Friday, 12 September 2025

"आँख बन्द डिब्बा गायब"

"आँख बन्द डिब्बा गायब" 

         तो हुआ यूं कि टीवी पर वोट चोर गद्दी छोड़ का नारा सुनते सुनते ससुरे कानों ने अपनी जगह से लगभग उखड़ते हुए बिल्कुल दोनों दीदो के बीच आकर कहा अबे सुनो राहुल गाँधी की नौटंकी से हमारे यानि कानों के सिर में दर्द हो रहा है। आख़िर हम भी एक हद तक ही डेसिबल डेसिबल झेल सकते हैं। बड़े व्यंग्यकार बने फिरते हो सुनो हमें अभी अभी गुप्त सूचना प्राप्त हुई है कल राहुलवा हाइड्रोजन बम फोड़ने वाला है हम पे रहम करो और वहां ले चलो ज़रा प्रत्यक्ष देख सुन लें।कानों के रौद्र रूप को देखते हुए हम अगले दिन कोटला जा पहुंचे वो भी 9 बजे 10 बजे हाइड्रोजन बम फटने का समय जो निश्चित था पहुंचें तो पता चला बम फूटने का समय 10 की जगह 11 हो गया है। बस फिर क्या था हमने कांग्रेस मुख्यालय के हॉल में टहलना शुरु कर दिया  तभी हॉल में टंगी एक फोटो ने हमें खोपचे में आने का इशारा किया। हमने इधर उधर देखा तो फुटवा बोली वोट चोरी का हाइड्रोजन बम फूटता देखने आए हो बे हमने हां में मुंडी हिलाई और परिचय जानना चाहा तो तस्वीर ने नाम पट्टिका से धूल हटाने को कहा, हमने धूल हटाई तो मटमैले कलर में "एलन ऑक्टेवियन ह्यूम" लिखा दिखा। हमने मस्ती में पूछा तुम यहां काहे टंगे हो बे। तस्वीर फिर बोली मैं एक ब्रिटिश सिविल सेवी, एक पक्षी विज्ञानी और वनस्पति विज्ञानी था। मति मारी गई थी मेरी जो मैंने भारतीयों और ब्रिटिशस के मध्य एक सेफ़्टी वाल्व के रूप में कार्य करने के लिए 28 दिसम्बर 1885 में 72 लोगों (भाई साहब आप 72 हूरें न पढ़ लेना, हां नई तो) के साथ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना कर डाली । 

         तस्वीर ने एक लम्बा पॉज लिया फिर बोली कांग्रेस पार्टी के उद्भव से लेकर आज तक न जाने कितने अध्यक्ष बने या बनाए गए कभी चोरी से कभी सीना जोरी से लेकिन मजाल है किसी दूसरे कॉन्ग्रेसी नेता ने चूं चपड़ की हो और करते भी कैसे कुछ दिनों या महीनों में ही चूं चपड़ करने वाले का नाम," राम नाम सत्य" में जो विलीन हो जाने का ख़तरा जो रहता था। कभी ट्रक के नीचे कभी होटल के कमरे में खूबसूरत लाश के रूप में तो कभी हवाई जहाज़ में उल्टे लटके हुए। वैसे कुछ भी कहो हवाई जहाज़ में मरने का अलग ही मज़ा है लेकिन इसके लिए आपके पास कुछ ख़ुफ़िया राज होने चाहिए ऐसे ही कोई इत्ते महंगे हवाई जहाज़ की बली थोड़े दी जाएगी भाई साहब किसी ऐरे गेरे के लिए। इसके लिए ऐसे वैसे और न जाने कैसे कर्म कुकर्मों की आह लेनी पड़ती है जी। वैसे ख़तरा मतलब वो जो सफ़ेद बोर्ड पर एक नरमुंड पर लाल रंग से क्रॉस निशान, अबे बात समझ में आई या नहीं। अब भला किसको शौक होगा जो उस नरमुंड की जगह अपना मुंड लटकता देखना चाहेगा।  ख़ैर असली वोट चोरी या तुम उसे डकैती कहना चाहो या लूट कह लो। मैं तुम्हें आंकड़े देता हूं लेकिन शर्त इत्ती सी है तुम जाते जाते मुझे यहां से चुरा कर ले जाना। मैंने हां में फिर से मुंडी हिलाई तो तस्वीर बड़बड़ाते हुए बोली चलो  कागज़ पेंसिल उठाओ और लिखना शुरू करो। 

       👉  एक *  देखो भैय्या आज़ाद भारत में वोट चोरी नहीं बल्कि वोट डकैती डाली गई थी। 1946 में 15 कॉंग्रेस प्रान्तीय समितियों को कॉंग्रेस अध्यक्ष का चुनाव करना था 15 में से 12 ने सरदार पटेल को वोट दिया 3 ने बहिष्कार किया और नेहरू को वोट की जगह मिला बाबा जी का ठुल्लू लेकिन अध्यक्ष कौन बना नेहरू। इससे सिद्ध होता है खुदा मेहरबान तो गधा पहलवान।  👉  दो ** 1951 में जम्मू कश्मीर में चुनाव डिक्लेयर हुए । नेहरू शेख अब्दुल्ला को मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे। सीट बंटवारे में कश्मीर घाटी को 43 जम्मू रीजन को 30 और लद्दाख को केवल 2 सीट दी गईं। कॉन्ग्रेस ने चुनाव न लड़ने का फैसला किया ताकि नेशनल कॉन्ग्रेस आसानी से चुनाव जीत जाए। तीसरी पार्टी थी प्रजा परिषद् चूंकि उसका घाटी में कोई आधार नहीं था इसलिए प्रजा परिषद् ने  जम्मू रीज़न में चुनाव लड़ने का फैसला किया लेकिन कॉन्ग्रेस की दख़ल पर तत्कालीन चुनाव आयुक्त ने  नॉमिनेश में 13 उम्मीदवारों के पर्चे ख़ारिज कर दिए इस पर प्रजा परिषद् ने पहले जम्मू कश्मीर में फिर दिल्ली में प्रोटेस्ट किया और नेहरू को इस गड़बड़ी की चिट्ठी लिखी लेकिन जब कोई एक्शन नहीं हुआ तो प्रजा परिषद् ने चुनाव बहिष्कार की घोषणा कर दी। 👉  चार ** बाबा साहब अम्बेडकर नॉर्थ बम्बई से 1952 में 14  हज़ार वोटों से हारे और वोट कैंसिल हुए 78000। जय प्रकाश नारायण जी ने भी कहा कुछ नही बहुत बड़ी गड़बड़ है।अब तनिक आप ही सोचो "दया कुछ गड़बड़ है " से पहले भी कांग्रेस कुछ गड़बड़ है वामपंथियों कुछ गड़बड़ है चल रहा था। इसलिए डंके की चोट पर अम्बेडकर जी ने कोर्ट में केस फाइल किया और कांग्रेस और वामपंथियों को कटघरे में खड़ा किया।

         👉 पांच ** 1952 में रामपुर में मौलाना आज़ाद चुनाव लड़े मगर बीस हज़ार वोटों से हार गए, रिटर्निंग ऑफिसर ने रिज़ल्ट भी डिक्लेयर कर दिया तभी नेहरू जी ने गोविन्द वल्लभ पंत को फोन कर कहा कि मौलाना आज़ाद चुनाव नही हारने चाहिए। पंत जी बोले महाराज डीएम रिजल्ट डिक्लेयर कर चुका है तो नेहरू जी ने तुरन्त धमकी दी अगर मौलाना की शिकस्त हुई तो तुम्हारी कुर्सी गई। पंत जी ने आनन फानन में डीएम को फोन लगाया और बोला अगर मौलाना हारा तो हम दोनों की कुर्सी जाना तय है कुछ करो, फिर डीएम जीते हुए उम्मीदवार के बक्से से वोट निकालकर मौलाना के बक्से में डाले और लो जी मौलाना जीत गए जी। गांधी जी की किताब सत्य के प्रयोग का सबसे उम्दा उदाहरण। प्वाइंट नम्बर छः ** कैलाश नाथ वाँचू जिनके पास नॉर्मल लॉ की डिग्री भी नही थी कॉन्ग्रेस ने 24 अप्रैल 1967 में उन्हें चीफ़ जस्टिस ऑफ इंडिया बना दिया। भाई साहब खुदई सोचो ऐसे ऐसे काम कांग्रेस के अलावा और कोई कर सके है। अब इसे वोट चोरी तो नहीं संवैधानिक लूट कह सकते हैं। प्वाइंट नम्बर सात** रायबरेली चुनाव में सो कॉल्ड आयरन लेडी ने वोट की चोरी नही की वरन डकैती डाली, उत्तर प्रदेश के हाई कोर्ट ने 1975 में राज नारायण की याचिका पर 1971 के चुनाव का संज्ञान लिया और परिणाम रद्द कर दिया। बस आयरन लेडी को गुस्सा आ गया 25 जून को आपातकाल लगा दिया। 👉 ** गोपाल स्वामी मुख्य चुनाव आयुक्त ने नवीन चावला की लिखित शिकायत दर्ज कराई कि चुनाव आयोग की महत्वपूर्ण सूचनाएं चावला द्वारा कांग्रेस को लीक की जा रही हैं। कांग्रेस ने कहा चावला हमारा बच्चा है ये तो यूं ही दुग्ध पीएगा। मतलब वोट चोरी चुनाव आयोग के एक लपाड़े के द्वारा नही बल्कि आधा चुनाव आयोग ही चोरी हो गया।

         👉 ** जस्टिस बहरुल इस्लाम आसाम हाई कोर्ट के जज पहले इस्तीफा देते हैं फिर कांग्रेस के टिकिट पर चुनाव लड़ते हैं, लोकसभा चुनाव कैंसिल हो जाता है तो फिर उन्हें राज्य सभा भेजा जाता है बाद में इस्लाम मियां इस्तीफा देते हैं फिर उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज बना दिया जाता है। अब लगाते रहो हिसाब ये चोरी है,लूट है या डकैती। 👉 ** जब 21 मई 1991 में राजीव गाँधी की हत्या हो गई तो चुनाव आयोग ने राजीव गाँधी की सीट कैंसिल नहीं की वरन पूरे देश के चुनाव को 21,22 दिन आगे बढ़ा दिया ताकि कॉन्ग्रेस राजीव गाँधी की अस्थियों को देश में लेकर घूम सके। अब खुदई सोचो जो पार्टी चुनाव आयोग को जेब में रखकर चलती थी आज वो चुनाव आयोग के पीछे हाथ धोकर पड़ी है। 👉 ** अधीर रंजन चौधरी जो कॉन्ग्रेस के पिछले लोप ( लीडर ऑफ ऑप्जिशन) रह चुके हैं खुदई कॉन्ग्रेस से अलग होकर बनी TMC यानि तुड़ी मुड़ी कांग्रेस पर आरोप लगा रहे हैं कि ममता नामक दीदी खुदई 35,40 लाख फर्जी वोट लिए घूम रही है।
👉 ** के एन राजन्ना कांग्रेस लीडर ने राहुल गांधी के वोट चोरी के आरोप पर उल्टा सवाल दागते हुए कहा कि कर्नाटक में यदि वोट चोरी हुई है तो कांग्रेस कर्नाटक में कैसे जीती। बस तुरन्त दिल्ली से फोन खड़क गया और परिणाम बेचारे राजन्ना की बलि से खत्म हुआ।

आँख बंद डिब्बा गायब
----------------------------- 
👉** चारा चोर का टाइटल गले में लटकाए घूम रहे ललुआ जी से जब बीबीसी एक पत्रकार पूछे कि बालू जी जहां आप जीतने की स्थिति में होते हैं वहां आप जीतते हैं कोई बात नही लेकिन जहां सबको पता है आप हारेंगे वहां कैसे जीतते हो ललुआ जी, तो भैय्या जी ललुवा जी बोले "आँख बन्द डिब्बा गायब " 👉 ** राहुल गाँधी ने वोट चोरी नामक वाहियात इल्ज़ाम चुनाव आयोग एवम् वर्तमान सरकार पर लगाया और उस पर बाकायदा PPt प्रेजेंटेशन तैयार कर कुछ सो कॉल्ड पत्रकारों एवम् स्टूडेंट्स के सामने प्रेजेंट किया। अब भईया जब उस प्रेजेंटेशन को अपलोड करने का रियल टाइम चैक किया गया तो पता चला ये तो म्यांमार से अपलोड किया गया है। मतलब आंकड़ा खुद का चोरी हुआ अब कै रिए हैं हाइड्रोजन बम फोड़ूगा। अब उनकी ही बाल्टी के लोग हाथ जोड़कर कह रहे हैं रहने दे भाई तेरे से न होगा। क्यूँ बेइज्जती में दाग लगवाने पर तुला है,चल हवा आने दे । 👉** राहुल गाँधी के वोट चोरी के आरोपों के बहकावे में आकर पता नही कॉन्ग्रेस के किस भक्त ने मद्रास हाई कोर्ट में याचिका लगा दी साथ ही कोर्ट को चुनाव आयोग को दिशा निर्देश देने के लिए कहा। अब भाई साहब पहले चौकीदार चोर पे सुप्रीम हंटर खाकर भी ये लकड़बग्घे सुधरे नही तो कोर्ट है वो भी हाई वाली आ गया गुस्सा वो भी हाई वाला, पहले तो याचिका कर्ता को ढंग से रगड़ा फिर एक लाख का अर्थ दण्ड लगा दिया । अब वो बंदा सोच रहा है नमाज़ बख्शवाने गया था ई ससुरा तो रोज़ा ही गले पड़ गया जी। 👉 
** एक सो कॉल्ड सोफिलोजीस्ट संजय कुमार जिनके ट्वीट से ही कॉन्ग्रेस ने वोट चोरी का फंडा विकसित किया। अब जब संजय कुमार कह चुके हैं माफी मांग चुके हैं कि ये एक टाइपिंग एरर था तो सवाल ये है कि इतना लम्बा एरर हुआ कैसे और हुआ तो पढ़ा कैसे और पढ़ा तो किसने इसे समझा कैसे मतलब संजय कुमार महाभारत के संजय बनने की कोशिश में संजय एरर बन गए। सच्चाई ये है कि ये सारी कारगुज़ारी कॉन्ग्रेस को पुनर्जीवित करने के लिए थी लेकिन कॉन्ग्रेस के राजकुमार कभी हाइड्रोजन कभी नाइट्रोजन बम को फुस्सी बम बनाकर फोड़ रहे हैं जिससे कांग्रेस परमानेंट कोमा में चली जाए। 👉** निशित कटारिया को हरियाणा युवा कांग्रेस अध्यक्ष बना दिया। भाई साहब कमाल तो ये है नीतीश पुत्र राजकुमार निषेध पुत्र सुखबीर बन गया और सुखबीर की पत्नी और पता नी कौन कौन रिश्तेदार के फर्जी डॉक्यूमेंट के आधार पर घने सारे फर्जी वोट ठोक दिए। मजे की बात जे है कि अकेले गुरुग्राम में इस बंदे पे सौ से ज्यादा केस विचाराधीन।

        और भैय्या अंत में वोट चोरी के अलावा कॉन्ग्रेस पार्टी जाति चोरी में भी बड़ी माहिर है। अब देखो ने जवाहर लाल कौल ( इससे पहले के इतिहास में जाऊंगा तो कोई अब्दुल निकलेगा ये विषय अलग है कि उस अब्दुल के दादा किशन लाल ही होंगे) जवाहर लाल नेहरू हो गए, किसी ने पूछा क्या कैसे?, फिरोज ghandy फिरोज गाँधी हो गए। एंटोनियो माइनो सोनिया गाँधी, प्रियंका गाँधी वाड्रा हो गईं लेकिन भाई साहब गाँधी सरनेम को पकड़ के रक्खा हुआ है आखिर भविष्य वाड्रा में थोड़े ही है ghandy में भी नहीं अगर भविष्य है तो वो है गाँधी में। गाँधी जी भी सोच रहे होंगे, अमा क्या सोच रहे होंगे अपना सिर धुन रिए होंगे, हां नई तो।

प्रदीप भट्ट - व्यंग्यकार 22.09.2025

Tuesday, 9 September 2025

"बेचारा गांधी "

        "बेचारा गांधी"
 
          अँधेरी रेलवे स्टेशन से निकलकर बाहर आया तो देखा दूर-दूर तक न कोई ऑटो न टैक्सी अलबत्ता पानी ज़रूर भरा हुआ मिला जिसमें छप छपाक की इक्का दुक्का आवाज़ें गूंजती मिली। नीचे भी तीन फुट पानी और ऊपर से राम जी का पानी और वो भी रात के सवा दो  बजे। थोड़ी देर संशय के सागर में गोते लगाते हुए  तय किया कि पैदल ही चले चलते हैं। पिट्ठू को पीठ पर लादा और सीधे एस वी रोड़ क्रॉस करके जुहू गली की तरफ़ मुड़ गया। पानी में छप छपाक की आवाज़ लगातर हुए जा रही थी तभी लाठी की ठक् ठक सुनाई पड़ी। पीछे मुड़कर देखा तो बिलकुल गांधी जी वाले गैटअप में लम्बी लम्बी डग भरते हुए एक कृष काय काया फासला कम करती हुई मुझसे आ लगी। मैंने ने यूं ही पूछ लिया चच्चा इत्ती रात में किधर टहल रिए हो, एक क्षण के पॉज के बाद आवाज़ आई चच्चा नही बप्पा मैंने हँसते हुए कहा उन्हें तो 6 सितम्बर को विसर्जित कर दिया।चश्मे पे पानी की बूँदों को झटकटते हुए वो कृष काया में फिर कंपन हुई और इस ज़रा सख्त आवाज़ आई तो फिर बापू कहो मैं मोहन दास करम चन्द गांधी उर्फ़ महात्मा गाँधी उर्फ़ राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी। मैंने फिर मज़ाक किया ये क्या चचा भारत वर्ष, हिंदुस्तान और इंडिया की तर्ज़ पर अपना गुणगान कर रिये हो। इस बार कोई प्रतिक्रिया न आई तो मुझे लगा इस बहरूपिये ने गांधी जी की किताब "मौन सर्वार्थ साधकम" का पालन किया है।थोड़ी देर बस छप छाप की आवाज़ ही गूंजती रही।

          जुहू सर्कल से मुड़ते हुए मैंने उस कृष काय काया को फिर से देखा और उल्टा सवाल दाग दिया लगता है चच्चा लगे रहो मुन्ना भाई के किरदार में अभी तक धंसे हुए हो मैं संजय दत्त नहीं प्रखर दत्त हूं और हां ये तीन फुट भरे पानी में तुम्हारी लाठी की आवाज़ कैसे क़ायम है। वो कृष काया बोली देख भाई प्रखर दत्त पहले मेरी बात ध्यान से सुन मुझमें पहले दम था पर अब न है। अगर ये लाठी न हो तो तो मुझे कोई पहचाने भी न।  पता नहीं मेरे कैसे कैसे और किस किस रंग रूप के स्क्रपचलर बना दिए जा रहे हैं जिसमें मैं न मोहन दास लगता हूं, न करम चन्द और महात्मा तो बिल्कुल नहीं लेकिन लोग उस स्क्रपचलर के हाथ में लाठी देखकर समझ लेते हैं कि यही होगा वो जिसने सो कॉल्ड चरखे से आज़ादी दिलाई पर सच्ची बात तो ये है उस चरखे से इत्ता सुत भी न कता जिससे मैं अपनी दो चार धोती बना लेता। खैर देख भाई तू मेरा एक काम कर मुझे परसों सुबह तक अपने घर में छिपा के रख ले। तेरा घर तो यहीं जुहू में ही है न और हां मेरी लाठी मेरी धोती में फंसी हुई है जिससे तीन फुट पानी में भी लाठी आवाज़ पैदा कर रही है। मैंने पहली बार महसूस किया कि ये कृष काया वास्तव में वास्तव वाले गांधी जी हैं बिलकुल 30 जनवरी 1948 वाले दिन की तरह बस फ़र्क इत्ता था कि उनके दोनों कंधे पकड़कर चलने वाली सहायिका गायब थीं। असलियत से सामना होते ही मेरी टांगे कांप गई लेकिन "सूं सां मानस गंध" हम दोनों के अलावा तीसरा कोई था भी नही इसलिए मुंह से इत्ता ही फूटा जैसी आपकी इच्छा बापू।

         बात करते करते हम दोनों मेरे फ्लैट तक आ पहुंचे थे। मैंने बापू को अन्दर आने का इशारा किया और खादी का तौलिया उनकी ओर बढ़ा दिया । खादी का तौलिया देखते ही बापू बोले बस अब दो अक्टूबर को ही मेरी ज़रूरत रह गई है, वो भी पहले रिबेट के लिए और अब..... फिर कुछ सोचते हुए बोले नाथू राम गोड़से ने तो तीन गोली मारकर मुझे ठंडा कर दिया लेकिन यहाँ के नेताओं ने मुझे अभी भी गर्म रक्खा हुआ है, देखो न भगवान जी से सेटिंग कर रक्खी है। हर साल एक अक्तुबर को भगवान जी मुझे ऊपर से यहां टपका देते हैं कभी दिल्ली कभी वर्धा कभी बिहार कभी झारखण्ड। इस साल मुम्बई टपका दिया है। मैं तो उकता गया हूं इस ढोंग से। इसलिए 1.40 की लास्ट लोकल से अंधेरी उतरा था कि चलो विरार जाकर कहीं लेट जाऊंगा लेकिन इस राम जी की बरसात ने उधम उतार रक्खा है ऐसा लगता है बादलों में छेद हो गया है। मैंने पहली बार बापू की दयनीय स्थिति को देखते हुए पूछा बापू सच्ची सच्ची बताओ तुम वास्तव में भारत की आज़ादी के लिए लड़ रहे थे या । मेरे इस प्रश्न से बापू कुछ अचकचाए फिर बोले "सत्य के प्रयोग" पर किताब लिखना अलग बात है स्वीकारना अलग। फिर बुदबुदाए ऐसे वैसे कैसे कैसे हो गए और कैसे कैसे ऐसे वैसे हो गए। बापू को गर्म चाय पिलाई फिर थपकी देकर बापू को सुला दिया। मुझे अब समझ आया बापू 2 अक्तूबर के पाखण्ड से बस ख़ुद को बचाने की चेष्टा क्यूँ कर रहे थे। सच बोल रिया हूँ गांधी जी को मैं कुछ ख़ास पसन्द नहीं करता लेकिन पहली बार लगा मोहन दास करम चंद गांधी उर्फ़ महात्मा गांधी उर्फ़ सो कॉल्ड राष्ट्रपिता बेचारा गांधी भी हो सकता है।

प्रदीप डीएस भट्ट 
मेरठ 
तीन काव्य संग्रह व एक कहानी संग्रह प्रकाशित 
उत्तरांचल दीप पत्रिका में नियमित आलेख 

Tuesday, 2 September 2025

"नदी चली मायके "

रिपोर्ताज 

     "नदी चली मायके"

         यूं तो दो बरस हो गए हैदराबाद को छोड़े लेकिन आँख🥸 बंद करो तो साढ़े चार साल के हैदराबाद प्रवास की यादें आंखो के आगे चित्र की भांति अब भी यूं गुजर जाती है जैसे बरसात के दिनों में नदी नाले उफान मार जाएं। अब आप सोच रिए होंगे जे क्या उदाहरण हुआ जी तो भैय्यू इस बार गर्मी तो जितनी पढ़नी थी पड़ ली लेकिन बरसतिया 🌧 बुआ छप्पर फाड़ के सूखी जमीन का गला तर करने पर तुली हुई हैं। अब करें भी क्यूँ न गंगा मैय्या हों या जमुना, राप्ती हों या झेलम या फिर इनकी चचेरी ममेरी तहेरी बहनें, बहुत दिनों से वो अपने ससुराल की जमीन पर बहे जा रहीं थीं बहे जा रही थीं अब वो का है न ससुराल में कुछ ज़्यादा ही प्यार जो मिल रिया था हुज़ूर सो अब भैय्या ससुराल का मामला है कौन किसको क्या कहे बरसों बरस हो गए बहते हुए किसकी हिम्मत जो मइया जी को टोक दे कि बुआ तनिक भाई भतीजों का भी हाल चाल 👍 मालूम कर लो, तो हुआ यूं के म्हारे बार बार गिड़गिड़ाने पर जून में सभी बुआओं ने एक मीटिंग कर डाली और तय किया कि चलो इस बार मायके चलते हैं देखें भैय्या भाभी भतीजा भतीजी कैसे हैं ,  राम राम भी हो जाएगी और मायके घूम भी आयेंगे, पर भैय्या आयेंगे कहां से जहां ये सारी नदिया बहती थीं वहां तो क्या माननीय सांसद क्या विधायक, क्या कॉर्पोरेटर क्या मुखिया सब ससुरों ने बड्डी बड्डी बिल्डिंग 👷‍♀️ 🏢 🏗 डाली रही सही कसर भाई भतीजों ने पूरी कर दी और लो जी भैया जो थोड़ी भोत धार चल री थी या बची हुई थी वहां किनारे पर अपने अपने घर बना डाले। अब जब सभी बुआओं ने मायके जाने के लिए बड्डी वाली बरसतिया 🌧 🌦 बुआ के साथ मायके जाने का रस्ता पकड़ा तो उन्हें रस्ता न मिल के दिया जब घणी परेशान हो गई तो अपने बादल ☁️ 😶‍🌫️ मित्र को बुलावा भेज दिया कि तनिक ऊपर से देखकर बताओ हमारा मायका कहां है। 

         अब बादल मित्र भी क्या करते बिन पानी उड़ान भरते भरते उन्होंने HD फ़ोटो  खींची और सारी नदियों को व्हाट्सअप कर दिया। फ़ोटो देखते देखते वॉयरल भी हो गई। अब तो फ़ोटो देखते ही सारी बुआओं को घणा गुस्सा आ गया अबे ये हमारा मायका था इसे क्या तुम सबने सरकारी ज़मीन समझकर ग़ैर क़ानूनी कब्ज़ा कर लिया बे, हमारी पूजा भी करोगे और हमीं पे कब्ज़ा। सजा मिलेगी बरोबर मिलेगी और उन्होंने सावन के पावन महीने में भोले नाथ को फुनवा लगा दिया उधर भोले नाथ भी तनिक गुस्से में बैठे थे वो इसलिए कि धरती पे जितने भी सो कॉल्ड भक्त हैं सब ससुरे सुबह देखें न शाम दिन देखें न रात उनकी पिंडी पे लोटा से ड्रम से (नीला 🛢️ नी महाराज) भर भर के दे जल दे जल। अरे भैय्या माना वो भोले नाथ हैं पर नेचर कॉल तो उन्हें भी निपटानी पड़ती है न। बस फिर क्या था नदी बुआ ने जैसे ही अपना दुखड़ा सुनाया भोले नाथ ने नन्नक सी अपनी तीसरी आँख खोलकर बादलों ☁️ को इशारा कर दिया। अब बादल तो बादल ठहरे नदियों के दोस्त और भोले का इशारा बस भक्तों ने जितना जल पिंडी पे उड़ेला था उसका लाख गुना पानी छलनी की जगह अपनी पेंदी में छेद करके बरसा दिया अब आप उसे बादल फटना कहो या चखना बादल नू कि फ़र्क पैंदा है जी। अब आप खुदई देख लो शेर सिंह के ढाबे का अगड़ा हिस्सा चमक रिया है पिछले का तो हैप्पी बड्डे हो भी गया। जिधर देखो त्राहिमाम त्राहिमाम। कहां तो पाकिस्तान एक एक बूंद पानी के लिए तरस रिया था और धमकी अलग से दे रिया था पानी 💧 नी मिला ते अपन भारत की सांसे बंद कर दांगे, खून बहा दांगे। एक तो मुझे समझ नी आंदा ऐ पाकिस्तान उर्दू विच क्यूँ नी बोलदा खैर मैनू की लोड़। अब पानी चड्ड दीत्ता ती कै रिया है इत्ता पानी काय नू चड्ड दित्ता । ओ लो जी मैंनु भी पंजाबी बोलन दी आदत पड़ गी सी। मैनू ऐसा लग रिया है कि नदियों ने कब्ज़ा करने वालों पर ट्रंप डैडी की तरह 5000 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया है। जय भोले नाथ की।

         हां तो हम कहां थे जी ओह याद आया नदियों की लीला से त्रसित मानव त्राहिमाम त्राहिमाम कर ही रहा था तभी हमें हैदराबाद से एक ठो सूचना मिली काव्य धारा प्रकाशन इन्दौर में एक दिनी कार्यक्रम आयोजित कर रहा है उसमें हमें भी आमंत्रण दिया गया। भाई इन्दौर को मिनी मुम्बई😎 भी कहा जाता है सो सबसे पहले मित्र दिनेश दवे जी को सूचित किया कि हम 23 अगस्त को इन्दौर पधार रहे हैं सो स्वच्छ  इन्दौर को हमारे स्वागत के लिए और स्वच्छ करवा दिया जाए। दवे जी भी उस्ताद निकले तुरन्त बोले तथास्तु🥳 साथ ही सूचना दी कि इन्दौर से इंद्र देवता रूठे हुए हैं उतनी नहीं हुई जितनी होनी चाहिए। हमने ठहाका मारते हुए पूछा अभी तक उतनी क्या नहीं हुई माहराज इससे पहले वो बोलते हम खुदई बोल पड़े आमदनी क्या अब ठहाका उधर से आया फिर बोले गुरु तबियत से बारिश 🌧 🌦 न हुई अब तक। हमने अपने बनियान के कॉलर ऊंचे करते हुए कहा इन्द्र देव से बात हो गई है दवे जी हम 23 अगस्त को प्रातः 6.05 पर ट्रेन से उतरेंगे और उतरते ही स्वच्छ इन्दौर को पानी पानी कर देंगे। 

         अब कह दी तो कह दी। खैर 22 अगस्त को 11.40 पर हल्की बूंदा बांदी के बीच हमने जैसे ही ऋषिकेश इन्दौर एक्सप्रेस के B1 के कंपार्टमेंट में एंट्री मारी तो घुसते ही 12 नम्बर सीट पर आराम फरमाते हुए एक ठो लड़की 👦 मिली, सामान रक्खा और सामने वाले से बोले दो मिनिट में फ्रेश होकर आते हैं, रेस्ट रुम गए,जुल्फें करीने से सेट की और वापिस सीट पर लैदर बैग को सीट के नीचे सरकाया खाने का झोला सामने टांगा तो सामने से आवाज़ आई कहां तक जाएंगे हमने अपनी जुल्फें पीछे की तरफ़ धकेली और बोले बस थोड़ी दूर तक हुज़ूर। उन सज्जन ने एक गहरी सांस ली और हमारी सीट पर भगवान विष्णु की तरह शेष शैय्या की मुद्रा में लेटी हुई लड़की 👧 को रिलेक्स का इशारा किया। हम भी थोड़ा रिलेक्स हुए फिर उन साहब से पूछा आप कहां तक तो बोले आखिरी स्टेशन तक यानि इन्दौर ये कल सुबह पहुंचेगी। हमने हां में मुंडी हिलाई तो फिर पूछ बैठे वैसे आप क्या दिल्ली तक या मथुरा, हमने फिर जुल्फों को झटका देते हुए कहा बस इन्दौर तक। एक बारगी तो वहां बैठे सब गड़बड़ा गए जब हमने दोबारा दोहराया तो बोले मान गए पक्के ह्यूमरिस्ट हो हमने उनकी आंखों में झांकते हुए पूछा शक्ल से या... उन्होंने दोनों हाथ पकड़ते हुए बोला मजा आ गया इन्दौर तक अच्छा रास्ता कटेगा तब तक वो लड़की उठ कर बैठने की चेष्टा कर रही थी। हमने सर पे हाथ रखते हुए कहा तत्काल प्रभाव से ये सीट आपकी हुई बच्चा वैसे एक बात बताओ एक्सीडेंट में चोट ही खानी थी तो लेफ्ट में खाते राइट में क्यूँ प्लास्टर चढ़ा रखा है उसने थोड़ा मुस्कुराते हुए कहा अंकल स्कूटी स्किड हो गई सड़क पर और.... हमने अफ़सोस ज़ाहिर करते हुए कहा क्या सड़क को भी प्लास्टर चढ़ा है। अब ये सुनते ही उस बच्चे के चेहरे पर जो हंसी आई है बस पूछो मति मज़ा आ गया। दिन 🌞 कैसे निकला पता ही नही चला रात 🌙 आई और बीच वाली सीट में किसी तरह खुद को फंसा कर सो गए। सुबह 🌄 चार बजे उज्जैन आँख खुली तो हमने सीट से बाहर निकलकर ट्रेन से महाकाल को प्रणाम किया लेकिन ये क्या बूंदा बांदी शुरु हम कुछ समझ पाते तभी कानों में सुरसुराहट हुई बेटा प्रदीप भट्ट तू भी तो घर में रखी पिंडी पर मुझे तीन बूंद जल रोज़ाना उड़ेलता है तो ले बेटे थोड़ी मौज तू भी ले ले।

         म्हारी क़िस्मत भी न गज़ब की है जी ठीक ठाक बारिश में 🚂 ने भी हमें 6.05 की जगह 5.35 पर इन्दौर स्टेशन का पटका। सह यात्रियों से राम राम की और एक छज्जे के नीचे दुड़की लगा दी बस सर ही गिला हुआ तभी मुबलिया🤗 घनघना उठा उधर डॉक्टर खामोश भागिया जी अजीब इत्तेफ़ाक है जनाब उनकी ट्रेन 🚆 भी आधे घंटे पहले ही अहमदाबाद से इंदौर जंक्शन पर आ धमकी खैर तय हुआ 🏨 में मिलते हैं और लीजिए हुज़ूर बारिश में ही पंद्रह मिनिट में वो उधर से हम इधर से सीधे 🏨 और बरखा रुक गई। गले मिले फिर रिसेप्शन वाले ने बताया गया कि रुम जल्दी से जल्दी भी करेंगे तो रूम दस बजे मिलेगा फ़िलहाल आपको फ्रेश होने के लिए दूसरा रुम दिए देते हैं। Thx बोलकर हम दोनों बाहर आए और बूंदा बांदी शुरू ख़ैर स्वच्छ इन्दौर में सुबह सुबह कूड़ा करकट देखा फिर दोनों ने चाय 🍵 भी और भागिया जी ने एक सिगरेट सुलगा ली फिर गम को हंसी में उड़ाते हुए दो दीवाने शहर में कूड़ा करकट देखते हुए वापिस 🏨। 9.00 रुम लिया फ्रेश हुए फिर पूरी, करेला, आंवला और हां कृष्णाष्टमी की बची हुई पंजीरी से नाश्ता किया फिर अन्य आए हुए अन्य मित्रों से मुलाक़ात की। शाम को मित्र दिनेश दवे आ पहुंचे हमने भी जी भर कर उनका आथित्य स्वीकारा, यकीं नहीं तो कटोरियां 🥣 गिन लो जी। अगले दिन नाश्ता किया और साढ़े दस बजे सबों के साथ हम भी श्री मध्य भारत हिन्दी सेवा समिति के प्रांगण में जो 🏨 से बा मुश्किल पांच मिनिट की दूरी पर था में प्रवेश कर गए। खूबसूरत हॉल जहां चारों ओर एक से बढ़कर दिवंगत साहित्यकारों के चित्र। सबसे अच्छी बात सब A 4 साइज़ के फ्रेम में जड़े हुए। मतलब समझ गए न आप जिंदा रहते सब के सब अपनी मैं में तने हुए मैं ये मैं वो करने वाले यहाँ सब एक साइज़ में चलो यहाँ आकर तो इंसाफ़ हुआ।

         11.30 पर दीप प्रज्ज्वलन से कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत हुई राजस्थान से आईं पायल शर्मा और रश्मि शर्मा ने सरस्वती वन्दना से कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मंच पर प्रोफ़ेसर राजीव शर्मा जिन्होंने दुष्यन्त पर पी एच डी की है, हरे राम बाजपेई, सत्य प्रसन्न जी, डॉक्टर ख़ामोश भागिया, काव्य धारा प्रकाशन की सुनीता लुल्ला, ब्रजेश शर्मा, बागड़ी जी और नोएडा से पधारे बढ़िया वाले विज्ञान व्रत जी उपस्थित रहे। समारोह में कुल दस पुस्तकों 📖 📕 📘 का लोकार्पण हुआ जिसमें 8 एकल व 2 साझा संकलन  किसलय और मनीषा। पहले सत्र में यही सब कुछ होता है पुस्तक लोकार्पण, सम्मान समारोह यहां भी यही हुआ फिर लंच और भैय्या फिर दूसरे सत्र में कवि सम्मेलन जिसमें कोई पांच मिनिट पढ़ेगा फिर भी टोका टाकी होगी और किसी को जब तक वो चाहे। हर कार्यक्रम का यही ढर्रा है इसलिए किसी एक को दोष देना ठीक नहीं। मंच पर पहले और दूसरे सत्र में लगभग एक जैसी मूर्तियां जे बात ठीक न है जी 2021 में इससे बेहतर व्यवस्था थी।दूसरी बात आधे पौने घण्टे में 10 पुस्तकों 📖 📕 📘 का लोकार्पण, किसी एक पुस्तक पर भी चर्चा न होना दिखाता है कि सब के सब भेड़ चाल में व्यस्त हैं। बस पुस्तक छपवा लो फिर पुस्तक का फ़ोटो सेशन करवा लो फिर जय हिंद जय भारत। ये सोचने का विषय है कि क्वांटिटी नहीं क्वालिटी की बात तो सब करते हैं लेकिन मानता कोई नहीं। और भी बहुत कुछ लेकिन छड़ो भी। बुरा मान जाएंगे मैं तो कहता हूं बुरा मान के भी देख ले शायद साहित्य का कुछ भला हो जाए। अब हमें भी पढ़ना था सो पढ़ दिया आप भी पढ़कर धन्य हो जाओ जी।

“दरगाहों पर जाना क्यूँ है”

दरगाहों पर जाना क्यूँ है,  मन अपना बहलाना क्यूँ है
धर्म सनातन सर्वश्रेष्ठ फिर, दर दूजा खटकाना क्यूँ है

जो भी जीव धरा पर आये,ब्रह्मा जी ने उन्हें बनाया   
बच्चे की फिर चाह में मत्था, हर दर पर टिकवाना क्यूँ है

चींटी को कण हाथी को मन,तोल सभी को विष्णु देते
आँखे नीची करके अपनी, हाथ सदा फैलाना क्यूँ है

बिन इच्छा के महादेव की, बाल भी बाँका हो न पाए 
झाड फूँक करने वालों को, डर अपना दिखलाना क्यूँ है

धन की देवी मात वैष्णवी, हर इच्छा पूरण करती हैं
साँझ सवेरे करो अर्चना,पीरों के दर जाना क्यूँ है

संकट हरणी मात शांभवी, दुर्जन निकट नहीं आ पाता 
दुर्गा काली अरि अवरोधी, कृष्ण तिलक लगवाना क्यूँ है

नाम से जिनके भूत भी काँपे, वो बजरंग बली हैं भैय्या
खली फली के डर से बोलो, फिर तुमको घबराना क्यूँ है

राम नाम में इतनी ताकत, पत्थर भी तैरे जाते हैं
क्रोध दिला श्रीराम से तुमको, सागर को सूखवाना क्युँ है

कृष्ण की लीला कृष्ण ही जाने, और दूजा न जाने कोई 
बार बार कनकी उँगली फिर, गोवर्धन उठवाना क्यूँ है
   
                                                                                                                                                                                                                                                दिया ईश ने जन्म जहाँ तुम, बस उसका सम्मान करो जी 
धर्म बदल कर कोख को अपनी, नालायक कहलाना क्यूँ है

जाने कितने धर्म हैं उपजे, इसी सनातन पारावर से
बार बार चमडे का सिक्का, फिर तुमको चलवाना क्यूँ है

रहो चैन से खुद भी और तुम, दूजे को भी रहने दो न
बात बात पे रार बढाकर, आपस में टकराना क्यूँ है

छोडो भी जाने दो बातें , कहाँ कोई है सुनने वाला
वक्त से पहले चित्र पे अपनी, माला को चढ़वाना क्यूँ है

समय शेष है 'दीप' चेताओ, अब सब अपने मुख को खोलें 
मौन की अग्नि से फिर वर्ना, देश  नया जन्मवाना क्यूँ है 

© प्रदीप देवीशरण भट्ट -24:02:2021

         दवे जी से फिर से बात हुई और तय हुआ वो शाम चार बजे 🏨 आएंगे, अपुन सामान सहित उनकी गाड़ी में जा ठूंसेगे घूमेंगे और बाद में नौ साढ़े नौ बजे वे हमें टेशन छोड़ देंगे। हमने सोची जे भी ठीक है, बस गणेश भगवान का छजराना मंदिर 🛕 🕍 🛕 🕍 🛕 देख लें तो काफी है सो जैसे ही जाम से जूझते हुए दवे जी छः बजे पहुंचे हम उनकी गड्डी में सामान सहित जा गिरे एक बात जो मैने नोट की वह ये कि मैं और भागिया जी जितनी बार होटल 🏨 से निकले इंद्र देवता कुनन मिनन करते मिले भाई साहब इस चक्कर में इन्दौर घूमने का प्रोग्राम चौपट अब 25 की रात्रि ट्रेन 🚆 🚉 🚄 और इंद्र महाराज हैं कि ऐंठे हुए हैं हमने पूछा काहे दुर्वासा हुए जा रहे हो तो बोले बेटे भोले नाथ से पंगे लोगे तो तुमही तो भुगतोगे। भोले बाबा 22 को ही बोल दिए थे ई ससुरा प्रदीपवा बहुत बड़ा फेंकोलिजवा है जहां तहां फेंक देता है, ट्रेन में फेंक दिया कि इन्दौर पहुंचते ही बादल बरसेंगे और इसका फेंका हुआ लपेटना हमें पड़ता है। क्या करें सच्चे वाला भगत है इसकी बात तो माननी ही पड़ेगी।तो बस भैय्या हम तो उनका आदेश मान रिए हैं जब तक तुम इन्दौर की स्वच्छ धरती पर हो हम तुम्हें कतई सूखने न देंगे ज़ालिमलोशन। बारिश और जाम को देखते हुए दवे जी सीधे अपने घर ले गए रास्ते में भगवान गणेश जी का छजाराना मन्दिर की चोटी के दर्शन किए, गाड़ी में बैठे बैठे ही गणेश जी को नमस्ते की तभी फिर कान में सुरसुराहट हुई गणेश जी कह रहे थे क्यूँ बेटा बाप को नाराज़ करके बेटे के दर्शन करेगा फिर हँसते हुए बोले चल कोई गल्ल नी नेक्स्ट टाइम श्योर। दवे जी के यहाँ उपमा खाया, चाय पी फिर सीधे इन्दौर जंक्शन, प्लेटफॉर्म नंबर 2 से भागिया जी शान्ति एक्सप्रेस पकड़ी और आधे घंटे बाद प्लेटफॉर्म नम्बर 4 से हमने फिर अगले दिन वाया दिल्ली होते हुए सीधे मेरठ लेकिन लेकिन लेकिन बारिश अभी भी चालू आहे, अब बस भी करो भोले नाथ। 🙏 रिपोर्ताज लिखने दोगे की नाही, हां नई तो।

प्रदीप डीएस भट्ट -01092025