे थे कि उनके सोचने में भगवान जी के सैटेलाइट का हाथ हो फ़िर खोपड़िया पर अपनी उंगलियों से तबला बजाते हुए बोले बस छोटे से कद का होगा भूरे रंग का, माथे पे सफ़ेद सी लकीर थी और भी कुछ था पर याद नही बस इतना याद है कुत्ता भौंका पता नहीं क्यूँ पर ससुरा भौंका नही गुरु। कुत्ता दो काम ज़रूर करता है टांग उठाकर मूतेगा भी और भौंकेगा भी काटे न काटे ये उसकी मर्ज़ी या यूं कह लो गुरु कंडीशन अप्लाई। हमने अपनी बरबंटे जैसी आंखों को थोड़ा और चौड़ा किया फिर लमन्डेस से बोले सुनो बे हम आज तुम्हें कुत्ते की एक ऐसी प्रजाति के बारे में ज्ञान देंगे जिसे आज तक किसी ने किसी को न तो दिया और आगे भी न देगा। लमन्डेस थोड़ा और नज़दीक को खिसक कर बैठ गया फिर बोला जैसा भगवान कृष्ण ने अर्जुन को दिया था कुरुक्षेत्र में कुछ वैसा वाला गुरु। हमने न में मुंडी हिलाई तो लमन्डेस हल्के से गुर्राते हुए बोला अबे सीधे सीधे बोलो हमें बेकार में ज्ञान मत पेलो बे हम बनारस से हैं दूसरों को ज्ञान पेलते हैं। हमने लमन्डेस को घुरकर देखा फिर बोले अफ्रीका में बेसेंजी प्रजाति बार्कलेस डॉग यानि बिना भौंकने वाला कुत्ता पाया जाता है। उसके न भौंकने का कारण जानते हो उसके गले की संरचना यानी लेरिंक्स सामान्य कुत्तों से अलग होती है यानि थोड़ी पतली और चपटी बस यही कारण है वो जोर से भौं भौं नहीं कर पाता। बेसेंजी अलग तरह की आवाज़ निकालता है जिसे योडल या बरु कहते हैं। ये कुछ ज्यादा तेज़ और फुर्तीला होता है। शिकारियों के लिए बेमिसाल कुत्ता, शिकार देखकर यूडली यूडली करता है जिससे शिकार को पंछी होने का भ्रम हो जाता है। बेसेंजी अपने मालिक से प्यार तो करता है लेकिन हर वक्त उसके नाम की माला नहीं जपता जहां कोई यूडली दिखाई दी तुरन्त दुड़की लगा लेता है आख़िर आज़ादी भी कोई चीज़ होती है भाई साहब। लमन्डेस ने व्यंग्यात्मक लहज़े में पूछा और कोई खासियत हो तो भी बतावें हुज़ूर। हमने दोनों हाथ सर के पीछे करते हुए ज्ञान की आखिरी पंक्ति भी मुखारबिंद से उड़ेल दी। देखो मियां ये बहुत बड़े वाला सफ़ाई पसंद कुत्ता है यानि स्वच्छ भारत अभियान का छोटे वाला ब्रांड एंबेसेडर। 

          लमन्डेस जी बिफरते हुए बोले अरे यार हम रेणुका चौधरी द्वारा लाए कुत्ते की बात कर रहें हैं और तुम हो कि कुत्ता ज्ञान बघारे जा रहे हो। हमने वक्त की नब्ज़ पकड़ी और कमर को सीधा करते हुए बोले देखो लमन्डेस मियां तुम्हें वो अतिकवा याद है न इलाहाबाद का गुंडा हां वही जिसके घर नेता जी यानि मुल्ला मुलायम गए तो सार्वजनिक तौर पर अतिकवा के कुत्ते से हाथ मिलाया ताकि अतिकवा से दोस्ती बनी रहे, दोस्ती बनी रहेगी तो मुस्लिम वोट बने रहेंगे और ये दोनों बने रहेंगे तो नोट तो खुदई बने रहेंगे न और उन नोटों पर नमाजवादी का कब्ज़ा। इसलिए कुत्तों से प्यार करो फिर जो चाहोगे मिलेगा। इससे पहले कि लमन्डेस हमारे ज्ञान के बीच में फिर अपना ज्ञान बघारते हमने ज़रा रुको का इशारा करते हुए एक खट्टी डकार ली जिससे लमन्डेस और हम ख़ुद भी थोड़ा अटपटा गए लेकिन चारपाई से उतरकर गुजरे जमाने की आराम कुर्सी पर पसरते हुए शुरू हो गए।

         देखो मियां लमन्डेस कुत्तों से प्यार करना तो पाप न है लेकिन हर जीव जंतु की अपनी जगह होती है। पहली रोटी गाय की और आखिरी रोटी कुत्ते की ही क्यूँ बनती है सोचा है कभी? लमन्डेस बोले सुने हैं बे वो भी बचपन से पचपन तक। हमने लमन्डेस की ओर आँखें घूमाते हुए पूछा जाने कितनी तस्वीरें इंद्रजाल पर मौजूद हैं जहां राहुल गाँधी विभिन्न मुद्राओं में कुत्ते के साथ फुटवा में मौजूद हैं। करनाल में भारत जोड़ो यात्रा में सफ़ेद रंग का श्वान उनके साथ साथ चल रहा था मजे कि बात पट्टा कुत्ते के गले में और चेन राहुल के हाथ में।
अगर कोई पत्रकार उस धौले रंग वाले कुत्ते का इंटरव्यू ले लेता तो निश्चित वो कुत्ता बड़ी शान से कहता अगर मैं न साथ चलूं तो भारत जोड़ो यात्रा भारत तोड़ो यात्रा में तब्दील हो जाती। अब भैय्या अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर राहुल गाँधी ने सेना के कुत्तों के साथ योग करते हुए तस्वीर पोस्ट की थी तब सच बता रिया हूं सेना के कुत्तों ने राहुल को कॉम्प्लेक्स दे दिया था। और तो और राहुल का पर्सनल कुत्ता जिसका नाम pidi पीडी है से घने से अच्छा वाला प्रेम करते हैं।  शायद ये गुण उनको उनकी चाची से मिला है वो भी 🐕 प्रेमी हैं। लमन्डेस जी रोकते हुए बोले ये तो ठीक है लेकिन वो किस्सा याद है न जहां कांग्रेसी राहुल के घर मीटिंग में व्यस्त हैं और राहुल का प्रिय pidi भी एक कुर्सी पर विराजमान है। भाई साहब कुछ भी कहो राहुल की निगाह में सब एक समान है फिर वो pidi कुत्ता हो या कॉन्ग्रेसी। जिस प्लेट से राहुल pidi को बिस्कुट खिला रहे हैं उसी प्लेट से कांग्रेसी भी बड़े चाव से बिस्किट गटक रहे हैं, मज़बूरी है लेकिन क्या करें राहुल बाबा नाराज़ हो गए तो न प्लेट नसीब होगी न बिस्किट। बस एक नासमझ कांग्रेसी उस मीटिंग में था वो क्या नाम है उसका हेमंत बिस्वा शर्मा। कित्ता नासमझ है शर्मा बताओ जी ज़मीर न बेचकर भाजपा की तरफ़ दुड़की लगा दी। भाई खा लेते pidi की प्लेट से एक बिस्कुट कम से कम आज मजे से ठाली रहता घर में और यहाँ वहां घूमकर राहुल को कोसता कि भैय्या हम भी जवान और राहुल भी जवान लेकिन दोनों को कुछ न मिला काम। अब कोई पूछे उस हेमंतवा से भाजपा में जाकर क्या मिला उसे कुछ भी तो नहीं, बस असम का मुख्यमंत्री और पूरे पूरा नॉर्थ ईस्ट का इंचार्ज और हां मां के साथ भारत मां भी सेवा कर रहा है। भले ही हेमन्ता ने कांग्रेस छोड़ दिया लेकिन इससे कांग्रेस के कुत्ता-नेता साम्य भाव पर कुछ फ़र्क पड़ा क्या कुछो भी तो फ़र्क नहीं पड़ा। 

         जहां तक राहुल गाँधी की इस टिप्पणी का प्रश्न है कि संसद के अंदर भी पालतू बैठे हैं तो भाजपा को इसमें कतई बुरा नहीं मानना चाहिए। शायद वो भी तो अपने सांसदों के बारे मे बता रहे थे या उन्हें शब्दों के बूस्ट से नहला रहे थे। और भाई साहब जहां तक रेणुका चौधरी की बात है कि वे संसद के प्रांगण में कुत्ता लेकर क्यूँ आईं तो सोचो भाई उन्होंने एक संदेश दिया है कांग्रेस साफ़ दिल की पार्टी है वो सांसदों और कुत्तों में तनिक भी भेदभाव नहीं करती हो सकता है बंगाल चुनाव में कॉन्ग्रेस किसी देसी विदेशी नस्ल के कुत्ते को खड़ा कर दे और कोई बड़ी बात नही कि वो कुत्ता एम एल ए भी बन जाए और क़िस्मत ठीक रही तो मंत्री भी। अब इससे एक पंथ दो काज हो गए न जीवों पर दया भी, चुनाव में जीत भी और भैय्या परिवारवाद का आरोप भी गायब। हो तो ये भी सकता है कि वे उस कुत्ते को कांग्रेस की सदस्यता दिलवाने लाई हों, क्योंकि वोट चोरी के मुद्दे तो फ्लॉप हो गए फिर भी कॉन्ग्रेस है कि वोट चोर गद्दी छोड़ का नारा लगातार हफ़्ते भर कढ़ाई में पड़े हुए सडेले रिफाइंड में इस नारे से दस बीस भटूरे और तल लेना चाहती हो लेकिन उन भट्टूरों को जनता क्या ख़ुद उनकी पार्टी के नेता भी सूंघने को भी तैयार नहीं। और मैं तो नू कै रिया हूं कि लोकसभा राज्य सभा में जितने भी कांग्रेसी हैं सब 19 दिसंबर से पहले एक एक देसी या विदेशी कुत्ता संसद प्रांगड़ में लाकर कुत्ता जिंदाबाद का नारा लगवा दें इसी बहाने राहुल गाँधी को ख़ुश करने का मौक़ा भी मिल जाएगा और हो सकता है इसी बहाने राहुल गाँधी कुत्तों के लोकतंत्रिक अधिकार की लड़ाई लड़ने वाले वड़े वाले नेता बन जाएं। वे कुत्तों को वोटिंग का अधिकार, चुनाव लड़ने का अधिकार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं क्योंकि उन्हें पता है कि कांग्रेस के नेताओं से अधिक वफादार कुत्ते ही होते हैं। 

         लमन्डेस जी ने शायद इससे पहले इत्ता कुत्तों पर इत्ता सारा ज्ञान आज तक लपेटा न था सो वो औकते हुए उठे और मेरे द्वारा दिए गए दिव्य ज्ञान को वॉश बेसन में उल्टियाए। अलप सलप करके लमन्डेस जी फिर बाजू में आ बैठे और लगे हमारे कुत्तई ज्ञान की प्रशंसा करने। हमने आशीर्वाद की मुद्रा में हाथ उठाया तो बोले गुरु ये रेणुका चौधरी का गली का आवारा सा कुत्ता बढ़िया वाली बड़ी सी गाड़ी में! साले ने क्या क़िस्मत पाई है सच कै रिया हूं हम तो बस सोचने के लिए बने हैं एसी गाड़ी में तो कुत्ते पहले से घूम रहे हैं लेकिन लोकसभा का प्रांगण न न न। हम साले चालीस साल से दिल्ली में झक मरा रिए है बस टी वी पर लोकसभा देखकर खुश हो रहे हैं और एक ये है आवारा गली का कुत्ता जिसकी किस्मत का ताला रेणुका ताई ने खोल दिया। चलो आज संध्या वंदन में भगवान जी से अगले जनम मुझे कुत्ता बनाईयो की गुहार लगाते हैं वैसे गुरु तुम्हारी ज्ञान गंगा भी गज़ब की है तभी तो हम तुम्हें अपना बड़े वाला गुरु मानते हैं लेकिन एक बात तो बताओ तुम कुत्तों पे इत्ता ज्ञान कहां से पाए हो बे कहीं तुम पिछले जन्म में......... आगे के शब्द लमन्डेस जी ने हवा में फिर तैरने के लिए छोड़ दिए। 

प्रदीप भट्ट 
व्यंग्यकार, मेरठ 

Saturday, 6 December 2025

परफेक्शन

                "परफेक्शन"

         गाँव का चौकीदार भुवन भागता हुआ चौपाल पर पहुंचा और हांफते हुए चौपाल का आंगन लीप रही धनवंती से बोला प्रधान जी कहां हैं। धनवंती ने ख़ुद को सीधा किया फिर बोली छत पे कसरत कर रे हैं वैसे चौपाल तो दस बजे सजेगी अभी तो आठ भी न बजे और तू हांफ क्यूँ रहा है क्या बात हुई बता। धनवंती की बात का जवाब दिए बिना दीनानाथ छत की ओर लपक लिया। प्रधान जी प्रधान जी कालीदीन के खेत पर एक लाश पड़ी है। प्रधान जी सीधे होते हुए बोले थानेदार को बताया। कालीदीन ने हां में मुंडी हिलाई तो प्रधान जी धोती लपेटते हुए बोले पता लगा लाश किसकी है। कालिदीन ने फिर ना में मुंडी हिलाई तो प्रधान जी बोले पूरे गांव को बुला ला और हां उन चारों को भी। ठीक है कहता हुआ कालिदीन सीढ़ी से नीचे उतर गया।

        दरोगा जी दो सिपाहियों के साथ कालिदीन के खेत में पड़ी लाश को बांस की खपच्चियों से घेरे हुए खड़े थे साथ में गांव प्रधान शंकर विश्नोई भी। लोग आते दूर से लाश को देखते और पहचानने से इंकार कर देते। दरोगा जी प्रधान से बोले पूरा गांव ना में मुंडी हिला रहा है अरे कोई तो कुछ बताओ आख़िर ये लाश किसकी है। प्रधान जी ने पूरब दिशा से आ रहे चार लोगों की तरफ़ इशारा किया। चारों पास आए तो प्रधान जी बोले आप चारों भी लाश देख लो और दरोगा जी को कुछ सुराग दो। पण्डित रामलुभवन मिश्र जी गए लाश के चारों ओर चक्कर लगाया फिर दरोगा से बोले लाश के शरीर पर जनेऊ है, ललाट पर तिलक आधा मिट गया है शिखा में गांठ भी लगी है मरने वाला पक्का ब्राह्मण है। दरोगा बोला ये मुझे भी पता है तो इसमें नया क्या है? फिर श्रीधर गुप्ता को इशारा किया, श्रीधर गए चक्कर लगाया और लौटकर दरोगा से बोला लाश के पास एक थैला है उसमें से हिसाब की बही झांक रही है साथ में कलम नत्थी है मानो न मानो मरने वाला बनिया है। दरोगा ने घूर कर श्रीधर को देखा फिर तीसरे राम सिंह को इशारा किया, राम सिंह ने भी लाश का चक्कर लगाया और लौटकर बताया कि लाश के शरीर पर तलवार के कई घाव है उसके हाथ में भी तलवार का मूठ है जो दर्शाता है कि वो लड़ते लड़ते मरा। निश्चित ये क्षत्रिय होगा। अब दरोगा ने खीजते हुए चौथे को जाने का इशारा किया चौथा जो चर्मकार था ने भी लाश का चक्कर लगाया फिर लौटकर दरोगा से बोला साहब मैं इनके जीत्ता परफेक्ट विद्वान तो न हूं पर एक बात पक्की इस लाश के पैर में दस नम्बर की जूती ही आएगी, बाक़ी आप देख लो।


प्रदीप भट्ट -- 06122025